Episode -1 (लंबी रात खत्म हुई और एक अनकहा चेहरा)
अस्पताल के उस वीरान कमरे में चारों ओर सफेद दीवारों का सन्नाटा पसरा हुआ था। केवल मशीनों की 'बीप-बीप' की आवाज़ उस सन्नाटे को चीर रही थी। रिया ने बहुत धीरे से अपनी पलकें झपकाई। उसे महसूस हुआ जैसे वह सदियों पुरानी किसी गहरी और बोझिल नींद से जाग रही है। उसकी आँखो में एक अजीब सी भारीपन और थकान थी, जैसे पलकों पर किसी ने पत्थर रख दिए हों।
उसने अपना शरीर हिलाने की कोशिश की, पर हाथ-पैर जैसे बेजान लकड़ी के टुकड़े हो चुके थे। सब कुछ धुंधला था... जैसे किसी ने आँखो के सामने सफेद कोहरा फैला दिया हो। तभी उसे पास ही सफ़ेद कपड़ों में एक नर्स खड़ी दिखी, जिसके हाथ में इंजेक्शन था। रिया ने अपनी पूरी ताकत लगाकर नर्स को देखने की कोशिश की, लेकिन रोशनी उसकी आँखो में चुभ रही थी। एक पल के लिए होश आया और अगले ही पल अंधेरा फिर से उसे अपनी आगोश में लेने लगा। उसकी आँखें दोबारा बंद हो गई।
नर्स (डेजी) बुरी तरह घबरा गई। वह फौरन दौड़ती हुई डॉक्टर सिन्हा के पास पहुँची।
"डॉक्टर शाहब! उस लड़की को होश आ गया है!" नर्स डेजी की आवाज़ में घबराहट और उत्साह दोनों थे।
डॉक्टर सिन्हा बिना वक्त गंवाए रिया के कमरे की ओर दौड़े। उन्होंने देखा कि रिया अभी भी स्थिर पड़ी है, शरीर में कोई हलचल नहीं।
"कहाँ होश आया है? यह तो अभी भी बेहोश है!" डॉक्टर सिन्हा ने नर्स डेजी को फटकार लगाते हुए कहा।
नर्स डेजी कुछ बोलने ही वाली थी कि तभी रिया की पलकें फिर से कांपी। उसने धीरे-धीरे अपनी आँखें खोल दीं। नर्स डेजी ने तुरंत डॉक्टर सिन्हा को इशारा किया। डॉक्टर सिन्हा ने करीब आकर देखा—हाँ, वह लड़की जाग चुकी थी। रिया कुछ बोलना चाहती थी, उसके होंठ हिले पर आवाज़ गले में ही घुट कर रह गई। उसने हाथ उठाना चाहा, पर कमजोरी ने उसे जकड़ रखा था। उसकी बेचैनी देखकर डॉक्टर सिन्हा ने नरमी से उसका हाथ थपथपाया।
"शांत रहो... परेशान मत हो। तुम अब ठीक हो। बहुत कमजोरी है, इसलिए आवाज़ नहीं निकल रही। धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा।" डॉक्टर सिन्हा ने नर्स डेजी की तरफ मुड़कर सख्त लहजे में कहा, "इसका पूरा ख्याल रखना। कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। तुम्हें पता है ना... उसने क्या कहा था?"
'उसने'... वह कौन था? यह सवाल हवा में तैरता रहा और डॉक्टर सिन्हा वहाँ से चले गए।
कुछ दिनों बाद...
रिया की हालत में सुधार था। जब डॉक्टर सिन्हा उसका चेकअप करने आए, तो रिया के सूखे होंठों से ज़िंदगी का पहला शब्द निकला— "माँ..."
डॉक्टर सिन्हा ठिठक गए। उन्होंने उसकी ओर देखा, "क्या हुआ? कुछ कहना चाहती हो?"
रिया ने अपनी पूरी हिम्मत जुटाई, "मेरी माँ... कहाँ है?"
डॉक्टर सिन्हा ने कोई जवाब नहीं दिया। वह खामोशी से अपना काम करते रहे। रिया की आवाज़ इस बार थोड़ी तेज़ थी, "मेरी माँ कहाँ है? और... मैं कहां हूं? मुझे यहां कौन लेकर आया है?"
डॉक्टर सिन्हा ने जैसे ही जवाब देने के लिए अपना मुँह खोला, तभी गलियारे में भारी जूतों की आवाज़ सुनाई दी। वह आवाज़ कमरे की ओर ही बढ़ रही थी— 'ठक... ठक... ठक...'
ज्यों-ज्यों आवाज़ नज़दीक आई, डॉक्टर सिन्हा के चेहरे का रंग उड़ गया। वह सम्मान और थोड़े डर के साथ कुर्सी से उठकर खड़े हो गए। कमरे का दरवाज़ा धीरे-धीरे खुला। डॉक्टर सिन्हा को इस तरह सहमा हुआ खड़ा देख, रिया की धड़कनें तेज़ हो गईं। उसने अपनी गर्दन घुमाई और दरवाज़े की ओर देखा...
दरवाज़े पर एक लंबा, गबरू जवान लड़का खड़ा था। उसकी कद-काठी किसी मॉडल जैसी थी, लेकिन उसका अंदाज डरावना था। गहरे काले बाल उसके माथे पर बिखरे थे। उसने एक महंगा कोट-पैंट और टाई पहनी हुई थी। कलाई पर बंधी कीमती घड़ी कमरे की मद्धम रोशनी में चमक रही थी। आँखो पर काला चश्मा और चेहरे पर एक मास्क... वह बिल्कुल सीधा, अपने दोनों हाथ पीछे बांधे किसी पत्थर की मूर्ति की तरह खड़ा था।
डॉक्टर सिन्हा, जो अब तक रिया के सामने सख्त बने हुए थे, उस लड़के को देखते ही पसीने-पसीने हो गए। वे घबराते हुए उसके पास गए। उन दोनों के बीच दबी आवाज़ में कुछ बात होने लगी। रिया अपनी धुंधली आँखो से उन्हें देख रही थी और मन ही मन सवालों के जाल में उलझ रही थी— 'आखिर ये कौन है? इसे देखकर डॉक्टर साहब के चेहरे की हवाइयां क्यों उड़ गई हैं? क्या बातें हो रही हैं उनके बीच?'
तभी, उस लड़के ने धीरे से अपनी आँखो से चश्मा उतारा। उसकी ठंडी और पैनी नज़रें सीधे रिया के चेहरे पर जाकर टिकीं। रिया का रोम-रोम कांप उठा। बिना कुछ कहे, वह लड़का मुड़ा और गलियारे के अंधेरे में ओझल हो गया।
"रुको!" रिया अपनी पूरी ताकत बटोरकर चिल्लाई। वह बेड से उतरी और उसके पीछे दौड़ने की कोशिश की, लेकिन बरसों की कमजोरी उस पर भारी पड़ गई। सिर चकराया, पैर लड़खड़ाए और वह ज़ोर से ठंडे फर्श पर गिर पड़ी। होश खोने से पहले उसे बस डॉक्टर सिन्हा की डरी हुई आवाज़ सुनाई दी।
जब रिया की आँखें दोबारा खुली, तो सामने डॉक्टर सिन्हा खड़े थे। रिया ने फौरन सवाल किया, "वह लड़का कौन था डॉक्टर? और उसने आपसे क्या कहा?"
डॉक्टर सिन्हा ने जैसे सुना ही नहीं। उन्होंने नज़रें चुरा लीं और नर्स डेजी की तरफ मुड़कर बोले, "इसे दवा दे दो।"
नर्स डेजी जैसे ही दवा लेकर आगे बढ़ी, रिया ने उसका हाथ झटक दिया। "मैं कोई दवा नहीं लूंगी! पहले मुझे बताइए कि वह कौन था और यहाँ क्या कर रहा था?"
डॉक्टर सिन्हा ने नर्स डेजी को एक रहस्यमयी इशारा किया और ठंडे लहजे में बोले, "इसे बहला-फुसलाकर कैसे भी दवा खिला दो!" इतना कहकर वे तेज़ कदमों से कमरे से बाहर निकल गए। रिया पीछे से चिल्लाती रही, "डॉक्टर! सुनिए... डॉक्टर!"
तभी नर्स डेजी ने उसके करीब आकर धीमी आवाज़ में कहा, "वो तुम्हें कुछ नहीं बताएंगे। अगर सच जानना है, तो तुम्हें खुद पता लगाना होगा। और पता लगाने के लिए तुम्हारा ठीक होना बहुत ज़रूरी है।" नर्स डेजी की बात में छिपा हुआ संकेत रिया को समझ आ गया। वह शांत हुई और खामोशी से दवा निगल ली। दवा के असर से उसकी पलकें भारी होने लगीं और वह गहरी नींद में डूब गई।
रिया को सोया देख नर्स डेजी फौरन डॉक्टर सिन्हा के केबिन में पहुँची।
"आज तो उसे शांत कर दिया डॉक्टर शाहब, पर कल फिर ज़िद की तो क्या करेंगे?" डॉक्टर सिन्हा ने कुछ नहीं कहा, बस कांपते हाथों से अपना फोन उठाया और कमरे से बाहर निकल गए।
अगली सुबह जब रिया की नींद खुली, तो उसके सामने रखी खाली कुर्सी पर वही अनजान लड़का बैठा था। वह मास्क और चश्मा पहने हुए खामोशी से रिया को ही देख रहा था। उसे इतना करीब देख रिया के गले से एक भयानक चीख निकल गई। नर्स डेजी दौड़ती हुई कमरे में आई, "क्या हुआ? तुम चीखी क्यों? क्या फिर कोई बुरा सपना देखा?"
रिया ने डर के मारे अपने दोनों हाथों से अपना चेहरा छिपा लिया था। नर्स डेजी ने चारों तरफ नज़रें दौड़ाई, लेकिन वहाँ रिया और उसके अलावा कोई तीसरा नहीं था। कमरे की खिड़की से आती धूप में कुर्सी बिल्कुल खाली थी। रिया ने धीरे से अपनी उंगलियों के बीच से देखा। कमरा खाली था। "मैने... मैने उसे देखा है! वह यहीं था! इसी कुर्सी पर बैठा मुझे देख रहा था... सच में!" वह पागलों की तरह ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी।
नर्स डेजी को रिया की हालत देख दुख हो रहा था। उसने उसे गले से लगाया, "यहाँ हमारे अलावा कोई नहीं है। देखो, पूरा कमरा खाली है।"
तभी डॉक्टर सिन्हा अंदर आए। रिया की हालत देख वे नर्स डेजी पर बरस पड़े, "मैने कहा था ना इसे कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए! तुम जानती हो ना... उसकी नज़र हम पर है। अगर उसे पता चला कि हमारी वजह से इसे तकलीफ हुई है, तो वह हमें ज़िंदा नहीं छोड़ेगा!"
"आखिर कौन है वो रहस्यमयी शख्स, जिससे डॉक्टर सिन्हा और नर्स डेजी मौत की तरह डरते हैं? क्या वह रिया का रक्षक है या उसका सबसे बड़ा दुश्मन?
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