Vashikarini - 2 in Hindi Thriller by Pooja Singh books and stories PDF | वशीकारिणी - 2

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वशीकारिणी - 2

..... अब आगे.......

शक्ति अपनी इच्छा को ढूंढ़ने के लिये उस पेपर पर लिखे पते पर जाने के लिए सबसे पूछता है... पर किसी को उस पेपर पर लिखे पते के बारे में कुछ नही पता था.... सूरज की रोशनी हल्की होने लगी थी... धीरे धीरे रात हो चुकी थी, शक्ति सुबह ढूंढने की सोचकर अपने चाचा चाची के पास पहुंचता है जोकि इस वक्त खाने की तैयारी में लगे थे....

डोर की बेल रिंग करके शक्ति अपने हाथ पकड़े पेपर को अपनी जेब में रख लेता है... थोड़ी देर बाद खुलता है, सामने अपने चाचा मिस्टर धीरज को देखकर खुशी से उनके गले लग जाता है...मिस्टर धीरज भी इतने सालों बाद अपने भतीजे को देखकर काफी खुश थे... उसे अंदर लेकर आते और उसके अचानक आने का कारण पूछते है... " बेटा आज अचानक कैसे...? भाभी ठीक तो है न.. "

शक्ति हल्के से हॅसते हुए कहता है... " हा चाचू माँ ठीक है... " 

" और भैया कैसे है...?... "

शक्ति पीछे मुड़कर देखते हुए कहता है..... " चाची मामा भी ठीक है... प्रिया कहाँ है दिखाई नहीं दे रही है... " 

"हा वो जॉब के काम से गयी है कल आ जाएगी, तुम खाना खा कर आराम कर लो..." 

शक्ति रूम में जाकर बैठा हीं था की थोड़ी देर में हीं उसका फ़ोन रिंग करता है... शक्ति फोन उठाकर पूछता है.... "कौन...?..."

दूसरी तरफ की आवाज सुनकर शक्ति हैरान रह जाता है, और दुहराते हुए कहता है... " ये आप क्या कह रहे है,, रति की डेथ हो चुकी है... " शक्ति फ़ोन वही पटक कर निराश सा वही बैठ जाता है....

" मै तुम्हे अब कैसे ढूंढ सकता हूँ मेरी आखरी उम्मीद तुम्हारी बहन हीं थी अब वो भी नहीं है.... इच्छा... कहाँ हो तुम...?... प्लीज वापस आ जाओ.... काश मैंने तुम्हे उस दिन हीं सब बता दिया होता..शक्ति अब आराम करने का समय नही है, कुछ तो करना ही होगा... " शक्ति बिना किसी से कुछ कहे चुपचाप घर से निकल गया.... रात के दस बज चुके थे, इसलिए सब लोग अपने अपने घरो में थे...। वो अकेला रास्ते भर बस इच्छा के बारे में ही सोच रहा था, इसलिए अपने मन को रिलेक्स करने के लिए वो उसी के घर की तरफ जाने लगा... न जाने उसे बढ़ते कदम लड़खड़ाने क्यू लगे.. अपने कदमो को बढ़ाते हुऐ वो उसके घर के पास पहुंच चुका था....उसके घर को देखते हुए उसकी आंखों में कुछ नमी सी आ गई... " जब तुम थी तो यहाँ कितनी खुशहाली थी.. अब तो इस तरफ कोई आता ही नही.. आखिर तुम कहाँ चली गई अपनी माँ को मरने के लिए छोड़ कर... इच्छा... " शक्ति खुद से बाते करते हुए अंदर पहुंच गया काफी समय घर बंद होने की वजह से काफी गंदगी हो चुकी, 

... " लाइट भी कट हो चुकी है... कितना अंधेरा है... ".... शक्ति अपने फोन की फ्लैश लाइट ऑन करके आगे जाता है.. लाइट इधर उधर घुमाते हुए देखते हुए कहता है..." अब तो मुझे तुम्हारे घर से हीं पता चलेगा आखिर यहां हुए क्या है...?.. " शक्ति इच्छा के कमरे की तरफ बढ़ता है... उसके कमरे पहुंच कर वो अलमीरा को खोलता है और ढूंढ़ने की कोशिश करता है... कुछ एक चीजे हटाने के बाद उसे एक एल्बम मिलती है जिसे खोलकर देखते हुए शक्ति कहता... " ये फोटो... मुझे याद है.... "

...... सात साल पहले.........

.......... To be continued......