✨ "वो जो मेरा था..."
एपिसोड – 15
हवा में ठंडी नमी थी, मानो मौसम खुद उनके रिश्ते की हलचल को महसूस कर रहा हो। बारिश की हल्की बूँदें खिड़की पर गिर रही थीं और काव्या खामोशी से सोफ़े पर बैठी हुई थी। उसकी आँखों में अब भी वो अनकहे सवाल थे जो पिछले कुछ दिनों से उसके दिल को खाए जा रहे थे। आरव कमरे में आया, हाथ में दो कॉफी मग लिए।
आरव (नर्मी से): "कॉफी पीओगी?… पता है, तुम्हें स्ट्रॉन्ग कॉफी पसंद है।"
काव्या ने उसकी तरफ़ देखा, होंठों पर हल्की सी मुस्कान आई पर अगले ही पल वो गायब हो गई। उसने मग थाम लिया मगर उसकी आँखों की चुप्पी बहुत कुछ कह रही थी।
काव्या (धीरे से): "आरव… कभी-कभी लगता है, तुम मुझसे बहुत कुछ छुपाते हो। क्या सचमुच तुमने मुझे अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना लिया है?"
आरव एक पल को ठिठक गया। उसने कॉफी का घूँट भरा और गहरी साँस ली।
आरव: "काव्या, मैं तुम्हें अपनी हर साँस से भी ज़्यादा चाहता हूँ। लेकिन कुछ बातें ऐसी हैं जो ज़िंदगी ने मुझे कहने ही नहीं दीं… डरता हूँ कि कहीं उन बातों से तुम्हें चोट न लगे।"
काव्या ने उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा—
काव्या: "प्यार में सबसे बड़ा भरोसा होता है, आरव। अगर तुम मुझे अपनी कमजोरी भी नहीं बताओगे तो मैं कैसे मान लूँ कि तुम्हें सचमुच मेरी ज़रूरत है?"
कमरे में कुछ पल सन्नाटा छा गया। बारिश की आवाज़ अब और भी गहरी लग रही थी। आरव ने धीरे-धीरे अपना हाथ काव्या के हाथों पर रखा।
आरव (टूटे स्वर में): "काव्या… मेरी ज़िंदगी में एक अतीत है, एक ऐसी गलती जिसने मुझे आज तक चैन से जीने नहीं दिया। मैं सोचता था, शायद अगर तुम्हें न बताऊँ तो वो ज़ख्म वहीं दबे रहेंगे… लेकिन अब लगता है, तुम्हारे बिना मैं अधूरा हूँ। अगर तुम चाहो तो मैं सब बता दूँगा।"
काव्या का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। उसे लगा जैसे कोई बड़ा सच सामने आने वाला है। उसने सिर हिलाकर कहा—
काव्या: "मैं तुम्हारे साथ हूँ, चाहे कुछ भी हो।"
आरव ने अपने अतीत का दरवाज़ा धीरे-धीरे खोला।
आरव: "काव्या… जब मैं कॉलेज में था, तब मेरी ज़िंदगी में कोई और थी—रिया। वो मेरी पहली मोहब्बत थी। मैंने उसे सच्चे दिल से चाहा था, मगर हालात ऐसे बने कि वो मुझे छोड़कर चली गई। उसने मेरी मोहब्बत को एक मज़ाक समझा… और मैं टूट गया। उस दिन से मैंने कसम खाई थी कि कभी किसी को इतना पास नहीं आने दूँगा कि वो मुझे फिर से तोड़ सके।"
काव्या की आँखें नम हो गईं। उसने महसूस किया कि आरव ने कितने दर्द के बाद उसे अपनाया है।
काव्या (धीरे से): "तो मैं… तुम्हारे लिए क्या हूँ, आरव?"
आरव ने उसका चेहरा अपनी हथेलियों में थाम लिया।
आरव: "तुम वो हो जिसने मुझे जीना सिखाया। तुम वो हो जिसने मेरी टूटी हुई रूह को फिर से जोड़ा। रिया सिर्फ़ एक अधूरी कहानी थी… लेकिन तुम मेरी पूरी किताब हो।"
काव्या की आँखों से आँसू बह निकले, लेकिन इस बार ये आँसू दर्द के नहीं बल्कि सुकून के थे। उसने खुद को आरव की बाहों में समेट लिया।
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कुछ देर बाद, दोनों खिड़की के पास बैठे बारिश को निहार रहे थे। काव्या ने मुस्कुराते हुए कहा—
काव्या: "तुम्हें पता है, बारिश मुझे हमेशा अपनेपन का एहसास दिलाती है। जैसे हर बूँद कह रही हो—‘तुम अकेले नहीं हो’…"
आरव ने उसकी तरफ़ देखते हुए जवाब दिया—
आरव: "और मुझे बारिश में तुम्हारी हँसी सबसे खूबसूरत लगती है। सच कहूँ, अगर कभी तुम्हें खो दिया तो शायद मैं फिर कभी मुस्कुराना ही भूल जाऊँ।"
काव्या ने शरारत से उसकी तरफ़ देखा और बोली—
काव्या: "तो फिर हमेशा मुझे संभाल कर रखना।"
आरव ने झुककर उसके माथे पर एक गहरा चुंबन दिया।
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उसी शाम, जब दोनों बाहर ड्राइव पर निकले, अचानक आरव का फ़ोन बजा। कॉलर आईडी पर एक नाम चमका—रिया।
काव्या ने देखा, और उसके दिल की धड़कन एक पल को थम गई। उसने आरव की तरफ़ देखा, उसके चेहरे पर भी हल्की बेचैनी थी।
काव्या (संभलते हुए): "कॉल उठाओ, आरव।"
आरव ने हिचकते हुए कॉल रिसीव किया। दूसरी तरफ़ से रिया की आवाज़ आई, काँपती हुई और बेचैन—
रिया: "आरव… मुझे तुमसे एक आख़िरी बार मिलना है। बहुत बड़ी मुसीबत में हूँ… प्लीज़ मदद करो।"
आरव चुप रहा। काव्या उसकी आँखों को पढ़ने की कोशिश कर रही थी।
काव्या (धीरे से): "जाओगे न?"
आरव ने उसकी तरफ़ देखा और कहा—
आरव: "अगर तुम साथ चलो तो ही…"
काव्या का दिल मानो किसी तूफ़ान में घिर गया। वो समझ गई थी कि उनके रिश्ते की असली परीक्षा अब शुरू होने वाली है।
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✨ एपिसोड 15 समाप्त
(एपिसोड 16 में: रिया की वापसी, उसका रहस्य, और आरव-काव्या के रिश्ते पर बड़ा असर…)
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