कुछ किस्से, कुछ बाते, कुछ कही देखे हुए, कुछ पढ़े हुए कुछ विचार, से बनते है किरदार.... इन्ही किरदार की बातो भरी कहानी, और इस कहानी का....
दूसरा भाग....
पथक: इतने सारे गिफ्ट्स?, सभी सालो के एक साथ ही दे दिए,
राही: हां, ये मौका ही मुझे इतने सालो बाद मिला है, में कोई मौका गवाना नही चाहती...
पथक ने एक के बाद एक सारे गिफ्ट्स देखे लेकिन उन सभी गिफ्ट्स मेसे एक गिफ्ट कुछ अलग ही दिख रहा था...
फूलो से बनी हुई एक टोकरी में छोटा सा लिफाफे जैसा दिख रहा था,
और वो लिफाफा भी कुछ अलग ही था,
फूलो से बना हुआ था, उस लिफाफे के अंदर कुछ खत जैसा था...
पथक समझ गया कि ये गिफ्ट राही ने खुद अपने हाथो से बनाया है, डेकोरेशन खुद राही ने ही की है..
पथक जैसे ही वो लिफाफा लेने के लिए जाता है तभी डोरबेल बजती है...
राही: पथक प्लीज देख लो न, कोन आया है? मैं थोड़ी सी busy हु यहां पर..
पथक: हां, देखता हूं,
कहके डोर खोलने जाता है, और सामने देखता है
जोर से बोलने की आवाज: Surprise, wishing you a very very very happy birthday....
पथक : दित्या, अहाना, हीया, तुम सब यहां, What a pleasant surprise!!
दित्या: yes हम सब यहां आज के दिन कैसे नही आते..
हीया : आज के दिन कैसे नही आते, आज आपका birthday है, और हर साल आप हमारे साथ ही अपना birthday celebrate करते हो, तो आज क्यों नहीं??
पथक: क्यों नहीं बेटा, ये मेरे लिए सबसे बेस्ट सरप्राइस है, के तुम लोग यहां आए, अब सभी बाते क्या दरवाजे पर ही करोगे, अंदर तो आओ,
आहना: हमे यहां राही ने बुलाया है, उसने हमसे कहा के आपके birthday पर हम सब यहां आए.. उसे आपको सरप्राइस देनी थी इसलिए सबको बोल के रखा था के कोई आपसे ये बात न कहे...
राही: हेलो everyone कैसे हो आप सब?
दित्या: हम सब ठीक है, आप कैसे हो?
राही: में भी ठीक हु। आपका काम कैसा चल रहा गुड़िया ? And छोटी गुड़िया आपकी पढ़ाई, प्रोजेक्टस वगैरा कैसा चल रहा है सब??
दित्या और हीया: बहुत अच्छा चल रहा है, सब सही से चल रहा और पढ़ाई भी ठीक से हो रही है।
राही: आप कैसी है आहना ??
आहना: में भी बिल्कुल ठीक हु, और आप दोनो को देख लिया तो अभी तो एक दम ठीक हु।
राही: आप सब बैठो, मैं आपके लिए पानी और नाश्ता लेके आती हूं,
राही सबके के लिए और नाश्ता लेके आती है, सब बहुत खुश होते है,
पथक को हस्ता खिलखिलाता देख राही भी खुश हो जाती है,
और मन ही मन मुस्काती है, और कहती है,
" तुम न हस्ते हुए बड़े ही प्यारे लगते हो..
जितना तुम्हे देखती हु मेरी चाहत और बढ़ जाती है,
मेरा प्यार और गहरा होता जाता है,
पता नही क्या खासियत है तुजमे,
के तुमसे नजरे हटती ही नहीं,
ये दिल का हाल क्या ही बयां करू,
मेरे दिल की हर धड़कन में तुम बसे हुए हो,
तुम न हस्ते रहा करो, बड़े प्यारे लगते हो...
सच.... "
बस हसी खुशी का माहोल था, सब कुछ ठीक था,
सब अपनी मस्ती में थे, तभी...
पथक: राही, राही कहा हो तुम ? राही सब wait कर रहे है,
चलो आगे का क्या करना है, सब पूछ रहे है,
राही कहा हो तुम ??
राही कहा चली गई कही मिल नही रही,
सभी उसको ढूंढते है, घर के अंदर बाहर हर जगह उसको फोन भी लगाया लेकिन राही अपना फोन तो यही छोड़ गई है,
आहना राही मिली ,? नही नही मिली
कहा चली गई राही, सभी उसको ढूंढने में लग जाते है,
अरे पर अभी तो यही थी, कहा चली गई राही,
राही, राही, राही......
आखिर कहा गई राही?, किसको बिना बताए, कही खुद से गई अगर गई है तो क्यू गई है, और अगर नही तो फिर कोई और बात है,? आखिर कहा जा सकती है, राही .... पथक को राही मिलेगी, या फिर नही,
आखिर क्या है ये मंजिल.....
To be continued....