Adhura Wada Ek Saya - 7 in Hindi Horror Stories by kajal jha books and stories PDF | अधुरा वादा एक साया - एपिसोड 7

Featured Books
Categories
Share

अधुरा वादा एक साया - एपिसोड 7

एपिसोड 7: विरासत का बोझ
नीलकमल सराय के ढहने की गूँज अभी भी माया के कानों में प्रतिध्वनित हो रही थी। मलबे से उठने वाला गुबार धीरे-धीरे सुबह की धुंध में मिल रहा था। इशान की कार शहर की ओर दौड़ रही थी, लेकिन सन्नाटा इतना गहरा था कि घड़ी की टिक-टिक भी हथौड़े की तरह सुनाई दे रही थी।
माया ने अपने हाथ की हथेलियों को देखा। ताबीज टूट चुका था, लेकिन उसकी जलन अब भी उसकी त्वचा पर महसूस हो रही थी। वह जल नहीं रही थी, बल्कि उसे ऐसा लग रहा था जैसे कोई ऊर्जा उसकी नसों में प्रवाहित हो रही हो।
इशान का रहस्य और पुरानी फाइलें
"तुमने कभी नहीं बताया कि आर्यन तुम्हारा भाई था," माया ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा। उसकी आवाज़ में थकान और थोड़ा सा क्षोभ था।
इशान ने स्टीयरिंग पर अपनी पकड़ मजबूत की। "अगर बताता तो क्या तुम मुझ पर भरोसा करतीं? तुम पहले से ही डरी हुई थीं। मुझे डर था कि तुम पीछे हट जाओगी। आर्यन और नंदिनी की कहानी मेरे परिवार का वो ज़ख्म है जो कभी नहीं भरा। मेरी माँ मरते दम तक उस सराय की ओर देखती रही थीं, इस उम्मीद में कि उनका बड़ा बेटा वापस आएगा।"
उसने कार के डैशबोर्ड से एक पुरानी, मटमैली फाइल निकाली और माया की ओर बढ़ा दी। "विमला अकेली नहीं थी, माया। वह तो सिर्फ एक प्यादा थी। वह अमरता की जिस औषधि या मंत्र के पीछे पागल थी, उसके पीछे एक पूरा सिंडिकेट था। 'अमरत्व' नाम का एक गुप्त संगठन, जो 1974 से आज तक सक्रिय है।"
माया ने कांपते हाथों से फाइल खोली। उसमें कुछ धुंधली तस्वीरें थीं—अस्पताल के बेड्स, कुछ वैज्ञानिक उपकरण और वही चिन्ह जो ताबीज पर बना था।
एक नई शुरुआत या नया जाल?
शहर पहुँचते ही माया अपने पुराने अपार्टमेंट में वापस तो आ गई, लेकिन उसे सब कुछ बदला हुआ लगा। उसे महसूस हुआ कि उसकी इंद्रियां अब सामान्य से अधिक तेज़ हो गई थीं। वह दीवार के पार की फुसफुसाहट सुन सकती थी और बंद आँखों से भी कमरे की ऊर्जा को महसूस कर सकती थी।
रात के करीब दो बजे थे। माया को नींद नहीं आ रही थी। उसने अपने मेज पर रखे उन दस्तावेज़ों को देखा जो वह सराय से लाई थी। अचानक, कमरे का तापमान गिर गया। मोगरे की महक नहीं, बल्कि इस बार ओजोन और जलने जैसी गंध हवा में फैली।
उसकी खिड़की पर एक साया उभरा। वह आर्यन नहीं था। यह कोई और था।
"नंदिनी की बेटी..." एक भारी, गूँजती हुई आवाज़ कमरे में फैली। "तुमने जो तोड़ा है, उसे तुम्हें ही फिर से जोड़ना होगा। विमला सिर्फ एक रक्षक थी, असली शैतान अभी जागना बाकी है।"
माया झटके से खड़ी हुई। "कौन हो तुम? सामने आओ!"
वह साया धुंध की तरह गायब हो गया, लेकिन मेज पर रखे एक कोरे कागज पर खून जैसे लाल अक्षरों में एक पता लिखा था: 'सेंट जुड का पुराना अनाथालय, वॉर्ड नं. 9'।
अतीत की परतें
अगली सुबह, माया इशान से मिले बिना उस पते पर पहुँच गई। यह शहर के बाहरी इलाके में एक जर्जर इमारत थी। वहाँ पहुँचते ही माया को एक अजीब सा अहसास हुआ—जैसे वह यहाँ पहले भी आ चुकी हो।
वहाँ उसे एक बूढ़ी नन मिली, जिसकी आँखें सफेद मोतियाबिंद से ढकी थीं। माया को देखते ही वह कांपने लगी।
"तुम... तुम फिर आ गई? 50 साल बाद?" नन ने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा।
"मैं यहाँ पहली बार आई हूँ। आप मुझे किससे जोड़ रही हैं?" माया ने उसे सहारा देते हुए पूछा।
"नंदिनी... वह भी इसी तरह आई थी। वह गर्भवती थी और डरी हुई थी। उसने मुझे बताया था कि विमला ने उसे चुन लिया है। उसने अपनी होने वाली बच्ची को बचाने के लिए अपनी आत्मा का सौदा किया था। माया, वह ताबीज सिर्फ सुरक्षा के लिए नहीं था, वह एक चाबी थी।"
माया का दिल ज़ोर से धड़कने लगा। "कैसी चाबी?"
"उस विरासत की चाबी, जिसे विमला ने सदियों से सहेज कर रखा था। वह शक्ति अब तुम्हारे अंदर है। जिस क्षण ताबीज टूटा, वह ऊर्जा मुक्त नहीं हुई, बल्कि उसने एक नया शरीर ढूंढ लिया। तुमने विमला को नहीं मारा, तुमने उसके अंदर की 'शक्ति' को खुद में समाहित कर लिया है।"
एक भयानक एहसास
माया को पसीना आने लगा। उसे याद आया कि कैसे सराय ढहते वक्त उसे एक अजीब सी शांति महसूस हुई थी। क्या वह शांति थी या सत्ता का नशा?
उसने अनाथालय के एक पुराने शीशे में अपनी सूरत देखी। उसकी आँखों की पुतलियाँ हल्की नीली चमक रही थीं—ठीक वैसी ही जैसी ताबीज टूटने पर निकली रोशनी थी।
तभी इशान का फोन आया। उसकी आवाज़ में घबराहट थी। "माया, तुम कहाँ हो? भागो वहाँ से! मैंने अभी पुलिस फाइलों की दोबारा जांच की। विमला का कोई बेटा या परिवार नहीं था। आर्यन को गोद लिया गया था... और जिस फाइल को मैंने तुम्हें दिया, वह मुझे कल रात मेरे घर के दरवाजे पर मिली थी। किसी ने हमें उस सराय में भेजा था ताकि तुम ताबीज तोड़ सको!"
माया के हाथ से फोन गिर गया। उसे अहसास हुआ कि वह अब तक जो कर रही थी, वह किसी और की रची हुई बिसात का हिस्सा था। वह प्रतिशोध नहीं ले रही थी, बल्कि वह एक 'पात्र' बन रही थी।
सराय का पुनर्जन्म
अचानक, पूरे शहर में बिजली गुल हो गई। माया ने अनाथालय की खिड़की से बाहर देखा। दूर पहाड़ी पर, जहाँ नीलकमल सराय जमींदोज हो चुकी थी, वहां से एक विशाल नीली रोशनी आसमान की ओर उठ रही थी।
मलबे के नीचे से कुछ निकल रहा था।
सराय मरी नहीं थी। वह सिर्फ अपनी पुरानी खाल छोड़ रही थी। माया को अपने सीने में एक खिंचाव महसूस हुआ। उसका दिल उसी लय में धड़क रहा था जिस लय में वह नीली रोशनी चमक रही थी।
"माया..." इशान की आवाज़ फोन के स्पीकर से अभी भी आ रही थी, "वह संगठन... उसका नाम 'अमरत्व' नहीं है... वह 'माया' है। उन्होंने तुम्हारा नाम बहुत पहले ही चुन लिया था।"
माया ने धीरे से अपना हाथ उठाया। उसकी उंगलियों के पोरों से नीला धुआं निकल रहा था। उसने एक दर्दनाक मुस्कान के साथ खिड़की की ओर देखा। उसे अब सब समझ आ गया था। वह केवल नंदिनी की बेटी नहीं थी, वह उस अंधकार की अगली वारिस थी जिसे दुनिया खत्म मान चुकी थी।
अगले एपिसोड में:
क्या माया अपनी इस नई काली शक्ति पर नियंत्रण पा पाएगी? या वह विमला से भी बड़ी आपदा बन जाएगी? इशान का असली मकसद क्या है—रक्षा या विनाश