विराट का आलीशान घर – सुबह
रसोईघर में
संपूर्णा (चाय बनाते हुए, मुस्कान के साथ) बोली -
अच्छा, आज विराट जी को जल्दी जाना है, तो चाय गर्म और नाश्ता तैयार। विवान, अपना खिलौना इधर रखो।
विवान (चार साल का मासूम बेटा, खिलौने से खेलते हुए) बोला -
मम्मी, मम्मी… कार कहाँ रखी है?
संपूर्णा (हंसते हुए) बोली -
वो तुम्हारी डीलक्स रेड कार? वही तुम्हारे रूम में है। अभी संभाल कर रखना, पापा के आने से पहले।
लिविंग रूम में
संपूर्णा (सभी दस्तावेज़ और लैपटॉप चेक करते हुए) बोली -
हां, आज मीटिंग लंबी है। लेकिन घर का हर काम भी समय पर पूरा होना चाहिए।
विवान (मम्मी के पास दौड़ते हुए) बोला -
मम्मी, मुझे कहानियाँ सुनाओ…
संपूर्णा (विवान को गोद में उठाते हुए) बोली -
ठीक है, अभी तुम्हें ‘साहसी राजा’ की कहानी सुनाती हूँ।
विराट का ऑफिस कॉल
फोन रिंग
संपूर्णा (फोन उठाते हुए) बोली -
हैलो… हाँ विराट जी? सब ठीक है?
विराट (फोन में) बोला -
संपूर्णा… मुझे पता है तुम घर संभाल रही हो। लेकिन मुझे तुम्हारे हाथों पर पूरा भरोसा है। मैं आज देर से आउँगा।
संपूर्णा (धीरे मुस्कुराते हुए) बोली -
चिंता मत करो, सब ठीक है। विवान भी स्कूल के लिए तैयार है। आप फिक्र मत करो।
विराट की यादें – फ्लैशबैक
विराट (संपूर्णा को गले लगाते हुए) बोला -
संपूर्णा… तुम्हारे बिना मैं कुछ भी नहीं। तुम्हारे बिना ये घर, ये कंपनी, सब अधूरा है।
संपूर्णा (मुस्कुराते हुए) बोली -
विराट जी… आप हमेशा काम में व्यस्त रहते हो, पर मैं जानती हूँ, आपका दिल सिर्फ मेरा है।
वर्तमान – रसोईघर में
विवान बोला -
मम्मी, पापा जल्दी घर आओ, मैं तुम्हारे लिए पापा का डिनर सजाऊँगा!
संपूर्णा (मुस्कान के साथ) बोली -
ठीक है, बेटा। अब जल्दी नाश्ता खा लो, स्कूल के लिए तैयार होना है।
संपूर्णा, विवान को तैयार कर रही है, घर में हर जगह प्यार और व्यवस्था का माहौल है।
(संपूर्णा की सोच) -
विराट जी की यादें हमेशा मेरे साथ हैं… और मेरा काम है इस घर को खुशियों से भरना। चाहे कोई कितना भी व्यस्त क्यों न हो, मैं सब संभाल लूंगी।
विराट का आलीशान घर – शाम
लिविंग रूम में
विराट (संपूर्णा के पास बैठते हुए, मुस्कुराते हुए) बोला -
संपूर्णा… याद है कॉलेज में हम दोनों उस गार्डन में कहाँ बैठते थे? वही पुराने बेंच के पास…
संपूर्णा (हल्की हँसी, आंखों में चमक लिए) बोली -
हां… आपके साथ छुप-छुप कर पढ़ाई करने का मज़ा… और तुम हमेशा मेरी कॉपी चुराने की कोशिश करते थे।
विराट (धीरे से उसके हाथ पकड़ते हुए) बोला -
और मैं हर बार तुम्हें परेशान करके भी ये सोचता था… कि ये पल हमेशा ऐसे ही रुक जाए।
फ्लैशबैक – कॉलेज गार्डन
विराट (यंग) (संपूर्णा के कंधे के पास झुकते हुए) बोला -
संपूर्णा… तुम हमेशा इतनी स्मार्ट और खूबसूरत कैसे हो गई?
संपूर्णा (यंग) (लाल हो जाती है) बोली -
बस… पढ़ाई का असर है। और आप हमेशा मस्ती में रहते हो।
विराट (यंग) बोला -
पर यही मस्ती मुझे हमेशा तुम्हारे पास खींच लाती थी…
वर्तमान – घर में
संपूर्णा (विराट की आंखों में देखते हुए, धीरे से) बोली -
विराट जी… आपके साथ हर पल ऐसा ही लगता है… जैसे वही गार्डन और वही बेंच अब भी हमारे बीच है।
विराट (संपूर्णा के बालों को हल्का सहलाते हुए) बोला -
संपूर्णा… मैं हमेशा चाहता हूँ कि हम एक-दूसरे के इतने करीब रहें। सिर्फ आज नहीं, हमेशा।
संपूर्णा (हाथ पकड़ते हुए) बोली -
हमेशा… विराट जी।
विवान का मासूम पल
विवान (खिलौने लेकर आता है) बोला -
पापा… मम्मी… मेरे लिए भी थोड़ा प्यार बचा है?
विराट (हंसते हुए, विवान को गले लगाते हुए) बोला -
बिलकुल बेटा! तुम्हारे लिए सबसे ज्यादा प्यार हमेशा रहेगा।
संपूर्णा (मुस्कान के साथ) बोली -
देखो… हमारा छोटा हीरो भी खुश है।
विराट, संपूर्णा और विवान – तीनों का प्यारा और घनिष्ठ पल, घर में प्यार और सुरक्षा का माहौल बनाता है।
(संपूर्णा की सोच) -
विराट जी… आपके बिना मैं अधूरी हूँ। लेकिन आपके साथ, हर पल पूरा लगता है। यही हमारी छोटी दुनिया है – हमारी खुशियों की दुनिया।
विराट का आलीशान घर – शाम का समय, लिविंग रूम और बाहर का बगीचा
आवाज़ बाहर से आई -
भीभी! मेरा लैपटॉप कहाँ है?
संपूर्णा (मुस्कुराते हुए) बोली -
आई देवरानी जी!
काजल – संपूर्णा की देवरानी, हल्की सांवली, प्यारी और थोड़ी नटखट।
प्रेम – संपूर्णा का देवर, मस्ती भरा और हमेशा बच्चों का फेवरेट।
वर्षा – संपूर्णा की जेठानी, खाना बनाना बहुत पसंद करती हैं।
ऋषभ – संपूर्णा का जेठ, बड़े सुकून वाले, परिवार में सबके लिए आदर्श।
गंगा – संपूर्णा की सास, घर की इज्जत और प्यार की मूरत।
अर्जुन चौहान – संपूर्णा के ससुर, बड़े स्नेही और हंसमुख।
विवान (काजल के पीछे दौड़ते हुए) बोला -
चाची! चाची!
विवान, काजल के पीछे चिल्लाते हुए, हाथ बढ़ाए हुए।
संपूर्णा (हंसते हुए) बोली -
विवान… हमेशा काजल चाची के पीछे ही क्यों दौड़ते हो?
विवान (मुस्कुराते हुए) बोला -
क्योंकि चाची और चाचा मेरे फेवरेट हैं… और ताई जी का खाना भी मुझे बहुत पसंद है!
विवान (दादू के पास खेलते हुए) बोला -
दादू, ये देखो… मैं गाड़ी चला रहा हूँ!
विवान (दादी के पास) बोला -
दादी… कहानी सुनाओ!
संपूर्णा (प्यार से) बोली -
और अब सोने का समय… पापा के पास जाकर सो जाओ, बेटा।
विराट (विवान को गले लगाते हुए) बोला
हम्म… और मैं तुम्हारा हीरो बनूँगा, है न?
घर में हर तरफ प्यार और घनिष्ठता का माहौल।
मम्मी के साथ सोना – सुरक्षा और आराम।
पापा के साथ खेलना और गले लगाना – खुशी और प्यार।
दादी की कहानियाँ – सीख और सुकून।
दादू के साथ खेलना – हंसी और मस्ती।
चाची-चाचा के साथ प्यार भरी नज़दीकियाँ।
ताई जी का खाना और ताऊ जी का प्यार।
विराट (संपूर्ण को धीरे से देखते हुए) बोला -
संपूर्णा… देखो, हमारा छोटा हीरो सबके साथ कितना प्यार बाँटता है। लेकिन जब वो मेरे पास आता है, तो लगता है जैसे ये घर और भी पूरा हो गया।
संपूर्णा (विराट के हाथों को पकड़ते हुए) बोली -
विराट जी… यही हमारी दुनिया है। और मैं हर दिन शुक्रगुज़ार हूँ कि ये सब मेरे साथ है।
विराट और संपूर्णा – एक-दूसरे की आँखों में प्यार और भरोसा,
विवान – मासूमियत से खेलता हुआ, घर में खुशियों का माहौल बना रहा है।
(संपूर्णा की सोच) -
ये घर… ये परिवार… मेरे लिए सबसे कीमती है। प्यार, मस्ती, समझदारी और नज़दीकियाँ – यही हमारी असली खुशी है।