Adhura Wada Ek Saya - 5 in Hindi Horror Stories by kajal jha books and stories PDF | अधुरा वादा एक साया - एपिसोड 5

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अधुरा वादा एक साया - एपिसोड 5

आधी रात का सफर

इशान खन्ना की आँखों में एक ऐसी सच्चाई थी जिसे माया झुठला नहीं पा रही थी। उसने उस पुराने खत और ताबीज को अपने पास रखा और इशान की गाड़ी में बैठ गई। शहर की रोशनी पीछे छूट रही थी और वे एक ऐसे घने जंगल वाले रास्ते की ओर बढ़ रहे थे जहाँ सड़कों के नाम तक मिट चुके थे।

"हम कहाँ जा रहे हैं इशान?" माया ने कांपती आवाज़ में पूछा।

"शहर से 30 मील दूर, 'नीलकमल सराय' की ओर। 1974 के उस हादसे के बाद इस सराय को मनहूस घोषित कर दिया गया था। लोगों का मानना है कि वहाँ की दीवारों से आज भी किसी के सिसकने की आवाज़ें आती हैं," इशान ने बिना सड़क से नज़र हटाए जवाब दिया।


नीलकमल सराय: एक ज़िंदा कब्र

जब वे सराय पहुँचे, तो चाँद बादलों के पीछे छिपा हुआ था। सराय की इमारत किसी कंकाल की तरह खड़ी थी। उसकी लकड़ियाँ गल चुकी थीं और मुख्य दरवाजे पर एक बड़ा सा जंग लगा ताला लटका था।

जैसे ही माया ने सराय की दहलीज पर कदम रखा, उसे एक ज़ोरदार चक्कर आया। उसे फिर से वही पुरानी खुशबू आने लगी—लेकिन इस बार मोगरे की नहीं, बल्कि जलती हुई लकड़ियों और पुरानी किताबों की थी।

"वह यहाँ है," माया अचानक बुदबुदाने लगी। उसे ऐसा लग रहा था जैसे कोई अदृश्य शक्ति उसे अंदर खींच रही है।


. तहखाने का दरवाज़ा

इशान ने अपनी टॉर्च जलाई और वे सराय के रसोई घर की ओर बढ़े। वहाँ एक भारी लकड़ी की मेज के नीचे एक गुप्त दरवाज़ा (Trapdoor) था। इशान ने उसे पूरी ताकत से खींचा। नीचे जाने के लिए पत्थर की सीढ़ियाँ बनी थीं जो अंधेरे की गहराई में खो रही थीं।

जैसे-जैसे वे नीचे जा रहे थे, तापमान गिरता जा रहा था। तहखाने की दीवारों पर पुरानी लिखावट थी—ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने अपने नाखूनों से वहां कुछ उकेरा हो।

अचानक, इशान की टॉर्च की रोशनी एक छोटे से लोहे के पिंजरेनुमा कमरे पर पड़ी। उसके भीतर एक धुंधली सी आकृति बैठी हुई थी। वह वही बच्ची थी! लेकिन वह पारदर्शी नहीं थी... वह सांस ले रही थी।


वक्त का थमा हुआ पहिया

माया पिंजरे के करीब गई। "गुड़िया?" उसने धीरे से पुकारा।

बच्ची ने अपना सिर उठाया। उसका चेहरा बिल्कुल वैसा ही था जैसा माया ने खिड़की के भाप पर देखा था। लेकिन उसकी उम्र 50 साल पहले जैसी ही थी। "माँ? क्या तुम मुझे लेने आई हो?" बच्ची की आवाज़ किसी पुरानी ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग जैसी गूँज रही थी।

इशान ने माया को पीछे खींचा। "रुको माया! यह सामान्य इंसान नहीं है। विक्रम सिंह ने इसे मरा हुआ घोषित कर दिया था, लेकिन वह जानता था कि नंदिनी और आर्यन का खून 'विशेष' है। उसने इस बच्ची पर कुछ तांत्रिक प्रयोग किए थे ताकि वह समय को रोक सके।"

माया की रूह कांप उठी। वह बच्ची 50 सालों से उस अंधेरे में भूखी-प्यासी सिर्फ एक 'प्रयोग' बनकर रह गई थी?


. एक खौफनाक खुलासा

तभी, तहखाने के दरवाजे पर किसी के हंसने की आवाज़ आई। माया और इशान ने ऊपर देखा। वहाँ कोई और नहीं, बल्कि विमला खड़ी थी—वही पुरानी सहकर्मी जिसने माया को ऑफिस में फाइलें ढूँढने में मदद की थी!

उसने हाथ में एक मशाल ली हुई थी। "तुमने बहुत देर कर दी इशान। और माया... तुमने मेरा काम आसान कर दिया। इस बच्ची को जगाने के लिए उस ताबीज की ज़रूरत थी जो सिर्फ तुम ढूँढ सकती थी।"

विमला की आँखें अब लाल हो चुकी थीं। "विक्रम सिंह तो सिर्फ एक मोहरा था। असली खेल तो मैं और मेरा परिवार खेल रहे हैं। हम इस बच्ची की 'अमरता' (Immortality) को चुराना चाहते हैं।"


साये की वापसी

विमला ने एक अजीब सा मंत्र पढ़ना शुरू किया। ज़मीन कांपने लगी। पिंजरे के अंदर की बच्ची चीखने लगी और उसके शरीर से काला धुआँ निकलने लगा। माया बेबस होकर गिर पड़ी।

तभी, पूरे तहखाने में एक ठंडी हवा चली। सराय की दीवारें फटने लगीं। हवा के बीच से एक विशाल आकृति उभरी। वह आर्यन था! लेकिन इस बार वह अकेला नहीं था। उसके पीछे हज़ारों साये थे—वे सभी लोग जिन्हें विक्रम और विमला के खानदान ने शिकार बनाया था।

आर्यन की रूह ने विमला की ओर इशारा किया। "अब और नहीं!"

अचानक, वह बच्ची पिंजरे से बाहर आई और उसने माया का हाथ पकड़ लिया। माया को एक बिजली का झटका महसूस हुआ। उसकी आँखों के सामने नंदिनी की सारी यादें ताज़ा हो गईं। उसे

याद आया कि उसे क्या करना है।