ateet ka adha sach in Hindi Thriller by vishnupriya pandit books and stories PDF | हैरानी - Ateet ki Yaadein - 17

Featured Books
Categories
Share

हैरानी - Ateet ki Yaadein - 17

Episode - 17 (अतीत का आधा सच)


अस्पताल के उस ठंडे कमरे में रिया और मास्कमैन डॉक्टर अकेले है । फिर मास्कमैन डॉक्टर के हाथ से रिया वह धागा अपने हाथ में लेती है । वह लाल धागे को देख रिया का पूरा शरीर कांप जाता है , उसके बगल में खड़े मास्कमैन उसकी आंखों के खौफ को पढ़ने की कोशिश कर रहा होता है । 


मास्कमैन डॉक्टर ने रिया के हाथ से धागा लिया और गंभीर आवाज में कहने लगा " यह सिर्फ एक धागा नहीं है रिया । यह किसी के यहां होने की दस्तक है " । 
जैसे ही रिया ने उस धागे को कस कर पकड़ा , उसे अपनी कलाई पर वहीं पुराना दबाव महसूस हुआ । कमरे की बत्ती हल्की सी झपझपाई और रिया की आंखें अतीत की गहराइयों में खो गई । 

कुछ साल पहले ...... 


शादी का मंडप सजा था । शहनाइयो की आवाज गूंज रही थी , पर रिया के कमरे में एक अजीब सी खामोशी थी । लाल जोड़े में सजी रिया आईने के सामने खड़ी थी , उसके हाथ में वह खत था जो उसकी सहेली प्रिया ने दिया । उस खत ने रिया को उलझन में डाल रखा था उस खत में किसी का नाम नहीं लिखा था उसमें सिर्फ एक लाइन लिखी थी - " जो बताया गया तुम्हे , वह सच नहीं है ।" 

रिया का दिल तेजी से धड़कने लगा " सच नहीं है ? क्या सच नहीं है ? मेरी शादी ? या कुछ और....? "
 उसके दिमाग में सवालों का तूफान उठ खड़ा हुआ । उसे अचानक महसूस हुआ की खिड़की के बाहर कोई खड़ा है । वह डरते - डरते खिड़की की ओर बढ़ी उसे एक खुशबू आई जो मदहोश कर देने वाली थी , खिड़की का पर्दा तेजी से लहराया । बाहर अंधेरा था , पर वहां कोई था । रिया उसे देखने के लिए कमरे की खिड़की से बाहर निकल गई ... उसे होश ही न रहा कि , वह कब घर की चार दिवारी से बाहर निकल गई । 
मंडप पर पंडित जी मंत्र पढ़ रहे थे । दूल्हा अपनी दुल्हन के इंतजार में बैठा था उसकी आंखों में गुस्सा और बेचैनी थी । शादी का मुहूर्त निकला जा रहा है मेहमानों में कानाफूसी शुरू हो गई थी - " दुल्हन कहा गायब हो गई ? क्या वह भाग गई ? क्या दूल्हे में कोई खोट है ? " 

दूल्हे का चेहरा गुस्से से लाल हो गया । उसके लिए यह अपमान की चरम सीमा थी । तभी , घर के मुख्य दरवाजे से रिया दाखिल हुई । उसके बाल बिखरे थे , चेहरे का रंग उड़ गया था और चेहरे पर एक अजीब सा खालीपन था । 

पूरा मंडप शांत हो गया । दूल्हा अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ । उसकी नजरो में रिया के लिए प्यार नहीं बल्कि गुस्सा था । 
" कहा थी तुम रिया ? अपने कमरे से गायब होकर , बाहर के दरवाजे से आ रही हो ? किसके साथ गई थी ? " दूल्हे की आवाज में कड़वाहट थी । 

रिया कुछ बोल नहीं पाई । वह बस किसी गहरी सोच में थी । लोग तरह - तरह की बाते कर रहे थे - " जरूर किसी के साथ भागने की कोशिश की होगी , पर पकड़ी गई ।" 

दूल्हे ने समाज के सामने अपना अपमान सह लिया , पर उसने मन ही मन ठान लिया कि इस अपमान का बदला वह रिया की पूरी जिंदगी तबाह करके लेगा ।
 तभी रिया शादी करने से मना कर देती है ।

यह बात सुन कर दूल्हे का गुस्सा सातवें आसमान में था। उसने मन ही मन सोचा अगर अब मेरी शादी न हुई तो यह समाज मुझपे उंगली उठाएगा। " मै शादी करूंगा मै यहां अपनी दुल्हन लेने आया था तो मैं खाली हाथ नहीं जाऊंगा मैं नहीं जानता तुम कहा से आ रही हो , तुम्हारे साथ क्या हुआ? लेकिन मैं तुम्हे दुनिया के ताने सुनने के लिए नहीं छोड़ सकता। इसलिए मैं शादी करूंगा और तुम्हे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करूंगा।" 

उसकी ये मीठी - मीठी बात सुन कर रिया के पापा ने रिया की एक न सुनते हुए उसे मंडप में ले जाकर दूल्हे के बगल में बिठा दिया । 

सिसकियों और कड़वाहट के बीच शादी की रस्मे पूरी हुई , पर उस रात रिया की दुनिया बदल गई । रिया की मांग में सिंदूर जरूर उसके दूल्हे ने भरा था लेकिन.... मन में रिया के आर्यन था ।

शादी के बाद जब रिया ने ससुराल की दहलीज पर कदम रखा , तो वहां स्वागत की आरती नहीं , बल्कि नफरत की चिंगारियां थी । मंडप पर हुए अपमान को उसकी सास ने एक हथियार बना लिया था । 

" देख लो कुलक्षिणी को ! कमरे से भाग कर आई थी , न जाने किस - किस के साथ मुंह काला करके आई है और ये नालायक, मेरा बेटा इसने फिर भी इस कुलक्षिणी से शादी करके इसे यहां ले आया है , अब ये हमारे खानदान की बहू बनकर राज करेगी ? "

सास की आवाज में जहर था । रिया बस नीचे नजरे किए खड़ी रही वो बेसुध थी उसकी सारी उम्मीदें चकना - चूर हो गई । उसने अपनी पति से जो आस लगाई थी वह टूट गई । उसे लगा था कि उसका पति उसका साथ देगा , पर उसकी आंखों में तो भयानक आग थी ।

रात के सन्नाटे में जब कमरा बंद हुआ , तो रिया का दिल किसी बेजुबान परिंदे की तरह फड़फड़ाने लगा । उसका पति हाथ में कोई उपहार नहीं बल्कि बेल्ट और अपनी नफरत लिए खड़ा था । रिया उसके हाथ में बेल्ट देख सहम गई , और अपने कदम पीछे की ओर बढ़ाने लगी ।

"सबके सामने मेरा सिर नीचा किया तुमने रिया ! अब उस अपमान की कीमत चुकानी होगी ," वह आगे बढ़ा और रिया की कलाई पकड़ कर उसे मरोड़ने लगा उसने रिया की कलाई को इतनी जोर से मरोड़ा कि चूड़ियां उसकी खाल में चुभ गई । ' कचर - कचर ' कांच टूटने की आवाज आई । 

रिया दर्द से कराह उठी ," आह ! छोड़िए मुझे ... मै ... मैं अपनी मर्जी से नहीं गई थी ।" 
" मर्जी ? तुम्हारी कोई मर्जी नहीं चलेगी इस घर में ! " इतना कहने के साथ ही उसने रिया को जोर से एक थप्पड़ मारा रिया फर्श पर जा गिरी , उसको अपने बचपन के दोस्त आर्यन की वो बात याद आ गई ( मेरे होते हुए तुम्हे कभी कोई दुख नहीं होगा ) आर्यन की ये बात उसको रुलाने लगी । और उसने अपने मन में सोचा आज अगर यहां आर्यन होता तो मेरी ये हालत न होती , उसके दिलों दिमाग में सिर्फ एक ही नाम था - आर्यन।

क्या रिया अपने पति और ससुराल की नफरत सह पाएगी ? जानने के लिए बने रहे । अपनी राय कॉमेंट में जरूर बताएं। फॉलो जरूर कर लें। और अपनी रेटिंग जरूर दें।