जिंदगी एक सफऱ - 1 in Hindi Thriller by niranjan barot books and stories PDF | जिंदगी एक सफऱ - 1

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जिंदगी एक सफऱ - 1

 1ज़िंदगी सफ़र...


अहमदाबाद के थलतेज इलाके में स्थित एक शानदार कॉफी शॉप। 28 मार्च, 2015 की शाम का समय। अभिमन्यु सिंह अपनी बिजनेस मीटिंग खत्म करके बाहर निकल रहा था। 45 साल की उम्र में भी उसकी शख्सियत इतनी प्रभावशाली थी कि कोई भी शरमा जाएं। गहरे भूरे बाल, क्लीन शेव, ट्रिम की हुई मूंछें और अच्छी तरह से सजा हुआ सूट, वह बिल्कुल आकर्षक लग रहा था। अपनी महंगी मर्सिडीज कार की ओर बढ़ते हुए वह मोबाइल में कुछ चेक कर रहा था।अचानक, उसी की कार के पास एक और महंगी ऑडी कार पार्क हुई। उसमें से एक महिला बाहर निकली। उसके चेहरे पर अनुभव की रेखाएं थीं, लेकिन उसके सुंदर चेहरे पर एक अनोखी चमक थी। अभिमन्यु ने अनायास ही उसकी ओर देखा। वह महिला भी उसकी ओर देख रही थी। एक पल के लिए दोनों की नजरें मिलीं। दोनों के मन में अतीत की यादें ताजा हो गईं।

साल 1991...एलएल.बी. के पहले साल का पहला दिन। कॉलेज कैंपस में नए छात्रों की चहल-पहल थी। अभिमन्यु अपने क्लासरूम में बैठा था, लेकिन उसका ध्यान बाहर आते-जाते छात्रों पर था। तभी एक लड़की अंदर आई, सुंदर चेहरा, मासूम मुस्कान और आंखों में एक चमक। वह अंग्रेजी साहित्य के क्लास में जा रही थी। अभिमन्यु को पहली नजर में ही उस पर मोह हो गया।आगे के दिनों में वह झंखना के नाम से जानी गई। दोनों के क्लास अलग थे, लेकिन उनकी मुलाकात कॉलेज की कैंटीन और लाइब्रेरी में होती रही। दोनों के बीच शब्द कम बोले जाते, लेकिन आंखें बहुत कुछ कह जातीं। अभिमन्यु को झंखना की मासूम बातें और हंसी बहुत पसंद थी। झंखना को अभिमन्यु की गंभीरता और शालीनता आकर्षित करती थी। एक-दूसरे के साथ वे घंटों बिताते। इस मासूम दोस्ती में प्यार की खुशबू थी, लेकिन दोनों में से किसी ने कभी 'आई लव यू' नहीं कहा, फिर भी उन्हें पता था कि वे एक-दूसरे के लिए कितने खास हैं।

साल 1994...कॉलेज खत्म हुआ और झंखना की शादी एक बिजनेसमैन के साथ हो गई। वह बॉम्बे शिफ्ट हो गई। अभिमन्यु के मन में हमेशा एक कसक रही कि वह झंखना से आखिरी बार नहीं मिल सका।

साल 2015...कॉफी शॉप के पार्किंग में एक बार फिर वास्तविकता में लौटे।"अभिमन्यु!" उसकी आवाज सालों बाद भी वैसी ही मधुर थी।अभिमन्यु के चेहरे पर एक अनोखी मुस्कान आई। "झंखना...!" उसके मुंह से शब्द धीमे और भावुक स्वर में निकले।झंखना ने हंसते हुए कहा, "आप को तो पलक झपकते ही पहचान लिया? 21 साल हो गए... लेकिन तुम तो वही हो!""तू भी! इतने सालों बाद भी तू जरा भी नहीं बदली," अभिमन्यु ने कहा।दोनों ने फैसला किया कि इतने सालों बाद मिले हैं तो थोड़ा वक्त साथ बिताएं। वे कॉफी शॉप में गए और एक कोने में बैठे। बातें शुरू हुईं, लेकिन पहले थोड़ा संकोच था। फिर धीरे-धीरे कॉलेज के दिनों की बातें शुरू हुईं। मस्ती, मासूम मजाक और उस वक्त की दोस्ती की यादें ताजा करते हुए दोनों खुश हो गए।"याद है? आप हमेशा चुप रहते थे और मैं लगातार बोलती थी," झंखना ने हंसते हुए कहा।"और तेरी हंसी की आवाज पूरे कॉलेज में गूंजती थी," अभिमन्यु ने भी मुस्कान के साथ जवाब दिया।समय कब बीत गया, पता ही नहीं चला। जब बाहर अंधेरा हो गया, तब जाकर उन्हें एहसास हुआ कि अब जाना होगा।झंखना ने कहा, "मुझे सचमुच बहुत खुशी हुई, इतने सालों बाद भी हम मिल सके।""मुझे भी, झंखना। मुझे भी," अभिमन्यु ने भावना के साथ कहा।दोनों ने नंबरों का आदान-प्रदान किया और फिर मिलने का वादा करके अलग हुए। अभिमन्यु अपनी कार में बैठा और मन में सोचने लगा, "ज़िंदगी में जो अधूरा रह गया था, क्या आज फिर से उसकी शुरुआत होगी?" फिर से वही दोस्ती... फिर से वही समय... लेकिन परिवार... समाज... सारे विचार अभिमन्यु के दिमाग में घूमने लगे...आगे क्या होगा...

क्रमशः...©निरंजन...