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मैं चाहूँ तो अपनी मोहब्बत पर एक किताब लिख दूँ, खुद को एक कांटा और तुझे खिला गुलाब लिख दूँ। और तू जो अपनी मोहब्बत को एहसान बताता है, मैं चाहूँ तो तुझे भी मोहब्बत का बुरा ख्वाब लिख दूँ। 🥀💔 - Priya Chaudhary
सब मोह-माया का बंधन है, ये दुनिया एक छलावा है, 🕸️ मैंने हर रिश्ते में सिर्फ धोखा और खालीपन ही पाया है। 💔🥀 अब कोई ख्वाहिश नहीं बची, न कोई पाने की आरज़ू है, 🌬️ महादेव, अब तो बस तेरी शरण में मिलने वाली वो शांति ही रूबरू है। 🙏✨ दुनिया के इन शोर से दूर, एक खामोश ठिकाना चाहिए, 🏔️🧘♀️ रिश्तों के इन झूठे धागों से, अब मुझे आज़ाद हो जाना चाहिए। ⛓️🕊️ सब छोड़कर, सब तोड़कर, बस तेरी राहों पर चल पड़ूँ, 👣🔱 मैं भी वैरागी बनकर, तेरे ध्यान में खुद को ढाल लूँ। 🕉️🕯️ न महल की चाहत है, न अपनों के दिए गम का कोई रोना है, 🏚️💧 अब तो बस राख लपेट कर, तेरे चरणों में ही खोना है। ✨🌀 ये दुनिया भी अपनी है, ये रूतबा भी उनका ही है, 🌍🎭 मैं तो बस तेरी होकर, तेरे संन्यास की राह पर चलना चाहती हूँ महादेव। 📿🙌🔱 :-प्रिया चौधरी
अब न कोई शिकायत है, न तुमसे कोई उम्मीद बची है, मेरी रूह ने अब तुम्हारे ख़यालों से भी, दूरी चुन ली है। तुम बेवफा नहीं थे, शायद बस मेरी पसंद में ही गलती थी, पर उस गलती को सुधारने की, अब मुझमें हिम्मत जागी है। मैं उस आईने को अब तोड़ दूँगी, जिसमें तुम्हारा अक्स दिखता है, उस रास्ते पर अब नहीं चलूँगी, जहाँ मेरा दिल ही सिसकता है। मैंने खुद को बहुत छोटा किया, तुम्हारी दुनिया में फिट होने के लिए, अब मैं उतनी बड़ी हूँ, कि मुझे तुम्हारे साये की ज़रूरत नहीं है। जाओ, अब तुम आज़ाद हो, और मैं अपनी मंज़िल पर निकल पड़ी हूँ, बीते हुए कल की राख को छोड़कर, मैं एक नई सुबह पर खड़ी हूँ। तुम्हें नफरत नहीं, बस अब एक धुंधली याद बनाना है, मुझे खुद से फिर से मिलना है, खुद को ही गले लगाना है। ( priya Chaudhary)
वो अब बिजी हो गया है अपनी नई दुनिया सजाने में, और मैं अब भी उलझी हूँ, उसे अपनी यादों से हटाने में। उसे वक्त नहीं है अब, मेरी खामोशियों को सुनने का, मेरे उन तमाम सवालों का, जो अब भी दबे हैं ज़माने में। कभी घंटों जो मेरी आहट पर ठहर जाया करता था, आज उसे खबर भी नहीं, कि मैं मर रही हूँ या जी रही हूँ। वो तो अपनी कामयाबी की बुलंदियों पर खुश है बहुत, और मैं... मैं अब भी बस अपनी ही तन्हाई को पी रही हूँ। मजबूत बनना चाहती हूँ, कि अब उसे याद न करूँ, पर वो 'बिजी' है—ये ख्याल मुझे और भी तोड़ देता है। वो तो भूल चुका है मुझे, शायद एक पुराना पन्ना समझकर, और ये दिल है कि आज भी, उसकी हर एक झूठी उम्मीद को जोड़ देता है। कितनी अजीब है न ये मोहब्बत की आखिरी सीढ़ी? कि उसे परवाह भी नहीं, और मैं मर रही हूँ ये सोचकर, कि उसके पास अब मेरे लिए वक्त क्यों नहीं है? अब खुद को आईने में देखना भी एक सजा सा लगता है, क्योंकि मेरी आँखों में अब, उसके 'बिजी' होने का मातम दिखता है। शायद अब वक्त आ गया है, कि मैं भी 'बिजी' हो जाऊं, खुद को समेटने में, खुद को वापस पाने में, और उसे हमेशा के लिए, उसकी अपनी 'बिजी' दुनिया में छोड़ आने में। — प्रिया चौधरी 🥀🩹🦋✨
बिछड़ गए तो ये दिल 'उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं 😇💔 नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं🥺❤️
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