मंजिल - पथक और राही by Muskurahat in Hindi Novels
कहानियां कुछ कह सी जाती है, जो दिल की बात है वो बयां सी कर जाति है ऐसे ही मेरी पहली कहानी की कोशिश कापहला भाग.....     ...
मंजिल - पथक और राही by Muskurahat in Hindi Novels
कुछ किस्से, कुछ बाते, कुछ कही देखे हुए, कुछ पढ़े हुए कुछ विचार, से बनते है किरदार.... इन्ही किरदार की बातो भरी कहानी, और...
मंजिल - पथक और राही by Muskurahat in Hindi Novels
कहानी के पहलु, कभी हस्ते हुए कभी रोते हुए, अभी तो हसी का माहोल, अभी गम डूबा हुआ संसार, पर कहानियां कभी खत्म नहीं होती, क...