hindi Best Moral Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • BOYS school WASHROOM-2

    पिछले भाग में आपने पढ़ा कि कैसे स्कूल बस में कुछ लड़के विहान को परेशान करने लगते ह...

  • दिव्यांग सिंगल माँ

    दिव्यांग सिंगल माँ आज के युग में यह शब्द नया नहीं है। यह 30 साल पहले की बात है।...

  • खोटा सिक्का

    ‘....ऑटो !‘ बस से उतरकर , कंधे पर लटके बैग को संभालते हुये बस अडडे के सामने , चै...

होने से न होने तक - 38 By Sumati Saxena Lal

होने से न होने तक 38. यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं शुरु हो गई थीं और सभी काफी समय के लिए उसमें व्यस्त हो गए थे। कालेज आते हैं तो वहॉ मन नही लगता। घर जाते हैं तो वहॉ भी मन में बेचैनी बन...

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BOYS school WASHROOM-2 By Akash Saxena "Ansh"

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि कैसे स्कूल बस में कुछ लड़के विहान को परेशान करने लगते हैं और विहान अपने बड़े भाई यश को आवाज़ लगा देता है,अब आगे"यश भईया।" "यश भईया।"विहान के बुलाते ही सब लड़क...

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राम रचि राखा - 1 - 1 By Pratap Narayan Singh

राम रचि राखा अपराजिता (1) दोपहर हो चुकी थी। ध्रुव को सुलाकर मैं आफिस के लिए तैयार होने लगी थी। शान्ति खाना बना रही थी। तभी कालबेल बजा। कौन आ गया इस समय...सोचते हुए मैने दरवाजा खोला...

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दिव्यांग सिंगल माँ By Dr Darshita Babubhai Shah

दिव्यांग सिंगल माँ आज के युग में यह शब्द नया नहीं है। यह 30 साल पहले की बात है। जब महिला की समाज में कोई हैसियत नहीं थी। नारी की कोई आवाज नहीं थी और न ही समाज में कोई स्थान था। ऐसे...

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केसरिया बालम - 5 By Hansa Deep

केसरिया बालम डॉ. हंसा दीप 5 पुनरारोपण अमेरिका, न्यूजर्सी के एडीसन शहर ने दिल खोलकर स्वागत किया उसका। इमीग्रेशन काउंटर से लेकर घर के दरवाजे तक। लैंड होने के बाद अमेरिका में कदम रखने...

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समंदर और सफेद गुलाब - 1 - 3 By Ajay Sharma

समंदर और सफेद गुलाब 3 मैं सोया तो था ही नहीं...मेरे मन में आया कि आंखें खोलूं और देखूं कि मुंबई आने में कितना समय बाकी रह गया है। मैंने धीरे से आंखे खोलीं और अपनी घड़ी की ओर देखा।...

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आधी दुनिया का पूरा सच - 12 By Dr kavita Tyagi

आधी दुनिया का पूरा सच (उपन्यास) 12. रानी जहाँ बैठी थी, बिना हिले-डुले निष्क्रिय और भाव शून्य मुद्रा में वहीं पर बैठी रही । एक क्षण पश्चात् उसके कानों में बालिका-गृह की उसी परिचारिक...

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विदा रात - 3 By Kishanlal Sharma

तब बरखा को एहसास होने लगा कि मात्र भावात्मक लगाव उसकी बने रहने में सहायक नही हो सकता।शारीरिक इच्छा की पूर्ति भी ज़रूरी है।इस इच्छा को पति ही पूरी कर सकता है।वह पुराने जमाने की उन और...

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मकान By Lovelesh Dutt

“अरे...ठाकुरदास...ओ ठाकुरदास...” अन्दर आते हुए डाकिये की आवाज़ ने अमरावती को असहज कर दिया। उसने पास बैठी अपनी दस वर्षीया बेटी कीर्ति को संबोधित करते हुए उत्तर दिया, “जा...डाकिया ता...

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खोटा सिक्का By Dr Narendra Shukl

‘....ऑटो !‘ बस से उतरकर , कंधे पर लटके बैग को संभालते हुये बस अडडे के सामने , चैराहे पर खड़े ऑटोवाले को मैंने हाथ के इशारे से बुलाया । ऑटोवाला बस से उतरती सवारियों की ओर ही देख रहा...

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समर्पण By rajendra shrivastava

कहानी समर्पण राजेन्‍द्र कुमार श्रीवास्‍तव, ऐयर बैग अपने कन्‍धे पर टॉंगकर स्‍टेशन से निकलते ही मैंने सोचा चार साल बाद कौशल्‍या की ससु...

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फिर मिलेंगे... कहानी - एक महामारी से लॉक डाउन तक - 12 By Sarvesh Saxena

दो दिन बाद आफताब की हालत बहुत बिगड़ गई, मंजेश बहुत परेशान हो गया, उसने बहुत कोशिश की पर आफताब को भी नहीं बचा पाया गया | तीनों दोस्तों को बहुत दुख हुआ क्योंकि उसमें कोरोना वायरस का...

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आगाज़ By Poonam Singh

"आगाज़" पुलिस की वर्दी में ड्यूटी पर जाने को तैयार अपनी बेटी से माँ ने पूछा ," क्या हुआ कुछ सोचा तूने ?" " सोचना मुझे नहीं आपको है माँ ! " फिर कुछ पल की खामोशी के पश्चात ..बेटी ने...

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मुझसे कह कर तो जाते By Hansa Deep

कहानी मुझसे कह कर तो जाते हंसा दीप जीवन में ऐसे क्षण कभी-कभी ही आते हैं जब ऐसी तृप्ति महसूस होती है, बड़ी तृप्ति। छोटी-छोट...

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याददाश्त वापस लौट रही है...    By Alka Sinha

आदमकद शीशे में तरन्नुम ने खुद को सिर से पैर तक निहारा, फिर सधे हाथों से आंखों में सुरमा पिरोया। काजल की डोरी से आंखें चमक उठी थीं। बालों को हल्का-सा बाउंस दे कर उसने टेबल पर पड़ा प...

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एक ही भूल, अंतिम भाग (४) By Saroj Prajapati

राजन ने मुझे आश्वासन दिया की वह अपनी पत्नी से जल्द ही तलाक ले लेगा। अभी हम आगे कुछ करते उससे पहले ही पुलिस वाले हमें खोजते हुए यहां तक अा पहुंची। उसके पिता व ससुर रसूख वाले थे। पुल...

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चूड़ियां By Vandana Bajpai

चूड़ियां न जाने क्यों आज उसका चेहरा आँखों के आगे से हट नहीं रहा है,चाहे कितना भी मन बटाने के लिए अपने को अन्य कामों में व्यस्त कर लूँ, या टी वी ऑन करके अपना मनपसंद कार्यक्रम देख कर...

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गवाक्ष - 1 By Pranava Bharti

गवाक्ष बसंत पंचमी दिनांक-12/2/2016 (नमस्कार मित्रो ! यह उपन्यास ‘गवाक्ष’ एक फ़िक्शन है जिसे फ़िल्म के लिए तैयार किया जा रहा था किन्तु इसके प्रेरणास्त्रोत 'स्व. इंद्र स्वरूप माथुर...

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आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे By Nidhi Agrawal

आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगेनिधि अग्रवाल पद्मा ने उकता कर बैकस्टेज की झिरी से हाल में झाँका। तिल रखने की जगह शेष न थी। शहर के गणमान्य जन आ चुके थे। बस मंत्री जी की प्रतीक्षा...

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बेवकूफ-लड़का By Ram Nagina Maurya

बेवकूफ-लड़का सुबह-सुबह उसकी पत्नी के पेट में मरोड़ के साथ तेज दर्द उठा था, फिर शान्त हो गया। उसे ध्यान आया कि डाॅक्टरनी जी ने कहा था, ‘नवां महीना चल रहा है, रात-बिरात जब भी दर्द उठे,...

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उर्वशी - 4 By Jyotsana Kapil

उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 4 वह ही है मूर्ख, जो बिन सोचे समझे जाने क्या क्या कल्पना कर रही है। उन्होंने कब उसके साथ प्रेम की पींगें बढ़ाई ? कब उसे अपने विषय मे धोखे में रखा ? कब कोई...

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जननम - 5 By S Bhagyam Sharma

जननम अध्याय 5 आनंद को उन्हें सहलाने की भावना तीव्रता से उठी। उनके हाथ को पकड़ कर हाथ हिलाने की इच्छा हुई कि बहुत धन्यवाद बोले ऐसा लगा। वह लावण्या को देखकर एक मुस्कान दिखाकर और लोगो...

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बिगुल By Deepak sharma

बिगुल “तुम्हें घोर अभ्यास करना होगा”, बाबा ने कहा, “वह कोई स्कूली बच्चों का कार्यक्रम नहीं जो तुम्हारी फप्फुप फप्फुप को वे संगीत मान लेंगे...” जनवरी के उन दिनों बाबा का इलाज चल रहा...

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आधा आदमी - 16 By Rajesh Malik

आधा आदमी अध्‍याय-16 ‘‘पर यह सब हुआ कब?‘‘ ‘‘कल रात.‘‘ ‘‘माई कहाँ है?‘‘ ‘‘वही गई हैं.‘‘ ‘‘तो ठीक हैं भाईजान, मै बाद में आता हूँ.‘‘ कहकर ज्ञानदीप ने सेलफोन रख दिया। एकाएक ज्ञानदीप को...

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महामाया - 22 By Sunil Chaturvedi

महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – बाईस संत निवास में गद्दे पर लंबे पैर कर दीवार से सिर टिकाये निर्मला माई बैठी थी। नीचे कालीन पर आलथी-पालथी लगाये जग्गा बैठा था। उसने दोनों हाथों से...

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भूख में भी स्वाद की तलाश By Mita Das

भूख में भी स्वाद की तलाश मीता दास मुंबई - हावड़ा मेल जब एक बजे दोपहर को रेलवे प्लेटफार्म पर रुकी, एकाएक भगदड़ मच गई | जून माह का अंतिम सप्ताह, तेज लू की मार अब कम थी पर चिलचिलाती धूप...

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बडी प्रतिमा - 7 By Sudha Trivedi

बडी प्रतिमा (7.) इस घटना के तीसरे रोज की बात है। शाम हो आई थी। अभी घर गई लडकियां लौटी नहीं थीं। दो-चार लडकियां ही हाॅस्टल में इधर उधर डोलती रहती थीं। अभी सब की सब इकट्ठा होकर फील्ड...

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बीच समंदर मिट्टी है!! By Anagh Sharma

बीच समंदर मिट्टी है!! मुल्क 1: यमन शहर: सना ठहाके लगाती रात, हँसती हुई रात तो इस शहर के आसमान से कब की जा चुकी थी। ऐसी रात जो शादी के जागमागते उजालों से चमकती रहती थी वह तो जाने कह...

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मज़बूर (पार्ट 3) By Shrikar Dixit

ट्रेन के आने का announce शुरू हो चुका था,ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आने वाली थी,स्वाती दबे हुए स्वर में राहुल से :आपको क्या लगता है कहीं राजेश लेट तो ना हो जाएगा,राहुल :- नहीं, आ रहा होगा...

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काश ! में समज पाता - 3 By Mahek Parwani

कुछ महीने बाद प्रेरणा फिर से एक बार खुश खबरी सुनाती है हीचकिचाहट के साथ और फिर से चेकप कराती है इस बार ईश्वर की कृपा से वह नन्ही सी जान बेबी बॉय था । घर में अब...

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लोहे की जालियां By Ram Nagina Maurya

लोहे की जालियां ‘‘देखिये, आप रोज कोई-न-कोई बात कह कर मुझे बहंटिया देते हैं, काम के बहाने टाल जाते हैं। कितनी बार कहा कि आॅफिस से लौटते वक्त, अपने पुराने मकान-मालिक अवनीन्द्र बाबू क...

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अलगाव By Kailash Banwasi

अलगाव कैलाश बनवासी एकदम अप्रत्याशित था. नियुक्ति पत्र था. यू.डी.सी. पोस्ट. जिला-जबलपुर. माँ ने पोस्टमैन को पाँच रुपयेका नोट उसी पल अपनी थैली से निकलकर थमा दिया था. उस सफ़ेद कागज के...

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न उम्र की सीमा हो By seema singh

न उम्र की सीमा हो .................... ये वक्त जो ठहर हुआ है मुठ्ठी में फँसी रेत सा फिसलता जा रहा ..लाख जतन रोकने की पर वह है कि बहता जा रहा ...तुम्हारी याद के मुहाने पर आकर ठहर ग...

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मुआवजा-विवाह By Krishan Kumar Ashu

मुआवजा-विवाह अंधकार ने अपना फन फैलाया। अंधेरे का काला सर्प रेंगा और शाम के धुंधलके पर कुण्डली मारकर बैठ गया। इसी के साथ सूरज ने क्षितिज में मुंह छुपा लिया। शायद वह भी मीनू के दुख क...

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होने से न होने तक - 38 By Sumati Saxena Lal

होने से न होने तक 38. यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं शुरु हो गई थीं और सभी काफी समय के लिए उसमें व्यस्त हो गए थे। कालेज आते हैं तो वहॉ मन नही लगता। घर जाते हैं तो वहॉ भी मन में बेचैनी बन...

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BOYS school WASHROOM-2 By Akash Saxena "Ansh"

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि कैसे स्कूल बस में कुछ लड़के विहान को परेशान करने लगते हैं और विहान अपने बड़े भाई यश को आवाज़ लगा देता है,अब आगे"यश भईया।" "यश भईया।"विहान के बुलाते ही सब लड़क...

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राम रचि राखा - 1 - 1 By Pratap Narayan Singh

राम रचि राखा अपराजिता (1) दोपहर हो चुकी थी। ध्रुव को सुलाकर मैं आफिस के लिए तैयार होने लगी थी। शान्ति खाना बना रही थी। तभी कालबेल बजा। कौन आ गया इस समय...सोचते हुए मैने दरवाजा खोला...

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दिव्यांग सिंगल माँ By Dr Darshita Babubhai Shah

दिव्यांग सिंगल माँ आज के युग में यह शब्द नया नहीं है। यह 30 साल पहले की बात है। जब महिला की समाज में कोई हैसियत नहीं थी। नारी की कोई आवाज नहीं थी और न ही समाज में कोई स्थान था। ऐसे...

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केसरिया बालम - 5 By Hansa Deep

केसरिया बालम डॉ. हंसा दीप 5 पुनरारोपण अमेरिका, न्यूजर्सी के एडीसन शहर ने दिल खोलकर स्वागत किया उसका। इमीग्रेशन काउंटर से लेकर घर के दरवाजे तक। लैंड होने के बाद अमेरिका में कदम रखने...

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समंदर और सफेद गुलाब - 1 - 3 By Ajay Sharma

समंदर और सफेद गुलाब 3 मैं सोया तो था ही नहीं...मेरे मन में आया कि आंखें खोलूं और देखूं कि मुंबई आने में कितना समय बाकी रह गया है। मैंने धीरे से आंखे खोलीं और अपनी घड़ी की ओर देखा।...

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आधी दुनिया का पूरा सच - 12 By Dr kavita Tyagi

आधी दुनिया का पूरा सच (उपन्यास) 12. रानी जहाँ बैठी थी, बिना हिले-डुले निष्क्रिय और भाव शून्य मुद्रा में वहीं पर बैठी रही । एक क्षण पश्चात् उसके कानों में बालिका-गृह की उसी परिचारिक...

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विदा रात - 3 By Kishanlal Sharma

तब बरखा को एहसास होने लगा कि मात्र भावात्मक लगाव उसकी बने रहने में सहायक नही हो सकता।शारीरिक इच्छा की पूर्ति भी ज़रूरी है।इस इच्छा को पति ही पूरी कर सकता है।वह पुराने जमाने की उन और...

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मकान By Lovelesh Dutt

“अरे...ठाकुरदास...ओ ठाकुरदास...” अन्दर आते हुए डाकिये की आवाज़ ने अमरावती को असहज कर दिया। उसने पास बैठी अपनी दस वर्षीया बेटी कीर्ति को संबोधित करते हुए उत्तर दिया, “जा...डाकिया ता...

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खोटा सिक्का By Dr Narendra Shukl

‘....ऑटो !‘ बस से उतरकर , कंधे पर लटके बैग को संभालते हुये बस अडडे के सामने , चैराहे पर खड़े ऑटोवाले को मैंने हाथ के इशारे से बुलाया । ऑटोवाला बस से उतरती सवारियों की ओर ही देख रहा...

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समर्पण By rajendra shrivastava

कहानी समर्पण राजेन्‍द्र कुमार श्रीवास्‍तव, ऐयर बैग अपने कन्‍धे पर टॉंगकर स्‍टेशन से निकलते ही मैंने सोचा चार साल बाद कौशल्‍या की ससु...

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फिर मिलेंगे... कहानी - एक महामारी से लॉक डाउन तक - 12 By Sarvesh Saxena

दो दिन बाद आफताब की हालत बहुत बिगड़ गई, मंजेश बहुत परेशान हो गया, उसने बहुत कोशिश की पर आफताब को भी नहीं बचा पाया गया | तीनों दोस्तों को बहुत दुख हुआ क्योंकि उसमें कोरोना वायरस का...

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आगाज़ By Poonam Singh

"आगाज़" पुलिस की वर्दी में ड्यूटी पर जाने को तैयार अपनी बेटी से माँ ने पूछा ," क्या हुआ कुछ सोचा तूने ?" " सोचना मुझे नहीं आपको है माँ ! " फिर कुछ पल की खामोशी के पश्चात ..बेटी ने...

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मुझसे कह कर तो जाते By Hansa Deep

कहानी मुझसे कह कर तो जाते हंसा दीप जीवन में ऐसे क्षण कभी-कभी ही आते हैं जब ऐसी तृप्ति महसूस होती है, बड़ी तृप्ति। छोटी-छोट...

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याददाश्त वापस लौट रही है...    By Alka Sinha

आदमकद शीशे में तरन्नुम ने खुद को सिर से पैर तक निहारा, फिर सधे हाथों से आंखों में सुरमा पिरोया। काजल की डोरी से आंखें चमक उठी थीं। बालों को हल्का-सा बाउंस दे कर उसने टेबल पर पड़ा प...

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एक ही भूल, अंतिम भाग (४) By Saroj Prajapati

राजन ने मुझे आश्वासन दिया की वह अपनी पत्नी से जल्द ही तलाक ले लेगा। अभी हम आगे कुछ करते उससे पहले ही पुलिस वाले हमें खोजते हुए यहां तक अा पहुंची। उसके पिता व ससुर रसूख वाले थे। पुल...

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चूड़ियां By Vandana Bajpai

चूड़ियां न जाने क्यों आज उसका चेहरा आँखों के आगे से हट नहीं रहा है,चाहे कितना भी मन बटाने के लिए अपने को अन्य कामों में व्यस्त कर लूँ, या टी वी ऑन करके अपना मनपसंद कार्यक्रम देख कर...

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गवाक्ष - 1 By Pranava Bharti

गवाक्ष बसंत पंचमी दिनांक-12/2/2016 (नमस्कार मित्रो ! यह उपन्यास ‘गवाक्ष’ एक फ़िक्शन है जिसे फ़िल्म के लिए तैयार किया जा रहा था किन्तु इसके प्रेरणास्त्रोत 'स्व. इंद्र स्वरूप माथुर...

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आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे By Nidhi Agrawal

आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगेनिधि अग्रवाल पद्मा ने उकता कर बैकस्टेज की झिरी से हाल में झाँका। तिल रखने की जगह शेष न थी। शहर के गणमान्य जन आ चुके थे। बस मंत्री जी की प्रतीक्षा...

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बेवकूफ-लड़का By Ram Nagina Maurya

बेवकूफ-लड़का सुबह-सुबह उसकी पत्नी के पेट में मरोड़ के साथ तेज दर्द उठा था, फिर शान्त हो गया। उसे ध्यान आया कि डाॅक्टरनी जी ने कहा था, ‘नवां महीना चल रहा है, रात-बिरात जब भी दर्द उठे,...

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उर्वशी - 4 By Jyotsana Kapil

उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 4 वह ही है मूर्ख, जो बिन सोचे समझे जाने क्या क्या कल्पना कर रही है। उन्होंने कब उसके साथ प्रेम की पींगें बढ़ाई ? कब उसे अपने विषय मे धोखे में रखा ? कब कोई...

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जननम - 5 By S Bhagyam Sharma

जननम अध्याय 5 आनंद को उन्हें सहलाने की भावना तीव्रता से उठी। उनके हाथ को पकड़ कर हाथ हिलाने की इच्छा हुई कि बहुत धन्यवाद बोले ऐसा लगा। वह लावण्या को देखकर एक मुस्कान दिखाकर और लोगो...

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बिगुल By Deepak sharma

बिगुल “तुम्हें घोर अभ्यास करना होगा”, बाबा ने कहा, “वह कोई स्कूली बच्चों का कार्यक्रम नहीं जो तुम्हारी फप्फुप फप्फुप को वे संगीत मान लेंगे...” जनवरी के उन दिनों बाबा का इलाज चल रहा...

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आधा आदमी - 16 By Rajesh Malik

आधा आदमी अध्‍याय-16 ‘‘पर यह सब हुआ कब?‘‘ ‘‘कल रात.‘‘ ‘‘माई कहाँ है?‘‘ ‘‘वही गई हैं.‘‘ ‘‘तो ठीक हैं भाईजान, मै बाद में आता हूँ.‘‘ कहकर ज्ञानदीप ने सेलफोन रख दिया। एकाएक ज्ञानदीप को...

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महामाया - 22 By Sunil Chaturvedi

महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – बाईस संत निवास में गद्दे पर लंबे पैर कर दीवार से सिर टिकाये निर्मला माई बैठी थी। नीचे कालीन पर आलथी-पालथी लगाये जग्गा बैठा था। उसने दोनों हाथों से...

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भूख में भी स्वाद की तलाश By Mita Das

भूख में भी स्वाद की तलाश मीता दास मुंबई - हावड़ा मेल जब एक बजे दोपहर को रेलवे प्लेटफार्म पर रुकी, एकाएक भगदड़ मच गई | जून माह का अंतिम सप्ताह, तेज लू की मार अब कम थी पर चिलचिलाती धूप...

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बडी प्रतिमा - 7 By Sudha Trivedi

बडी प्रतिमा (7.) इस घटना के तीसरे रोज की बात है। शाम हो आई थी। अभी घर गई लडकियां लौटी नहीं थीं। दो-चार लडकियां ही हाॅस्टल में इधर उधर डोलती रहती थीं। अभी सब की सब इकट्ठा होकर फील्ड...

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बीच समंदर मिट्टी है!! By Anagh Sharma

बीच समंदर मिट्टी है!! मुल्क 1: यमन शहर: सना ठहाके लगाती रात, हँसती हुई रात तो इस शहर के आसमान से कब की जा चुकी थी। ऐसी रात जो शादी के जागमागते उजालों से चमकती रहती थी वह तो जाने कह...

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मज़बूर (पार्ट 3) By Shrikar Dixit

ट्रेन के आने का announce शुरू हो चुका था,ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आने वाली थी,स्वाती दबे हुए स्वर में राहुल से :आपको क्या लगता है कहीं राजेश लेट तो ना हो जाएगा,राहुल :- नहीं, आ रहा होगा...

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काश ! में समज पाता - 3 By Mahek Parwani

कुछ महीने बाद प्रेरणा फिर से एक बार खुश खबरी सुनाती है हीचकिचाहट के साथ और फिर से चेकप कराती है इस बार ईश्वर की कृपा से वह नन्ही सी जान बेबी बॉय था । घर में अब...

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लोहे की जालियां By Ram Nagina Maurya

लोहे की जालियां ‘‘देखिये, आप रोज कोई-न-कोई बात कह कर मुझे बहंटिया देते हैं, काम के बहाने टाल जाते हैं। कितनी बार कहा कि आॅफिस से लौटते वक्त, अपने पुराने मकान-मालिक अवनीन्द्र बाबू क...

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अलगाव By Kailash Banwasi

अलगाव कैलाश बनवासी एकदम अप्रत्याशित था. नियुक्ति पत्र था. यू.डी.सी. पोस्ट. जिला-जबलपुर. माँ ने पोस्टमैन को पाँच रुपयेका नोट उसी पल अपनी थैली से निकलकर थमा दिया था. उस सफ़ेद कागज के...

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न उम्र की सीमा हो By seema singh

न उम्र की सीमा हो .................... ये वक्त जो ठहर हुआ है मुठ्ठी में फँसी रेत सा फिसलता जा रहा ..लाख जतन रोकने की पर वह है कि बहता जा रहा ...तुम्हारी याद के मुहाने पर आकर ठहर ग...

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मुआवजा-विवाह By Krishan Kumar Ashu

मुआवजा-विवाह अंधकार ने अपना फन फैलाया। अंधेरे का काला सर्प रेंगा और शाम के धुंधलके पर कुण्डली मारकर बैठ गया। इसी के साथ सूरज ने क्षितिज में मुंह छुपा लिया। शायद वह भी मीनू के दुख क...

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