दिल्ली है दिलवाले की।दिल्ली की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर, जहाँ हर कोई अपने सपनों की दौड़ में भाग रहा था, वहीं एक ऐसा लड़का था जो इस शहर पर राज करता था—आहान मेहरा। आहान सिर्फ 30 साल का था, लेकिन उसकी गिनती दिल्ली के टॉप बिजनेसमैन में होती थी। उसके पास लग्जरी गाड़ियाँ थीं, महंगे सूट थे, और एक ऐसा स्टेटस था जिससे हर कोई जलता था। लेकिन उसकी ज़िंदगी में एक कमी थी—सच्चा प्यार। वहीं, दूसरी ओर थी अनाया शर्मा। 22 साल की एक सीधी-सादी लड़की, जो एक छोटे से इलाके में अपनी माँ के साथ रहती थी। उसके पिता का देहांत हो चुका था, और उसकी माँ सिलाई करके घर चलाती थी। अनाया खुद भी एक कैफे में वेट्रेस की नौकरी कर रही थी, ताकि वह अपनी पढ़ाई पूरी कर सके। एक दिन, आहान अपने बिजनेस पार्टनर के साथ मीटिंग के बाद उसी कैफे में आया, जहाँ अनाया काम करती थी। कैफे में हलचल मची हुई थी, और अनाया अकेले ही सारे ऑर्डर मैनेज कर रही थी। "एक ब्लैक कॉफी," आहान ने काउंटर पर जाकर कहा। अनाया ने सिर उठाया और उसकी नज़र आहान से मिली। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी—न तो लालच था, न डर, बस एक सादगी भरी ईमानदारी थी। "सर, दस मिनट लगेंगे। काफी भीड़ है," अनाया ने मुस्कुराकर कहा। आहान को उसकी ये बात अजीब लगी। उसकी आदत थी कि लोग उसे तवज्जो दें, लेकिन इस लड़की ने बिना किसी झिझक के सीधा जवाब दिया। "दस मिनट बहुत होते हैं," आहान ने ठंडे लहजे में कहा। "तो आप चाहें तो कैंसिल कर सकते हैं," अनाया ने फिर मुस्कुराते हुए जवाब दिया और दूसरे कस्टमर्स को सर्व करने लगी। आहान के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई। "इंटरेस्टिंग," उसने मन ही मन सोचा। इसके बाद आहान कई बार उसी कैफे में आने लगा। कभी वह सिर्फ कॉफी पीने आता, कभी दोस्तों के साथ, लेकिन उसकी नज़र हमेशा अनाया पर रहती। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातें बढ़ने लगीं। अनाया को पता था कि आहान अमीर है, लेकिन उसने कभी उसे स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं दिया। "तुम्हें पता भी है कि मैं कौन हूँ?" एक दिन आहान ने पूछा। "हाँ, बड़े बिजनेसमैन हो। पर मेरे लिए कस्टमर कस्टमर ही होता है," अनाया ने हल्के अंदाज़ में कहा। आहान को पहली बार लगा कि कोई उसे सिर्फ उसके पैसों के लिए नहीं, बल्कि एक इंसान की तरह देख रहा है। कुछ हफ्तों बाद, आहान ने अनाया को कैफे के बाद कॉफी पर चलने के लिए कहा। "मैं अमीर लड़कों के साथ बाहर जाने वाली लड़कियों में से नहीं हूँ," अनाया ने मज़ाक में कहा। "और मैं भी किसी आम लड़के की तरह नहीं हूँ जो हर लड़की को डेट पर ले जाए," आहान ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती गहरी होती गई। आहान को पहली बार किसी के साथ रियल फील हो रहा था। वहीं, अनाया भी समझने लगी थी कि आहान बाहर से चाहे जितना भी सख्त दिखता हो, अंदर से वह एक अच्छा इंसान है। लेकिन हर कहानी में एक ट्विस्ट होता है...एक शाम, जब अनाया कैफे से बाहर निकली, तो देखा कि आहान अपनी कार के पास खड़ा था। उसे देखकर वह मुस्कुराया और हाथ हिलाया। अनाया थोड़ी हैरान थी, क्योंकि आज पहली बार आहान कैफे के बाहर उसका इंतजार कर रहा था। "क्या हुआ? बिजनेसमैन साहब को कोई और बिजनेस नहीं मिला क्या?" अनाया ने हँसते हुए पूछा। "आज बिजनेस से ब्रेक लिया है, सोचा तुम्हें घर तक छोड़ दूँ," आहान ने दरवाजा खोलते हुए कहा। "मुझे आदत है अकेले जाने की," अनाया ने हल्के अंदाज में कहा। "और मुझे आदत है जो चीज पसंद आए, उसे अपना बनाने की," आहान की आँखों में एक अलग सी शरारत थी। अनाया को लगा कि यह मज़ाक कर रहा है, लेकिन वह जानती थी कि आहान जो कहता है, वह सच में करता है। वह झिझकते हुए गाड़ी में बैठ गई। रास्ते में दोनों चुप थे। हल्की बारिश हो रही थी, और दिल्ली की गलियों में पानी की हल्की फुहारें पड़ रही थीं। आहान ने धीमे स्वर में रेडियो ऑन कर दिया। एक रोमांटिक गाना बजने लगा। "तो, तुमने अब तक किसी को पसंद किया?" आहान ने अचानक पूछा। "मैं प्यार-व्यार पर विश्वास नहीं करती," अनाया ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा। "झूठ," आहान ने मुस्कुराते हुए कहा। "क्या मतलब?" "कोई ऐसा नहीं जो तुम्हें पसंद हो, लेकिन कोई ऐसा जरूर है जिसे तुमने खो दिया।" अनाया चौंक गई। यह लड़का सिर्फ अमीर ही नहीं, बल्कि समझदार भी था। उसे अपनी पुरानी यादें ताज़ा होती महसूस हुईं, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। कुछ मिनटों बाद, गाड़ी उसके घर के पास रुक गई। "थैंक्स," अनाया ने कहा और उतरने लगी। "कल भी मिलोगी?" आहान ने धीमी आवाज़ में पूछा। अनाया कुछ पल उसे देखती रही, फिर हल्की मुस्कान के साथ बोली, "अगर तुम रोज़ कैफे आओगे, तो शायद हाँ।" आहान हँस पड़ा और गाड़ी आगे बढ़ा दी। उस रात, दोनों के मन में कुछ हलचल थी। आहान सोच रहा था कि यह लड़की क्यों इतनी अलग है, और अनाया सोच रही थी कि वह इस अमीर लड़के से इतना प्रभावित क्यों हो रही है। लेकिन मोहब्बत की दस्तक देने में देर नहीं लगती...chapter 3अगली सुबह जब अनाया कैफे पहुँची, तो देखा कि आहान पहले से ही वहाँ बैठा था। वह आराम से एक किताब पढ़ रहा था और बीच-बीच में कॉफी की चुस्कियाँ ले रहा था। अनाया ने अपनी जगह संभाली और काउंटर पर खड़ी होकर धीरे से मुस्कुराई। "आज तो तुमने जल्दी आने का रिकॉर्ड तोड़ दिया," अनाया ने हँसते हुए कहा। आहान ने किताब बंद की और उसकी तरफ देखा। "कभी-कभी बिजनेस छोड़कर जरूरी चीजों पर ध्यान देना चाहिए।" "ओह, तो तुम्हारे लिए कॉफी पीना ज्यादा जरूरी हो गया?" "नहीं, तुमसे मिलना।" अनाया चुप हो गई। यह लड़का बिना किसी झिझक के अपनी बातें कह देता था। वह कुछ बोलने ही वाली थी कि तभी कैफे का मैनेजर आ गया। "अनाया, जल्दी से ये ऑर्डर टेबल 5 पर दे दो," मैनेजर ने कहा। "हाँ, सर," अनाया ने जल्दी से ट्रे उठाई और टेबल की तरफ बढ़ गई। लेकिन जल्दबाजी में उसका पैर फिसल गया, और पूरा ट्रे नीचे गिर गया। सन्नाटा छा गया। मैनेजर गुस्से में आ गया और उसे डाँटने लगा। "तुम्हारी लापरवाही की वजह से रोज नुकसान होता है!" अनाया शर्मिंदा थी, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। तभी आहान खड़ा हुआ और मैनेजर की तरफ देखा। "आपकी ये लड़की सबसे मेहनती है, और छोटी गलती हर किसी से होती है। इतनी डाँटने की जरूरत नहीं है।" मैनेजर थोड़ी देर चुप रहा, फिर मुँह बनाकर वहाँ से चला गया। अनाया ने सिर झुका लिया। "तुम्हें कुछ बोलने की जरूरत नहीं थी। मैं खुद हैंडल कर लेती।" "कभी-कभी किसी और को भी तुम्हारी फिक्र करने का मौका दे दिया करो," आहान ने हल्के से कहा और वापस अपनी जगह बैठ गया। उस दिन के बाद अनाया ने महसूस किया कि आहान सिर्फ अमीर नहीं, बल्कि अच्छा इंसान भी है। धीरे-धीरे दोनों के बीच नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं। एक दिन, आहान ने उसे ऑफिस आने के लिए कहा। "बस एक बार देख लो, तुम्हें अच्छा लगेगा।" अनाया झिझक रही थी, लेकिन आखिरकार मान गई। अगले दिन जब वह आहान के ऑफिस पहुँची, तो देखकर हैरान रह गई। बड़ी-बड़ी इमारतों के बीच एक शानदार ग्लास बिल्डिंग खड़ी थी। अंदर घुसते ही हर कोई उसे देख रहा था। "सर, यह लड़की कौन है?" एक स्टाफ मेंबर ने फुसफुसाते हुए पूछा। "खास दोस्त," आहान ने हल्के से मुस्कुराकर कहा। अनाया को अंदर लाकर उसने अपना कैबिन दिखाया। "यहाँ मैं अपने सपनों पर काम करता हूँ। तुम्हें कैसा लगा?" "बिल्कुल तुम्हारी तरह... बड़ा और इम्प्रेसिव," अनाया ने ईमानदारी से कहा। आहान उसे देखकर मुस्कुराया। वह भी धीरे-धीरे समझने लगी थी कि उसके दिल में कुछ हलचल हो रही है। लेकिन दोनों की दुनिया अलग थी। क्या उनकी मोहब्बत इन फर्कों को पार कर पाएगी?chapter 4अनाया को ऑफिस आए कुछ ही मिनट हुए थे, लेकिन वह खुद को वहाँ अजीब महसूस कर रही थी। हर कोई उसे ऐसे देख रहा था जैसे वह वहाँ फिट नहीं होती। उसे लगा कि वह किसी ऐसी दुनिया में आ गई है, जो उसके लिए नहीं बनी। "तुम यहाँ सहज महसूस नहीं कर रही?" आहान ने उसके चेहरे के हाव-भाव देखकर पूछा। "नहीं, बस थोड़ा अजीब लग रहा है। मैं ऐसी जगहों की आदत नहीं रखती," अनाया ने ईमानदारी से जवाब दिया। "आदतें बदली जा सकती हैं," आहान ने मुस्कुराते हुए कहा। "लेकिन क्या जरूरत है बदलने की?" अनाया ने तुरंत जवाब दिया। आहान को यह सुनकर अच्छा लगा। वह जानता था कि अनाया दिखावे से दूर रहने वाली लड़की है। लेकिन उसे एहसास हो रहा था कि वह उसे अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाना चाहता है। "आओ, मैं तुम्हें कुछ दिखाता हूँ," आहान ने कहा और उसे अपने ऑफिस के एक कोने में ले गया, जहाँ एक दीवार पर ढेर सारी तस्वीरें लगी थीं। "ये सब क्या है?" "ये मेरी जर्नी है। जब मैंने यह कंपनी शुरू की थी, तब मेरे पास कुछ भी नहीं था। बस एक सपना था और उसे पूरा करने की जिद थी।" अनाया ने उन तस्वीरों को ध्यान से देखा। कुछ तस्वीरों में आहान एक छोटे से ऑफिस में काम करता दिख रहा था, कुछ में उसकी मेहनत झलक रही थी। "लोग सोचते हैं कि मैं सिर्फ अमीर परिवार का लड़का हूँ, जिसे सब कुछ आसानी से मिल गया। लेकिन सच्चाई यह है कि मैंने खुद को साबित करने के लिए बहुत मेहनत की है।" अनाया ने पहली बार आहान को एक अलग नज़रिए से देखा। वह सिर्फ एक अमीर बिजनेसमैन नहीं था, बल्कि एक ऐसा इंसान था जिसने मेहनत से सब कुछ हासिल किया था। "इम्प्रेसिव," अनाया ने हल्की मुस्कान के साथ कहा। "और तुम्हारी कहानी क्या है?" आहान ने उसकी तरफ देखा। "मेरी कोई बड़ी कहानी नहीं है। बस ज़िंदगी को जैसे मिलता है, वैसे जीती हूँ," अनाया ने कंधे उचका दिए। "मुझे लगता है कि तुम्हारी कहानी भी खास है, बस तुमने अभी तक उसे पहचाना नहीं," आहान ने गंभीर लहजे में कहा। उस दिन के बाद से अनाया और आहान के बीच कुछ बदल गया। दोनों अब पहले से ज्यादा करीब आ गए थे। एक शाम, जब दोनों कैफे में बैठे थे, आहान ने अनाया से पूछा, "क्या तुमने कभी सोचा कि तुम्हारा सपना क्या है?" अनाया थोड़ी देर चुप रही, फिर बोली, "मैं अपनी माँ के लिए एक अच्छा घर खरीदना चाहती हूँ। ताकि उन्हें सिलाई करके घर चलाने की जरूरत न पड़े।" आहान ने उसकी आँखों में देखा। वहाँ एक ईमानदारी और मजबूती थी, जो उसने किसी में नहीं देखी थी। "अगर मैं तुम्हारी मदद करूँ तो?" "नहीं, मैं किसी की मदद से नहीं, बल्कि खुद से कुछ बनना चाहती हूँ," अनाया ने तुरंत जवाब दिया। आहान ने उसकी यह बात दिल से महसूस की। वह समझ गया कि यह लड़की सिर्फ उसके पैसों से प्रभावित नहीं हो सकती। लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने सब कुछ बदल दिया। अनाया के कैफे में एक नया ग्राहक आया। वह एक रईस आदमी था, जिसने उसे देखते ही अजीब तरीके से मुस्कुराया। "तुम्हारा नाम अनाया है, ना?" उसने पूछा। "हाँ, लेकिन आप कौन?" "मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है," उस आदमी ने कहा और एक बिजनेस कार्ड उसकी तरफ बढ़ाया। अनाया ने कार्ड देखा—उस पर लिखा था "रणवीर सिंह, मेहरा ग्रुप ऑफ कंपनीज़"। यह नाम सुनते ही अनाया सन्न रह गई। यह वही इंसान था जिसे आहान अपने सबसे बड़े दुश्मनों में से एक मानता था। अब यह नया मोड़ उनके रिश्ते में क्या हलचल मचाने वाला था?chapter 5अनाया ने कार्ड को उलट-पलट कर देखा और फिर सीधे रणवीर की आँखों में झाँका। वह आदमी दिखने में शालीन लग रहा था, लेकिन उसकी मुस्कराहट में एक अजीब सी चालाकी थी। "मुझसे क्या जरूरी बात करनी थी?" अनाया ने सीधे पूछा। "बैठ कर बात करें?" रणवीर ने सामने वाली कुर्सी की तरफ इशारा किया। "सॉरी, लेकिन मैं काम पर हूँ।" रणवीर हल्का सा हँसा। "तुम सच में बहुत अलग हो। खैर, मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि तुम्हारी और आहान की दोस्ती अब किसी से छुपी नहीं है। और मैं चाहता हूँ कि तुम इस दोस्ती को यहीं खत्म कर दो।" अनाया ने चौंक कर उसकी तरफ देखा। "क्यों?" "क्योंकि आहान तुम्हारे लिए सही इंसान नहीं है।" "ये आप तय करने वाले कौन होते हैं?" "मैं बस तुम्हें सच बताने आया हूँ। आहान जैसा दिखता है, वैसा है नहीं। उसके पास जो भी है, वह सब उसने छीनकर लिया है। उसने सिर्फ अपने फायदे के लिए लोगों का इस्तेमाल किया है, और अब वह तुम्हें भी अपने जाल में फँसाना चाहता है।" अनाया को रणवीर की बातों पर यकीन नहीं हुआ। "अगर आप सोचते हैं कि मैं इतनी भोली हूँ कि आपकी इन बातों में आ जाऊँगी, तो आप गलत सोच रहे हैं।" "अगर यकीन नहीं होता तो खुद पता कर लो। देख लो कि आहान ने कैसे मेरे परिवार को बर्बाद किया। कैसे उसने मेरे बिजनेस को छीन लिया। और फिर खुद तय कर लो कि तुम किसके साथ हो।" रणवीर ने एक फाइल निकालकर अनाया की तरफ बढ़ाई। "यहाँ हर सबूत है। जब तुम्हें सही लगे, इसे पढ़ लेना। लेकिन एक बात याद रखना—आहान के करीब जाने का मतलब है खुद को मुसीबत में डालना।" इतना कहकर रणवीर वहाँ से चला गया। अनाया पूरी तरह उलझ गई थी। उसे यकीन था कि आहान ऐसा नहीं हो सकता, लेकिन उस फाइल को देखकर उसका मन डगमगा गया। शाम को जब आहान उसे लेने आया, तो वह चुप थी। "क्या हुआ? सब ठीक?" आहान ने कार स्टार्ट करते हुए पूछा। "अगर कोई तुम्हारे बारे में कुछ कहे तो मुझे उस पर भरोसा करना चाहिए?" आहान ने उसे देखा और हल्की मुस्कान के साथ कहा, "ये तो इस बात पर निर्भर करता है कि कौन कह रहा है और क्या कह रहा है।" "अगर रणवीर कहे?" आहान का चेहरा तुरंत सख्त हो गया। उसने अचानक ब्रेक मारा और कार सड़क के किनारे रोक दी। "रणवीर से तुम्हारी बात हुई?" "हाँ, वह आज कैफे आया था। उसने कहा कि तुमने उसका बिजनेस छीना, उसके परिवार को बर्बाद किया।" आहान ने गहरी साँस ली और कुछ देर तक चुप रहा। "तो तुमने क्या सोचा?" "मुझे नहीं पता। मैं बस सच जानना चाहती हूँ।" आहान ने उसे गौर से देखा और फिर कार से बाहर निकल आया। अनाया भी उसके पीछे-पीछे आई। "मेरे साथ चलो। मैं तुम्हें खुद सब बताऊँगा।" आहान ने अनाया का हाथ पकड़ा और उसे अपने घर ले गया। वहाँ उसने एक पुराना एल्बम निकाला और उसके सामने रख दिया। "यह मेरा और रणवीर का सच है। जो भी फैसला लेना है, इसे देखने के बाद लेना।" अनाया ने एल्बम खोला और उसमें जो देखा, उसने उसकी पूरी सोच बदल दी...chapter 6अनाया ने एल्बम का पहला पेज खोला। उसमें एक पुरानी तस्वीर थी—दो लड़के, एक साथ हँसते हुए। एक लड़का साफ-सुथरे कपड़ों में था, जबकि दूसरा थोड़ा साधारण पहनावे में। लेकिन दोनों की आँखों में दोस्ती की चमक थी। "यह मैं और रणवीर हैं," आहान ने शांत आवाज़ में कहा। अनाया ने चौंककर उसे देखा। "तुम दोनों दोस्त थे?" "हाँ, कभी बहुत अच्छे दोस्त थे। बचपन में हम साथ स्कूल जाते थे, साथ सपने देखते थे। लेकिन फिर सब बदल गया।" अनाया ने अगला पेज पलटा। अब तस्वीरों में वही लड़के बड़े हो चुके थे। लेकिन इस बार, उनके चेहरे पर दोस्ती की जगह दूरियाँ दिख रही थीं। "रणवीर का परिवार पहले बहुत अमीर था, और मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से था। उसके पिता बड़े बिजनेसमैन थे, जबकि मेरे पिता एक छोटी सी दुकान चलाते थे। लेकिन मुझे हमेशा खुद कुछ बनने की चाह थी।" अनाया चुपचाप सुन रही थी। "जब मैंने अपनी कंपनी शुरू करने का सपना देखा, तो रणवीर ने कहा कि वह मेरी मदद करेगा। उसने अपने पिता से बात की, और उन्होंने मुझे एक इन्वेस्टमेंट ऑफर किया। लेकिन उसके बदले में वे चाहते थे कि मैं अपना पूरा बिजनेस उन्हें सौंप दूँ।" "क्या?" अनाया ने आश्चर्य से पूछा। "हाँ, और जब मैंने मना कर दिया, तो उन्होंने मेरे खिलाफ साजिश रचनी शुरू कर दी। उन्होंने मेरी कंपनी की फाइनेंस रिपोर्ट्स से छेड़छाड़ की, मेरे क्लाइंट्स को मुझसे दूर किया। जब भी मैंने कोई डील फाइनल करने की कोशिश की, वे बीच में आकर उसे तोड़ देते थे। मैं बर्बाद होने लगा था।" अनाया को यकीन नहीं हो रहा था कि रणवीर ऐसा कर सकता है। "फिर क्या हुआ?" "फिर मैंने फैसला किया कि मैं अपने दम पर सबकुछ हासिल करूँगा। मैंने दिन-रात मेहनत की, और धीरे-धीरे मेरी कंपनी उठने लगी। लेकिन रणवीर और उसके पिता को यह बर्दाश्त नहीं हुआ। उन्होंने मुझ पर झूठे केस करवा दिए, मेरी इमेज खराब करने की कोशिश की।" "तो तुमने क्या किया?" "मैंने उनकी ही चाल उन्हीं पर इस्तेमाल की। मैंने उनके गलत कामों के सबूत इकट्ठे किए और सही वक्त पर सबके सामने रख दिया। इससे उनकी कंपनी को बड़ा नुकसान हुआ, और रणवीर का परिवार पूरी तरह टूट गया। लेकिन मैंने सिर्फ अपना बचाव किया, कुछ छीना नहीं।" अनाया कुछ देर तक चुप रही। "अब रणवीर तुमसे मुझे छोड़ने के लिए कह रहा है, क्योंकि वह जानता है कि तुम मेरे लिए खास हो। वह जानता है कि अगर तुम चली गईं, तो शायद मुझे चोट पहुँचेगी। लेकिन फैसला तुम्हारे हाथ में है। अगर तुम्हें लगता है कि मैं गलत हूँ, तो तुम जा सकती हो।" अनाया ने धीरे से एल्बम बंद किया और आहान की तरफ देखा। "तुमने कभी मुझसे पहले यह सब क्यों नहीं बताया?" "क्योंकि मैं तुम्हें अपनी ज़िंदगी की मुश्किलों में नहीं घसीटना चाहता था।" अनाया को अब सब समझ आ गया था। रणवीर ने उसे गलत कहानी सुनाई थी, लेकिन सच यह था कि आहान ने सिर्फ अपनी मेहनत से सब हासिल किया था। उसने गहरी सांस ली और हल्की मुस्कान के साथ कहा, "तुम्हें छोड़कर जाने का सवाल ही नहीं उठता।" आहान ने पहली बार राहत की सांस ली। उसने धीरे से अनाया का हाथ थाम लिया। दिल्ली की ठंडी हवा उनके चारों तरफ बह रही थी, और उनके बीच की दूरियाँ हमेशा के लिए खत्म हो रही थीं।chapter 7आहान ने अनाया का हाथ थामे रखा, जैसे उसे यकीन हो कि अब वह कभी दूर नहीं जाएगी। अनाया की आँखों में भरोसा था, और यही भरोसा आहान के लिए सबसे बड़ी जीत थी। लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी। अगले दिन, जब अनाया कैफे पहुँची, तो उसने देखा कि रणवीर वहाँ पहले से बैठा था। उसकी आँखों में वही पुरानी चालाकी थी। "तो, फैसला कर लिया?" रणवीर ने बिना किसी भूमिका के पूछा। "हाँ। और मैं आहान के साथ हूँ," अनाया ने बिना झिझक कहा। रणवीर कुछ सेकंड तक उसे घूरता रहा, फिर हँस पड़ा। "मुझे पता था कि तुम भी बाकी लोगों की तरह उसकी चिकनी-चुपड़ी बातों में आ जाओगी। लेकिन कोई बात नहीं। जब वह तुम्हें धोखा देगा, तब याद रखना कि मैंने तुम्हें पहले ही आगाह किया था।" "आहान मुझे धोखा नहीं देगा। और अगर तुम वाकई उसके दोस्त थे, तो तुम्हें उसकी सफलता से नफरत नहीं होनी चाहिए थी।" रणवीर का चेहरा कठोर हो गया। उसने बिना कुछ कहे अपना कप उठाया और वहाँ से चला गया। उस रात, आहान और अनाया इंडिया गेट के पास एक बेंच पर बैठे थे। चारों तरफ हल्की ठंडक थी, और सड़कें रोशनी से जगमगा रही थीं। "तो अब आगे क्या?" आहान ने हल्की मुस्कान के साथ पूछा। "अब? अब तुम्हें मेरे साथ मेरी दुनिया में चलना होगा," अनाया ने शरारत से कहा। "मतलब?" "मतलब, अगर मैं तुम्हारी आलीशान ऑफिस और बिजनेस वर्ल्ड का हिस्सा बनी, तो तुम्हें भी मेरे छोटे से घर, मेरी माँ की बनी चाय, और मेरी दुनिया का हिस्सा बनना होगा।" आहान हँस पड़ा। "डील पक्की। लेकिन एक शर्त है।" "क्या?" "तुम सिर्फ मेरी दुनिया का हिस्सा नहीं बनोगी, बल्कि मेरी ज़िंदगी का भी।" अनाया ने हल्के से उसकी आँखों में झाँका। "क्या ये प्रपोज़ल था?" "तुम्हें क्या लगता है?" अनाया ने जवाब नहीं दिया, बस मुस्कुराई। लेकिन उसकी मुस्कान ही जवाब थी। दिल्ली की हवाओं ने उस पल में दो अलग दुनिया के लोगों को एक कर दिया था। और शायद, यही सच्ची मोहब्बत थी—जहाँ न अमीरी की दीवार थी, न गरीबी की बेड़ियाँ। बस दो दिल थे, जो एक-दूसरे को समझते थे।chapter 8कुछ हफ़्तों बाद, आहान पहली बार अनाया के घर गया। वह एक छोटा सा लेकिन साफ-सुथरा मकान था, जहाँ हर चीज़ सादगी से भरी हुई थी। दरवाज़े पर अनाया की माँ मिलीं, जो सिलाई मशीन के पास बैठी थीं। "नमस्ते आंटी," आहान ने आदर से कहा। अनाया की माँ ने उसे सर से पैर तक देखा, फिर हल्की मुस्कान के साथ बोलीं, "तो तुम ही हो आहान?" "जी।" "अच्छा, अंदर आओ।" आहान ने घर में कदम रखा। वहाँ हर चीज़ में अपनापन था, जो शायद उसकी बड़ी-बड़ी इमारतों में नहीं था। "तुम्हें चाय पसंद है?" माँ ने पूछा। "बहुत," आहान ने तुरंत जवाब दिया। "अच्छा, तो फिर अनाया के हाथ की चाय पीनी पड़ेगी।" अनाया ने आश्चर्य से माँ की तरफ देखा। "माँ!" "क्या? लड़के को परखना है कि इसे सच में तुम्हारी आदतों से प्यार है या नहीं।" आहान ने मुस्कुराते हुए कहा, "मैं तैयार हूँ।" अनाया भले ही झुंझला रही थी, लेकिन वह अंदर जाकर चाय बनाने लगी। जब तक चाय बनी, तब तक आहान और अनाया की माँ की बातें होती रहीं। "बेटा, अमीरी-गरीबी कोई बड़ी बात नहीं। बस यह देखना जरूरी है कि इंसान दिल से कैसा है।" "मैं पूरी कोशिश करूँगा कि आपको कभी शिकायत का मौका न मिले," आहान ने गंभीरता से कहा। माँ मुस्कुराईं। "देखते हैं।" कुछ ही देर में अनाया चाय लेकर आई। आहान ने पहली चुस्की ली और आँखें बंद कर लीं। "क्या हुआ?" अनाया ने पूछा। "यह दुनिया की सबसे अच्छी चाय है!" अनाया हँस पड़ी, और माँ ने राहत की सांस ली। शायद उन्हें यकीन हो गया था कि आहान उनकी बेटी के लिए सही इंसान है। उस दिन के बाद से आहान अनाया की दुनिया का हिस्सा बन गया। वह उसकी माँ की मदद करता, उनके साथ बैठकर बातें करता, और धीरे-धीरे अनाया की ज़िंदगी में पूरी तरह रच-बस गया। एक शाम, जब दोनों एक साथ बैठे थे, आहान ने हल्के से उसका हाथ पकड़ा। "अब तो मानोगी कि मैं तुम्हारी दुनिया में पूरी तरह फिट हो गया?" अनाया ने उसकी आँखों में देखा और मुस्कुराकर कहा, "हाँ, और अब मैं भी तुम्हारी दुनिया का हिस्सा बनने के लिए तैयार हूँ।" आहान ने उसकी उँगलियों को हल्के से दबाया। "तो फिर, हमेशा के लिए?" अनाया ने कोई जवाब नहीं दिया, बस उसकी बाहों में समा गई। जवाब देने की जरूरत भी नहीं थी। क्योंकि कुछ रिश्ते बस दिल से समझे जाते हैं।chapter 9कुछ महीनों बाद, अनाया आहान के ऑफिस में उसके केबिन में बैठी थी। उसने चारों तरफ देखा—ऊँची-ऊँची बिल्डिंग्स, बड़े-बड़े बिजनेसमैन, और एक ऐसी दुनिया, जहाँ वह कभी अपनी जगह नहीं देखती थी। लेकिन अब, आहान के साथ, उसे यहाँ अजनबीपन महसूस नहीं होता था। "क्या सोच रही हो?" आहान ने लैपटॉप बंद करते हुए पूछा। "यही कि मैं यहाँ तक कैसे पहुँची," अनाया ने हँसते हुए कहा। "अपने हक से। अपनी सच्चाई से।" "और तुम्हारी जिद से," अनाया ने शरारत से कहा। आहान हँस पड़ा। "हाँ, वो तो थी ही।" तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई। सेक्रेटरी अंदर आई और बोली, "सर, रणवीर सिंह आपसे मिलना चाहते हैं।" कमरे में एक अजीब सा सन्नाटा छा गया। अनाया ने आहान की तरफ देखा। "भेज दो," आहान ने शांत स्वर में कहा। कुछ ही देर में रणवीर अंदर आया। वह अब पहले जैसा आत्मविश्वासी नहीं लग रहा था। "कैसे आना हुआ?" आहान ने सीधे पूछा। रणवीर कुछ पल चुप रहा, फिर बोला, "मैं माफ़ी माँगने आया हूँ।" अनाया और आहान दोनों चौंक गए। "जो कुछ भी मैंने किया, जो भी नफ़रत रखी, वह सिर्फ मेरे अहंकार की वजह से थी। मैं देख नहीं सका कि मेरी हार मेरी गलतियों की वजह से थी, न कि तुम्हारी किसी साजिश की वजह से। लेकिन अब समझ आ गया है।" आहान ने बिना कुछ कहे उसे देखा। "मैं जानता हूँ कि तुम मुझे माफ नहीं करोगे, और शायद तुम्हें करना भी नहीं चाहिए। लेकिन मैं अब अपनी नफरत को खत्म करना चाहता हूँ।" आहान ने गहरी सांस ली। "रणवीर, मैंने तुमसे कभी नफरत नहीं की। बस तुम्हारी नफरत ने हमें दूर कर दिया था। अगर तुम सच में अपनी गलतियों को स्वीकार कर चुके हो, तो शायद हम फिर से एक नई शुरुआत कर सकते हैं।" रणवीर ने हल्की मुस्कान दी और हाथ बढ़ाया। आहान ने बिना झिझक उसका हाथ थाम लिया। अनाया ने यह सब देखा और महसूस किया कि ज़िंदगी में असली जीत धन-दौलत से नहीं, बल्कि रिश्तों को सहेजने से होती है। उस दिन, न केवल आहान और रणवीर के बीच की दूरियाँ मिट गईं, बल्कि अनाया को भी यकीन हो गया कि उसने सही इंसान को चुना है। क्योंकि प्यार सिर्फ एक-दूसरे को अपनाने का नाम नहीं, बल्कि एक-दूसरे के साथ मिलकर हर मुश्किल को हराने का नाम है।chapter 10कुछ समय बीत गया। आहान और अनाया की ज़िंदगी अब पहले से भी ज्यादा खूबसूरत हो गई थी। रणवीर भी बदल चुका था। उसने अपने पिता की गलतियों से सीख ली और खुद का एक नया बिजनेस शुरू किया। हालाँकि वह अब भी आहान से आगे निकलने की कोशिश करता, लेकिन अब यह दुश्मनी में नहीं, बल्कि एक हेल्दी कॉम्पिटिशन में बदल चुका था। एक दिन, आहान ने अनाया को एक खूबसूरत रेस्तरां में डिनर पर बुलाया। वहाँ कैंडल लाइट, हल्का संगीत, और एक रोमांटिक माहौल था। अनाया ने उसे देखा और हँसते हुए पूछा, "आज कोई खास दिन है?" आहान ने जेब से एक छोटी सी बॉक्स निकाली और उसके सामने खोल दी। अंदर एक खूबसूरत हीरे की अंगूठी चमक रही थी। "हाँ, आज का दिन हमारी ज़िंदगी का सबसे खास दिन बनने वाला है," आहान ने मुस्कुराते हुए कहा। अनाया की आँखें आश्चर्य से फैल गईं। "आहान, क्या तुम...?" "हाँ, मिस अनाया, क्या तुम मिसेज़ अनाया आहान खन्ना बनना पसंद करोगी?" अनाया की आँखों में नमी आ गई। उसने बिना कोई शब्द कहे, हल्के से सिर हिलाया। आहान ने मुस्कुराते हुए उसकी उँगली में अंगूठी पहना दी। वहाँ बैठे लोग तालियाँ बजाने लगे, और पूरे माहौल में खुशी छा गई। शादी की तैयारियाँ ज़ोरों पर थीं। अनाया के लिए यह सब किसी सपने जैसा था। आहान ने न सिर्फ उसकी दुनिया बदली, बल्कि उसे यह एहसास कराया कि सच्चा प्यार अमीरी-गरीबी नहीं देखता, सिर्फ दिल से जुड़ता है। शादी के दिन, जब अनाया लाल जोड़े में सजी हुई थी, उसने आईने में खुद को देखा और मुस्कुराई। कुछ साल पहले वह एक साधारण लड़की थी, जो बस अपनी माँ और छोटी-सी दुनिया में खुश थी। लेकिन अब, वह एक नए सफर की दहलीज़ पर खड़ी थी, जहाँ प्यार, सम्मान और एक खूबसूरत ज़िंदगी उसका इंतजार कर रही थी। जब आहान ने मंडप में उसका हाथ थामा, तो उसने हल्के से फुसफुसाकर कहा, "तैयार हो हमेशा के लिए मेरी दुनिया में आने के लिए?" अनाया ने मुस्कुराकर जवाब दिया, "मैं तो उसी दिन तैयार हो गई थी, जब पहली बार तुम्हें देखा था।" और इसी तरह, दिल्ली की गलियों में पली-बढ़ी एक साधारण लड़की, बिज़नेस वर्ल्ड के सबसे सफल आदमी की हमसफ़र बन गई। लेकिन यह कोई परियों की कहानी नहीं थी। यह दो लोगों की मेहनत, भरोसे और प्यार की कहानी थी, जिसने अमीरी-गरीबी की हर दीवार को गिरा दिया था।chapter 11शादी के बाद, आहान और अनाया की ज़िंदगी और भी खूबसूरत हो गई। आहान अपने बिजनेस में पहले से ज्यादा सफल हो रहा था, और अनाया धीरे-धीरे उसके साथ हर फैसले में भागीदार बन रही थी। लेकिन उनका रिश्ता सिर्फ बिजनेस पार्टनर जैसा नहीं था—वे एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त, सबसे बड़े सपोर्टर और सबसे करीबी हमसफ़र थे। एक दिन, जब अनाया अपने नए प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी, आहान ऑफिस से जल्दी घर आ गया। "इतनी जल्दी आज?" अनाया ने हैरानी से पूछा। "आज मेरे पास तुम्हारे लिए एक सरप्राइज़ है," आहान ने मुस्कुराते हुए कहा। "अब और क्या?" अनाया ने शरारत से पूछा। आहान ने उसके हाथ में एक टिकट थमा दिया। "यह क्या है?" "हमारे हनीमून की टिकट्स। मालदीव्स।" अनाया की आँखें चमक उठीं। "सच में?" "हाँ, मिसेज़ खन्ना, अब वक्त है कि हम थोड़ा रिलैक्स करें और दुनिया की टेंशन भूलकर बस एक-दूसरे के साथ कुछ वक्त बिताएँ।" दो दिन बाद, वे दोनों खूबसूरत समुद्री किनारों के बीच एक शानदार रिसॉर्ट में थे। वहाँ नीला पानी, सफेद रेत, और शांति थी—एक ऐसी जगह, जहाँ बस वे दोनों और उनका प्यार था। एक शाम, समुद्र किनारे बैठे हुए, अनाया ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "अगर मैं उस दिन तुम्हारी कंपनी में नौकरी के लिए न आई होती, तो शायद हम कभी नहीं मिलते।" आहान ने उसका हाथ थाम लिया। "तब भी हम मिलते। क्योंकि जो रिश्ता तक़दीर में लिखा होता है, वो किसी भी हाल में होकर रहता है।" अनाया ने उसकी आँखों में देखा और महसूस किया कि उसने सच ही कहा था। यह सिर्फ एक अमीर बिजनेसमैन और एक साधारण लड़की की कहानी नहीं थी। यह दो दिलों की कहानी थी, जो हर मुश्किल को पार कर, एक-दूसरे के लिए बने थे। मालदीव्स की उस खूबसूरत शाम, समंदर की लहरों के बीच, तारे उनकी मोहब्बत के गवाह बन रहे थे। और वे दोनों जान गए थे कि यह सफर सिर्फ शादी तक का नहीं था—यह ज़िंदगीभर के साथ का था।chapter 12कुछ साल बीत गए, लेकिन आहान और अनाया का प्यार पहले जैसा ही था—बेहद गहरा और सच्चा। आहान बिजनेस की ऊँचाइयों को छू रहा था, और अनाया भी उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही थी। एक सुबह, अनाया बालकनी में बैठी थी, जब आहान ने पीछे से आकर उसे गले लगा लिया। "आज ऑफिस नहीं जाना?" अनाया ने मुस्कुराते हुए पूछा। "आज नहीं। आज सिर्फ तुम्हारे साथ वक्त बिताना है," आहान ने कहा। "कोई खास बात?" आहान ने उसकी आँखों में देखा और धीरे से कहा, "तुम्हें कुछ बताना है।" अनाया थोड़ा चिंतित हो गई। "क्या हुआ?" आहान ने उसकी हथेली थामी और एक हल्की सी स्माइल के साथ बोला, "हम पेरेंट्स बनने वाले हैं।" अनाया की आँखें आश्चर्य और खुशी से भर गईं। "क्या? तुम सच कह रहे हो?" आहान ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया। "हाँ, डॉक्टर से कन्फर्म हुआ है।" अनाया की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन यह खुशी के आँसू थे। उसने आहान को गले लगा लिया। अब उनकी ज़िंदगी का एक नया अध्याय शुरू हो चुका था। आहान पहले से भी ज्यादा केयरिंग हो गया था। वह अनाया का हर तरह से ख्याल रखता, उसे ऑफिस के काम से दूर रहने की सलाह देता और उसकी हर छोटी-बड़ी ज़रूरत पूरी करता। "तुम मुझे बच्चा बना रहे हो," अनाया ने एक दिन हँसते हुए कहा। "क्योंकि तुम मेरे लिए सबसे ज्यादा जरूरी हो," आहान ने प्यार से जवाब दिया। फिर वह दिन भी आया, जब अनाया ने एक प्यारी सी बेटी को जन्म दिया। अस्पताल के कमरे में, जब आहान ने पहली बार अपनी बेटी को गोद में लिया, तो उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी। "हमारी नन्ही परी," उसने हल्की आवाज़ में कहा। अनाया ने मुस्कुराकर उसे देखा। "इसका नाम क्या रखेंगे?" आहान ने बेटी के चेहरे को निहारते हुए कहा, "आव्या।" और इस तरह, उनकी प्रेम कहानी एक नई शुरुआत की ओर बढ़ गई। अब वे सिर्फ पति-पत्नी नहीं, बल्कि माता-पिता भी थे। प्यार के इस नए रूप में भी उन्होंने एक-दूसरे का उतना ही साथ दिया, जितना पहले देते आए थे। दिल्ली की उन्हीं सड़कों पर, जहाँ कभी एक अमीर बिजनेसमैन और एक साधारण लड़की का सफर शुरू हुआ था, अब एक नन्ही हँसी की गूंज भी शामिल हो चुकी थी।chapter 13आव्या के आने के बाद, आहान और अनाया की ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई। अब उनकी दुनिया में बिज़नेस मीटिंग्स और बड़े प्रोजेक्ट्स से ज्यादा मायने रखती थी उनकी नन्ही परी की मुस्कान। एक दिन, जब आहान ऑफिस से घर लौटा, तो उसने देखा कि अनाया और आव्या फर्श पर बैठकर खिलौनों से खेल रहे थे। अनाया अपनी बेटी की नकल उतार रही थी, और आव्या हँस-हँसकर लोटपोट हो रही थी। आहान दरवाज़े पर ही रुक गया और यह नज़ारा देखने लगा। अनाया ने उसे देखा और मुस्कुराकर बोली, "बिल्कुल वैसे ही खड़े रहो, जैसे कोई फ़िल्मी हीरो अपने परिवार को देखकर इमोशनल हो रहा हो।" आहान हँस पड़ा और उनके पास आकर बैठ गया। "मैं सच में इमोशनल हो रहा हूँ। ये पल मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं।" आव्या ने अपनी छोटी-छोटी बाहें फैलाकर कहा, "पापा!" आहान ने झट से उसे गोद में उठा लिया। "मेरी नन्ही परी, आज पापा के साथ क्या करने का मन है?" "आइसक्रीम!" आव्या ने चहककर कहा। अनाया तुरंत टोका, "इतनी ठंड में आइसक्रीम नहीं।" आहान ने मुस्कराते हुए कहा, "ठीक है, हम गर्म चॉकलेट पीने चलेंगे।" और फिर वे तीनों अपनी कार में बैठकर दिल्ली की गलियों में निकल पड़े। वे किसी बड़े होटल या आलीशान कैफे में नहीं गए, बल्कि एक छोटे से स्ट्रीट कैफे में बैठे, जहाँ उन्होंने गर्म चॉकलेट और गरमा-गरम समोसे खाए। अनाया ने आहान की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए कहा, "याद है, यही वो जगह है जहाँ हम पहली बार मिले थे?" आहान ने प्यार से उसका हाथ थाम लिया। "हाँ, और यही वो जगह है, जहाँ मेरी ज़िंदगी ने सबसे खूबसूरत मोड़ लिया था।" आव्या कुछ समझ नहीं पाई, लेकिन उसने अपने माता-पिता को खुश देखकर ताली बजाई। उस ठंडी रात में, दिल्ली की रौशनी के बीच, एक अमीर बिजनेसमैन और एक साधारण लड़की की प्रेम कहानी अब एक प्यारी सी परिवार की कहानी बन चुकी थी। यह सफर प्यार से शुरू हुआ था, और अब प्यार, विश्वास और खुशियों से भरा हुआ था।chapter 14समय बीतता गया, और आव्या बड़ी होती गई। अब वह पाँच साल की हो चुकी थी, शरारती, जिद्दी, लेकिन उतनी ही प्यारी। आहान और अनाया की दुनिया अब पूरी तरह उससे जुड़ चुकी थी। एक दिन, जब अनाया किचन में थी, तब आव्या भागते हुए आई और बोली, "मम्मा, पापा मुझे स्कूल छोड़ने चलेंगे ना?" अनाया ने मुस्कुराकर कहा, "हाँ बेटा, पापा तुम्हें रोज़ स्कूल छोड़ने जाते हैं।" "लेकिन आज मम्मा भी चलेंगी!" आव्या ने जिद की। तभी पीछे से आहान की आवाज़ आई, "तो आज मम्मा भी चलेंगी।" आव्या उछल पड़ी और बोली, "याय! फिर हम तीनों साथ में चॉकलेट मिल्कशेक भी पिएँगे!" अनाया ने हँसते हुए कहा, "तुम्हारी सारी प्लानिंग पहले से तैयार रहती है?" आव्या ने सिर हिलाया, "हम्म, पापा कहते हैं कि अच्छे बिजनेसमैन को हमेशा आगे की प्लानिंग करनी चाहिए!" आहान और अनाया एक-दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुरा पड़े। थोड़ी देर बाद, वे तीनों कार में थे। रास्ते में आव्या अपने स्कूल की बातें कर रही थी—कैसे उसकी दोस्त रिया उससे पेंसिल मांगती है, कैसे टीचर उसे क्लास में सबसे अच्छा बच्चा कहती हैं, और कैसे वह कल एक ड्राइंग कॉम्पिटिशन में भाग लेने वाली है। "पापा, मम्मा, आप दोनों कल स्कूल आओगे ना? मेरी ड्राइंग देखने?" आहान ने कहा, "बिलकुल आएँगे! हमारी परी का टैलेंट कैसे मिस कर सकते हैं?" अनाया ने हँसकर कहा, "लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि तुम्हारी ड्राइंग में बहुत सारे रंग होंगे।" "हम्म, क्योंकि रंगों के बिना कुछ भी अच्छा नहीं लगता, मम्मा!" आहान ने अनाया की तरफ देखा और हल्के से उसका हाथ थाम लिया। "सही कह रही हो, आव्या। ज़िंदगी भी बिना रंगों के अधूरी होती है।" अनाया ने मुस्कुराकर कहा, "और हमारा सबसे खूबसूरत रंग तुम हो, मेरी जान।" कार स्कूल के गेट पर रुकी, और आव्या खुशी-खुशी भागती हुई अंदर चली गई। आहान ने एक गहरी सांस ली और अनाया की तरफ देखा। "कभी-कभी सोचता हूँ, अगर उस दिन तुम मेरी कंपनी में इंटरव्यू देने नहीं आती, तो क्या हमारी ज़िंदगी इतनी खूबसूरत होती?" अनाया ने हल्के से उसका हाथ दबाया और कहा, "शायद हमारी तक़दीर कहीं न कहीं हमें ज़रूर मिलाती, क्योंकि कुछ रिश्ते ऊपरवाले ने खुद लिखे होते हैं।" आहान ने मुस्कुराकर कहा, "और उन रिश्तों को निभाना हमारा सबसे बड़ा काम होता है।" फिर दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थामे कार स्टार्ट की और अपने खूबसूरत सफर की अगली मंज़िल की ओर बढ़ गए—एक नई सुबह, नए सपनों और नए रंगों के साथ।chapter 15समय के साथ आव्या बड़ी होती गई, और आहान और अनाया के लिए हर दिन एक नया एहसास लेकर आता। उनकी ज़िंदगी अब पूरी तरह से एक खुशहाल परिवार की तरह थी—जहाँ प्यार, हँसी और छोटे-छोटे पलों की खूबसूरती थी। एक दिन, जब अनाया सुबह-सुबह उठी, तो उसने देखा कि आहान बालकनी में खड़ा बाहर देख रहा था। वह उसके पास गई और उसके कंधे पर हाथ रखते हुए बोली, "क्या सोच रहे हो?" आहान ने हल्की मुस्कान दी और कहा, "सोच रहा हूँ कि ज़िंदगी कितनी बदल गई है। कुछ साल पहले मैं सिर्फ एक बिज़नेस मैन था, जो सिर्फ अपने काम में खोया रहता था। लेकिन अब, तुम और आव्या मेरी दुनिया हो।" अनाया ने प्यार से कहा, "और यही बदलाव सबसे खूबसूरत है।" तभी अचानक आव्या दौड़ते हुए आई और बोली, "पापा, मम्मा! जल्दी आओ! देखो मैंने क्या बनाया!" दोनों उसके कमरे में गए, जहाँ दीवार पर एक खूबसूरत ड्राइंग लगी थी। उसमें तीन लोग थे—एक आदमी, एक औरत और एक छोटी बच्ची। उनके सिर पर एक बड़ा सा दिल बना था। "ये कौन हैं?" आहान ने मुस्कराते हुए पूछा। "हम!" आव्या चहकते हुए बोली। "पापा, मम्मा, और मैं। और ये दिल हमारा प्यार है, जो हमें हमेशा साथ रखेगा!" अनाया और आहान ने एक-दूसरे की तरफ देखा, फिर आव्या को गले से लगा लिया। आहान ने हल्के से कहा, "सच में, ज़िंदगी की सबसे बड़ी दौलत प्यार और अपने लोग ही होते हैं। बिज़नेस, पैसे, शोहरत—सबकुछ बाद में आता है।" अनाया ने सिर हिलाया और मुस्कुराई। "और मुझे खुशी है कि हमें यह दौलत मिल गई।" उस दिन, दिल्ली की उसी हवाओं में एक परिवार का प्यार गूंज रहा था। एक अमीर बिज़नेसमैन और एक साधारण लड़की की कहानी अब पूरी तरह से एक खूबसूरत परिवार की कहानी में बदल चुकी थी। और वे जानते थे कि आगे भी उनकी ज़िंदगी ऐसे ही हँसी, प्यार और खुशियों के रंगों से भरी रहेगी।chapter 16कुछ साल और बीत गए। आव्या अब दस साल की हो चुकी थी—तेज़ दिमाग, शरारती लेकिन दिल की बहुत अच्छी। वह आहान की परछाई थी, उसके हर अंदाज में आहान की झलक दिखती थी। अनाया भी अब बिज़नेस की दुनिया में आहान के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही थी। वे दोनों न सिर्फ एक खुशहाल परिवार थे बल्कि एक मजबूत पार्टनरशिप भी निभा रहे थे। एक दिन, आव्या स्कूल से आई और सीधा आहान के ऑफिस में घुस गई। "पापा! मुझे आपसे कुछ बहुत ज़रूरी बात करनी है!" आहान ने हेडफोन उतारे और मुस्कुराकर कहा, "बिल्कुल, मैडम! बोलिए, क्या हुक्म है?" आव्या ने गंभीरता से कहा, "मैं अब बड़ी हो गई हूँ।" आहान ने हँसते हुए पूछा, "अच्छा? और ये कैसे पता चला?" "क्योंकि मेरी क्लास में सबके मम्मी-पापा उन्हें उनके ड्रीम्स को फॉलो करने के लिए सपोर्ट करते हैं। तो मुझे भी चाहिए!" अनाया, जो दरवाजे पर खड़ी यह सब सुन रही थी, हँस पड़ी। "अच्छा, तो हमारी मैडम को कुछ स्पेशल चाहिए?" आव्या ने सिर हिलाया, "हाँ! मुझे अपना खुद का यूट्यूब चैनल चाहिए!" आहान और अनाया ने एक-दूसरे की तरफ देखा और फिर हँसते हुए कहा, "यूट्यूब चैनल? और उस पर क्या करोगी?" "मैं बच्चों को कहानियाँ सुनाऊँगी! बिल्कुल वैसे ही जैसे मम्मा मुझे सुनाती हैं!" अनाया ने मुस्कुराकर कहा, "तो इसका मतलब हमारी परी को स्टोरीटेलर बनना है?" आव्या जोश में बोली, "हाँ! और मुझे आप दोनों का पूरा सपोर्ट चाहिए!" आहान ने आव्या को गोद में उठाया और कहा, "बिल्कुल मिलेगा! हमारी छोटी प्रिंसेस जो चाहेगी, वो करेगी। लेकिन पहले एक शर्त है—पढ़ाई में कोई लापरवाही नहीं।" आव्या ने तुरंत सिर हिलाया, "डील पक्की!" उस रात, जब अनाया और आहान बालकनी में खड़े थे, तो अनाया ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "देखा? हमारी बेटी भी हमारी तरह अपने सपनों के पीछे भागना चाहती है।" आहान ने उसकी तरफ देखा और प्यार से कहा, "क्योंकि हमने उसे यही सिखाया है—कभी खुद को छोटा मत समझो, क्योंकि कोई भी सपना बड़ा नहीं होता।" दिल्ली की वही हवाएँ, जो कभी एक गरीब लड़की और एक अमीर बिज़नेसमैन को पास लाई थीं, आज उनके परिवार की खुशियों की गवाह बन चुकी थीं। वे जानते थे कि उनकी कहानी यहाँ खत्म नहीं हो रही, बल्कि हर दिन एक नया खूबसूरत अध्याय जोड़ रही थी।chapter 17समय के साथ, आव्या का यूट्यूब चैनल तेजी से लोकप्रिय हो गया। उसकी कहानियाँ बच्चों को बहुत पसंद आती थीं, और देखते ही देखते उसके चैनल पर लाखों सब्सक्राइबर हो गए। अनाया और आहान को अपनी बेटी पर गर्व था। एक दिन, आव्या का स्कूल में एक बड़ा इवेंट था, जहाँ उसे "बेस्ट क्रिएटिव माइंड" अवॉर्ड मिलने वाला था। अनाया ने उसकी प्यारी सी फ्रॉक तैयार कर दी, और आहान उसे स्टेज तक छोड़ने के लिए खुद चला गया। जब आव्या को अवॉर्ड मिला, तो उसने स्टेज पर खड़े होकर कहा, "ये अवॉर्ड मेरे मम्मा-पापा के लिए है। उन्होंने मुझे हमेशा सिखाया कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती। चाहे आप किसी भी बैकग्राउंड से हों, अगर आपके पास मेहनत और प्यार है, तो आप कुछ भी हासिल कर सकते हैं!" आहान और अनाया की आँखें गर्व से चमक उठीं। घर लौटते समय, आहान ने अनाया का हाथ थामा और हल्की आवाज़ में कहा, "कभी सोचा था कि एक दिन हमारी बेटी इतनी बड़ी बात कहेगी?" अनाया ने मुस्कुराकर कहा, "शायद, लेकिन ये भी तो तुम्हारी ही सीख है ना? तुमने ही तो सिखाया कि इंसान अपनी किस्मत खुद बनाता है।" आहान ने सिर हिलाया, "और तुमने सिखाया कि प्यार और विश्वास से हर मुश्किल आसान हो जाती है।" उस रात, वे तीनों बालकनी में बैठे थे। दिल्ली की हल्की ठंडी हवाओं में एक अजीब सी शांति थी। आव्या ने सितारों की तरफ देखकर कहा, "पापा, मम्मा, क्या हम हमेशा ऐसे ही साथ रहेंगे?" आहान ने उसे गोद में उठाया और कहा, "हमेशा। क्योंकि हमारा प्यार और हमारे रिश्ते कभी नहीं बदलते।" अनाया ने दोनों को देखते हुए हल्की मुस्कान दी। कभी एक अमीर बिजनेसमैन और एक साधारण लड़की की मुलाकात से शुरू हुई यह कहानी अब एक खूबसूरत परिवार की मिसाल बन चुकी थी। प्यार, संघर्ष और सपनों का यह सफर अब सिर्फ उनका नहीं था, बल्कि यह हर उस इंसान की प्रेरणा था जो मानता था कि सच्चा प्यार हर मुश्किल को हरा सकता है।chapter 18आव्या की सफलता के बाद, आहान और अनाया ने सोचा भी नहीं था कि उनकी जिंदगी में एक और बड़ा मोड़ आने वाला है। एक दिन, जब वे तीनों अपने फार्महाउस पर वीकेंड बिताने गए थे, तभी आहान को एक कॉल आई। यह एक इंटरनेशनल बिजनेस फर्म से था, जो आहान की कंपनी के साथ पार्टनरशिप करना चाहती थी। यह डील सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में उनके बिजनेस को नई ऊँचाइयों पर ले जा सकती थी। आहान ने फोन काटते ही अनाया की तरफ देखा। "ये बहुत बड़ी डील है, अनाया। लेकिन इसके लिए मुझे कुछ महीनों के लिए लंदन जाना होगा।" अनाया कुछ पल सोचती रही, फिर मुस्कुराकर बोली, "तो इसमें दिक्कत क्या है? ये तुम्हारा सपना था, आहान। तुम्हें इसे पूरा करना चाहिए।" आव्या, जो पास ही खेल रही थी, अचानक दौड़ते हुए आई और बोली, "पापा लंदन जा रहे हैं?" आहान ने उसे गोद में उठाया और प्यार से कहा, "हाँ, बेटा। लेकिन मैं बहुत जल्दी लौट आऊँगा। और जब मैं वापस आऊँगा, तो तुम्हारे लिए बहुत सारे गिफ्ट्स लेकर आऊँगा!" आव्या का चेहरा थोड़ी देर के लिए उदास हो गया, लेकिन फिर उसने मुस्कुराकर कहा, "ठीक है पापा, लेकिन हर दिन मुझसे वीडियो कॉल करोगे, वादा करो!" आहान ने उसका माथा चूमते हुए कहा, "वादा!" कुछ हफ्तों बाद, आहान लंदन चला गया। अनाया और आव्या ने उसे एयरपोर्ट पर विदा किया। अनाया ने अपने आँसू रोकते हुए कहा, "जल्दी लौटना, क्योंकि बिना तुम्हारे ये घर अधूरा लगता है।" आहान ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "तुम्हारा प्यार ही मुझे यहाँ तक लाया है, और यही मुझे वापस लाएगा।" लंदन में आहान की मेहनत रंग लाई, और वह डील साइन हो गई। उसकी कंपनी अब इंटरनेशनल लेवल पर पहुंच चुकी थी। लेकिन इन सारी उपलब्धियों के बीच, हर रात जब वह अपने होटल के कमरे में अकेला बैठता, तो उसे सिर्फ एक ही चीज़ की कमी महसूस होती—अपने परिवार की। एक दिन, उसने अचानक अनाया को वीडियो कॉल किया। "तुम दोनों तैयार रहो, मैं कल लौट रहा हूँ!" अनाया और आव्या खुशी से उछल पड़ीं। जब आहान दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरा, तो अनाया और आव्या पहले से वहाँ उसका इंतजार कर रहे थे। आव्या दौड़कर उसके पास आई और चिल्लाई, "पापा!!!" आहान ने उसे गोद में उठा लिया और प्यार से कहा, "अब मैं कहीं नहीं जाऊँगा, मेरी परी।" अनाया ने उसकी आँखों में देखा और हल्की मुस्कान के साथ कहा, "वेलकम बैक होम, आहान!" दिल्ली की वही हवा, वही सड़कें, वही परिवार—बस अब ज़िंदगी और भी खूबसूरत हो चुकी थी।chapter 19कुछ महीने बीत गए, और आहान की कंपनी अब इंटरनेशनल लेवल पर पहचान बना चुकी थी। लेकिन इसके बावजूद, उसने फैसला किया कि वह अब बिजनेस को और ज्यादा फैलाने की बजाय, अपनी फैमिली के साथ ज्यादा वक्त बिताएगा। एक शाम, जब आहान घर लौटा, तो उसने देखा कि अनाया बालकनी में अकेली बैठी थी, हल्की ठंडी हवा चल रही थी, और वह चुपचाप चाय पी रही थी। आहान ने उसके पास जाकर कहा, "क्या सोच रही हो?" अनाया ने हल्की मुस्कान दी, "बस, यही कि हमने कितना लंबा सफर तय कर लिया है। कभी सोचा था कि एक इंटरव्यू से शुरू हुई हमारी कहानी यहाँ तक पहुँचेगी?" आहान ने प्यार से कहा, "शायद नहीं, लेकिन अब जब पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो महसूस होता है कि यह सफर जितना खूबसूरत था, उतना ही अनमोल भी।" तभी आव्या दौड़ते हुए आई और बोली, "मम्मा-पापा, चलो! फैमिली मूवी नाइट करनी है!" आहान ने उसे गोद में उठाया और कहा, "बिलकुल! आज कौन सी मूवी देखनी है?" "कोई भी, लेकिन साथ में पॉपकॉर्न और कोल्ड ड्रिंक भी चाहिए!" आव्या ने शरारती अंदाज में कहा। तीनों हँसते हुए लिविंग रूम में आ गए। मूवी के दौरान, आव्या आहान और अनाया के बीच में बैठी थी, और दोनों अपने इस छोटे से परिवार को देखकर संतोष महसूस कर रहे थे। फिल्म खत्म होते ही, आव्या ने अचानक कहा, "पापा, मम्मा, क्या हम हमेशा ऐसे ही साथ रहेंगे?" आहान ने हल्के से उसका माथा चूमा और कहा, "हमेशा, मेरी परी।" अनाया ने प्यार से कहा, "हमारी कहानी कभी खत्म नहीं होगी, क्योंकि हमारा प्यार कभी खत्म नहीं होगा।" दिल्ली की रात, हल्की सर्द हवा, और एक छोटे से परिवार की हँसी—ज़िंदगी का यह पल किसी सपने से कम नहीं था। उनका सफर संघर्षों से भरा था, लेकिन प्यार और विश्वास ने हर मुश्किल को पार कर दिया था। अब उनके पास सबकुछ था—एक खूबसूरत रिश्ता, एक प्यारा परिवार, और अनगिनत यादें, जो हमेशा उनके साथ रहेंगी।chapter 20कुछ साल और बीत गए। अब आव्या सोलह साल की हो चुकी थी—तेज़, समझदार और उतनी ही जिद्दी जितनी बचपन में थी। वह स्कूल में टॉप करती थी, लेकिन उसका असली जुनून स्टोरीटेलिंग और कंटेंट क्रिएशन में था। उसका यूट्यूब चैनल अब एक ब्रांड बन चुका था, और वह सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हो गई थी। एक दिन, जब आहान अपने ऑफिस में था, तब अनाया ने उसे फोन किया। "आहान, आज घर जल्दी आ सकते हो?" आहान ने तुरंत पूछा, "सब ठीक है?" अनाया हँसकर बोली, "हाँ, लेकिन आव्या ने हमें अपने स्कूल के एक स्पेशल इवेंट में बुलाया है। और इस बार कोई बहाना नहीं चलेगा।" आहान ने मुस्कुराकर कहा, "ठीक है, आज मैं जल्दी घर आऊँगा।" शाम को, जब वे स्कूल पहुँचे, तो हॉल खचाखच भरा हुआ था। स्टेज पर आव्या खड़ी थी, और उसने माइक उठाया। "आज का दिन मेरे लिए बहुत खास है, क्योंकि आज मुझे 'यंग अचीवर अवॉर्ड' दिया जा रहा है। लेकिन अगर मैं यहाँ तक पहुँची हूँ, तो इसका पूरा क्रेडिट मेरे मम्मा-पापा को जाता है।" पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। अनाया की आँखों में नमी थी, और आहान गर्व से मुस्कुरा रहा था। "मेरे पापा ने मुझे सिखाया कि सपनों को हकीकत में बदलने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। और मेरी मम्मा ने मुझे सिखाया कि कोई भी सपना छोटा नहीं होता, बस उसमें सच्चे दिल से यकीन होना चाहिए।" आव्या ने स्टेज से नीचे उतरकर आहान और अनाया के पास आकर कहा, "यह अवॉर्ड आप दोनों के लिए है!" आहान ने आव्या को गले लगा लिया, और अनाया ने धीरे से कहा, "हमें तुम पर गर्व है, बेटा।" उस रात, जब वे घर लौटे, तो आहान बालकनी में खड़ा था। अनाया उसके पास आई और बोली, "क्या सोच रहे हो?" आहान ने मुस्कुराकर कहा, "बस, यही कि हमने एक-दूसरे का हाथ कभी नहीं छोड़ा, और इसी ने हमें यहाँ तक पहुँचाया।" अनाया ने हल्के से उसका हाथ थाम लिया और कहा, "और कभी छोड़ेंगे भी नहीं।" दिल्ली की वही हवाएँ, वही शहर, लेकिन अब उनकी कहानी सिर्फ प्यार की नहीं थी, बल्कि विश्वास, संघर्ष और एक खूबसूरत परिवार की मिसाल बन चुकी थी। chapter 21 कुछ साल और बीत गए। अब आव्या कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर चुकी थी और अपने ब्रांड को और ऊँचाइयों तक ले जा रही थी। आहान और अनाया ने भी अपनी ज़िंदगी को और बेहतर बनाने के लिए बिजनेस के साथ-साथ परिवार को भी बराबर समय देना सीख लिया था। एक दिन, आहान अपने ऑफिस में बैठा था, जब अनाया ने उसे कॉल किया। "तुम अभी कहाँ हो?" आहान ने मुस्कुराते हुए कहा, "ऑफिस में हूँ, लेकिन तुम्हारी आवाज़ सुनकर लग रहा है कि मुझे कहीं और होना चाहिए।" अनाया हँसकर बोली, "बिल्कुल सही समझे। आज एक बहुत ही खास दिन है, और तुम्हें घर जल्दी आना होगा।" आहान थोड़ा चौंका, "खास दिन? कोई बर्थडे या एनिवर्सरी तो नहीं भूल गया मैं?" अनाया ने रहस्यमयी अंदाज़ में कहा, "बस जल्दी आ जाओ, फिर सब पता चल जाएगा।" आहान तुरंत घर पहुँचा। जैसे ही उसने दरवाजा खोला, पूरा घर हल्की रोशनी से जगमगा रहा था। लिविंग रूम में अनाया और आव्या खड़ी थीं, दोनों की आँखों में एक खास चमक थी। आहान ने उत्सुकता से पूछा, "अब कोई बताएगा कि चल क्या रहा है?" अनाया मुस्कुराई और उसके हाथ में एक छोटा सा बॉक्स थमा दिया। आहान ने उलझन में बॉक्स खोला, और अंदर जो देखा, उसे देखकर उसकी आँखें चमक उठीं। वहाँ एक छोटी सी बेबी शूज़ थी और साथ में एक नोट—"जल्द ही, तुम्हारे प्यार का एक और छोटा सा हिस्सा तुम्हारी ज़िंदगी में आने वाला है।" आहान की आँखें हैरानी और खुशी से भर गईं। उसने अनाया की तरफ देखा, और वह धीरे से सिर झुका कर मुस्कुराई। "तुम... तुम प्रेग्नेंट हो?" आहान की आवाज़ भावनाओं से भारी हो गई थी। अनाया ने हल्के से सिर हिलाया। आहान ने तुरंत उसे गले लगा लिया, उसकी आँखों में खुशी के आँसू थे। आव्या भी कूदकर आई और चिल्लाई, "ओएमजी! मैं बड़ी बहन बनने वाली हूँ!" तीनों खुशी से गले मिले, और उस पल, आहान को महसूस हुआ कि ज़िंदगी ने उसे सबसे खूबसूरत तोहफा दिया है। दिल्ली की वही हवाएँ, वही प्यार, लेकिन अब उनकी कहानी में एक नया अध्याय जुड़ चुका था—एक और नन्हा मेहमान, जो उनकी दुनिया को और भी खूबसूरत बनाने वाला था।chapter 22कुछ महीनों बाद, अनाया की प्रेग्नेंसी का आखिरी महीना आ गया था। घर में सब कुछ बदल गया था—आहान अब बिज़नेस से ज्यादा समय अनाया और आव्या के साथ बिताने लगा था, और आव्या तो पूरे समय अपनी मम्मा का ख्याल रखने में लगी रहती थी। एक रात, अनाया को अचानक तेज़ दर्द होने लगा। आहान तुरंत घबराया, लेकिन खुद को संभालते हुए अस्पताल लेकर दौड़ा। रास्ते में, अनाया की आँखें बंद हो रही थीं, लेकिन आहान ने उसका हाथ पकड़कर कहा, "मैं यहीं हूँ, अनाया, कुछ नहीं होगा। बस थोड़ा और हिम्मत रखो!" अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों ने अनाया को अंदर ले लिया। आहान और आव्या बाहर बेचैनी से टहल रहे थे। हर सेकंड भारी लग रहा था। कुछ घंटों बाद, डॉक्टर बाहर आए और मुस्कुराकर कहा, "मुबारक हो, एक प्यारी सी बेटी हुई है!" आहान और आव्या की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। आव्या तो खुशी से उछल पड़ी, "मैं बड़ी बहन बन गई!" आहान दौड़कर अंदर गया। अनाया बेड पर लेटी थी, और उसके पास एक नन्ही सी जान peacefully सो रही थी। आहान ने प्यार से उस नन्हे चेहरे को देखा—छोटे-छोटे हाथ, गुलाबी गाल, और मासूमियत से भरी एक प्यारी सी मुस्कान। उसने अनाया की तरफ देखा और हल्के से कहा, "यह हमारी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत तोहफा है।" अनाया ने थकी हुई मुस्कान के साथ कहा, "हाँ, और अब हमारी फैमिली पूरी हो गई।" आहान ने धीरे से अपनी बेटी को गोद में उठाया और फुसफुसाया, "प्यारी परी, तुम्हारा स्वागत है हमारी ज़िंदगी में।" आव्या ने पास आकर कहा, "पापा, नाम क्या रखेंगे इसका?" आहान ने अनाया की तरफ देखा, और दोनों मुस्कुराए। फिर आहान ने प्यार से कहा, "अन्वी। इसका नाम अन्वी होगा।" दिल्ली की वही हवाएँ, वही प्यार, लेकिन अब यह घर एक नए हँसते-खेलते सदस्य से भर चुका था। आहान, अनाया, आव्या और अब अन्वी—उनकी ज़िंदगी की कहानी अब एक नए, और भी खूबसूरत सफर पर थी।chapter 23समय बीतता गया, और अन्वी भी धीरे-धीरे बड़ी होने लगी। घर में अब पहले से भी ज्यादा रौनक थी। आव्या अपनी छोटी बहन से बहुत प्यार करती थी और उसकी हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान रखती थी। आहान और अनाया, दोनों अपनी दो बेटियों के साथ एक परफेक्ट फैमिली लाइफ जी रहे थे। एक दिन, अनाया सुबह-सुबह किचन में थी, जब अन्वी अपनी नन्ही टांगों से दौड़ते हुए आई और उसकी साड़ी पकड़कर बोली, "मम्मा… पापा कहाँ हैं?" अनाया हँस पड़ी, "पापा अपने ऑफिस गए हैं, लेकिन जल्दी आ जाएँगे।" अन्वी ने मुँह फुला लिया, "पापा को बोलो अब ऑफिस नहीं जाना!" तभी दरवाजे की घंटी बजी। अनाया ने दरवाजा खोला, तो सामने आहान खड़ा था, हाथ में ढेर सारे खिलौने और चॉकलेट्स लिए। अन्वी खुशी से उछल पड़ी और दौड़कर उसके पास पहुँच गई। आहान ने हँसकर उसे गोद में उठाया, "मेरी परी को पापा की याद आ रही थी?" अन्वी ने सिर हिलाया और कसकर उसे गले लगा लिया। आव्या भी कमरे से बाहर आई और मुस्कुराकर बोली, "पापा, अब आपको हमारे साथ ज्यादा टाइम बिताना चाहिए। अन्वी और मुझे आपकी बहुत याद आती है!" आहान ने प्यार से दोनों बेटियों को देखा और फिर अनाया की तरफ देखकर कहा, "शायद तुम लोग सही कह रहे हो। बिजनेस हमेशा रहेगा, लेकिन ये पल दोबारा नहीं आएँगे। अब मैं अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने के लिए काम कम कर दूँगा।" अनाया ने प्यार से उसका हाथ थाम लिया, "यही तो मैं हमेशा से चाहती थी।" उस दिन के बाद, आहान ने सच में अपने बिजनेस को थोड़ा स्लो कर दिया और ज्यादा से ज्यादा वक्त अपने परिवार के साथ बिताने लगा। एक शाम, वे सब छत पर बैठे थे। हल्की ठंडी हवा चल रही थी, और पूरा परिवार साथ बैठकर हँसी-मजाक कर रहा था। अन्वी अचानक बोली, "पापा, जब मैं बड़ी हो जाऊँगी, तो आप मुझसे भी उतना ही प्यार करेंगे जितना दीदी से करते हैं?" आहान ने मुस्कुराकर उसे गोद में उठाया और प्यार से कहा, "मेरी जान, तुम दोनों मेरी दुनिया हो। मैं तुम दोनों से बराबर प्यार करता हूँ, और हमेशा करता रहूँगा।" अनाया ने प्यार भरी नज़रों से अपने परिवार को देखा और सोचा कि ज़िंदगी कितनी खूबसूरत हो गई थी। दिल्ली की वही हवाएँ, वही शहर, लेकिन अब यह घर हँसी, प्यार और खुशियों से भर चुका था। उनका सफर मुश्किलों से भरा था, लेकिन अब उनके पास सबकुछ था—एक परफेक्ट परिवार, अनगिनत यादें और एक प्यार जो कभी खत्म नहीं होगा।chapter 24कुछ साल और बीत गए। अब आव्या कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर चुकी थी और अपने ब्रांड को इंटरनेशनल लेवल तक ले जा चुकी थी। वहीं, अन्वी भी अब स्कूल में टॉप कर रही थी और हर चीज़ में आगे रहती थी। आहान और अनाया अपनी बेटियों की तरक्की देखकर फूले नहीं समा रहे थे। एक दिन, घर में एक खास माहौल था। आव्या की ग्रेजुएशन सेरेमनी थी, और पूरा परिवार उसके कॉलेज पहुँचा। जब आव्या ने स्टेज पर जाकर अपना सर्टिफिकेट और गोल्ड मेडल लिया, तो अनाया की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। आहान ने गर्व से कहा, "देखो, हमारी बेटी ने क्या कमाल कर दिया!" सेरेमनी के बाद, आव्या दौड़कर अपने माता-पिता के पास आई और बोली, "मम्मा-पापा, यह अवॉर्ड सिर्फ मेरा नहीं है, यह आप दोनों का भी है। अगर आपने मुझे सपोर्ट नहीं किया होता, तो मैं यहाँ तक नहीं पहुँचती।" आहान ने मुस्कुराकर कहा, "बेटा, यह तो बस शुरुआत है। तुम्हें इससे भी ऊँचाइयों तक जाना है!" उस रात, घर में सेलिब्रेशन हुआ। अन्वी खुशी से कूदती हुई बोली, "दीदी, अब तुम क्या करने वाली हो?" आव्या ने मुस्कुराकर कहा, "अब मैं अपनी कंपनी को और बड़ा बनाने के लिए न्यूयॉर्क जा रही हूँ!" यह सुनकर घर में अचानक एक अजीब सा सन्नाटा छा गया। अनाया थोड़ी चिंतित हुई, "इतनी दूर…? क्या तुम यहाँ से काम नहीं कर सकती?" आव्या ने प्यार से उनका हाथ पकड़ा, "मम्मा, यह मेरे करियर के लिए बहुत जरूरी है। और मैं ज्यादा समय तक दूर नहीं रहूँगी। बस कुछ साल, फिर वापस आ जाऊँगी।" आहान ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "हम जानते हैं कि तुम जो भी कर रही हो, सही कर रही हो। हमें तुम पर गर्व है, बेटा। लेकिन हाँ, जब भी घर की याद आए, तो एक फोन कॉल दूर रहना!" आव्या ने अपने पापा को गले लगाया और बोली, "हमेशा!" कुछ हफ्तों बाद, एयरपोर्ट पर सबने आव्या को विदा किया। अन्वी अपनी बहन से लिपट गई और रोते हुए बोली, "जल्दी आना, दीदी!" आव्या ने मुस्कुराते हुए कहा, "पक्का!" आहान और अनाया ने एक-दूसरे की तरफ देखा। उनके चेहरे पर गर्व और थोड़ी उदासी दोनों थे। दिल्ली की वही हवाएँ, वही शहर, लेकिन अब उनके घर का एक हिस्सा उनसे दूर जा रहा था—एक नए सफर पर, एक नए सपने की ओर। लेकिन उन्हें यकीन था कि उनका प्यार और परिवार हमेशा जुड़ा रहेगा, चाहे दूरी कितनी भी हो।chapter 25कुछ साल और बीत गए। न्यूयॉर्क में रहकर आव्या ने अपनी कंपनी को ऊँचाइयों तक पहुँचा दिया था। अब वह एक सफल एंटरप्रेन्योर बन चुकी थी, लेकिन दिल्ली और अपने परिवार की यादें हमेशा उसके दिल में बसी रहती थीं। एक दिन, अनाया और आहान सुबह की चाय पी रहे थे जब दरवाजे की घंटी बजी। अन्वी दौड़कर दरवाजा खोलने गई, और जैसे ही उसने सामने देखा, उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। "दीदी!" वह चिल्लाई और आव्या से लिपट गई। आहान और अनाया ने भी आव्या को देखा और एक पल के लिए विश्वास नहीं हुआ। अनाया की आँखों में आँसू आ गए, "तू अचानक... बिना बताए?" आव्या ने हँसकर कहा, "मम्मा, सरप्राइज़ देना चाहती थी। अब मैं हमेशा के लिए वापस आ गई हूँ!" आहान ने उसे गले लगाते हुए कहा, "हमेशा?" आव्या ने सिर हिलाया, "हाँ पापा, मैंने अब अपने ब्रांड का हेडक्वार्टर दिल्ली में ही शिफ्ट कर दिया है। अब मुझे कहीं और जाने की जरूरत नहीं!" पूरा घर खुशियों से गूंज उठा। अन्वी खुशी से उछल पड़ी, "अब हमारी फैमिली फिर से पूरी हो गई!" वह दिन घर में जश्न जैसा था। आव्या की वापसी ने सबको फिर से एक कर दिया था। रात को, जब पूरा परिवार छत पर बैठा था, ठंडी हवा चल रही थी, और चाँदनी चारों ओर फैली थी, तब अनाया ने हल्के से कहा, "हमारी ज़िंदगी कितनी बदल गई, है ना?" आहान ने मुस्कुराकर कहा, "हाँ, लेकिन एक चीज़ कभी नहीं बदली—हमारा प्यार और हमारा परिवार।" आव्या ने अन्वी का हाथ पकड़कर कहा, "और अब हम हमेशा साथ रहेंगे!" दिल्ली की वही हवाएँ, वही शहर, वही घर—लेकिन अब यह और भी खुशियों से भर चुका था। उनका सफर मुश्किलों से भरा था, लेकिन प्यार और विश्वास ने हर दूरी को मिटा दिया था। अब उनकी कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं थी, बल्कि एक ऐसी मिसाल थी जो सिखाती थी कि सच्चा प्यार और परिवार हमेशा एक साथ रहते हैं, चाहे कितनी भी दूरियाँ क्यों न आ जाएँ।chapter 26कुछ समय और बीत गया। घर में खुशहाली थी, लेकिन अब सबकी ज़िंदगी नई राहों पर आगे बढ़ रही थी। आव्या ने अपनी कंपनी को इतना बड़ा बना लिया था कि वह अब भारत की टॉप बिजनेस वुमन में गिनी जाने लगी थी। दिल्ली में उसका ऑफिस शहर की सबसे ऊँची बिल्डिंग में था, और उसके नाम के चर्चे हर जगह थे। लेकिन सफलता के इस सफर में, उसने एक चीज़ का खास ख्याल रखा—वह अपने परिवार से कभी दूर नहीं हुई। एक दिन, जब आहान अपने ऑफिस से घर लौट रहा था, तभी उसे हार्टबीट तेज़ महसूस हुई। हल्की-सी बेचैनी होने लगी, लेकिन उसने इसे नज़रअंदाज़ कर दिया। घर पहुँचकर अनाया ने उसका चेहरा देखा और तुरंत समझ गई कि कुछ सही नहीं है। "आहान, तुम ठीक तो हो?" आहान ने हल्का सा मुस्कुराने की कोशिश की, "हाँ, बस थोड़ा थका हुआ महसूस कर रहा हूँ।" लेकिन अनाया संतुष्ट नहीं हुई। उसने आव्या को फोन किया और तुरंत डॉक्टर को बुलाने का फैसला किया। डॉक्टर ने आकर चेकअप किया और कहा, "थोड़ा स्ट्रेस ज्यादा हो गया है, आपको आराम की जरूरत है।" आव्या और अन्वी घबरा गईं। "पापा, आप अपना ध्यान क्यों नहीं रखते?" आव्या ने नाराज़गी से पूछा। आहान ने प्यार से उसकी तरफ देखा, "बेटा, मैं बिल्कुल ठीक हूँ। तुम लोग परेशान मत हो।" लेकिन इस घटना ने सबको झकझोर दिया। उस रात, जब अनाया और आहान अकेले बैठे थे, अनाया ने आहान का हाथ थामा और कहा, "अब तुम्हें अपने काम से थोड़ा ब्रेक लेना होगा। ज़िंदगी सिर्फ मेहनत करने के लिए नहीं होती, उसे जीने के लिए भी होती है।" आहान ने उसकी आँखों में देखा और महसूस किया कि वह सही कह रही थी। अगले दिन, आहान ने अपने ऑफिस में घोषणा कर दी कि अब वह बिजनेस से रिटायर होकर अपनी फैमिली के साथ समय बिताएगा। यह सुनकर पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। अब उनका समय घूमने, हँसी-मजाक करने और ज़िंदगी के छोटे-छोटे पलों को खुलकर जीने में बीतने लगा। एक शाम, जब पूरा परिवार छत पर बैठा था, ठंडी हवाएँ चल रही थीं और हल्की बारिश हो रही थी, तब अन्वी ने कहा, "पापा, अब आपको हमारे साथ हर जगह घूमना पड़ेगा!" आहान हँसकर बोला, "बिल्कुल, अब मैं सिर्फ तुम्हारा पापा हूँ, कोई बिजनेसमैन नहीं!" अनाया ने प्यार से आहान का हाथ पकड़ा और कहा, "यही तो मैं हमेशा से चाहती थी—एक ज़िंदगी, जहाँ हमारे पास सब कुछ हो, लेकिन सबसे ज्यादा हमारे अपने!" दिल्ली की वही हवाएँ, वही प्यार, वही परिवार—लेकिन अब यह और भी मजबूत हो चुका था। ज़िंदगी ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया था, और अब वे सिर्फ एक-दूसरे के साथ खुशियाँ बाँट रहे थे, बिना किसी फिक्र के।chapter 27समय अपनी रफ्तार से चलता गया। अब अन्वी भी कॉलेज जाने लगी थी और अपने पिता आहान की तरह बिजनेस में रुचि लेने लगी थी। उसने पढ़ाई के साथ-साथ आव्या की कंपनी में भी काम करना शुरू कर दिया था। पूरे परिवार को गर्व था कि अन्वी भी अपने भविष्य को लेकर उतनी ही गंभीर थी जितनी उसकी बहन। एक दिन, घर में हलचल मची हुई थी। आज आहान और अनाया की शादी की सालगिरह थी, और पूरे परिवार ने उनके लिए एक खास सरप्राइज़ प्लान किया था। शाम होते ही अनाया ने देखा कि पूरा घर खूबसूरत लाइट्स और फूलों से सजा हुआ था। उसने हैरानी से पूछा, "ये सब किसने किया?" आव्या मुस्कुराई, "मम्मा, यह सब आपके और पापा के लिए है। आज आप दोनों की शादी की 30वीं सालगिरह है, और यह सेलेब्रेट तो बनता है!" आहान ने हँसते हुए अनाया का हाथ थामा, "देखो, हमारी बेटियों ने हमें कितना बड़ा सरप्राइज़ दिया है!" सबने मिलकर एक खूबसूरत डिनर अरेंज किया था। चारों लोग एक साथ बैठे, बातें कर रहे थे, पुरानी यादें ताज़ा कर रहे थे। तभी अन्वी ने चुटकी लेते हुए कहा, "पापा, मम्मा से पहली बार कब मिले थे?" आहान ने अनाया की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए कहा, "यह बहुत पुरानी बात है, लेकिन अब भी ऐसे याद है जैसे कल की हो। तुम्हारी मम्मा मेरी जिंदगी में आईं और सब कुछ बदल गया।" अनाया ने हल्का सा सिर झुका लिया, उसकी आँखों में वही पुरानी चमक थी जो आहान को पहली बार पसंद आई थी। फैमिली के इस छोटे-से सेलिब्रेशन में इतनी खुशी थी कि लगा जैसे वक्त ठहर गया हो। रात के आखिर में, जब सभी अपने कमरों में जा रहे थे, अनाया ने हल्के से आहान का हाथ पकड़कर कहा, "अगर फिर से मौका मिले, तो क्या तुम मुझसे दोबारा शादी करोगे?" आहान ने मुस्कुराकर कहा, "हर जनम में, बिना किसी शक के!" दिल्ली की वही हवाएँ, वही प्यार, लेकिन अब और भी गहरा हो चुका था। उनका सफर लंबा था, उतार-चढ़ाव से भरा था, लेकिन आज वे वहाँ थे जहाँ उन्होंने हमेशा रहने का सपना देखा था—एक-दूसरे के साथ, एक परफेक्ट परिवार के साथ।chapter 28कुछ साल और बीत गए। अन्वी अब अपनी पढ़ाई पूरी कर चुकी थी और बिजनेस की दुनिया में कदम रखने के लिए पूरी तरह तैयार थी। आव्या पहले से ही अपने ब्रांड को ग्लोबल लेवल तक पहुँचा चुकी थी, और अब अन्वी भी उसी राह पर चलना चाहती थी। एक दिन, परिवार में एक नई हलचल मची। अन्वी ने घर में सबको इकट्ठा किया और कहा, "मैं अपना खुद का बिजनेस शुरू करना चाहती हूँ!" आहान ने गर्व से उसकी तरफ देखा, "यह तो बहुत अच्छी बात है, बेटा! लेकिन क्या सोचा है?" अन्वी ने उत्साह से बताया, "मैं एक नया स्टार्टअप लॉन्च करना चाहती हूँ, जो टेक्नोलॉजी और ई-कॉमर्स को मिलाकर एक इनोवेटिव प्लेटफॉर्म बनाएगा। मैंने इसके लिए रिसर्च कर ली है, और अब बस आपको सब समझाना है!" आव्या ने खुश होकर कहा, "ये तो शानदार आइडिया है, अन्वी! मैं तुम्हारी पूरी मदद करूँगी!" अनाया ने प्यार से उसकी तरफ देखा, "बेटा, तुम्हारा सपना बहुत बड़ा है, लेकिन याद रखना, सफलता के साथ ज़िम्मेदारी भी बढ़ती है।" अन्वी ने अपनी माँ का हाथ पकड़ा और कहा, "मम्मा, मैं जानती हूँ। लेकिन आप और पापा हमेशा मेरे साथ हो, तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ!" आहान ने गर्व से अपनी बेटी को देखा और कहा, "तुम्हारे इस सफर में मैं तुम्हारे साथ खड़ा हूँ, जैसे तुम्हारी माँ मेरे हर फैसले में मेरे साथ खड़ी रहीं।" कुछ महीनों बाद, अन्वी का स्टार्टअप लॉन्च हो गया। मीडिया, बिजनेस वर्ल्ड और सोशल मीडिया पर उसकी चर्चा होने लगी। वह जल्द ही एक सफल बिजनेस वुमन बन गई, और लोग उसे "द न्यू यंग टायकून" कहने लगे। फिर एक दिन, जब पूरा परिवार डिनर कर रहा था, अन्वी ने एक और सरप्राइज़ दिया, "मुझे एक बड़े इंटरनेशनल इन्वेस्टर से इन्वेस्टमेंट ऑफर मिला है! इसका मतलब है कि मेरा ब्रांड अब ग्लोबल होने जा रहा है!" आहान और अनाया की आँखों में गर्व के आँसू आ गए। आव्या ने उसे गले लगाया, "मैंने हमेशा सोचा था कि मैं अकेली ही फैमिली बिजनेस को आगे ले जाऊँगी, लेकिन अब मुझे पता है कि मेरे बाद इसे सँभालने वाली कोई और भी है!" दिल्ली की वही हवाएँ, वही परिवार, लेकिन अब उनकी कहानी नई ऊँचाइयों तक पहुँच चुकी थी। वे सिर्फ एक परिवार नहीं थे, बल्कि एक मिसाल बन चुके थे—प्यार, संघर्ष और सफलता की सबसे खूबसूरत मिसाल।chapter 29समय बीतता गया, और आहान और अनाया के लिए अब ज़िंदगी पहले से भी ज्यादा सुकून भरी हो गई थी। उनकी दोनों बेटियाँ न सिर्फ अपने-अपने करियर में सफल हो चुकी थीं, बल्कि परिवार के रिश्तों को भी उतनी ही खूबसूरती से सँभाल रही थीं। एक दिन, सुबह की चाय पीते हुए अनाया ने हल्की मुस्कान के साथ आहान से कहा, "समझ ही नहीं आता, कब हमारी छोटी-छोटी बेटियाँ इतनी बड़ी हो गईं। कल तक आव्या स्कूल जाती थी, और आज वह एक ग्लोबल ब्रांड की मालकिन है। अन्वी की शरारतें कभी खत्म नहीं होती थीं, और आज वह एक इंटरनेशनल बिजनेस लीडर बन गई है।" आहान ने हँसते हुए कहा, "हाँ, और तुम्हें याद है, जब हम पहली बार मिले थे? हमने सोचा भी नहीं था कि ज़िंदगी हमें यहाँ तक ले आएगी।" अनाया ने प्यार से कहा, "लेकिन इस सफर का सबसे खूबसूरत हिस्सा यह है कि हमने इसे एक-दूसरे के साथ जिया।" उसी शाम, पूरा परिवार एक साथ डिनर टेबल पर बैठा था। अन्वी और आव्या अपने बिजनेस की बातें कर रही थीं, लेकिन तभी अन्वी ने एक चौंकाने वाली घोषणा की, "मम्मा-पापा, मुझे आपसे एक जरूरी बात करनी है!" सबने उत्सुकता से उसकी तरफ देखा। "मैंने शादी करने का फैसला किया है!" अन्वी ने हल्की मुस्कान के साथ कहा। कमरे में एक पल के लिए सन्नाटा छा गया, फिर आव्या ने मज़ाक में कहा, "अरे वाह! यह तो सरप्राइज़ है!" आहान ने थोड़ा गंभीर होकर पूछा, "तुम पूरी तरह से तैयार हो? और लड़का कौन है?" अन्वी ने सिर हिलाया, "हाँ पापा, मैं पूरी तरह से तैयार हूँ। वह मेरे बिजनेस पार्टनर में से एक है, और सबसे जरूरी बात—वह मुझे समझता है और मेरी रिस्पेक्ट करता है।" अनाया ने प्यार से उसकी ओर देखा और कहा, "अगर तुम खुश हो, तो हमें और क्या चाहिए?" पूरे घर में फिर से एक नई हलचल मच गई। तैयारियाँ शुरू हो गईं, और शादी की तारीख तय कर दी गई। दिल्ली की हवाओं में एक बार फिर खुशियों की महक फैल गई। शादी का दिन आ गया। आहान ने अन्वी का हाथ पकड़कर कहा, "बेटा, आज तू सिर्फ मेरी बेटी नहीं, बल्कि किसी की ज़िंदगी का सबसे कीमती हिस्सा बनने जा रही है। लेकिन याद रखना, हमारा घर हमेशा तेरा रहेगा!" अन्वी की आँखों में आँसू आ गए, "पापा, मैं कभी आपसे दूर नहीं हो सकती!" शादी धूमधाम से हुई, और पूरा परिवार खुशी से झूम उठा। कुछ साल बाद, आहान और अनाया अपने पोते-पोतियों के साथ खेल रहे थे। उनके चेहरे पर सुकून था—उन्होंने अपनी ज़िंदगी में जो सपना देखा था, वह अब हकीकत बन चुका था। दिल्ली की वही हवाएँ, वही घर, वही प्यार—लेकिन अब यह परिवार और भी बड़ा और खुशहाल हो चुका था।chapter 30समय ने करवट ली, और अब आहान और अनाया अपनी जिंदगी के सबसे सुकून भरे दौर में थे। उनके चारों ओर खुशियाँ थीं, उनकी बेटियाँ अपने-अपने जीवन में सफल थीं, और अब उनका परिवार पहले से भी बड़ा हो चुका था। एक दिन, आहान सुबह की चाय पी रहे थे, जब अनाया उनके पास आई और बोली, "अब तुम्हें बिजनेस की कोई चिंता नहीं करनी चाहिए। हमारी बेटियाँ इतनी सक्षम हैं कि वे सब कुछ सँभाल सकती हैं। अब हमें अपनी जिंदगी सिर्फ जीनी चाहिए, बिना किसी टेंशन के।" आहान मुस्कुराए, "तो फिर क्या ख्याल है, कहीं घूमने चलें?" अनाया ने चौंककर कहा, "अरे, अब इस उम्र में?" आहान ने हँसते हुए कहा, "और क्या! ज़िंदगी का असली मज़ा अब लेना चाहिए। बच्चों को अपनी जिंदगी में व्यस्त रहने दो, और हम अपनी नई जर्नी शुरू करते हैं।" आव्या और अन्वी को जब यह पता चला, तो वे भी बहुत खुश हुईं। "पापा, आपको और मम्मा को यह ब्रेक बहुत पहले ले लेना चाहिए था!" अन्वी ने मज़ाक में कहा। आहान और अनाया ने अपने सफर की शुरुआत की। कभी मनाली की बर्फीली वादियों में, तो कभी राजस्थान के महलों में, कभी समुद्र किनारे गोवा में, तो कभी विदेशी धरती पर नई जगहों को एक्सप्लोर करते हुए। हर जगह से वे अपनी बेटियों के लिए गिफ्ट्स और यादें लेकर आते। एक दिन, जब वे पेरिस की सड़कों पर घूम रहे थे, अनाया ने हल्के से आहान का हाथ थामा और बोली, "हमारी शादी को इतने साल हो गए, लेकिन ऐसा लगता है जैसे कल ही की बात हो।" आहान ने प्यार से उसकी तरफ देखा और कहा, "क्योंकि हमारे बीच प्यार आज भी वैसा ही है, जैसा पहली बार था।" समय के साथ, वे दिल्ली लौट आए। अब उनका ज़्यादातर समय अपने पोते-पोतियों के साथ बीतता था, कहानियाँ सुनाने में, पुराने दिनों को याद करने में, और सबसे जरूरी—प्यार बाँटने में। एक शाम, जब पूरा परिवार छत पर बैठा था, हल्की ठंडी हवा चल रही थी, और आसमान में सितारे चमक रहे थे, तब अन्वी ने कहा, "पापा, आपकी और मम्मा की लव स्टोरी एक फिल्म से कम नहीं है!" आव्या ने मुस्कुराते हुए कहा, "और यह सबसे खूबसूरत फिल्म है, जिसका एंड कभी नहीं होगा!" दिल्ली की वही हवाएँ, वही परिवार, वही प्यार—लेकिन अब यह एक पूरी तरह से संपूर्ण कहानी बन चुकी थी। एक ऐसी कहानी, जो सिर्फ एक बिजनेसमैन और गरीब लड़की के प्यार की नहीं थी, बल्कि एक परिवार, संघर्ष, सफलता और हमेशा साथ निभाने के वादे की थी।chapter 31समय बीतता गया, लेकिन आहान और अनाया का प्यार वैसा ही बना रहा। उनके घर में अब हर तरफ हँसी-खुशी थी। पोते-पोतियों के साथ खेलते हुए उन्हें अपने पुराने दिन याद आ जाते। एक दिन, जब आहान अपनी पुरानी डायरी पढ़ रहे थे, अनाया ने मुस्कुराते हुए पूछा, "क्या देख रहे हो?" आहान ने हल्के से हँसते हुए कहा, "हमारी कहानी। जब पहली बार तुमसे मिला था, जब पहली बार तुम्हें अपने दिल की बात बताई थी, जब हमने पहली बार हाथ पकड़ा था... सब कुछ यहाँ लिखा है।" अनाया ने प्यार से डायरी को देखा और कहा, "अगर हमें फिर से मौका मिले, तो क्या तुम मुझे फिर से अपनी जिंदगी में चुनोगे?" आहान ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, "हर बार, हर जनम में, बिना एक पल सोचे।" उनकी पोती, छोटी आरुषि, जो पास ही खेल रही थी, दौड़कर आई और बोली, "नानी, नाना, आप दोनों की लव स्टोरी तो सबसे बेस्ट है!" सब हँस पड़े। आहान ने अपनी पोती को गोद में उठाया और कहा, "सच्चा प्यार ऐसा ही होता है, बेटा। यह वक्त के साथ बढ़ता जाता है, कभी खत्म नहीं होता।" वह शाम खास थी। पूरा परिवार एक साथ बैठा, बीते हुए पलों को याद कर रहा था। आहान और अनाया एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए आसमान के उन सितारों को देख रहे थे, जिनके नीचे कभी उनकी प्रेम कहानी की शुरुआत हुई थी। आज उनकी कहानी मुकम्मल थी—प्यार, संघर्ष, सफलता और परिवार से भरी हुई। दिल्ली की वही हवाएँ बह रही थीं, लेकिन अब वे और भी प्यारी लग रही थीं, क्योंकि उन्होंने एक ऐसी कहानी देखी थी, जो कभी खत्म नहीं होने वाली थी।chapter 32आहान और अनाया अब अपने जीवन के सबसे खूबसूरत पड़ाव पर थे। उन्होंने जो सपने देखे थे, वे पूरे हो चुके थे। उनकी बेटियाँ सफल थीं, परिवार खुशहाल था, और उनकी अपनी प्रेम कहानी वक्त के साथ और गहरी होती जा रही थी। एक दिन, अन्वी ने घर में सबको इकट्ठा किया और एक बड़ी घोषणा की, "मम्मा-पापा, मैं और आरव पेरिस शिफ्ट होने का सोच रहे हैं!" पूरा घर कुछ पलों के लिए शांत हो गया। आहान और अनाया ने एक-दूसरे की तरफ देखा। आहान ने हल्की मुस्कान के साथ पूछा, "क्या तुमने यह अच्छे से सोचा है, बेटा?" अन्वी ने सिर हिलाया, "हाँ, पापा। आरव को वहाँ एक बेहतरीन जॉब का ऑफर मिला है, और मुझे भी अपने बिजनेस को इंटरनेशनल लेवल पर ले जाना है। यह हमारे करियर के लिए बहुत अच्छा होगा।" अनाया की आँखों में हल्की नमी थी, लेकिन उसने मुस्कुराते हुए कहा, "अगर यह तुम्हारे सपनों के लिए जरूरी है, तो हमें कोई शिकायत नहीं। बस एक वादा करो कि हमसे बार-बार मिलने आओगे।" अन्वी ने अपनी माँ को गले लगा लिया, "आपसे दूर रहने का सवाल ही नहीं, मम्मा!" कुछ ही महीनों में, अन्वी और आरव पेरिस चले गए। शुरू में घर थोड़ा सूना लगने लगा, लेकिन वीडियो कॉल्स और मुलाकातों ने दूरियों को कभी बढ़ने नहीं दिया। एक दिन, आव्या ने आहान और अनाया को एक और खुशखबरी दी, "मम्मा-पापा, अब आपको दादा-दादी ही नहीं, बल्कि नाना-नानी भी बनने का मौका मिलने वाला है!" अनाया की आँखों में खुशी के आँसू आ गए, "सच? हमारी फैमिली और बड़ी होने वाली है?" आहान ने आव्या को गले लगा लिया, "यह हमारी जिंदगी का सबसे खूबसूरत तोहफा है!" समय बीतता गया, और घर में फिर से नन्ही किलकारियाँ गूंजने लगीं। आहान और अनाया ने अपनी जिंदगी के इस नए सफर को भी खुलकर जिया, अपनी पोती के साथ खेलते, कहानियाँ सुनाते और ढेर सारी यादें बनाते। एक शाम, जब पूरा परिवार एक साथ बैठा था, आहान ने अनाया का हाथ थामा और कहा, "हमने बहुत कुछ देखा, बहुत कुछ पाया, लेकिन जो सबसे खास चीज़ है, वह यह परिवार है।" अनाया ने मुस्कुराकर कहा, "और यह प्यार, जो कभी कम नहीं होगा।" दिल्ली की वही हवाएँ बह रही थीं, लेकिन अब वे और भी खास लग रही थीं, क्योंकि उन्होंने एक ऐसी कहानी देखी थी, जो पीढ़ियों तक याद रखी जाएगी—एक कहानी, जिसमें प्यार, संघर्ष, सफलता और परिवार के साथ बिताए खूबसूरत पल थे।chapter 33समय अपनी रफ़्तार से चलता रहा, लेकिन आहान और अनाया की ज़िंदगी में हर दिन एक नई खुशी लेकर आता। उनके घर की दीवारों पर अब बच्चों की हंसी गूँजती थी, पोते-पोतियाँ उनके इर्द-गिर्द दौड़ते रहते थे, और उनका घर सचमुच एक जन्नत बन चुका था। एक शाम, जब आहान अपने पुराने एल्बम देख रहे थे, अनाया उनके पास बैठ गई। "क्या ढूंढ रहे हो?" उसने हल्की मुस्कान के साथ पूछा। आहान ने एक पुरानी फोटो निकाली, जिसमें वे दोनों अपने जवानी के दिनों में थे—दिल्ली की सड़कों पर, बारिश में भीगते हुए, ज़िंदगी के सपने बुनते हुए। "याद है, जब पहली बार तुम्हें चाय पिलाने ले गया था?" आहान ने हँसते हुए कहा। अनाया भी हँस पड़ी, "हाँ, और तुमने कहा था कि तुम्हें अच्छी चाय बनानी नहीं आती, लेकिन अगर मैं चाहूँ, तो तुम ज़िंदगी भर मेरे लिए चाय बनाना सीख सकते हो।" आहान ने मज़ाक में कहा, "और मैंने वादा पूरा किया! आज भी मैं तुम्हारे लिए चाय बनाता हूँ, और हमेशा बनाऊँगा!" दोनों ठहाका मारकर हँस पड़े। इस बीच, उनकी पोती आरुषि दौड़ती हुई आई और बोली, "नानी, नाना, आप दोनों की लव स्टोरी सबसे बेस्ट है!" अनाया ने हँसकर उसे गोद में उठा लिया, "और यह स्टोरी कभी खत्म नहीं होगी, मेरी जान!" पूरे परिवार ने एक साथ डिनर किया, और सबने पुरानी यादें ताजा कीं। उनकी बेटियाँ अब अपने बच्चों को वही संस्कार सिखा रही थीं, जो उन्होंने अपने माता-पिता से सीखे थे—प्यार, संघर्ष, और रिश्तों की अहमियत। रात को, जब आहान और अनाया छत पर बैठे थे, ठंडी हवा चल रही थी, और दिल्ली की लाइट्स दूर तक चमक रही थीं, अनाया ने हल्के से कहा, "आहान, अगर ज़िंदगी हमें फिर से कोई नया सफर शुरू करने का मौका दे, तो क्या तुम मेरे साथ चलोगे?" आहान ने उसका हाथ थामा, उसकी आँखों में देखा, और धीरे से कहा, "हर बार, हर जनम में, तुम्हारे साथ ही रहूँगा।" दिल्ली की वही हवाएँ, वही प्यार, लेकिन अब और भी गहरा और सुकून भरा। उनका सफर खत्म नहीं हुआ था—बल्कि यह सफर आगे भी ऐसे ही चलता रहेगा, हर बीते पल की तरह खूबसूरत, हर आने वाले कल की तरह उज्जवल।chapter 34कुछ साल और बीत गए। आहान और अनाया अब अपने जीवन की संध्या बेला में थे, लेकिन उनका प्यार और साथ पहले की तरह ही मजबूत था। उनके घर में हमेशा चहल-पहल बनी रहती। पोते-पोतियाँ बड़े हो रहे थे, बेटियाँ अपने परिवारों के साथ खुशहाल थीं, और आहान-अनाया हर दिन को एक नई सौगात की तरह जी रहे थे। एक दिन, अनाया बालकनी में बैठी चाय पी रही थी, जब आहान उसके पास आए और बोले, "तुम्हें पता है, मैंने ज़िंदगी में बहुत कुछ हासिल किया, लेकिन मेरी सबसे बड़ी जीत तुम हो।" अनाया ने मुस्कुरा कर कहा, "और मेरी सबसे बड़ी खुशी यह है कि मैंने अपना पूरा जीवन तुम्हारे साथ जिया।" आहान ने पास बैठकर उसका हाथ थामा, "याद है, जब पहली बार इस शहर में कदम रखा था? हम दोनों के पास कुछ भी नहीं था, सिर्फ सपने थे। लेकिन आज देखो, हमारे पास सिर्फ दौलत ही नहीं, बल्कि एक खूबसूरत परिवार भी है।" अनाया ने सिर हिलाया, "हाँ, और सबसे बड़ी बात, हमारा साथ।" उसी शाम, पूरा परिवार एक साथ बैठा था। आव्या और अन्वी अपने बच्चों के साथ व्यस्त थीं, पोते-पोतियाँ दादा-दादी की कहानियाँ सुनने के लिए उत्सुक थे। आरुषि ने पूछा, "नाना, नानी, आपकी लव स्टोरी का सबसे खूबसूरत पल कौन सा था?" आहान ने मुस्कुराकर कहा, "हर वो पल, जो मैंने तुम्हारी नानी के साथ जिया।" अनाया की आँखों में नमी आ गई, लेकिन उनके चेहरे पर संतोष की मुस्कान थी। कुछ दिनों बाद, आहान की तबीयत थोड़ी खराब रहने लगी। डॉक्टरों ने कहा कि अब उन्हें ज्यादा आराम की जरूरत है। लेकिन आहान हमेशा की तरह बेपरवाह थे। एक रात, जब वे बिस्तर पर लेटे थे, अनाया ने उनका हाथ पकड़कर कहा, "तुम वादा करो, हमेशा मेरे साथ रहोगे।" आहान ने मुस्कुराकर उसकी आँखों में देखा और कहा, "तुम जहाँ जाओगी, मैं वहाँ पहले से मौजूद रहूँगा।" उनकी आँखों में वही प्यार था, जो बरसों पहले था। अगली सुबह, जब सूरज की हल्की किरणें कमरे में आईं, अनाया ने आहान को हल्के से पुकारा। लेकिन वे अब गहरी नींद में थे—एक ऐसी नींद, जिससे अब कोई नहीं जगा सकता था। घर में शांति थी, लेकिन दिलों में हलचल। पूरा परिवार शोक में था, लेकिन अनाया शांत थी। उसने रोते हुए अपने पोते-पोतियों को गले लगाया और कहा, "तुम्हारे नाना कहीं नहीं गए। वे हमेशा हमारे साथ रहेंगे—हमारी यादों में, हमारे दिलों में, हर उस लम्हे में जो हमने उनके साथ जिया।" कुछ दिनों बाद, अनाया उनकी पुरानी डायरी लेकर बैठी। उसमें लिखा था— "अगर इस जन्म के बाद भी मुझे कोई दूसरा जीवन मिले, तो मैं फिर से तुम्हारे पास आऊँगा, तुम्हारा हाथ पकड़ूँगा, और फिर से वही कहानी शुरू होगी—आहान और अनाया की कहानी।" अनाया ने हल्की मुस्कान के साथ आसमान की ओर देखा, मानो कह रही हो, "मैं इंतज़ार करूँगी, आहान। अगले जन्म में फिर से मिलेंगे।" दिल्ली की हवाएँ अब भी वही थीं, लेकिन आज वे भी थोड़ी उदास लग रही थीं।chapter 35समय बीतता गया, लेकिन अनाया की दुनिया वहीं ठहर गई थी, जहाँ आहान ने उसे छोड़ा था। उनके बिना घर सूना लगता, उनकी हँसी, उनकी बातें, उनकी हर आदत अब बस यादों में थी। लेकिन अनाया कमजोर नहीं पड़ी। उसने खुद को टूटने नहीं दिया, क्योंकि वह जानती थी कि आहान उसे हमेशा मजबूत देखना चाहते थे। हर सुबह वह आहान की डायरी पढ़ती, उनके साथ बिताए पलों को दोबारा जीती। उनके पोते-पोतियाँ अब बड़े हो चुके थे, और वे सब अपनी नानी का खास ख्याल रखते थे। एक दिन, आरुषि ने उनसे कहा, "नानी, आपको दादू की बहुत याद आती है ना?" अनाया ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "याद? बेटा, वो गए ही कहाँ हैं? वो तो यहीं हैं, मेरे आसपास, हर जगह। इस हवा में, इन लम्हों में, हर उस एहसास में, जो मैंने उनके साथ जिया।" आरुषि उनकी गोद में सिर रखकर लेट गई, "क्या सच में सच्चा प्यार कभी खत्म नहीं होता?" अनाया ने प्यार से उसके बालों में हाथ फेरा, "नहीं, बेटा। सच्चा प्यार कभी खत्म नहीं होता, वह बस एक रूप से दूसरे रूप में बदलता रहता है। जैसे तुम्हारे दादू अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका प्यार आज भी मेरे साथ है, मेरी हर धड़कन में, हर सांस में।" समय बीतता रहा, और अनाया ने अपनी बाकी जिंदगी अपने परिवार, अपने बच्चों और पोते-पोतियों के साथ बिताई। उसने आहान की यादों को अपने जीवन का सबसे खूबसूरत हिस्सा बनाकर रखा, लेकिन कभी खुद को अकेला महसूस नहीं होने दिया। एक दिन, जब वह अपनी कुर्सी पर बैठी आहान की डायरी पढ़ रही थी, उसकी आँखें धीरे-धीरे बंद होने लगीं। उसने हल्की मुस्कान के साथ आसमान की ओर देखा, और जैसे ही उसकी सांसों की डोर ढीली पड़ी, उसे ऐसा लगा मानो कोई उसे बुला रहा हो। उसकी आत्मा हल्की हो गई थी, जैसे कोई उसे बाहों में समेट रहा हो। और अगले ही पल, वह फिर से उसी जगह थी—जहाँ एक बार उसने और आहान ने अपनी प्रेम कहानी शुरू की थी। आहान सामने खड़े थे, बिल्कुल वैसे ही जैसे बरसों पहले थे। उनकी आँखों में वही चमक, वही प्यार। उन्होंने हाथ बढ़ाया और मुस्कुराकर कहा, "मैंने कहा था ना, मैं तुम्हें लेने आऊँगा?" अनाया की आँखों से आँसू बह निकले, लेकिन यह खुशी के आँसू थे। उसने बिना कोई सवाल किए अपना हाथ बढ़ाया और आहान का हाथ थाम लिया। दिल्ली की हवाएँ एक बार फिर से गवाही दे रही थीं—एक अमर प्रेम कहानी की, जो इस जन्म में खत्म नहीं हुई थी, बल्कि किसी और जन्म में, किसी और वक्त में फिर से शुरू होने वाली थी।The End...Hello Readers..आपलोग को यह कहानी कैसी लगी।आप लोग कमेन्ट करके बताए।