khoya huaa dveep in Hindi Adventure Stories by kajal Thakur books and stories PDF | खोया हुआ द्वीप

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खोया हुआ द्वीप


भाग 1: रहस्यमयी नक्शा

अर्जुन एक 19 साल का लड़का था जिसे बचपन से ही एडवेंचर का शौक था। किताबों, फिल्मों और कहानियों में उसने अक्सर ऐसे खजानों के बारे में सुना था जो किसी रहस्यमयी द्वीप पर छिपे होते हैं। एक दिन उसे अपने दादा की पुरानी अलमारी में एक फटी हुई डायरी मिली। उसके अंदर एक नक्शा था — एक ऐसे द्वीप का जो आज की किसी भी मैप पर नहीं था।

नक्शे के नीचे सिर्फ एक लाइन लिखी थी:"जो डर गया, वो कभी सच्चा खजाना नहीं पाएगा।"

भाग 2: सफर की शुरुआत

अर्जुन ने बिना देर किए अपने दो दोस्तों – ज़ोया और कबीर – को ये बात बताई। तीनों ने तय किया कि वे इस रहस्यमयी द्वीप की तलाश में निकलेंगे। उन्होंने एक पुरानी नाव किराए पर ली और नक्शे के सहारे समंदर की ओर निकल पड़े।

सफर आसान नहीं था। तूफान, बड़ी लहरें और रात का अंधेरा – सब कुछ उन्हें रोकने की कोशिश कर रहा था, लेकिन तीनों ने हार नहीं मानी।

भाग 3: खोया हुआ द्वीप

तीसरे दिन सुबह, सूरज की पहली किरण के साथ उन्होंने देखा – एक घना और रहस्यमयी द्वीप उनकी आंखों के सामने था। पेड़ इतने बड़े थे जैसे आसमान से बातें कर रहे हों, और चारों ओर से अजीब-सी आवाजें आ रही थीं।

जैसे ही वे द्वीप पर उतरे, उन्हें महसूस हुआ कि ये जगह सामान्य नहीं थी। हर कदम पर जाल, पहेलियाँ और पुराने मंदिर जैसे रास्ते उनके सामने थे। एक जगह एक पत्थर पर लिखा था:

"खजाना उसी को मिलेगा जो अपने डर को हराएगा, और दोस्ती की कसम कभी न तोड़ेगा।"

भाग 4: असली खजाना

आखिरकार, उन्होंने एक गुफा खोजी जिसमें बहुत से पिंजरे, किताबें और एक बड़ा सा संदूक रखा था। संदूक में सोना-चांदी नहीं था, बल्कि एक क्रिस्टल बॉल थी जो अजीब सी रोशनी छोड़ रही थी।

अर्जुन ने जैसे ही बॉल को छुआ, चारों ओर का नज़ारा बदल गया — गुफा में एक प्राचीन आत्मा प्रकट हुई। वो बोली,"तुमने अपने साहस और दोस्ती से इस द्वीप का रहस्य हल किया है। असली खजाना ये क्रिस्टल है, जो ज्ञान और शक्ति का प्रतीक है। इसे संभालकर रखना और इसका इस्तेमाल सिर्फ अच्छाई के लिए करना।"

भाग 5: वापसी

अर्जुन, ज़ोया और कबीर ने उस क्रिस्टल को लेकर वापसी की। वे जानते थे कि खजाना सिर्फ दौलत नहीं होता, बल्कि अनुभव, दोस्ती और साहस ही सबसे बड़ा खजाना है।

अब वे तीनों एक नई टीम बन चुके थे — "द ट्रू ट्रैवेलर्स", जो दुनिया भर के छिपे रहस्यों को खोजने के लिए तैयार थे

इस एडवेंचर स्टोरी का भाग 2कहानी का नाम: "खोया हुआ द्वीप – अगला मिशन"टीम – "द ट्रू ट्रैवेलर्स" की वापसीभाग 2: “बर्फ़ का रहस्य”

अर्जुन, ज़ोया और कबीर ने क्रिस्टल बॉल को एक सुरक्षित स्थान पर रखा था। उसकी रोशनी समय-समय पर बदलती रहती थी, जैसे कोई उसे दूर से नियंत्रित कर रहा हो।

एक दिन, क्रिस्टल बॉल से नीली रोशनी निकली और कमरे की दीवार पर एक नक्सा उभर आया — इस बार जगह थी:“हिमगिरी ग्लेशियर” – एक ऐसी जगह जहाँ इंसान का जाना लगभग नामुमकिन था।नीचे लिखा था:“जहाँ बर्फ़ में जमी है आग की सच्चाई, वही छिपा है अगला रहस्य।”

भाग 3: हिमगिरी की चुनौती

तीनों दोस्तों ने ठंड से लड़ने के लिए ज़रूरी सामान लिया और निकल पड़े उत्तर की ओर। रास्ता बेहद मुश्किल था — पहाड़ों से फिसलती बर्फ, बर्फीली हवाएं और भूले हुए रास्ते। कई बार लगा कि लौट जाना चाहिए, पर अर्जुन ने कहा —"अगर हमने डर को हर बार जीतने दिया, तो कभी कोई कहानी नहीं बनेगी।"

ज़ोया और कबीर मुस्कुराए — और सफर जारी रहा।

भाग 4: बर्फ़ का जीव

ग्लेशियर के बीचों-बीच उन्हें एक अजीब गुफा मिली। अंदर एक पत्थर पर नक्काशी थी — एक इंसान और एक विशाल बर्फ़ के जीव की लड़ाई। तभी ज़मीन कांपी और एक जीव सामने आ गया — पूरा बर्फ़ का बना हुआ, उसकी आँखें लाल थी।

तीनों ने भागने की जगह समझदारी से काम लिया। ज़ोया ने क्रिस्टल बॉल को निकाल कर उसकी तरफ किया — बॉल की रोशनी जैसे ही जीव पर पड़ी, वो शांत हो गया।

उसने बर्फ़ में से एक पुराना हीटर-क्लॉक निकाला और कहा,"ये अगली कुंजी है, जो आग और समय का रास्ता खोलेगी।"

भाग 5: एक और संकेत

अब उनके पास एक क्रिस्टल और एक हीटर-क्लॉक था। दोनों चीज़ें मिलते ही फिर से क्रिस्टल बॉल चमकी और उसमें लिखा उभरा:"तीसरी यात्रा – रेत के शहर की तरफ़।"

अब उनका अगला मिशन था — “सुनहरी रेतों का रहस्य।”

अगला भाग चाहो तो मैं "भाग 3 – रेत का शहर" लिख सकती हूँ, जिसमें इन तीनों को रेगिस्तान के बीच छिपे एक शहर का रहस्य सुलझाना होगा।