✨ एपिसोड 63 — “जुनून, जज़्बात और छुपा तूफ़ान” ✨
कहानी — अधूरी खिताब
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रात की हवा में हल्की ठंड थी,
पर रिया का दिल एक अजीब सी गर्मी में घिरा हुआ था।
उसने पहली बार महसूस किया था कि
भागते-भागते थक गई है…
और रुकना बुरा नहीं लगता।
अयान के शब्द, उसकी आँखों की सच्चाई,
और निशांत के सामने उसका खड़े होना—
यह सब रिया को खुद की नजर में भी मजबूत बना रहा था।
लेकिन कहानी यहीं आसान नहीं होने वाली थी।
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🌙 रात — अयान की बेचैनी
अपने कमरे की खिड़की पर खड़ा अयान आसमान की ओर देख रहा था।
रात जितनी शांत दिखती थी,
उसके भीतर उतना ही शोर था।
“रिया सच में डरती है…
और ये डर उसकी गलती नहीं… उसकी कहानी है।”
वह खुद से बुदबुदाया।
उसे रिया की आंखों में गहराई से बस एक ही बात नजर आई थी—
वो किसी को खोने से डरी हुई है।
और अयान के लिए यह बात नई नहीं थी।
उसने खुद भी खोया था…
बहुत कुछ…
बहुत अपना…
उसकी मुट्ठियाँ कस गईं।
“रिया को मैं किसी भी हाल में दुख नहीं होने दूँगा।
किसी भी हाल में।”
उसकी आँखों में एक ऐसा जज़्बा था
जो प्यार नहीं…
जुनून में बदल सकता था।
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☀ अगली सुबह — और एक नई खामोशी
कैंपस के मैदान में रिया पहुँचते ही
लोगों की फुसफुसाहट शुरू हो गई।
“कल वाला सीन देखा?”
“अयान फिर झगड़ा कर देगा।”
“रिया क्यों इन दोनों लड़कों को बीच में लेकर घूम रही है?”
रिया की सांसें थोड़ी तेज़ हो गईं।
उसे भीड़ का शोर कभी पसंद नहीं था।
तभी—
पीछे से एक परिचित आवाज़ आई।
“तुम ठीक हो?”
रीया मुड़ी—
अयान खड़ा था,
लेकिन आज उसके चेहरे पर कल वाली तीखी आग नहीं थी।
आज वह बेहद शांत था…
उसकी आँखों में नरमी थी।
रिया ने हल्की मुस्कान दी—
“हाँ… बस लोग बातें कर रहे हैं।”
अयान ने उसकी आंखों में झाँका—
“क्या तुम चाहती हो कि मैं दूर रहूँ?”
रीया ने पहली बार बिना सोचे कहा—
“नहीं।”
अयान बस उसे देखता रह गया।
वह “नहीं” सिर्फ एक शब्द नहीं था…
वह रिया के टूटते डर का पहला सबूत था।
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💥 लेकिन शांति ज्यादा देर टिकती नहीं…
क्लास में पहुंचते ही माहौल बदल गया।
निशांत वहाँ पहले से बैठा था—
और रिया को देखते ही उसकी आँखें थम गईं।
उसने धीरे से कहा—
“रिया… हमें बात करनी चाहिए।”
अयान चुपचाप खड़ा रहा।
वह जानता था कि रिया खुद तय करेगी।
रीया उसके पास जाकर बैठी।
निशांत की आवाज़ गहरी और आहत थी—
“कल जो हुआ…
उससे सिर्फ मुझे ही नहीं,
तुम्हें भी बुरा लगा होगा।”
रिया ने धीरे से कहा—
“हाँ… लेकिन तुम समझ नहीं रहे हो, निशांत।”
निशांत की आँखें नम हो गईं—
“मैं बस चाहता हूँ कि तुम सुरक्षित रहो।
और अयान… वो लड़का जिस रास्ते पर चलता है,
वह किसी को भी चोट पहुँचा सकता है।”
अयान पीछे खड़ा सब सुन रहा था।
लेकिन उसने हस्तक्षेप नहीं किया।
रिया थोड़ा सख़्त होकर बोली—
“निशांत… तुम्हारी चिंता मुझे छूती है।
लेकिन मैं किसी पर फैसला थोपने नहीं दूँगी।
अयान मेरे लिए परेशानी नहीं…
मेरी समझ का हिस्सा है।”
निशांत स्तब्ध रह गया।
उसके शब्द टूट गए—
“क्या… तुम उसे पसंद करती हो?”
रिया अचानक चुप हो गई।
उसने अयान की तरफ देखा—
वह दूर खड़ा था,
लेकिन उसकी आंखों में सिर्फ रिया थी।
रिया ने धीरे से कहा—
“मुझे नहीं पता…
पर मैं उसके लिए डरती नहीं हूँ।”
यह सुनते ही निशांत का दिल टूट गया।
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🔥 अयान और निशांत — आमने-सामने
क्लास खत्म होते ही निशांत बाहर निकल गया।
अयान ने उसे रोका।
“निशांत.”
निशांत मुड़ा—
उसकी आंखों में जलन थी।
“क्या चाहते हो तुम?
रिया को अकेला छोड़ दो।”
अयान ने शांत आवाज में कहा—
“अगर रिया खुद कह दे…
तो मैं पीछे हट जाऊँगा।
लेकिन तुम्हारे कहने पर नहीं।”
निशांत ने दाँत भींचे—
“तुम उससे खेल रहे हो।”
अयान की आँखें पहली बार चमकीं—
“मैं खेलता नहीं हूँ…
खुद में ही जलता रहता हूँ।”
निशांत कुछ बोलता इससे पहले—
अयान करीब आया और धीमे, लेकिन खतरनाक स्वर में बोला—
“और रिया को लेकर…
मेरी सहनशक्ति की सीमा बहुत छोटी है।
उसे तकलीफ हुई… तो मैं खुद को नहीं रोक पाऊँगा।”
निशांत ने घूरकर कहा—
“यह धमकी है?”
अयान ने हल्की, ठंडी मुस्कान दी—
“चेतावनी।”
फिर वह वहाँ से चला गया।
निशांत की मुट्ठियाँ काँप उठीं।
उसने मन ही मन तय कर लिया—
“मैं अयान को रिया के पास नहीं रहने दूँगा…
भले इसके लिए मुझे खुद टूटना पड़े।”
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💫 शाम — दिल और दिमाग की जंग
रिया लाइब्रेरी में बैठी थी।
लेकिन आज किताबों से ज्यादा
उसके दिमाग में तीन लोग थे—
वह खुद, अयान…
और निशांत।
अचानक अयान उसके सामने आकर बैठ गया।
“तुम कन्फ्यूज हो?”
रिया ने आँखें उठाकर उसे देखा—
“थोड़ी।”
अयान ने कहा—
“मैं कुछ पूछूँ?”
“पूछो।”
“क्या तुम्हें मेरे पास रहने में डर लगता है?”
रिया ने धीरे से कहा—
“नहीं…
लेकिन मुझे खुद से डर लगता है।
इस बात से कि… कहीं मैं फिर टूट न जाऊँ।”
अयान उसकी ओर झुका—
धीरे, जैसे उसे डराना नहीं चाहता हो।
“तो मैं एक वादा करता हूँ…”
रिया की सांस थम गई।
अयान की आवाज़ गहरी थी—
“अगर तुम कभी टूटोगी…
तो मैं तुम्हें उठाऊँगा।
अगर तुम डरोगी…
तो मैं तुम्हारे साथ चलूँगा।”
उसने बहुत धीमे से कहा—
“मैं तुम्हें अकेला नहीं छोड़ूँगा, रिया।”
रीया की आँखों में हल्की नमी आ गई।
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🌑 लेकिन आसमान में छुपा था नया तूफ़ान
कॉलेज से बाहर आते ही
अयान का फोन बजा।
उसने स्क्रीन देखी—
चेहरा गंभीर हो गया।
“कौन था?” रिया ने पूछा।
अयान पल भर चुप रहा, फिर बोला—
“मेरा अतीत…
जिससे मैं सालों से भाग रहा हूँ।”
रिया की सांस अटक गई।
“क्या… क्या मतलब?”
अयान ने उसकी ओर देखा
—
“अगर वो अतीत वापस आया…
तो तुम खतरे में पड़ सकती हो।”
रिया वहीं जम गई।
अयान आगे बढ़ा और बहुत धीमे से बोला—
“इसीलिए डर मुझे होना चाहिए…
तुम्हें नहीं।”
हवा अचानक भारी हो गई।
कहानी अब एक नए अँधेरे दरवाज़े की तरफ बढ़ रही थी—
जिसे खोलने के लिए
रिया तैयार नहीं थी…
और अयान मजबूर था।