Quotes by rajesh kaliya in Bitesapp read free

rajesh kaliya

rajesh kaliya

@miku


शब की तन्हाइयों में एक जाम उठा लिया है,
सुब्ह तक के लिए ग़मों को भुला दिया है।

​जो ज़हर बन के रूह में उतरता था कभी,
आज उसी नशे ने ज़ख्मों को सुला दिया है।

​मज़हब क्या है, इबादत क्या, ये कौन जाने,
मैखाने के सजदे ने खुद से मिला दिया है।

​ठोकरें खाईं तो समझ आया हकीकत-ए-दुनिया,
तजरबों ने इस दिल को एक और जाम पिला दिया है।

​बस्तियां जलती रहीं, हम होश में थे ही नहीं,
इस बे-ख़ुदी ने वक़्त को बहुत धुंधला दिया है।

Read More

मालूम है उसके दिल में काफिरना है,
हमें फिर भी उसके दिल तक जाना है।

​है मंजिल भी वही, रास्ता भी वही है,
उसी की आँखों में मुझे खो जाना है।

​बेवजह नहीं है ये कश्मकश दिल की,
उसे पाना, या खुद को मिटाना है।

​मोहब्बत में शर्त-ए-वफा तो यही है,
कि उसका हर सितम हँस के उठाना है।

​वो जो देखे तो बहारें आ जाएँ राजेश
उसी की एक मुस्कान का दीवाना है।

Read More

Rajesh kaliya

खामोशियों में अब तो गुज़र हो रही है,
अपनों से दूरियों की बस ख़बर हो रही है।

जिसे माँगा था दुआओं में शिद्दत से हमने,
आज उसी की चाहत में बसर हो रही है।

टूटे हुए ख़्वाबों के टुकड़े चुने हैं मैंने,
हर एक साँस में मेरी क़बर हो रही है।

ज़ख़्म इतने मिले हैं इस ज़माने से हमको,
कि अब तो ख़ुशी से भी डर हो रही है।

तू न मिला तो क्या हुआ ऐ मेरे हमसफ़र,
मेरी तन्हाइयों में अब सहर हो रही है।

Read More

दिल के हर एक ज़ख्म को छुपाए बैठे हैं,
हम अपनी ही महफ़िल में तन्हा बैठे हैं।

वो आए थे कभी खुशियाँ बाँटने,
अब यादों के दीये हम जलाए बैठे हैं।

खामोशी में भी शोर है उनकी यादों का,
हम हर एक लफ़्ज़ उनके दिल में सजाए बैठे हैं।

वक़्त की रफ़्तार ने छीन लिया सब कुछ हमसे,
बस एक पुरानी तस्वीर से दिल लगाए बैठे हैं।

अब तो उम्मीद भी हमने छोड़ दी है राजेश,
हम अपने ही इश्क़ को दफ़नाए बैठे हैं।

Read More

आरज़ू-ए-दिल में एक शम्मा जला कर देखो,
जिंदगी कितनी हसीन है, मुस्कुरा कर देखो।

कदम-कदम पर मिलेंगी नई मंज़िलें तुम्हें,
हौसलों के परों को जरा फैल कर देखो।

गम की परछाइयां भी छू न पयेगी तुम्हें,
उम्मिद का सूरज जरा चमका कर देखो।

इश्क़ की गहराइयों में छुपा है एक जहाँ,
दिल के दरिया में जरा उतार कर देखो।

हर लम्हा एक नई कहानी है यहाँ,
अपनी तरफ से कि दास्तां बना कर देखो।

ये जिंदगी एक खुला मैदान है, राजेश
अपनी ख्वाहिशों की पतंग उड़ कर देखो

Read More

ज़िन्दगी के सफर में, थोड़ा ठहर कर तो देखो,
हर लम्हे की खूबसूरती को महसूस करके तो देखो।

भीड़ में भी तन्हाई का एक सुकून मिलता है,
अपने आप से कभी मुलाकात करके तो देखो।

दुनिया की दौड़ में क्या खोया क्या पाया,
अपने दिल से ज़रा ये सवाल करके तो देखो।

ग़मों की शाम ढलेगी, खुशियों का सवेरा आएगा,
बस एक नई सुबह का इंतज़ार करके तो देखो।

लोग क्या कहेंगे, इस फ़िक्र को छोड़ दो,
अपनी ख्वाहिशों की उड़ान भर कर तोे देखो।

ये ज़िंदगी एक खुली किताब है, दोस्त,
इसमें एक नई कहानी लिख कर तो देखो।

Read More

लगता है मुझे मोहब्बत हो गई है
दिन भाग रहा है,
रात छोटी पड़ रही है,
वक्त का पता नहीं चल रहा
नींद आँखों से कोसों दूर हो गई है
लगता है मुझे मोहब्बत हो गई है

कभी चाँद में तेरा चेहरा दिखता है
आईनों में एक्स तेरा रहता है
यह कैसा जादू है, जो मुझ पर हो गया है
वह दिख नहीं रही कहां खो गई है
लगता है मुझे मोहब्बत हो गई

हर लम्हा बस तेरा इंतज़ार है
मिलने को दिल बेकरार है,
नज़रों को बस तेरा दीदार चाहिये
तुझे ढूंढ रहा हूं तेरा प्यार चाहिए
अब ये जिंदगी बेपरवाह सी हो गई
लगता है मुझे मोहब्बत हो गई है


तू साथ न हो, तो हर पल अधूरा लगता है
तेरे बिन अब, जीना भी गवारा लगता है
दुनिया के असुलो से टकरा सकता हूं
मौत के दरवाजे पर मुस्कुरा सकता हूं
तुझे पाने की जिद हो गई है
लगता है मुझे मोहब्बत हो गई है

इश्क के दरिया में डूब रहा हूँ
पानी ही पानी है मगर सुख रहा हूं
कोई जिंदा रहने का मकसद बता दे
कोई अपना कह कर गले लगा दे
जिंदा रहने की ख्वाहिश मर सी गई है
लगता है मुझे मोहब्बत हो गई है। (राजेश कालिया)

Read More

हमेशा दूरियों से दिल का रिश्ता हो, ये ज़रूरी तो नहीं,
पास रहकर भी अजनबी हो जाएं, ये ज़रूरी तो नहीं|

तेरी यादों के सहारे ही तो कटती है ये रातें मेरी,
हर रात तेरी बाहों में ही गुज़रे, ये ज़रूरी तो नहीं|

कई ख्वाब अधूरे हैं, कई बातें अनकही सी हैं,
हर बात लबों तक आए, ये ज़रूरी तो नहीं|

कभी तो लौट आएगा वो, इसी आस में बैठे हैं,
हमेशा ही इंतेज़ार में रहें, ये ज़रूरी तो नही|

ये जुदाई का मौसम भी गुज़र जाएगा इक दिन,
हर मौसम ही दर्द भरा हो, ये ज़रूरी तो नही|

Read More

उसकी आँखों का नशा होने लगा है,
इश्क़ में जीने का मज़ा होने लगा है।

चाँदनी रातें, ये महकती हुई हवा,
मौसम कुछ ज़्यादा ही हसीं होने लगा है।

पहले तो खुद में ही गुम रहते थे हम,
अब किसी और पे दिल फ़िदा होने लगा है।

उसकी हर बात, हर एक नाज़-ओ-अदा,
मेरे हर दर्द की दवा होने लगा है।

क्या कहें 'राजेश' आलम इस दिल का,
वो अजनबी अब मेरा खुदा होने लगा है।

Read More

आ बैठ पास कुछ गुनगुनाते हैं,
हाल-ए-दिल क्या है तुम्हें बताते हैं।

कुछ तुम कहो कुछ हम कहें,
बेचैनियों को ज़रा सुलाते हैं।

तन्हाई का ये आलम अजीब है,
आओ, एक-दूजे में खो जाते हैं।

जो दर्द दबा है इन साँसों में,
आँखों से आज छलकाते हैं।

इश्क़ का ये रंगीन समां है,
चलो, दुनिया को भुलाते हैं। राजेश कालिया

Read More