कहानीयां, दिल बातें बताने का एक जरिया, कुछ चीजे जो हम कह नही पाते वो लिख सकते है, और इसीसे बनती है कहानियां, महोब्बत की, इश्क की, कुछ अनकही बातों की, दबे हुए जज्बातों की, कहानियां.....
छठा भाग:
कितनी अच्छी फीलिंग होती है न ये प्यार वाली फीलिंग
कितनी अच्छी होती है न ये, प्यार वाली फीलिंग,
मानो जैसे सबकुछ अलग सा लगता है,
मन जैसे नाचता रहता है, पेट में गुदगुदी सी होने लगती है,
तितलियां जैसे उड़ रहीं हो,
हवाएं जैसे मन को छू रहीं हो,
कितनी अच्छी होती है न, ये प्यार वाली फीलिंग...
बस वो घड़ी आ ही गई जिसका इंतजार था,
पथक पहुंच उस जगह पर राही का इंतजार कर रहा था,
राही भी पथक के बताई गई जगह पर पहोंच गई थी,
राही: हेलो पथक, कहां हो तुम? में यहां पहोंच गई हूं,
पथक: राही तुम्हारे राइट साइड में एक पेड़ है, उस पेड़ पर एरो का निशान है, उस निशान को फॉलो करो, आप हमारी तरफ पहोंच जाएंगे मैडम।
राही: ठीक है, सर जो हुकुम आपका।
राही उस एरो को फॉलो करते करते एक जगह पर पहोंच जाती है जहां से एरो अब दिखाई नहीं देता, तब राही के फोन पर एक मैसेज आता है, मिस राही इस फूलो के पथ को राह बनाइए, और इस पथक की राही बनके राह को खुशनुमा बनाइए...
ये पढ़ते ही राही मुस्कुराने लगती है, और पथ पर चलने लगती है,
और वहां पहोंच जाती है, बहुत सुंदर छोटा सा टेंट था, जिसको बड़े प्यार से सजाया जाता है, पथक उस टेंट के पास खड़ा होता है,
वो राही को बस देखते ही रह जाता है,
राही के खुले लंबे कर्ली बाल, उसके दिल को जैसे और ही लुभा रहे हो, बहुत ही सिंपल सी ड्रेस राही ने पहनी होती है, पर उस सिंपल ड्रेस में भी वो बहुत ही यूनिक लग रही थी खूबसूरत लग रही थी, राही की यही सिंपल चीजे पथक को अच्छी लगती है,
पथक को देख कर राही भी बहुत ही खुश हो जाती है, उसके सामने जाके खड़ी हो जाती है, और उसको देखते ही रह जाती है,
*वो कहते है न जो लोग प्यार में होते है न, उसको एक दूसरे के अलावा कुछ भी नहीं दिखता, उनको एक दूसरे का ही होना समझ आता है, उनको बस एक दूसरे की हर चीज अच्छी सी लगने लगती है, बस दोनो एक दूसरे के ही हो जाओ,*
राही और पथक एक दूसरे को गले लगते है...
राही: कैसे हो पथक ?
पथक: तुमसे मिलके अब बहुत अच्छा हो गया हूं, बिल्ली, I miss you so very much, तुमसे मिलने को कितना बेचैन था मैं, बस आ ही गई वो घड़ी जब तुम मेरे सामने हो।
राही: हां, में भी तुमसे मिलना चाहती थी,इसे पहले तुम कुछ कहो ये शायराना अंदाज क्या बात है, कविताएं, शायरियां क्या बात क्या है?? जनाब?
पथक: अरे कुछ नहीं, जो खुद शायरा हो उसके आगे हमारी क्या ही कहानी, ये तो बस तुम्हे इंप्रेस करने की कोशिश थी,,।
राही: हस्ते हुऐ, हा हा हा , अच्छा ऐसा था क्या,? चलिए जनाब हम आपसे इंप्रेस हो गए...
पथक: राही के बेग की तरफ इशारा करतें हुए, ये क्या है इस बेग में..?
राही: तुम्हारे लिए हमारी पहली मुलाकात की पहली निशानी, गिफ्ट्स है, wait I will give you.. राही बेग में से गिफ्ट्स निकलते हुए,
ये तुम्हारा पहला गिफ्ट रॉस, गुलाब, जैसे गुलाब की खुशबू से सब महकता है, वैसे ही तुम्हारे जीवन में हमेशा खुशियों के रंग महकते रहे...
ये दूसरा गिफ्ट, ये तुम खुद ही खोलो...
पथक गिफ्ट खोलता है, और उसमे से कुछ तस्वीर जैसा दिखता है, लेकिन वो समझ ही नहीं पाता के ये किस तरह की तस्वीर है,
उसे असमंजस में देख कर राही समझ गई के वो समझ नही पाया के ये तस्वीर किस तरह से है...
राही: समझ नहीं पाए न, किस तरह से ये गिफ्ट है, ? ये न कुछ खास गिफ्ट है वो तस्वीर को अपने हाथ में लेती है, और उसे वो गिफ्ट दिखाते हुए कहती है, ये इसे ऐसे प्लग लगाते है बुद्धू, ये देखो....
वो तस्वीर कुछ खास थी, यूंही देखने पर वो सिर्फ एक साधारण सी पेंटिंग थी, कुछ कुदरती चीजे थी, लेकिन उसको थोड़ी सी टेढ़ी करने पर पथक बस देखता ही रह गया....
राही: ये देखो इसमें तुम्हारी तस्वीर है.. अब इसे थोड़ा दूसरी तरफ घुमाओ...
पथक : ये तो बहुत ही खास तस्वीर है, ऐसी गिफ्ट मुझे पहले किसीने नही दी...thank you so much राही,
दूसरी तरफ घुमाने पर राही की तस्वीर थी एक ही तस्वीर में दोनो आ चुके थे जैसे एक दूसरे के लिए ही बने हुए हो...
राही: और एक ये, कार्ड ये तुम खुद ही पढ़ना...
पथक : नहीं ये भी तुम ही पढ़ के सुनाओगी समझी जगली बिल्ली .
राही : जो हुकुम बंदर जी....
राही कार्ड पढ़ने लगती है, और पथक की ओर देखती है, और पथक की आंखे नम सी हो जाती और वो बस राही के पास बैठा रहता है और उसकी बाते सुनता है जो उसने लिखा हुआ था
क्या था उस कार्ड में? राही ने क्या ही लिखा था उस कार्ड में , क्यू पथक इतना भावुक हो गया था???
To be continued......