चौहान हवेली – रात
पूरा हॉल अब भी चुप था। सबकी नजरें विवान पर टिकी थीं।
विराट उसके सामने घुटनों के बल बैठा था। उसकी आँखों में डर, उम्मीद और confusion सब एक साथ थे।
विराट बोला -
बेटा… जिसने तुम्हें बचाया… वो कैसी दिखती थी?
विवान तुरंत बोला—
मम्मा जैसी!
विवान अब मासूमियत से सब बताने लगा।
विवान बोला -
उन्होंने bad men को बहुत मारा… फिर मुझे गोद में लेकर भागीं…
काजल और प्रेम ध्यान से सुन रहे थे।
विवान बोला -
उनके हाथ में gun भी थी…
गंगा जी डर गईं। लेकिन विवान के चेहरे पर डर नहीं…भरोसा था। विराट की साँसें भारी हो गईं।
उसके दिमाग में बार-बार वही बात घूम रही थी—
मम्मा जैसी…
क्या सच में कोई लड़की संपूर्णा जैसी दिखती थी? या trauma की वजह से विवान ऐसा सोच रहा था? लेकिन विवान की आँखों में झूठ नहीं था। तभी विवान ने अपनी छोटी मुट्ठी खोली। उसके अंदर एक छोटी silver chain थी।
विवान बोला -
ये मम्मा की है… गिर गई थी।
विराट ने काँपते हाथों से वो chain ली। उसकी आँखें फैल गईं।
क्योंकि उस pendant पर बना था—
“S”
ये संपूर्णा की नहीं थी।विराट धीरे-धीरे उस chain को देखता रह गया। उसे पहली बार एहसास हुआ कोई है…जो उसकी पत्नी जैसा दिखता है। और उसी ने उसके बेटे की जान बचाई है।
उसी समय संयोगिता अपने penthouse के bathroom में खड़ी थी। Washbasin पर खून धुल रहा था। उसकी घायल बाँह पर पट्टी बंधी हुई थी। लेकिन अचानक उसकी नजर अपने गले पर गई। वहाँ chain नहीं थी। संयोगिता कुछ सेकंड के लिए चुप रह गई। फिर उसे याद आया जब विवान उससे लिपटा था…तभी शायद chain टूट गई थी। उसने आँखें बंद कर लीं। अब पहली बार उसका एक हिस्सा चौहान परिवार तक पहुँच चुका था।
विराट balcony में खड़ा उस chain को देख रहा था। बारिश की बूंदें उसके हाथों पर गिर रही थीं।
उसकी आँखों में दर्द के साथ एक नया सवाल था—
आखिर… वो लड़की कौन है?
और दूसरी तरफ संयोगिता शीशे में खुद को देख रही थी। उसे अपने चेहरे में फिर संपूर्णा दिखाई दी।
उसने धीरे से फुसफुसाया—
मैं तुम्हारा वादा निभा रही हूँ…
सुबह
शहर की सबसे बड़ी tech companies में से एक—
“Singh Global Tech”
ऊँची glass building के top floor पर… अपने विशाल cabin में संयोगिता अकेली बैठी थी। उसके सामने files खुली थीं। Laptop screen पर कई business reports चल रही थीं। लेकिन उसका ध्यान कहीं और था।
उसके दिमाग में बार-बार विवान की आवाज़ गूंज रही थी—
Mumma…
संयोगिता ने आँखें बंद कर लीं। उसने खुद से दूर रहने की बहुत कोशिश की थी। लेकिन अब वो समझ चुकी थी वो उस बच्चे को यूँ अकेला नहीं छोड़ पाएगी। और सिर्फ विवान ही नहीं…संपूर्णा का वादा भी उसे वापस खींच रहा था।
लेकिन सवाल था वो चौहान परिवार तक पहुँचे कैसे? वो सीधे वहाँ नहीं जा सकती थी। अगर अचानक उसके जैसे चेहरे वाली लड़की उनके सामने आ गई…तो सबकुछ बिगड़ सकता था।संयोगिता अपनी chair पर पीछे झुक गई। उसकी आँखें सोच में डूब गईं। तभी उसकी नजर एक business file पर पड़ी।
File के ऊपर लिखा था—
Chauhan Infotech Pvt. Ltd.
संयोगिता की आँखों में हल्की चमक आई। उसे याद आया—Virat अपनी company का owner था।
और अब…संपूर्णा की मौत के बाद वही CEO भी बन चुका था। संयोगिता धीरे-धीरे मुस्कुराई। अब उसे रास्ता मिल चुका था। अगर वो personal जिंदगी में नहीं पहुँच सकती…तो professional दुनिया के जरिए पहुँच सकती है।
Business meetings…
partnerships…
deals…यही उसका रास्ता बनने वाला था। उसने तुरंत intercom उठाया।
संयोगिता बोली -
Mr. Rajput को भेजो अंदर।
कुछ देर बाद उसका manager cabin में आया।
Manager बोला -
Yes ma’am?
संयोगिता ने file उसकी तरफ बढ़ाई।
संयोगिता बोली -
Chauhan Infotech के साथ meeting arrange करो।
Manager थोड़ा surprise हुआ। क्योंकि संयोगिता rarely किसी company में खुद interest लेती थी।
Manager के जाने के बाद…संयोगिता खिड़की के सामने जाकर खड़ी हो गई। उसकी आँखों में फिर वही ठंडापन लौट आया। लेकिन इस बार उसके अंदर एक और भावना भी थी—
एक अजीब सा खिंचाव।
वो धीरे से फुसफुसाई—
विवान…
दूसरी तरफ Virat अपने cabin में बैठा था। संपूर्णा की chair अब भी खाली थी। उसने दर्दभरी नजरों से उस chair को देखा। तभी उसकी secretary अंदर आई।
Secretary बोली -
Sir… Singh Global Tech की owner आपसे meeting करना चाहती हैं।
Virat ने बिना ऊपर देखे कहा—
Schedule कर दो…
उसे नहीं पता था उस meeting के बाद उसकी जिंदगी फिर से बदलने वाली है।
शहर के सबसे luxurious hotels में से एक। बड़ी glass walls…soft lights…और business world के बड़े लोग।
आज यहाँ एक महत्वपूर्ण business meeting होने वाली थी—
Chauhan Infotech
और
Singh Global Tech
Virat होटल के अंदर आया। Black suit…थका हुआ चेहरा…और आँखों में महीनों पुराना दर्द। संपूर्णा के जाने के बाद उसकी मुस्कान जैसे कहीं खो गई थी। अब वो सिर्फ काम में खुद को डुबो रहा था।
उसी समय होटल के दूसरे entrance से संयोगिता अंदर आई। उसने simple white anarkali suit पहना था।
ना कोई दिखावा…ना चमकदार fashion। फिर भी उसकी खूबसूरती इतनी शांत और गहरी थी। कि लोग अनायास उसकी तरफ देखने लगे। उसके खुले बाल हल्के-हल्के हवा में हिल रहे थे। वो भले ही अंधेरे में जीती थी…लेकिन उसके पहनावे में हमेशा एक सादगी रहती थी।
Meeting hall का दरवाज़ा खुला। Virat अंदर आया।
और उसी पल उसकी नजर सामने बैठी संयोगिता पर पड़ी।
उसके कदम अचानक रुक गए। उसकी आँखें फैल गईं। साँस जैसे अटक गई। क्योंकि सामने बैठी लड़की…बिल्कुल संपूर्णा जैसी दिख रही थी।
कुछ सेकंड तक Virat बस उसे देखता रह गया। उसे लगा जैसे वक्त अचानक पीछे लौट गया हो। वही आँखें…वही चेहरा…
वही मासूम सादगी। बस फर्क इतना था संपूर्णा की आँखों में नरमी थी। और इस लड़की की आँखों में…खामोश अंधेरा।
संयोगिता भी उसे देख रही थी। उसने पहली बार इतने करीब से Virat को देखा। उस आदमी को…जिसके लिए संपूर्णा आखिरी साँस तक परेशान थी। Virat की आँखों का दर्द देखकर एक पल को उसका दिल भारी हो गया। लेकिन उसने अपने चेहरे पर professionalism बनाए रखा। कुछ सेकंड की खामोशी के बाद संयोगिता धीरे से खड़ी हुई।
संयोगिता बोली -
Hello Mr. Virat Chauhan.
उसकी आवाज़ शांत थी। Virat अभी भी उसे देख रहा था। जैसे उसका दिमाग यकीन ही नहीं कर पा रहा हो।bफिर उसने धीरे से हाथ बढ़ाया।
Virat बोला -
Hello…
उसकी आवाज़ हल्की काँप गई। दोनों ने हाथ मिलाया। और उसी पल Virat के अंदर कुछ टूटकर जाग उठा। क्योंकि इतने दिनों बाद…उसे पहली बार ऐसा लगाजैसे संपूर्णा फिर उसके सामने खड़ी हो।
और दूसरी तरफ संयोगिता ने उसकी आँखों में वो खालीपन देखा जो सिर्फ किसी टूटे हुए इंसान में होता है। Meeting शुरू होने वाली थी। लेकिन असली कहानी…अब शुरू हुई थी।