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"वहा हथियार बनाए जा रहे थे ये बारूद और लोहे के टुकड़े उसका सबूत है और रही बात चिंदी कपड़ो की तो किसी इंसान को काबू में करने के लिए बेहोशी का स्प्रे यूज किया गया है भूल गए मिकी ने भी बताया था ना उसने इस्पेक्टर को एक लड़की को बेहोश करते देखा " कृभिन अपनी बात खत्म किया तो किसी ने उसकी आखरी बात पर ध्यान नहीं दिया। अब आगे,,,,
"ये सारी चीजे हमे गुमराह करने के लिए भी तो छोड़ा जा सकता हैं ताकि सोचने समझने में हमारा टाइम वेस्ट हो" रिहा अपना दिमाग चलाते हुए बोली।
तो काशी हाथ बांध सोचते हुए "जितनी जल्दी में हमने काला भंडार का राज बाहर निकाला मुझे नही लगता हैं उन्हे इसके लिए समय मिला होगा"
"और मिकी की बात भुलो मत उसने खुद अपनी आखों से लड़की को बेहोश होते देखा है मतलब साफ है" भीनी ने कहा तो सभी "Hm अब समझ में आ रहा है"
कृभिन मन में भुनभुनाया "तो मैंने क्या चीनी भाषा में बोला था जो समझा नही"
"वैसे ये चिंदी कपड़ा,,क्या सच में इसमे अभी भी इस्प्रे का असर है?" कृषि उस कपड़े को घूरते हुए बोला और उलट पलट कर देखने लगा जैसे कपड़ा न होकर कोहिनूर हीरा हो
कृभिन मन में "सूंघ के देख ले साले" तभी
"दे ला जरा देखूं तो कितना असर है कही बदबू तो नही आ रही?" बोलते हुए कनंत उससे कपड़ा छीन लिया इससे पहले कोई कुछ बोल पाता वो उसे सूंघ लेंता है और एक सेकेंड नही लगते उसे गिरने में आख़िर भिनी ने जो कहा सच निकला बेहोशी का स्प्रे वेरी स्ट्रॉन्ग सभी कनंत की हरकत पर अपना सिर पीट लिए।
वही कृभिन अलग हैरान परेशान खड़ा था जैसे उसकी दुआ की मेहरबानी कनंत ऐसे पड़ा है।
कृभीन मन में "मैने तो कृषि के लिए बोला था ये तो उल्टा पड़ गया,,सही कहते हैं सब गलत टाइम आग ही निकलती हैं मेरे मुंह से,,लेकिन एक मिनट मैं तो कुछ बोला ही नहीं "
कृभिन खुद में उलझा हुआ था।
तो वही काशी अपना सिर पीट कर ना में
हिलाते हुए "बेवकूफी की भी हद होती है अभी भीनी बताई थी बेहोशी का स्प्रे से ग्रस्त हैं फिर भी ये लड़का ह"
भिनि बेपरवाही से "कोई बात नही ये तो अच्छा है सिर्फ बेहोशी का स्प्रे है जहर का होता तो अब तक तो,,,"
कृभिन चौंककर खुद के मन से बाहर निकल आया और उसे घूरते हुए "वो मैडम क्या बोल रही ? शुभ शुभ नही बोल सकती तो अशुभता क्यों फैला रही ? चुप रहो ना"
"इसका कुछ नहीं हो सकता छोड़ो,,उठाओ इस बंदर को और फेक दो जहा मिकी पड़ा है" आशना ने सर मलते हुए कहा।
"और इसकी बेहोशी का क्या,,,?" सभी एक साथ पूछे।
"ना आए होश तो ही अच्छा होगा मिशन में आगे बढ़ने में बड़ी हेल्प होगी" आशना बेपरवाही दिखाते हुए बोली और वहा से tv हॉल में चली गई। सभी एक दूसरे का मुंह ताकने लगे
तो कृषभ बोला "इसे होश में लाओ पानी छिड़को मुंह पे"
तो भीनी कृषभ के सामने आकर भयंकर तरीके से
बोली "नही,, ऐसा खतरनाक काम मत करना लीडर वरना ये टपक जायेगा"
सभी हैरानी से आंखे फाड़े "मतलब ?????"
भीनी की खतरनाक बात सुन सभी सदमे में चले गए थे ।
जंगली इलाका
घनेरि जंगल
10:30
यहां घने से भी घना जंगल ऐसा इसलिए क्योंकि हर तरफ़ बड़े बड़े पेड़ और झाड़ियां लदी हुई थी सूरज की रोशनी को जमीन को छुने से रोक रही थी ।
जंगल के बीचों बीच मैदान जितनी बड़ी जगह में एक लकड़ी का कॉटेज था जो पेड़ पौधे से ढका हुआ था।
एक बाईक तेज रफ्तार से वहा आकर रूकी और बाइक सवार आदमी धड़धड़ाते हुए बेधड़क कॉटेज के अंदर घुस गया वही मुरीद जो गुस्से में तमतमाए हुए इधर से उधर चहल कदमी कर रहे थे अचानक बेधड़क घुस आए उस आदमी को देख रूक गए और गुस्से में घूरने लगे।
कबाड़ी घबराते हुए "ए ऐसे आने के लिए So,, सॉरी सर,,,पर हम यहां और ज्यादा देर तक नहीं छिपे रह सकते
चमड़ी डरते हुए पूछा "क्यों? पुलिस को खबर हो गई वो आ गई?"
"अभी तक नही लेकिन वो छान बीन करते हुए कभी भी यहां टपक सकती हैं" कबाड़ी माथे का पसीना पोछते हुए बोला।
मुरीद सर पकड़ घबराते हुए "हे भगवान फिर तो हमे जल्दी यहां खिसकना होगा"
तो चमड़ी भी बोला "हा सर पुलिस छान बीन करते हुए यहां तक पहुंचती ही होगी"
तभी जंगली ने भी कहा "और आपकी पुलिस की पोस्ट भी जा चुकी है"
ये सुन मुरीद गुस्से से तमतमा कर उसे देखे ।
और उसकी तरफ़ बढ़ उसका कॉलर पकड़ झंझकोरते हुए बोले "मुझे अच्छे से पता है की मेरी पोस्ट जा चुकी है तुझे बार बार बताने की जरुरत नहीं,,साला जब से यहां आए हैं तब से यही एक लाइन बके जा रहा अब दुबारा तेरे मुंह से ये बात निकली ना तो,,"
जंगली खांसते हुए "खो खो,,अरे सर जी म,, मैं तो बस याद दिला र,, रहा था की कही भू,,भूल वुल गए तो खो खोखो"
उसकी बात सुन सभी उसे मुंह बनाए घूरने लगे।
तो वही मुरीद भी उसका कॉलर झटके से छोड़ मुंह बनाए बोले "साला खुद तो भूलने का वायरस है और चला है मुझे याद दिलाने देख आखिरी बार बोल रहा हु दुबारा वो बात मत बोलना वर,,," मुरीद अपनी बात खत्म कर पाते की
तभी जंगली सब कुछ भूलते हुए "कौन सी बात सर जी?" ये सुन सभी का मन किया उसे छोड़ अपना सिर फोड़ ले। तो वही मुरीद खा जानें वाली नजरों से उसे घुर रहे थे।
"यही की तू कच्छा पहनना भूल गया साले" इससे पहले की मुरीद का गुस्सा फटता कबाड़ी जंगली की पीठ पर मुक्का जड़ बोला।
जंगली अपना पीठ सहलाते हुए "क्या बात कर रहे हैं उस्ताद दो दो कच्छा पहना हु"
वहा मौजूद सभी हैरान आखें फाड़े उसे देखते है। तो वही कबाड़ी कुछ ज्यादा ही हैरान था वो बोला "इसका मतलब मेरा कच्छा तू चुराके पहना है"
जंगली हद से ज्यादा शरमाते हुए "वो वो,,मैं वो ह हा,, न"
कबाड़ी झल्लाते हुए "वो मै वो मै क्या? सीधे हा या ना बोलना ऐसे शर्मा के मेरा दिमाग़ खराब मत कर"
कबाड़ी का दिमाग खिसक रहा था वही उसे ऐसे शरमाते देख तो वही सभी मुंह बनाते हुए "साले अब काहे इतना शर्मा रहा ? पहनते वक्त शर्म नहीं आई?"
सबकी बात सुन जंगली हड़बड़ाते हुए "ह हा,, मैंने चुरा के पहना,, माफ करना उस्ताद मेरे पास और कोई चारा नहीं था मजबूर जो था"
चमड़ी नाक मुंह सिकोड़ बोला "ऐसी भी क्या मजबूरी जो दो दो कच्छा पहनना पड़ जाए?"
"भाई वो मेरा कच्छा,, मेरा कच्छा फट गया था ना तो इसलिए मैने,,"जंगली शरमाते हुए इतना ही बोला था की
उसे टोक कबाड़ी दात पिस्ते हुए "साले फटा कच्छा पहनता तो भी कौन सा जगजाहिर हो जाता,, पैंट तो पहना है ना"
जंगली सोचते हुए "बात तो सौ टके की कही है आपने"
"चुप साले तेरी वजह से आज मैं बीन कच्छे का हूं,, तूझे तो मैं,,," कबाड़ी उसपर झपटने वाला था की
मुरीद जो काफी देर से इनकी बक बक सुन रहे थे बर्दास्त के बाहर होते ही गुस्से में चिल्लाए "चुप,,चुप करो सालो,, बंद करो अपना कच्छापुराण वरना इस बंदूक की सारी सारी गोली तुम्हारे पहने कच्छे पर ही दाग दूंगा फिर,,," उसने इतना ही कहा था की
उसका एक आदमी वहा आया और बोला "सर हमारे एक आदमी से पता चला है की वो किसी भी समय पहुंच रहे हैं,,ऊपर से फ्रेसर आ रहा है आपका encounter करने का ऑर्डर दिया है"
ये सुन मुरीद के साथ सभी लोग अपनी जगह पर स्तंभ रह गए।
💜❤️💜😂 कब होश आएगा कनंत को ? क्या सच में encounter होगा मुरीद का ? कौन करने वाला है encounter?
जानने के लिए बने रहे स्टोरी के साथ मिलते हैं जल्द ही next Ep में 💜❤️💜🤪😂