Pahli Nazar ka Ishq - 9 in Hindi Love Stories by Bikash parajuli books and stories PDF | पहली नज़र का इश्क - 9

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पहली नज़र का इश्क - 9

स्कूल की सुबह हमेशा की तरह हल्की हलचल, बच्चों की हँसी-मज़ाक और पढ़ाई के उत्साह से भरी हुई थी। लेकिन आज बिकाश और माया के लिए दिन कुछ अलग होने वाला था।
सुबह की हलचल और पहली मिसअंडरस्टैंडिंग
क्लास में सभी बच्चे अपनी सीटों पर बैठे थे। बिकाश अपनी नोटबुक में कुछ लिख रहा था, और माया अपने कॉपी में ध्यान लगा रही थी। अचानक, माया ने देखा कि बिकाश किसी और लड़की के साथ हँसते हुए बात कर रहा है।
माया की आँखों में हल्की जलन और नाराज़गी दिखने लगी। उसने अंदर ही अंदर सोचा,
"बिकाश… वह लड़की कौन थी? क्या मैं गलत सोच रही हूँ?"
जब क्लास में ब्रेक हुआ, माया ने सीधे बिकाश से पूछा,
“बिकाश, तुम कल उस लड़की के साथ क्या बात कर रहे थे?”
बिकाश थोड़ा चौंका, उसने मुस्कुराते हुए कहा,
“अरे माया, वह मेरी कक्षा की सहपाठी है। हम बस अगले प्रोजेक्ट की जानकारी शेयर कर रहे थे। तुमने गलत समझ लिया।”
माया ने हल्की नाराज़गी में सिर हिलाया,
“ठीक है… पर कभी-कभी मुझे लगता है कि तुम मुझे ध्यान नहीं देते।”
बिकाश ने धीरे से कहा,
“माया, मैं हमेशा तुम्हारे लिए हूँ। कभी भी तुम्हें नजरअंदाज नहीं किया। तुम मेरी जिंदगी में सबसे खास हो।”
माया ने उसकी आँखों में देखा और हल्की मुस्कान के साथ बोली,
“ठीक है बिकाश… पर अगली बार थोड़ी जल्दी समझाना।”
छोटी नोक-झोंक और प्यार की गहराई
ब्रेक के बाद, पार्क में दोनों अकेले बैठे।
माया ने मजाक में कहा,
“देखो बिकाश, तुम्हें अब हर लड़की की बातें मेरे सामने स्पष्ट करनी होंगी।”
बिकाश ने मुस्कुराते हुए कहा,
“तुम्हारे लिए तो मैं हमेशा स्पष्ट हूँ। और तुम मेरे लिए सबसे खास हो।”
माया ने उसकी ओर झुककर कहा,
“ठीक है, लेकिन अगली बार यह मिसअंडरस्टैंडिंग मत होने देना।”
बिकाश ने हँसते हुए कहा,
“मैं वादा करता हूँ, माया। अब से हम हमेशा एक-दूसरे को समझेंगे।”
स्कूल की मस्ती और दोस्ती
दोपहर के समय, स्कूल ने बच्चों के लिए एक छोटा स्किट कॉम्पटीशन रखा। बिकाश और माया ने मिलकर एक मज़ेदार नाटक तैयार किया।
माया ने मुस्कुराते हुए कहा,
“देखो बिकाश, अब हमारी टीम में सबसे मज़ेदार पल होंगे।”
बिकाश ने हँसते हुए जवाब दिया,
“हाँ माया… और तुम्हारे साथ होना इसे और मज़ेदार बनाता है।”
दोनों ने अपनी टीम के साथ स्किट का प्रैक्टिस किया। रास्ते में हँसी-मज़ाक, छोटे-छोटे झगड़े और नोक-झोंक ने उनके दिन को और मज़ेदार बना दिया।
स्किट के दौरान, माया ने हँसी में कहा,
“देखो बिकाश, तुम मेरे बिना इतना मज़ेदार नहीं हो सकते!”
बिकाश ने मुस्कुराते हुए कहा,
“और तुम बिना मेरी शरारत के मज़ेदार नहीं हो सकती।”
दोनों की हँसी और मस्ती ने क्लास में सबका दिल जीत लिया।
पहला रोमांटिक पल: झील के किनारे
दिन खत्म होते-होते, पार्क की झील के किनारे, दोनों अकेले बैठे। हवा हल्की ठंडी थी और सूरज ढल रहा था।
बिकाश ने माया का हाथ धीरे से थामते हुए कहा,
“माया, आज का दिन थोड़ा मुश्किल था, लेकिन तुम्हारे साथ होने से सब आसान लग रहा है।”
माया ने मुस्कुराते हुए कहा,
“हाँ बिकाश… कभी-कभी छोटी-छोटी बातें बड़ी लगती हैं, पर तुम्हारे साथ सब आसान है।”
दोनों ने हाथ कसकर थाम लिया। झील की हल्की लहरें और हवा की ठंडी बूँदें उनके प्यार और भरोसे को और गहरा बना रही थीं।
दोस्ती और प्यार में भरोसा
उस शाम, दोनों ने महसूस किया कि प्यार केवल रोमांस नहीं है। यह विश्वास, समझ और एक-दूसरे के लिए हमेशा खड़े रहने का नाम है।
माया ने हँसते हुए कहा,
“देखो बिकाश, अब कोई मिसअंडरस्टैंडिंग नहीं होगी, है ना?”
बिकाश ने मुस्कुराते हुए कहा,
“हाँ माया… अब से हम हमेशा एक-दूसरे की बातें समझेंगे और एक-दूसरे पर भरोसा करेंगे।”
दोनों ने झील की ओर देखा। सूरज की आखिरी किरणें उनके चेहरे पर पड़ रही थीं, और यह पल उनके लिए हमेशा यादगार बन गया।
Episode 9 का संदेश
इस एपिसोड ने यह दिखाया कि:
पहली मिसअंडरस्टैंडिंग किसी भी रिश्ते में आ सकती है, लेकिन भरोसा और स्पष्टता उसे सुलझा सकती है।
छोटी नोक-झोंक, मज़ाक और शरारतें रिश्ते में मिठास और मज़ा जोड़ती हैं।
पहला प्यार केवल रोमांस नहीं, बल्कि विश्वास, समझ और दोस्ती से भी गहरा होता है।
बिकाश और माया अब न केवल पहले प्यार के साथी थे, बल्कि सच्चे दोस्त, भरोसेमंद साथी और हमेशा एक-दूसरे के लिए खड़े रहने वाले साथी भी बन चुके थे।