hindi Best Moral Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • महामाया - 20

    महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – बीस समाधि का वक्त नजदीक आता जा रहा था। समाधि स्...

  • आधी दुनिया का पूरा सच - 9

    आधी दुनिया का पूरा सच (उपन्यास) 9. हृदय में भय और विवशता तथा चेहरे पर कृत्रिम मु...

  • किस्से कोरोना के

    नमस्कार पाठक मित्रों हम आपको किस्से कोरोना में आपको कोरोना से जुड़े किस्से बताएग...

बडी प्रतिमा - 6 By Sudha Trivedi

बडी प्रतिमा (6.) गीतू की तिकडी में जो प्यारी-सी अंजना थी, जिसे सब छोटी अंजना बुलाते थे, जो कुंवारी थी, जिसकी मां गवर्नमेंट हाई स्कूल की शिक्षिका थीं - उसके चार हजार रुपए नहीं मिल र...

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चाचाजी का अधूरा उपन्यास By Shushant Shupriy

चाचाजी का अधूरा उपन्यास सुशांत सुप्रिय चाचाजी हिंदी साहित्य में एक बड़ा नाम थे । उन्होंने दर्जनों कथा-संग्रह, काव्य-संग्रह व उपन्यास लिखे थे । उनकी आलोचनात्मक किताबों ने कई स्थापित...

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आधा आदमी - 14 By Rajesh Malik

आधा आदमी अध्‍याय-14 ‘‘अरे पहिले घूम तो लूँ फेर देखी जाईगी.‘‘ ‘‘जईसी तेरी मरजी.‘‘ जजमानी में मिलें बधाई के पैसे से बेटी अम्मा ने सभी के साथ-साथ मुझे भी बाँटा दिया। मैंने बाँटा लेकर...

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महामाया - 20 By Sunil Chaturvedi

महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – बीस समाधि का वक्त नजदीक आता जा रहा था। समाधि स्थल पर तीनों माताएँ पहुँच चुकी थी। वे आँख बंद किये जोर-जोर से ऊँ नमः शिवाय का जाप कर रही थी। अखिल, अन...

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होने से न होने तक - 35 By Sumati Saxena Lal

होने से न होने तक 35. जितनी आसानी से और जितनी जल्दी यश ने हॉ कर दी थी उसको ले कर मन में बाद तक कुछ चुभता रहा था। क्या यश मेरी तरफ से ही आग्रह किए जाने की प्रतीक्षा कर रहे थे ताकि क...

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केसरिया बालम - 2 By Hansa Deep

केसरिया बालम डॉ. हंसा दीप 2 बरगद की छाँव तले जिस दिन वह आने वाला था, सब दौड़ रहे थे इधर से उधर, घर वाले भी, घर के नौकर भी। योजनाबद्ध था सब कुछ, पहले पानी, फिर चाय-नाश्ता, उसके बाद...

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समंदर और सफेद गुलाब - 1 - 1 By Ajay Sharma

समंदर और सफेद गुलाब पहला दिन 1 शताब्दी टे्रन को मैंने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया और मैट्रो टे्रन लेने के लिए मैट्रो स्टेशन की तरफ बढऩे लगा। ट्रॉली बैग को पहियों पर घसीटता...

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आधी दुनिया का पूरा सच - 9 By Dr kavita Tyagi

आधी दुनिया का पूरा सच (उपन्यास) 9. हृदय में भय और विवशता तथा चेहरे पर कृत्रिम मुस्कान लेकर आज साँवली का झुग्गी के उस प्रतिबंधित भाग में प्रवेश हुआ था, जिसमें झाँकना भी आज से कुछ दि...

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डरना मना है By Anju Sharma

पौ फटने के समय ही निकल जाता है बसंत घर से पर आज थोड़ा लेट हो गया! सड़क पर थोड़ी बहुत आवाजाही शुरू हो चुकी थी! शुक्र है कि झाड़ू लगना अभी शुरू नहीं हुई थी वरना उसकी किस्मत पर भी फिर...

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धरती तुम बदल गईं By Mita Das

धरती तुम बदल गईं शाम का धुंधलका और गहरा हो चला था । स्ट्रीट लाइटें ऑन हो चुकी थीं । रविवार की शाम थी, दूरदर्शन पर शाम की फिल्म चल रही थी । सारे कालोनी के लोग कड़कड़ाती ठण्ड में शाम प...

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सुहागिन या विधवा - 4 By Kishanlal Sharma

उसकी राधा के छोटे भाई की पत्नी बन जाने पर उसे गहरा सदमा लगा था।उसे एक ही बात कचोटती रहती।राधा ने इस निर्णय का विरोध क्यो नही किया?राधा की यादों को दिल से निकालने के लिए उसने शराब...

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किस्से कोरोना के By Heena_Pathan

नमस्कार पाठक मित्रों हम आपको किस्से कोरोना में आपको कोरोना से जुड़े किस्से बताएगे ! मानवता के ऊपर सबसे बड़े संकट के रुप में मंडरा रहे कोरोना महामारी को हराने के लिए डॉक्टर अचानक स...

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कहानी ‘शम्मा दुलदुल वाला By ramgopal bhavuk

कहानी ‘शम्मा दुलदुल वाला’ रामगोपाल भावुक शम्मा का पूरा नाम तो श्यामलाल धानुक है। लेकिन लोग उसे शम्मा बरार के नाम से पुकारते हैं। वह शादी-ब्याह में पैत्रिक सम्पति के रूप में प्राप्त...

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मानव का खोखला जिवन By रनजीत कुमार तिवारी

जिवन अनमोल है, यूं व्यर्थ न गवाइए।अपने कुछ पल मानवता में भी लगाइए।।धरा है पाप से सहमी,आओ मिलकर उद्धार करें।मातृभूमि की रक्षा करें,ऐसा मन में सब बिचार करें।।हवा हो गयी है दुषित, पेड...

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मॉरीशस किनारे.... By Dr Jaya Anand

आज साँची गंगा तलाव मे पाँव डाले विचारों की लहरों में डूबती उतराती जा रही थी ।गंगा तलाव मॉरीशस की वो जगह जहाँ पहुंच कर एक छोटा भारत दिखाई पड़ता है। बिल्कुल अपना सा ,वही अति सुंदर शि...

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खब्बू वीर By Priyan Sri

इस पावन भूमि भारत में समय-समय पर महापुरुषों ने जन्म लिया है। जो अपने चमत्कारों द्वारा इस नश्वर संसार में भी अमर हो जाते हैं और आने वाली पीढ़ियाँ उनकी गुण-गाथा गाती हैं...ऐसे ही एक...

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फिर मिलेंगे... कहानी - एक महामारी से लॉक डाउन तक - 11 By Sarvesh Saxena

शहर के शहर सन्नाटे में डूबे थे, हर तरफ एक सन्नाटे का शोर था वो लोगों के रोने का बिलखने का शोर था, नियति हंस रही थी मानव पर, दिन-रात प्रकृति को असंतुलित करने वाले मानव आज एक लाचार द...

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ग्रामीण बच्चियां और उनका बचपन By Pragya Chandna

मैं एक शिक्षक हूं। मेरी पोस्टिंग एक ग्रामीण इलाके में है। मेरा स्कूल को-एड है, जैसा कि अमूमन हर शासकीय स्कूल होता है। हमारे देश में हालांकि बाल-विवाह कानूनन अपराध है, पर अभी भी ग्...

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दाता By Poonam Singh

कहानी " दाता " "बच्चें सो गए क्या ?" पिता ने चिंतित स्वर में पूछा। " हाँ अभी अभी सोए हैं।" "समझ रहा हूँ.., भूख से नींद तो आई नहीं होगी तूने मार डपटकर सुला दिया होगा।" "अब हम लोग...

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एक ही भूल, भाग २ By Saroj Prajapati

सीमा को पुरानी बातें याद आने लगी। रज्जो उसके ही गांव की थी। रजनी नाम था इसका। सब इसे रज्जो कहते थे। रज्जो के परिवार में उसके अलावा, माता पिता व भाई था। पिता सब्जी का ठेला लगाते थे...

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गंगादेई By Pranava Bharti

गंगादेई --------- उम्र का एक पड़ाव पार कर लेने पर मनुष्य न जाने क्यों अपनी पिछली ज़िंदगी में झाँकता ज़रूर है,वह स्थिर रह ही नहीं पाता | वैसे ज़िंदगी का अटूट सत्य...

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उर्वशी - 1 By Jyotsana Kapil

उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 1 " यह क्या कर डाला तुमने " उसने एक बार विस्फारित नेत्रों से भूमि पर पड़ा भाई का मृत शरीर देखा और एक बार छोटी बहन की ओर दृष्टि डाली " तुमने उसे मार डाला ?...

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जननम - 3 By S Bhagyam Sharma

जननम अध्याय 3 उन लोगों के अंदर घुसते ही उसने दरवाजे को बंद कर दिया। दीवार को देखते हुए वह लड़की लेटी हुई थी। "लावण्या !" धीरे से बोला आनंद। वह तुरंत पलटी। धर्मराजन और निर्मला आश्चर...

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सलमा सितारा जड़ी मेरी साड़ी By Geeta Shri

सलमा सितारा जड़ी मेरी साड़ी गीताश्री वह बार बार मुझसे टकरा रही थी। मैं उससे बचने की कोशिश करती हुई भीड़भाड़ में इधर उधर हो रही थी। जब जब पास से टकरा कर निकलती, उसकी साड़ी से कोई चम...

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पुराना पता By Deepak sharma

पुराना पता ‘इन दीज न्यू टाउन्ज वन कैन फाइन्ड द ओल्ड हाउजिस ओनली इन पीपल’ (‘इन नये शहरों में पुराने घर हमें केवल लोगों के भीतर ही मिल सकते हैं।’) इलियास कानेसी वह मेरा पुराना मकान ह...

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चक्रव्यूह. By Neelima Tikku

चक्रव्यूह बाहर मूसलाधार बारिश होने लगी थी, इसी के साथ ही रोड़ लाइट्स बंद हो गईं थीं। वह काफी समय से एयरपोर्ट रोड़ पर कार में बैठी छोटी बहन को फ़ोन लगा रही थी लेकिन उसका फ़ोन स्विच...

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विश्वासघात By Jyoti Prakash Rai

विश्वासघात मानवता एक बार फिर शर्मसार हुई है और इसका जिम्मेदार भी मानव प्राणी ही हुआ है वह मानव जो संसार में सबसे अधिक बुद्धिमान माना जाता है। जिसके उपयोग के लिए ईश्वर ने सुंदरता की...

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मज़बूर (पार्ट 2) By Shrikar Dixit

स्वाती दरबाजा खोलती है..राहुल :- रौशन सो रहा है जागा तो नहीं...स्वाती :- नहीं,सो ही रहा है..राहुल :- अच्छा,स्वाती :क्या कहा राजेश जी ने?राहुल :- ह्म्म, नंबर दिया है एक साहब का,कल...

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काश ! में समज पाता - 2 By Mahek Parwani

बस ये बात जैसे प्रणव कि माताजी को कांटे कि तरह चुभ सी गई । दिन-रात एक ही चिंता उसे सता रही थी , अगर बेटी आई तो इस घर का वंश आगे कैसे बढ़ेगा ? उन्होंने प्रणव के पिताजी , प्रणव और प्र...

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निकले बड़े बेआबरू होकर.. By Amit Singh

"निकले बड़े बेआबरू होकर... "कवि केदारनाथ सिंह ने कहा है कि “जाना” हिंदी की सबसे खतरनाक क्रिया है | लेकिन लोग जा रहे हैं | लोग ठीक वैसे ही जा रहे हैं, जैसे वे कुछ हप्तों, मह...

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बेटी और रोटी का रिश्ता By Kumar Gourav

गाँव में पेट्रोल डिजल का रोना नहीं है। उहाँ विकासवा आराम से चाय की टपरी पर सुर्ती मलता है । गाँव छोड़े सालों हो गये लेकिन गाँव हमें नहीं छोड़ रहा । पछियारी टोल का सारा खबर विकासवा फो...

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फ्रैंड रिक्वैस्ट By Pratibha

फ्रैंड रिक्वैस्ट मन पर दस्तक हुई .. मैंने धीरे से कपाट खोले .. गर्दन बाहर निकाली.. सामने देखा, इधर - उधर झाँका .. | कोई नहीं था .. माने प्रत्यक्ष कोई नहीं था ..पर कुछ अनुभव हो रहा...

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नव प्रभात By Rama Sharma Manavi

जिंदगी के आसमान में खुशियों के पंख लगाकर वह उन्मुक्त परिंदे की मानिंद उड़ान भर रही थी कि किस्मत ने अचानक उसके पंख काटकर उसे हकीकत के पथरीले उजड़े जमीन पर पटक दिया। नैना तीन भाइ...

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वो इधर की उधर लगाने वाले विदूषक कब बन गए, पता चला क्या ? By Meenakshi Dikshit

सुबह से शाम तक हम सभी को सोशल मीडिया के माध्यम से अग्रसारित किये जाने वाले अनेकानेक चुटकुले, मेम्स और तमाम मजाकिया सन्देश मिलते रहते हैं. कभी हम हंस पड़ते हैं कभी यूँ ही अग्रसारित क...

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जौंइ By Pranava Bharti

जौंइ ==== बड़ी उम्र होते -होते बचपने की तरफ़ दौड़ता है मन ! मुझे भी उम्र के बढ़ने के साथ बीते ज़माने न जाने कैसे याद आने लगे हैं ,अपने बालपन के खिलंदड़े दिन ! हाँ ,शिवकुमार मा...

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नो स्माइल प्लीज़ ! By Neelam Kulshreshtha

नो स्माइल प्लीज़ ! नीलम कुलश्रेष्ठ "आप ऑरेंज क्यों नही लाती ?" कीवी ने उसका बैग टटोलते हुए पूछा. "ऑरेंज का सीजन गया. " "आप ग्रेप्स भी नही लाती ? "बाबा ! उसका भी सीज़न गया. " "क्या म...

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नष्टचित्त By Deepak sharma

नष्टचित्त इधर कुछ समय से वह उतनी चौकस नहीं रही थीं। चीज़ों के प्रति, लोगों के प्रति उनकी जिज्ञासाएँ ख़त्म हो रही थीं। सवाल पूछे जाने पर जो भी वह उत्तर में कहतीं, वह ज़्यादातर अस्पष्ट...

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कुबेर - 48 - अंतिम भाग By Hansa Deep

कुबेर डॉ. हंसा दीप 48 बच्चे क्या कहते, जानते थे उनका लक्ष्य, उनका काम। अपने नये मिशन को पूरा करने वे वहीं रहने लगे। यद्यपि इन बच्चों के लिए की गयीं ये व्यवस्थाएँ पर्याप्त नहीं थीं...

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बडी प्रतिमा - 6 By Sudha Trivedi

बडी प्रतिमा (6.) गीतू की तिकडी में जो प्यारी-सी अंजना थी, जिसे सब छोटी अंजना बुलाते थे, जो कुंवारी थी, जिसकी मां गवर्नमेंट हाई स्कूल की शिक्षिका थीं - उसके चार हजार रुपए नहीं मिल र...

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चाचाजी का अधूरा उपन्यास By Shushant Shupriy

चाचाजी का अधूरा उपन्यास सुशांत सुप्रिय चाचाजी हिंदी साहित्य में एक बड़ा नाम थे । उन्होंने दर्जनों कथा-संग्रह, काव्य-संग्रह व उपन्यास लिखे थे । उनकी आलोचनात्मक किताबों ने कई स्थापित...

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आधा आदमी - 14 By Rajesh Malik

आधा आदमी अध्‍याय-14 ‘‘अरे पहिले घूम तो लूँ फेर देखी जाईगी.‘‘ ‘‘जईसी तेरी मरजी.‘‘ जजमानी में मिलें बधाई के पैसे से बेटी अम्मा ने सभी के साथ-साथ मुझे भी बाँटा दिया। मैंने बाँटा लेकर...

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महामाया - 20 By Sunil Chaturvedi

महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – बीस समाधि का वक्त नजदीक आता जा रहा था। समाधि स्थल पर तीनों माताएँ पहुँच चुकी थी। वे आँख बंद किये जोर-जोर से ऊँ नमः शिवाय का जाप कर रही थी। अखिल, अन...

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होने से न होने तक - 35 By Sumati Saxena Lal

होने से न होने तक 35. जितनी आसानी से और जितनी जल्दी यश ने हॉ कर दी थी उसको ले कर मन में बाद तक कुछ चुभता रहा था। क्या यश मेरी तरफ से ही आग्रह किए जाने की प्रतीक्षा कर रहे थे ताकि क...

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केसरिया बालम - 2 By Hansa Deep

केसरिया बालम डॉ. हंसा दीप 2 बरगद की छाँव तले जिस दिन वह आने वाला था, सब दौड़ रहे थे इधर से उधर, घर वाले भी, घर के नौकर भी। योजनाबद्ध था सब कुछ, पहले पानी, फिर चाय-नाश्ता, उसके बाद...

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समंदर और सफेद गुलाब - 1 - 1 By Ajay Sharma

समंदर और सफेद गुलाब पहला दिन 1 शताब्दी टे्रन को मैंने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया और मैट्रो टे्रन लेने के लिए मैट्रो स्टेशन की तरफ बढऩे लगा। ट्रॉली बैग को पहियों पर घसीटता...

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आधी दुनिया का पूरा सच - 9 By Dr kavita Tyagi

आधी दुनिया का पूरा सच (उपन्यास) 9. हृदय में भय और विवशता तथा चेहरे पर कृत्रिम मुस्कान लेकर आज साँवली का झुग्गी के उस प्रतिबंधित भाग में प्रवेश हुआ था, जिसमें झाँकना भी आज से कुछ दि...

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डरना मना है By Anju Sharma

पौ फटने के समय ही निकल जाता है बसंत घर से पर आज थोड़ा लेट हो गया! सड़क पर थोड़ी बहुत आवाजाही शुरू हो चुकी थी! शुक्र है कि झाड़ू लगना अभी शुरू नहीं हुई थी वरना उसकी किस्मत पर भी फिर...

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धरती तुम बदल गईं By Mita Das

धरती तुम बदल गईं शाम का धुंधलका और गहरा हो चला था । स्ट्रीट लाइटें ऑन हो चुकी थीं । रविवार की शाम थी, दूरदर्शन पर शाम की फिल्म चल रही थी । सारे कालोनी के लोग कड़कड़ाती ठण्ड में शाम प...

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सुहागिन या विधवा - 4 By Kishanlal Sharma

उसकी राधा के छोटे भाई की पत्नी बन जाने पर उसे गहरा सदमा लगा था।उसे एक ही बात कचोटती रहती।राधा ने इस निर्णय का विरोध क्यो नही किया?राधा की यादों को दिल से निकालने के लिए उसने शराब...

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नमस्कार पाठक मित्रों हम आपको किस्से कोरोना में आपको कोरोना से जुड़े किस्से बताएगे ! मानवता के ऊपर सबसे बड़े संकट के रुप में मंडरा रहे कोरोना महामारी को हराने के लिए डॉक्टर अचानक स...

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कहानी ‘शम्मा दुलदुल वाला By ramgopal bhavuk

कहानी ‘शम्मा दुलदुल वाला’ रामगोपाल भावुक शम्मा का पूरा नाम तो श्यामलाल धानुक है। लेकिन लोग उसे शम्मा बरार के नाम से पुकारते हैं। वह शादी-ब्याह में पैत्रिक सम्पति के रूप में प्राप्त...

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मानव का खोखला जिवन By रनजीत कुमार तिवारी

जिवन अनमोल है, यूं व्यर्थ न गवाइए।अपने कुछ पल मानवता में भी लगाइए।।धरा है पाप से सहमी,आओ मिलकर उद्धार करें।मातृभूमि की रक्षा करें,ऐसा मन में सब बिचार करें।।हवा हो गयी है दुषित, पेड...

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मॉरीशस किनारे.... By Dr Jaya Anand

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फिर मिलेंगे... कहानी - एक महामारी से लॉक डाउन तक - 11 By Sarvesh Saxena

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दाता By Poonam Singh

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एक ही भूल, भाग २ By Saroj Prajapati

सीमा को पुरानी बातें याद आने लगी। रज्जो उसके ही गांव की थी। रजनी नाम था इसका। सब इसे रज्जो कहते थे। रज्जो के परिवार में उसके अलावा, माता पिता व भाई था। पिता सब्जी का ठेला लगाते थे...

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गंगादेई By Pranava Bharti

गंगादेई --------- उम्र का एक पड़ाव पार कर लेने पर मनुष्य न जाने क्यों अपनी पिछली ज़िंदगी में झाँकता ज़रूर है,वह स्थिर रह ही नहीं पाता | वैसे ज़िंदगी का अटूट सत्य...

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उर्वशी - 1 By Jyotsana Kapil

उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 1 " यह क्या कर डाला तुमने " उसने एक बार विस्फारित नेत्रों से भूमि पर पड़ा भाई का मृत शरीर देखा और एक बार छोटी बहन की ओर दृष्टि डाली " तुमने उसे मार डाला ?...

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जननम - 3 By S Bhagyam Sharma

जननम अध्याय 3 उन लोगों के अंदर घुसते ही उसने दरवाजे को बंद कर दिया। दीवार को देखते हुए वह लड़की लेटी हुई थी। "लावण्या !" धीरे से बोला आनंद। वह तुरंत पलटी। धर्मराजन और निर्मला आश्चर...

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सलमा सितारा जड़ी मेरी साड़ी By Geeta Shri

सलमा सितारा जड़ी मेरी साड़ी गीताश्री वह बार बार मुझसे टकरा रही थी। मैं उससे बचने की कोशिश करती हुई भीड़भाड़ में इधर उधर हो रही थी। जब जब पास से टकरा कर निकलती, उसकी साड़ी से कोई चम...

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चक्रव्यूह बाहर मूसलाधार बारिश होने लगी थी, इसी के साथ ही रोड़ लाइट्स बंद हो गईं थीं। वह काफी समय से एयरपोर्ट रोड़ पर कार में बैठी छोटी बहन को फ़ोन लगा रही थी लेकिन उसका फ़ोन स्विच...

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विश्वासघात By Jyoti Prakash Rai

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निकले बड़े बेआबरू होकर.. By Amit Singh

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बेटी और रोटी का रिश्ता By Kumar Gourav

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नव प्रभात By Rama Sharma Manavi

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वो इधर की उधर लगाने वाले विदूषक कब बन गए, पता चला क्या ? By Meenakshi Dikshit

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जौंइ ==== बड़ी उम्र होते -होते बचपने की तरफ़ दौड़ता है मन ! मुझे भी उम्र के बढ़ने के साथ बीते ज़माने न जाने कैसे याद आने लगे हैं ,अपने बालपन के खिलंदड़े दिन ! हाँ ,शिवकुमार मा...

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नो स्माइल प्लीज़ ! By Neelam Kulshreshtha

नो स्माइल प्लीज़ ! नीलम कुलश्रेष्ठ "आप ऑरेंज क्यों नही लाती ?" कीवी ने उसका बैग टटोलते हुए पूछा. "ऑरेंज का सीजन गया. " "आप ग्रेप्स भी नही लाती ? "बाबा ! उसका भी सीज़न गया. " "क्या म...

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नष्टचित्त By Deepak sharma

नष्टचित्त इधर कुछ समय से वह उतनी चौकस नहीं रही थीं। चीज़ों के प्रति, लोगों के प्रति उनकी जिज्ञासाएँ ख़त्म हो रही थीं। सवाल पूछे जाने पर जो भी वह उत्तर में कहतीं, वह ज़्यादातर अस्पष्ट...

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कुबेर - 48 - अंतिम भाग By Hansa Deep

कुबेर डॉ. हंसा दीप 48 बच्चे क्या कहते, जानते थे उनका लक्ष्य, उनका काम। अपने नये मिशन को पूरा करने वे वहीं रहने लगे। यद्यपि इन बच्चों के लिए की गयीं ये व्यवस्थाएँ पर्याप्त नहीं थीं...

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