पहली मुलाकात
गर्मी की छुट्टियाँ खत्म हो चुकी थीं, और स्कूल का पहला दिन था। स्कूल का गेट बच्चे और उनके माता-पिता से भरा हुआ था। हर कोई अपने दोस्तों से मिलने के लिए उत्साहित था।
बिकाश, दसवीं कक्षा का एक होशियार लेकिन शर्मीला लड़का, अपनी कॉपी और बैग हाथ में लेकर स्कूल की ओर बढ़ रहा था। उसके अंदर हमेशा एक हल्की-सी घबराहट रहती थी, खासकर जब उसे नए लोगों से मिलना पड़ता।
क्लास में प्रवेश करते ही उसकी नजरें नई छात्राओं की ओर गईं। तभी उसकी नजर माया पर पड़ी – नई छात्रा, जिसकी मुस्कान कुछ ऐसी थी कि जैसे पूरे क्लास का माहौल हल्का और खुशमिज़ाज हो गया। माया ने अपने बालों को पीछे किया और अपनी सीट की ओर बढ़ी।
जैसे ही माया अपनी किताबें खोलने लगी, अचानक उसकी किताबें फर्श पर गिर गईं। बिकाश तुरंत दौड़ा और झुककर उसने किताबें उठाईं।
“ये लो, संभाल लो,” उसने धीरे से कहा।
माया ने उसकी ओर देखा और हँसते हुए कहा,
“धन्यवाद, तुम बहुत अच्छे हो।”
बिकाश की हृदय की धड़कन थोड़ी तेज़ हो गई। उस पल उसे अहसास हुआ कि यह कोई साधारण मुलाकात नहीं है।
दिन बीतते गए…
अगले कुछ दिनों में, बिकाश और माया रोज़ थोड़ी-थोड़ी बातें करने लगे। कभी लाइब्रेरी में बैठकर होमवर्क करते, तो कभी खेल के मैदान में गपशप। उनकी दोस्ती धीरे-धीरे गहरी होती गई।
एक दिन, स्कूल के कंप्यूटर लैब में, माया ने बिकाश से कहा,
“तुम हमेशा इतने शांत रहते हो, बिकाश। मुझे यह बहुत अच्छा लगता है।”
बिकाश ने शर्माते हुए मुस्कुराया,
“और मुझे तुम्हारी हँसी बहुत पसंद है। सुनकर लगता है जैसे सारी दुनिया शांत हो गई।”
माया हँसी और सिर हिलाया। उस दिन दोनों की दोस्ती और भी मजबूत हुई।
छोटे पल, बड़े एहसास
वक्त बीतता गया, और दोनों की दोस्ती रोज़ाना की आदत बन गई। स्कूल के छोटे-छोटे पल – जैसे कि कॉपियों का आदान-प्रदान, टिफ़िन शेयर करना, क्लास में एक-दूसरे की मदद करना – हर पल उनके लिए खास बन गया।
एक दिन बारिश हुई और स्कूल से घर लौटते समय, माया का छाता फर्श पर गिर गया। बिकाश ने बिना कुछ सोचे तुरंत उसे पकड़ा और अपना छाता माया को दे दिया।
“तुम भीगोगी,” उसने कहा।
माया ने उसकी ओर देखा और हँसी में कहा,
“धन्यवाद बिकाश। तुम हमेशा मेरी मदद करते हो।”
उस पल बिकाश की धड़कन तेज़ हो गई। उसे एहसास हुआ कि वह माया को सिर्फ दोस्त के रूप में नहीं, बल्कि कुछ ज्यादा पसंद करने लगा है।
पहली प्रतियोगिता, पहला नज़दीकी पल
कुछ हफ्तों बाद, स्कूल में वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता हुई। बिकाश और माया एक ही टीम में थे।
दौड़ के दौरान, माया अचानक फिसल गई। बिकाश ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया और उसे गिरने से बचाया।
माया ने उसका हाथ कसकर थाम लिया और मुस्कुराते हुए कहा,
“धन्यवाद, बिकाश। तुम हमेशा मेरे साथ हो।”
बिकाश का चेहरा लाल हो गया। उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा। उस पल उसने पहली बार महसूस किया कि यही पहला प्यार है।
दिन का अंत
खेल खत्म होने के बाद, दोनों बेंच पर बैठे।
माया ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
“बिकाश, तुम्हारे साथ रहकर मुझे अच्छा लगता है। स्कूल अब पहले जैसा नहीं लगता।”
बिकाश ने धीरे से कहा,
“मुझे भी माया… तुम्हारे बिना स्कूल का हर दिन अधूरा लगता है।”
इस तरह, उनकी पहली स्कूल लव स्टोरी की शुरुआत हुई।
दोनों की दोस्ती अब सिर्फ़ दोस्ती नहीं रही, बल्कि धीरे-धीरे प्यार में बदलने लगी।