The Hiding Truth - 4 in Hindi Thriller by Suresh sondhiya books and stories PDF | The Hiding Truth - 4

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The Hiding Truth - 4



एपिसोड 4 — "नीली आँखों वाले रक्षक और एक नया रहस्य"


पुराने बंकर के बाहर तनाव अपने चरम पर था। सिया की मुट्ठियाँ भिंची हुई थीं, उसकी कलाई से निकल रही नीली रोशनी अब और भी तेज हो गई थी। उसके पीछे अंकल, रिया और गुरुस अपनी-अपनी जगह मोर्चा संभाले खड़े थे। सामने खड़े वे अजीब लोग—जिनकी कलाइयां कोयले जैसी काली थीं और आँखें समुद्र जैसी नीली—धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे।



सिया ने हमला करने के लिए अपना हाथ उठाया ही था कि तभी... ज़ूम!

सिया की कलाई से एक बार फिर नीली किरणें फूटीं और हवा में उसके पिता का होलोग्राम बन गया।



"रुक जाओ सिया!" पिता की आवाज़ गूंजी, जिसमें घबराहट थी। "ये दुश्मन नहीं हैं... ये दोस्त हैं। ये K-452b ग्रह के निवासी हैं। इनका निर्माण ही इस ब्रह्मांड को बचाने के लिए किया गया था। अपनी शक्तियां नीचे करो, बेटा।"



सिया और बाकी सब सन्न रह गए। होलोग्राम ने आगे कहा, "ये गैलेक्सी के अलग-अलग ग्रहों से चुनिंदा योद्धाओं को इकट्ठा कर रहे हैं। ब्रह्मांड पर एक बहुत बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जिसके बारे में तुम्हें इनके साथ जाकर ही पता चलेगा। इन पर भरोसा करो..." इतना कहकर होलोग्राम झिलमिलाया और गायब हो गया।



सिया अभी भी असमंजस में था, तभी उन एलियंस में से एक आगे आया। उसने झुककर ज़मीन से थोड़ी सी मिट्टी उठाई, उसे अपने माथे से लगाया और एक छोटे से गैजेट में रख लिया—मानो वह पृथ्वी का सम्मान कर रहा हो।



अगले ही पल, उस एलियंस के गले में लगे यंत्र से पृथ्वी की भाषा गूंजी, "हम इस दुनिया को नष्ट करने नहीं, बचाने आए हैं। क्या तुम हमारे साथ चलोगे? समय बहुत कम है।"



अंकल ने सिया के कंधे पर हाथ रखा, "तुम्हारे पिता ने कहा है, तो हमें जाना होगा।"



तैयारी शुरू हो गई। सिया, रिया, अंकल और गुरुस के साथ-साथ उनके समूह का सबसे ताकतवर योद्धा—एक विशालकाय पंबी पहलवान जिसे वे लोग कोडनेम '512' बुलाते थे—भी तैयार हो गया।



वे एलियंस के छोटे स्पोर्ट्स-शिप (Sports-Ship) में बैठे, जो उन्हें लेकर वायुमंडल के बाहर खड़े एक विशालकाय 'मदर-शिप' (Mother Ship) तक ले गया। वह जहाज इतना बड़ा था कि उसके अंदर पूरा शहर समा जाए। जहाज के अंदर कदम रखते ही सिया की आँखें फटी की फटी रह गईं। वहां सिर्फ वे ही नहीं थे, बल्कि अलग-अलग ग्रहों के अजीबोगरीब जीव भी मौजूद थे—शायद हर ग्रह के रक्षक।



तभी एक झटका लगा और जहाज 'लाइट की स्पीड' (Light Speed) से ब्रह्मांड के अंधेरे को चीरता हुआ निकल पड़ा।

सफर के दौरान सिया खिड़की से बाहर सितारों को लकीर बनते देख रहा था, पर उसका दिमाग कहीं और था। वह सोच रहा था— "अगर ये K-452b वाले लोग ब्रह्मांड के रक्षक हैं, तो मुझे क्यों चुना गया? मैं तो पृथ्वी का एक साधारण इंसान हूँ... क्या मैं सच में रक्षक हूँ या बस एक मोहरा?"

"सिया!" अंकल की आवाज़ ने उसे चौंकाया। "हम पहुँच गए हैं।"



जहाज नीचे उतर रहा था। K-452b ग्रह किसी सपने जैसा था। वहां पृथ्वी जैसी हरियाली तो थी, लेकिन इमारतें हवा में तैर रही थीं। प्रकृति और विज्ञान का ऐसा संगम सिया ने कभी नहीं देखा था। वहां के लोग—जिनकी आँखें नीली थीं—हवा में उड़ रहे थे और उनके पास ऐसी शक्तियां थीं जो किसी जादू से कम नहीं थीं।



वे एक विशाल दीवार के पास से गुजरे जिस पर उस ग्रह की प्राचीन भाषा में लिखा था, जिसे सिया का ट्रांसलेटर पढ़ पा रहा था— "ब्रह्मांड के रक्षक।"



सिया ने मन ही मन सोचा, "जब ये खुद इतने ताकतवर हैं, तो मेरी क्या ज़रूरत?"

तभी पूरे शहर में एक भारी आवाज़ गूंजी, "सभी आगंतुक (Guests) कृपया 'द ग्रेट हॉल' में उपस्थित हों।"



वे सब एक विशाल इमारत में पहुँचे। वहां एक ऊँचे मंच पर एक बुजुर्ग व्यक्ति खड़ा था, जिसके चेहरे पर गजब का तेज था। वह उस ग्रह का 'सुप्रीम लीडर' (Supreme Leader) — यास्किन था।



यास्किन ने बोलना शुरू किया, "स्वागत है योद्धाओं! मैं सुप्रीम यास्किन हूँ। आप सोच रहे होंगे कि आपको यहाँ क्यों लाया गया है। खतरा बाहर से नहीं, हमारे अपनों से है। हमारा ही एक पूर्वज, जिसने कभी हमारी रक्षा की कसम खाई थी, अब काली शक्तियों का गुलाम बन चुका है। वह 'ब्रह्मांड के रूप' (Dark Void) को खोलना चाहता है—एक ऐसा दरवाजा जहाँ सिर्फ अंधेरा और तबाही है।"



हॉल में सन्नाटा छा गया। तभी यास्किन की नज़र भीड़ में खड़े सिया पर पड़ी। उसकी नीली आँखें चमक उठीं।

"तुम..." यास्किन ने सिया की ओर इशारा किया। "तुम्हारा नाम सिया है, है न?"

सिया चौंका, "आप... आप मुझे कैसे जानते हैं?"



यास्किन मुस्कुराया, लेकिन उसकी मुस्कान में दर्द था। उसने इशारा किया और सिया को अपने निजी कक्ष में बुलाया। सिया और अंकल डरते-डरते अंदर गए।



"आप मेरे पिता को कैसे जानते हैं? वो यहाँ कैसे आए थे? वो क्या थे?" सिया ने सवालों की झड़ी लगा दी।



सुप्रीम यास्किन ने गहरी सांस ली, "सिया, तुम्हारे मन में तूफान है, मैं जानता हूँ। तुम्हारे पिता सालों पहले यहाँ आए थे। वो एक महान योद्धा थे। लेकिन..."

यास्किन रुका, उसने सिया की आँखों में देखा और एक ऐसा सच बोला जिसने सिया के पैरों तले ज़मीन खिसका दी।



"मैं तुम्हारे पिता के बारे में शायद सब कुछ न बता पाऊं... लेकिन मैं तुम्हारी 'माँ' के बारे में तुम्हें ज़रूर बता सकता हूँ।"

सिया के होश उड़ गए। "माँ? लेकिन मुझे बताया गया था कि मेरी माँ..."

यास्किन ने एक तस्वीर की ओर इशारा किया और सिया की धड़कनें रुक गईं।



सिया की माँ कौन थी? उसके माता-पिता का असली सच क्या है? सिया पृथ्वी का होकर भी इस एलियन ग्रह का हिस्सा क्यों लग रहा था? यास्किन आखिर क्या छुपा रहा है?
इन रहस्यमयी सवालों के जवाब जानने के लिए बने रहिए हमारे साथ!



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आपका पसंदीदा लेखक,
सुरेश सौंधिया