serial timer in Hindi Horror Stories by Vijay Erry books and stories PDF | धारावाहिक-काल दर्शी

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धारावाहिक-काल दर्शी

काल दर्शी - भाग 1: अनोखी शक्ति
तारा की सुबह हमेशा की तरह शुरू हुई। 23 साल की यह साधारण लड़की दिल्ली के एक छोटे से फ्लैट में अकेली रहती थी और एक IT कंपनी में काम करती थी। लेकिन आज की सुबह कुछ अलग थी।
मेट्रो में बैठे हुए जब उसकी नज़र सामने बैठी एक बुजुर्ग महिला पर पड़ी, तो अचानक उसके दिमाग में एक आवाज़ गूंजी - "काश बेटा आज फोन कर देता... कितने दिन हो गए।"
तारा चौंक गई। यह आवाज़ कहाँ से आई? उसने इधर-उधर देखा, लेकिन कोई बोल नहीं रहा था। वह महिला तो बस खिड़की से बाहर देख रही थी।
"शायद मेरा वहम होगा," तारा ने सोचा और फोन में व्यस्त हो गई।
ऑफिस पहुंचकर जब वह अपने बॉस राजीव से मीटिंग में बैठी, तो फिर वही अजीब अनुभव हुआ। राजीव मुस्कुरा रहा था और उसकी तारीफ कर रहा था, लेकिन जैसे ही तारा ने ध्यान से उसकी आँखों में देखा, उसे सुनाई दिया - "इस लड़की को प्रमोशन देना पड़ेगा नहीं तो यह भी छोड़कर चली जाएगी। कितना मुश्किल है अच्छे कर्मचारी ढूंढना।"
तारा का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। यह क्या हो रहा था? क्या वह सच में लोगों के मन की बात सुन पा रही थी?
दोपहर के खाने के समय, उसने अपनी सहेली प्रिया के साथ कैंटीन में बैठकर यह बात share करने की सोची।
"प्रिया, मुझे लगता है मेरे साथ कुछ अजीब हो रहा है," तारा ने धीरे से कहा।
"क्या हुआ?" प्रिया ने पूछा।
तारा ने पूरी बात बताई। प्रिया पहले तो हंसी, फिर बोली, "अरे, stress हो गया होगा तुझे। छुट्टी ले ले।"
लेकिन तारा को यकीन था कि यह सिर्फ stress नहीं था। जब उसने ध्यान से प्रिया की आँखों में देखा, तो सुनाई दिया - "काश मैं भी तारा की तरह confident होती। वो हमेशा इतनी मजबूत लगती है।"
तारा हैरान रह गई। प्रिया, जो हमेशा इतनी खुश और आत्मविश्वास से भरी दिखती थी, उसके मन में भी असुरक्षा थी।
शाम को घर लौटते हुए तारा सोच रही थी - यह शक्ति आखिर उसे कैसे मिली? और सबसे बड़ा सवाल - क्या यह वरदान था या अभिशाप?
जैसे ही वह अपने फ्लैट के गेट पर पहुंची, उसकी नज़र पड़ोस के अंकल पर पड़ी जो हमेशा सबसे हंसकर बात करते थे। लेकिन आज जब तारा ने उन्हें गौर से देखा, तो उसके रोंगटे खड़े हो गए - "कल रात वाला काम पूरा करना होगा... किसी को पता नहीं चलना चाहिए।"
तारा जल्दी से अंदर चली गई। उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। क्या उसने कुछ गलत सुन लिया? या फिर वाकई में कुछ गड़बड़ थी?
रात को बिस्तर पर लेटी तारा सोच रही थी - इस नई शक्ति के साथ उसकी ज़िंदगी कैसे बदलने वाली थी? क्या वह हर किसी के मन की बात जानना चाहती थी? और सबसे ज़रूरी - उसे इस शक्ति का उपयोग कैसे करना चाहिए?
जारी रहेगा...
क्या आप जानना चाहते हैं कि आगे तारा के साथ क्या होता है? अगले भाग में देखिए कैसे तारा इस शक्ति को समझने और नियंत्रित करने की कोशिश करती है।
काल दर्शी - भाग 2: रहस्य की गहराई
अध्याय 1: बेचैन रात
तारा की आँखों में नींद नहीं थी। छत की ओर टकटकी लगाए वह लेटी हुई थी, लेकिन उसका दिमाग तेज़ी से काम कर रहा था। आज का पूरा दिन एक अजीब सपने की तरह लग रहा था। क्या वाकई उसे लोगों के मन की बात सुनाई दे रही थी? या फिर वह पागल हो रही थी?
उसने अपना फोन उठाया और गूगल पर सर्च करना शुरू किया - "mind reading powers", "telepathy real or fake", "hearing people's thoughts"। कई आर्टिकल्स थे, कुछ साइंटिफिक, कुछ स्प्रिचुअल। लेकिन किसी में भी उसे अपने सवालों के जवाब नहीं मिले।
रात के दो बज चुके थे। तारा ने फोन साइड टेबल पर रखा और करवट बदली। उसे प्रिया की बात याद आई - "काश मैं भी तारा की तरह confident होती।" यह सोचकर उसे अजीब सा लगा। हम सब एक-दूसरे को देखकर समझते हैं कि सामने वाला कितना खुश है, कितना सफल है, लेकिन किसी को नहीं पता कि उसके मन में क्या चल रहा है।
अचानक उसे पड़ोस के शर्मा अंकल की बात याद आई - "कल रात वाला काम पूरा करना होगा... किसी को पता नहीं चलना चाहिए।" यह क्या था? क्या वह कुछ गलत कर रहे थे? तारा को लगा कि उसे इस बारे में और जानना चाहिए।
आखिरकार सुबह के पांच बजे के करीब उसकी आँख लग गई।
अध्याय 2: नया दिन, नई चुनौतियाँ
अलार्म की आवाज़ पर तारा की नींद खुली। सिर में हल्का दर्द था और आँखें भारी लग रही थीं। उसने snooze button दबाया और फिर से करवट ले ली। लेकिन दस मिनट बाद जब दूसरी बार अलार्म बजा, तो उसे एहसास हुआ कि उसे office के लिए तैयार होना है।
बाथरूम में जाकर जब उसने शीशे में अपना चेहरा देखा, तो वह खुद ही चौंक गई। आँखों के नीचे काले घेरे, बाल बिखरे हुए, चेहरे पर थकान साफ़ झलक रही थी।
"तारा, संभल जा," उसने खुद से कहा। "तुझे इस चीज़ को समझना होगा, डरना नहीं।"
नहा-धोकर जब वह तैयार हुई, तो थोड़ा बेहतर महसूस कर रही थी। उसने एक plan बनाया। आज वह जानबूझकर इस शक्ति को test करेगी। देखेगी कि यह सच में काम करती है या नहीं।
मेट्रो स्टेशन की ओर जाते हुए उसने सोचा कि किस तरह से यह शक्ति काम करती है। कल उसने notice किया था कि जब वह किसी को बहुत ध्यान से, खासकर उनकी आँखों में देखती थी, तभी उसे उनके विचार सुनाई देते थे। क्या यह हर बार होगा? क्या उसे इस पर control है?
मेट्रो में चढ़ते ही भीड़ देखकर वह थोड़ी घबरा गई। इतने सारे लोग... अगर वह सबके मन की बात सुनने लगी तो?
उसने एक कोने में जगह बनाई और अपनी नज़रें नीचे रखीं। लेकिन उसकी curiosity उस पर भारी पड़ रही थी। आखिर उसने हिम्मत करके सामने खड़े एक युवक को देखा। वह अपने फोन में व्यस्त था, हेडफोन्स लगाए गाने सुन रहा था।
तारा ने concentrate किया। पहले कुछ नहीं हुआ। फिर उसने और गहराई से देखा, उस युवक की आँखों पर focus किया। और तभी...
"यार, आज भी late हो गया। बॉस फिर से भाषण देगा। काश weekend आ जाए।"
तारा ने तुरंत अपनी नज़रें हटा लीं। उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था। तो यह सच था! वह वाकई लोगों के मन की बात सुन सकती थी।
अगले पंद्रह मिनट तक उसने तीन-चार और लोगों पर यह experiment किया। हर बार वही नतीजा - जब वह किसी को गौर से देखती, खासकर उनकी आँखों में, तो उनके विचार उसे सुनाई देते।
ऑफिस पहुंचकर तारा ने अपनी सीट पर बैठते ही laptop खोला और काम में डूबने की कोशिश की। लेकिन उसका मन कहीं और था।
"Good morning, Tara!" उसकी colleague अनन्या ने चहकते हुए कहा।
"Good morning," तारा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
अनन्या हमेशा बहुत खुश और energetic रहती थी। वह team की सबसे popular लड़की थी - खूबसूरत, smart, और हमेशा मददगार। तारा ने सोचा कि अनन्या के मन में क्या चलता होगा?
जब अनन्या अपनी सीट पर बैठी और computer on कर रही थी, तारा ने चुपके से उसे देखा। Focus किया... और सुना:
"काश ये सब जान पाते कि मैं कितनी अकेली हूँ। सबको लगता है मैं बहुत खुश हूँ, लेकिन अंदर से... घर जाकर रोज़ रोती हूँ। माँ की बीमारी, पापा का क़र्ज़... किसी को बताऊं भी तो किसे?"
तारा को झटका लगा। अनन्या... जो हमेशा इतनी हंसती-मुस्कुराती रहती थी, उसके अंदर इतना दर्द था?
पूरे दिन तारा असहज महसूस करती रही। उसे लग रहा था जैसे वह लोगों की privacy में झांक रही थी। लेकिन साथ ही, एक अजीब सी जिज्ञासा भी थी - और कौन-कौन क्या सोच रहा है?
अध्याय 3: राजीव का रहस्य
दोपहर के करीब तीन बजे तारा को उसके boss राजीव ने अपने cabin में बुलाया।
"Tara, come in," राजीव ने मुस्कुराते हुए कहा।
तारा अंदर गई और सामने की chair पर बैठ गई। राजीव लगभग चालीस साल का था, well-dressed, और professional। लेकिन कल उसने उसके मन की बात सुनी थी। आज वह और क्या सोच रहा होगा?
"देखो Tara, मैंने तुम्हारी last quarter की performance देखी है और मैं बहुत impressed हूँ," राजीव ने कहा।
तारा ने धन्यवाद कहा और मुस्कुराई।
"Actually, मैं तुम्हें एक नए project की responsibility देना चाहता हूँ। यह बहुत important project है और client भी बड़ा है। मुझे पूरा विश्वास है कि तुम इसे अच्छे से handle कर लोगी।"
राजीव बात करता रहा, लेकिन तारा की नज़रें उसकी आँखों पर टिक गई थीं। उसने concentrate किया...
"इस project में अगर यह लड़की अच्छा काम करेगी, तो मेरी promotion पक्की है। Sharma sir ने कहा है कि अगर यह deal successfully complete हुई, तो मुझे regional head बना देंगे। बस Tara को अच्छे से guide करना होगा... और फिर सारा credit मैं ले लूंगा।"
तारा का मन खट्टा हो गया। तो यह था असली reason! राजीव उसे यह project इसलिए दे रहा था ताकि बाद में credit खुद ले सके।
"Tara, क्या तुम ठीक हो?" राजीव ने पूछा।
तारा ने realize किया कि वह चुप बैठी सोच रही थी।
"हाँ... हाँ, sir. मैं बस सोच रही थी कि यह project कितना बड़ा होगा।"
"Don't worry. मैं तुम्हारे साथ हूँ। हम team के साथ मिलकर इसे complete करेंगे।"
"Team? मुझे अकेले ही सारा काम करना है। Team तो बस नाम की है।" राजीव के मन की आवाज़ फिर से गूंजी।
तारा ने project की details लीं और cabin से बाहर आ गई। उसका मन अब पूरी तरह से upset था। जिस boss को वह अच्छा समझती थी, वह actually इतना selfish था।
अध्याय 4: प्रिया से बातचीत
lunch break में तारा ने प्रिया को कैंटीन में बुलाया।
"क्या हुआ? तू परेशान लग रही है," प्रिया ने पूछा।
तारा ने पूरी बात बताई - कैसे उसने आज फिर से लोगों के मन की बात सुनी, अनन्या के बारे में जाना, और राजीव की असलियत भी पता चली।
प्रिया पहले तो चुप रही, फिर बोली, "Tara, honestly मुझे अभी भी लग रहा है कि तू overthink कर रही है। शायद ये सब तेरा imagination है।"
"प्रिया, मैं सच कह रही हूँ!" तारा ने frustration में कहा।
"Okay, okay. मान लेती हूँ कि तू सच कह रही है। तो फिर, यह power तुझे कैसे मिली? अचानक से ही कैसे?"
यह सवाल तारा ने खुद से भी पूछा था। "मुझे नहीं पता। कल तक सब normal था। और फिर अचानक से..."
"तूने कुछ अलग किया था कल? कहीं गई थी? कुछ खाया-पिया?"
तारा ने सोचा। "नहीं तो... सब normal ही था। बस..."
"बस क्या?"
"हाँ, एक बात याद आई। कल शाम को घर जाते वक्त मैं उस पुरानी temple के पास से गुज़री थी जो पिछले महीने से बंद पड़ा है। वहाँ एक बूढ़ी औरत खड़ी थी, मुझे अजीब लग रही थी। उसने मुझे रोका और कुछ कहने लगी।"
"क्या कहा?"
तारा ने माथे पर हाथ रखकर याद करने की कोशिश की। "कुछ... कुछ अजीब सी भाषा में बोल रही थी। फिर उसने मेरे माथे पर तिलक लगाया। मैंने मना किया था लेकिन वह बहुत ज़िद कर रही थी।"
प्रिया की आँखें फैल गईं। "Tara! यह तो serious बात है। क्या तूने उसे फिर से देखा?"
"नहीं, उसके बाद तो वह चली गई। मैं सोच रही थी कि कोई pagal औरत होगी।"
"तुझे उस temple के पास फिर से जाना चाहिए। शायद कोई clue मिल जाए।"
तारा ने सिर हिलाया। "हाँ, मैं आज शाम को जाऊंगी।"
अध्याय 5: पहला सही इस्तेमाल
lunch के बाद जब तारा अपनी seat पर वापस आई, तो उसने देखा कि अनन्या अपनी seat पर सिर झुकाए बैठी थी। उसके कंधे हिल रहे थे - वह रो रही थी।
तारा का दिल पसीज गया। सुबह जो उसने अनन्या के मन की बात सुनी थी, वह उसे याद आई। उसने एक पल के लिए सोचा - क्या मुझे कुछ करना चाहिए?
"Ananya, क्या हुआ?" तारा ने धीरे से पूछा।
अनन्या ने जल्दी से अपनी आँखें पोंछीं। "कुछ नहीं... बस... आँख में कुछ चला गया था।"
तारा जानती थी कि वह झूठ बोल रही है। उसने chair खींचकर अनन्या के पास बैठ गई।
"Ananya, मैं तेरी friend हूँ। तू मुझे बता सकती है अगर कोई problem है।"
अनन्या ने उसकी ओर देखा। उसकी आँखें लाल थीं।
"Tara... actually मैं बहुत परेशान हूँ। घर पर बहुत सारी problems हैं। मम्मी बीमार हैं, और papa के ऊपर बहुत क़र्ज़ है। मैं जो भी कमाती हूँ, वो सब घर चला जाता है। और यहाँ सबको लगता है कि मेरी life बहुत perfect है।"
तारा ने उसका हाथ पकड़ा। "तुझे अकेले में यह सब नहीं रखना चाहिए था। मैं हूँ ना। हम साथ में कोई solution निकालेंगे।"
अनन्या की आँखों में आँसू आ गए। "सच में?"
"बिल्कुल। पहले तो बता, तुझे कितने पैसों की ज़रूरत है?"
अनन्या ने अपनी पूरी situation explain की। तारा ने ध्यान से सुना और फिर कुछ practical suggestions दीं। उसने अनन्या को employee assistance program के बारे में बताया जो company offer करती थी, medical loan के options के बारे में बताया।
"और हाँ, तू अकेली नहीं है। हम सब friends हैं। तुझे किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो, बस बता देना।"
अनन्या ने तारा को गले लगा लिया। "Thank you, Tara. आज पहली बार लग रहा है कि शायद सब ठीक हो जाएगा।"
उस पल तारा को एहसास हुआ - शायद यह शक्ति कोई अभिशाप नहीं, बल्कि एक gift थी। अगर वह इसे सही तरीके से इस्तेमाल करे, तो लोगों की मदद कर सकती थी।
अध्याय 6: मंदिर की ओर
शाम को छह बजे office से निकलते ही तारा सीधे उस पुराने मंदिर की ओर चल पड़ी। यह मंदिर उसके flat से करीब एक किलोमीटर दूर था। पुराना, जर्जर, और पिछले कुछ महीनों से बंद पड़ा था।
जैसे-जैसे वह मंदिर के पास पहुंची, उसे एक अजीब सी feeling होने लगी। हवा में कुछ अलग सा था - एक खामोशी, एक रहस्यमय atmosphere।
मंदिर के बाहर कोई नहीं था। कल की वह बूढ़ी औरत भी नहीं दिखाई दे रही थी। तारा ने मंदिर के main gate की ओर देखा - एक बड़ा ताला लगा हुआ था।
"किसे ढूंढ रही हो, बेटी?"
तारा चौंक गई। पीछे मुड़ी तो देखा कि एक बूढ़ा पंडित खड़ा था, सफ़ेद धोती-कुर्ता पहने हुए।
"जी... मैं... actually कल यहाँ एक बूढ़ी औरत मिली थी। वह..."
"काली साड़ी वाली? सफ़ेद बाल?" पंडित ने पूछा।
"हाँ! आप उसे जानते हैं?"
पंडित जी ने गहरी सांस ली। "अंदर आओ, बेटी। तुमसे बात करनी है।"
तारा थोड़ी हिचकिचाई लेकिन फिर पंडित जी के पीछे-पीछे चल दी। पंडित जी ने side की एक छोटी सी gate खोली और अंदर ले गए।
मंदिर के अंदर का नज़ारा देखकर तारा हैरान रह गई। बाहर से तो यह बिल्कुल टूटा-फूटा लग रहा था, लेकिन अंदर सब कुछ साफ़-सुथरा था। मुख्य देवी की मूर्ति के सामने दीपक जल रहा था।
"बैठो," पंडित जी ने एक आसन की ओर इशारा किया।
तारा बैठ गई। उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था।
"तुमने उस औरत से कुछ लिया था? कोई तिलक? प्रसाद?" पंडित जी ने पूछा।
"हाँ... उसने मेरे माथे पर तिलक लगाया था। मैंने मना किया था लेकिन..."
पंडित जी ने सिर हिलाया। "यह मंदिर करीब तीन सौ साल पुराना है। यहाँ देवी काली की पूजा होती थी। कहते हैं कि इस मंदिर की पुजारिन को कुछ खास शक्तियाँ थीं - वह लोगों के मन की बात जान सकती थीं।"
तारा की साँस रुक गई।
"पिछले महीने वह पुजारिन - माता जी - उनका देहांत हो गया। मरने से पहले उन्होंने कहा था कि जल्द ही कोई आएगा, जिसे यह शक्ति मिलनी है।"
"लेकिन... लेकिन मैं? मुझे इस शक्ति से क्या करना है?" तारा ने घबराहट में पूछा।
पंडित जी ने तारा की ओर गौर से देखा। "यह तो तुम्हें ही तय करना होगा, बेटी। शक्ति न अच्छी होती है, न बुरी। यह इस पर निर्भर करता है कि उसका इस्तेमाल कैसे किया जाए।"
"क्या... क्या मैं इसे वापस कर सकती हूँ? मुझे यह नहीं चाहिए।"
"नहीं, बेटी। एक बार जो शक्ति मिल गई, वह वापस नहीं जाती। लेकिन तुम इसे control करना सीख सकती हो। और सबसे ज़रूरी - इसका सही उपयोग कर सकती हो।"
तारा के मन में हज़ारों सवाल उठ रहे थे। "लेकिन यह शक्ति मुझे ही क्यों मिली? मैं तो कोई खास नहीं हूँ।"
पंडित जी मुस्कुराए। "देवी हमेशा सही व्यक्ति को चुनती हैं। तुम्हारे अंदर कुछ है - शायद करुणा, शायद न्याय की भावना - जो इस शक्ति को संभाल सकती है।"
अध्याय 7: नया perspective
मंदिर से निकलकर तारा सीधे घर चली गई। पंडित जी ने उसे कुछ ध्यान करने के तरीके बताए थे जिससे वह अपनी शक्ति को control कर सके। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर कभी उसे मार्गदर्शन की ज़रूरत हो, तो वह मंदिर आ सकती है।
घर पहुंचकर तारा ने अपने लिए चाय बनाई और balcony में बैठ गई। शाम की ठंडी हवा चल रही थी और सूरज डूब रहा था।
उसने पिछले दो दिनों के बारे में सोचा। इस शक्ति ने उसकी ज़िंदगी पूरी तरह से बदल दी थी। लेकिन शायद यह बदलाव बुरा नहीं था।
आज उसने अनन्या की मदद की थी। उसे लगा कि शायद यही इस शक्ति का मकसद है - लोगों की मदद करना, उन्हें समझना, जो वे बोल नहीं पाते।
लेकिन साथ ही, राजीव जैसे लोगों के बारे में जानकर उसे बुरा भी लगा था। अगर हर किसी की असलियत पता चल जाए, तो क्या relationships survive कर पाएंगी?
उसका फोन बजा। प्रिया का message था: "क्या हुआ? मंदिर गई थी?"
तारा ने पूरी बात बताई - पंडित जी से मुलाकात, पुरानी पुजारिन की कहानी, सब कुछ।
प्रिया का जवाब आया: "OMG! यह तो पूरी फिल्म जैसा है। लेकिन Tara, अब तू क्या करेगी?"
तारा ने सोचा। फिर type किया: "मैं इस शक्ति को accept करूंगी। और इसका सही इस्तेमाल करूंगी। लेकिन carefully। सबकी privacy का भी ध्यान रखना होगा।"
अध्याय 8: नए नियम
अगले कुछ दिन तारा ने अपनी शक्ति को समझने और control करने में बिताए। पंडित जी ने जो meditation techniques बताई थीं, वह रोज़ practice करती थी।
उसने कुछ नियम भी बना लिए:
नियम 1: बिना ज़रूरत के किसी के मन में नहीं झांकना। सिर्फ तभी जब वाकई ज़रूरी हो या कोई खतरा हो।
नियम 2: जो भी सुना, उसे किसी और से share नहीं करना (सिवाय बहुत ज़रूरी cases में)।
नियम 3: इस शक्ति का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए नहीं करना। सिर्फ दूसरों की मदद के लिए।
नियम 4: हमेशा याद रखना कि हर किसी के मन में dark thoughts आते हैं - यह normal है। सिर्फ thoughts से किसी को judge नहीं करना।
इन नियमों के साथ, तारा की ज़िंदगी थोड़ी organized होने लगी।