Tere Mere Darmiyaan - 53 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 53

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तेरे मेरे दरमियान - 53

विद्युत रागिनी से कहता है --

विद्युत :- Congratulation बेटा ।

रागिनी :- थेंक्यू अंकल ।

विद्युत :- प्रताप , तेरी बेटी तो अब बहोत बड़ी डॉक्टर बन गई है ।

पूनम :- और बहोत सुदंर भी है । काश तु मेरे घर की बहू बन जाती।

रागिनी :- आपने तो मेरे मन की बात कर दी आंटी , पर ये बात उस डफर आदित्य को कौन समझायेगा । वो तो मुझे अपने दोस्त के अलावा कुछ और मानता ही नही है ।

रागिनी के इतना कहने बाद सभी हसने लगते है तब पूनम कहती है --

पूनम :- चल बेशरम । कैसे सबके सामने अपना शादी की बात करती है ।

रागिना :- शादी की बात करने मे कैसी शर्म, वैसे तो आप सब तो मेरे अपने ही हो तो आपसे क्या सरमाना ।

पूनम :- कास आज आदित्य यहां होता ।

रागिनी :- होता क्या आंटी , वो यहां आएगा ।

विद्युत हैरानी से कहता है --

विद्युत :- क्या वो यहां पर आएगा ।

रागिनी :- मैने बुलाया है तो जरुर आएगा ।

तभी वहां पर जानवी आ जाती है और विद्युत तिवारी से बात करने की कोशिश करती है पर विद्युत तिवारी और उसकी फैमिली जानवी को इग्नोर करके चला जाता है । जानवी ये दैखकर बहोत हैरान हो जाती है , जानवी सौचने लगती है --

" ये क्या विद्युत सर और बाकी सभी मुझे दैखकर चले कैसे गए । पहले तो कहा था के जब भी जरुरत होगा हम तुम्हारे के साथ है तो फिर अब क्या हो गया । एक बार और जाकर कोशिस करती हूँ । शायद उन्होने दैखा नही होगा ।

इतना बोलकर जानवी वहां से विद्युत के पास जाता है और कहती है --

जानवी :- हाय सर । 

विद्युत जानवी को दैखकर बिना कुछ बोले वहां से चला जाता है , पूनम भी जानवी को दैखकर वहां से चली जाती है और अनय तो पूरा इग्नोर करके चला जाता है । 

जानवी को ये दैखकर बहोत बूरा फील हो रहा था क्योकी सभी उसको दैख रहा था । अशोक ये सब पहले से जानता था के तिवारी फैमिली अब उनसे रिस्ता नही रखेगा । 

तभी वहां पर विकास आता है और जानवी से कहता है ---

विकास :- छोड़ो ना जानवी शायद वो लोग अभी कुछ और मुड मे हो ।

तभी वहां पर आदित्य अपने दोस्तो और मामा तिरु के साथ आता है , आदित्य रमेश और कृतिका को पकड़ कर चल रहा था , आदित्य की हालत दैखकर मोनिका , विक्की और विकास हस रहा था , मोनिका कहती है --

मोनिका :- ये यहां पर भी पहूँच गया , आखिर ये हर जगह पहूँच कैसे जाता है । इसे इतने बड़े लोग इंवाईट तो नही करेगें ।

आदित्य को लंगड़ाते हूए दैखकर मोनिका कहती है --

 
मोनिका :- आखिर इसे सजा मिल ही गया । जैसी करनी वैसी भरनी । जानवी ने इसे इसकी औकात बता दिया ।
 आदित्य को दैखकर रागिनी भागकर आदित्य के पास जाती है और कृतिका से छुड़ाकर आदित्य को खुद शहारा देती है । रागिनी का ऐसे भागकर आदित्य के पास जाना सभी को चोंका दिया था । 
तभी जानवी कहती है --

जानवी :- ये रागिनी आदित्य को ऐसे लेने गई जैसे वो उसकी गर्लफ्रेंड हो ।

मोनिका :- ये रागिनी इस फटिचर को कैसे जानती है ।

रागिनी :- ओ आदि , तुम यहां पर आए मैं बहोत खुश हूई ।

आदित्य :- तुमने बुलाया तो आना ही था । चाहे मेरी हालत कैसी भी हो ।

आदित्य जानवी और अशोक को दैखता है , जानवी अपनी नजरे चुराने लगती है तो अशोक आदित्य के आगे हाथ जौड़ता है । आदित्य अशोक को एक हल्की मुस्कान देता है जिससे अशोक को अच्छा लगता है । आदित्य के पास अनय , विद्युत और पुनम सभी आ जाते है और सभी मिलकर बहोत सारी बाते करने लगता है और हसने लगता है ।

उम सभी को इतनी बाते करते दैखकर सभी हैरान थे । 

मोनिका :- ये आदित्य से वो लोग इतनी बाते क्यो कर रहे है एक मामुली सा आदमी को तिवारी फैमिली इतनी Attention क्यो दे रहे है ।

अशोक अपनी बेटी जानवी से कहता है --

अशोक :- दैखा बेटी जब तुम आदित्य के साथ थी तब तिवारी फैमिली तुम्हारे साथ थी और जब आदित्य तुम्हारे साथ नही तो कैसे तिवारी फैमिली तुम्हें इग्नोर कर रही है ।

जानवी :- क्या पापा । कुछ भी ये सब उस आदित्य की चाल है , ताकी हमे Jealous feel करा सके ।

आदित्य , रागिनी , कृतिका और रमेश एक जगह पर बैठकर बात करे थे ।
रागिनी :- आज आंटी क्या बोल रही थी पता है ।

आदित्य : - क्या ?

रागिनी :- वो मुझे अपने घर की बहू बनाना चाहती है ।

आदित्य :- अरे वाह ये तो बहोत अच्छी खबर है ।

आदित्य की बात को सुनकर सभी खुश हो जाता है । 

रागिनी :- सच मे क्या तुम्हें कोई दिक्कत तो नही है ।

आदित्य :- अरे ये तो बहोत खुशी की बात होगी ना , तुम मेरी भाभी बन जाओगी ।


आदित्य से इतना सुनकर सभी हसने लगता है और रागिनी आदित्य को मारते हूए कहती है --

रागिनी :- डफर वो हमारी बात कर रही थी । 

रागिनी और आदित्य को ऐसै बात करते हूए दैखकर जानवी और मोनिका को जलन होने लगता है । तभी मोनिका कहती है --

मोनिका :- ये आदित्य बहोत चालाक है । हर बार एक नई लड़की फसा लेता है । 

जानवी :- ये आदित्य और रागिनी कर क्या रहा है । दैखा पापा आपने आदित्य कितना बेशरम इंसान है । मोनिका के बाद मैं और मोरे बाद ये डॉक्टर रागिनी । पता नही लड़कियां इसके जाल मे कैसे फस जाते है ।

तभी मोनिका वहां पर आती है और जानवी से कहती है --

मोनिका :- पर हम उस रागिनी से साथ उसे नही खेलने देगें । हम अभी आदित्य का सच रागिनी को जा कर बता देगें ।

इतना बोलतर मोनिका , विकास , विक्की और जानवी वहां पर चली जाती है जहां पर रागिनी , आदित्य , कृतिका और रमेश थे , मोनिका जाकर रागिनी से कहती है --

मोनिका :- हाय रागिनी ।


रागिनी :- हाय । आओ बैठो ।

मोनिका को दैखकर कृतिका कहती है --

कृतिका :- आ गई मनहूस ।

मोनिका कृतिका की बात सुन तो लेती है पर कृतिका की बात को इंग्नोर करके रागिनी से कहती है --

मोनिका :- तुम इसे ( आदित्य ) जानती हो ।

रागिनी :- मैं इसे जानु या ना जानु तुम्हें उससे क्या ।

मोनिका :- तुम यहां पर नई हो , और हम इसे अच्छे से जानते है । इससे तुम बचकर रहना , ये हर नई और रईस लड़की को अपने जाल मे फसा लेता है । 

रागिनी :- अच्छा तुम्हें कैसे पता ।

मोनिका :- क्योकी इसने मेरे साथ भी धोका किया है और मेरे बाद जानवी से शादी करके उसके दौलत को हड़पने की कोशिश की है और जब ये बात जानवी को पता चली तो उसने इसका अच्छा खासा इलाज करायी और अब ये तुम्हारे साथ भी वही करने वाला है । इसिलिए मैं तुम्हें इससे सावधान करने आई हूँ ।

रमेश :- मोनिका , तुम आदित्य के लाईफ मे कुछ ज्यादा ही , Interfere नही कर रही हो । आदित्य कहां जाता है क्या करता है किससे मिलता है , इससे तुम्हें क्या । क्या कहा तुमने आदित्य पैसे के पिछे भागता है , तो फिर तुम्हारे पास कितना पैसा था जो आदि तुम्हारे पास आया था । या जानवी से कितना पैसा लूटा ( आदित्य जानवी की और दैखचा है तो जानवी अपना सर निचे कर लेती है ) । सच तो ये है के तुम लोग आदित्य से चलते हो , उसकी खुशी तुमलोगो से दैखी नही जाती । इसिलिए ये सब करती रहती हो ।

मोनिका ( गुस्से से ) :- रमेश अपनी हद मे रहो ।

रागिनी :- तुम मोनिका हो राईट ?

मोनिका ( खुश होकर ) :- हां , आप मुझे जानती हो ।

रागिनी :- हां , कई सालो से । 

मोनिका :- क्या । पर मैं तो आपये पहली बार मिल रही हूँ ।
रागिनी :- मिल तो मैं भी पहली बार ही रही हूँ । और हैरान भी हूँ । 

मोनिका :- है...रान , किस लिए ?

रागिनी :- हैरान इसलिए, क्योकी आदित्य ने मुझे तुम्हारी वजह से रिजेक्ट किया था । 

रागिनी की बात को सुनकर सभी हक्का बक्का रह जाता है ।

रागिनी फिर कहती है --

रागिनी :- मैं उस मनहूस शाम को कभी नही भूल सकता , जब आदित्य मेरे पास आया था , उसी शाम को मैं भी आदित्य को अपने दिल की बताने वाली थी । पर उससे पहले ही इसने तुम्हारे बारे मे बता दिया । फिर बाद मैने भी आदित्य को अपनी दिल की बात बताई पर क्या फायदा ये तो तुम्हारा हो चुका था । अब पता चला के ये फिर से सिगंल हो गया है तो ट्राई मार रही हूँ के काश ये शादी के लिए हाॉ कर दे । पर ये है के अकड़ू हो गया है । पता नही मुझमे ऐसी क्या कमी है जो ये मुझे Accept नही करता है ।


To be continue....390