TERE MERE DARMIYAAN in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 110

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तेरे मेरे दरमियान - 110

जानवी (आँखों में आँसू): - तो तुमने… सच में कभी मुझे छोड़ा ही नहीं आदित्य… सब मेरी गलती है , मैने तुम्हें कभी समझी ही नही ।
उसका दिल अब और बेचैन हो जाता है।

जानवी: - मैंने… दो साल ऐसे ही गँवा दिए…बस एक गलतफहमी में…”
वो अचानक खड़ी हो जाती है।

उसकी आँखों में अब फिर वही जिद… वही प्यार था।

जानवी (दृढ़ आवाज़ में): - अब और नहीं… मैं अभी रागिनी से पुछती हूँ , उसमे आदित्य जरुर आएगा ।

वो तुरंत फोन उठाती है…रागिनी को कॉल करती है।

रागिनी (फोन पर, खुश आवाज़ में): - हैलो जानवी… कैसी हो?”

जानवी (सीधे): - तुमने… शादी कर ली?”

रागिनी (हंसते हुए): - हाँ… और तुम आई भी नहीं…”

जानवी की आवाज़ हल्की काँपती है —

जानवी: - और… आदित्य?”

कुछ पल की खामोशी…

रागिनी (धीरे): वो… आज भी अकेला है जानवी।”

ये सुनते ही जानवी की आँखों से आँसू बहने लगते हैं।

रागिनी: - उसने कभी किसी को अपनी जिंदगी में आने ही नहीं दिया…क्योंकि वो आज भी… तुमसे प्यार करता है। खैर अब इन सब बातो मे क्या रखा है और बताओ ... तुमने शादी की के नही ?

अब जानवी का दिल और इंतजार नहीं कर सकता था। जानवी रागिनी के बात का बिना जवाब दिये ही पूछती है --

जानवी (आँसू पोंछते हुए): - वो कहाँ है रागिनी…?”

रागिनी हल्की मुस्कान के साथ कहती है --

रागिन :- वो तो इंडिया से बाहर है ।”

जानवी :- क्या वो तुम्हारे पार्टी मे आएगा ?

रागिनी जानवी के बात पर हैरान थी , रागिनी को लगा के आदित्य के आने से शायद जानवी नही आएगी ।

रागिनी :- हां ... वो मेरा दोस्त है तो वो जरुर आएगा । पर जानवी ... प्लीज तुम भी आना , भूल जाओ जो कुछ भी हूआ है , दो साल हो गए है , अब आदित्य के लिए कोई भी बात दिल पर मत रखो ।

जानवी ( आंखो मे आंशु लिए ) :- मुझे उससे बात करनी है रागिनी , तुम मेरा एक काम कर दोगी ?

रागिनी :- हां ... जानवी बोलो ना ।

जानवी :- आदित्य को तुम किसी भी हाल मे बुलाओ ।

रागिनी को लगा के जानवी आदित्य की फिर से Insult करना चाहती है ।

रागिनी :- दैखो जानवी , जो कुछ हूआ है उसे भूल जाओ और आदित्य का insult मत करो । अब कैसा बदला लेना ।

जानवी समझ जाती है के रागिनी गलत समझ रही है तब जानवी रागिनी को सब बोलकर सुनाती है तो रागिनी कहती है --
रागिनी ( खुश होकर ) :- इसका मतलब ... इसका मतलब तुम्हें सब याद आ गया है ?

जानवी :- हां रागिनी ।

रागिनी :- ओह ..... ये बात अगर तुमसे उस दिन पुछ लेती तो आज तुम दोनो एक साथ होते , आदित्य ने तुम्हारे अलावा किसी और से प्यार किया ही नही है । 

रागिनी कुछ दैर चुप रहती है और जानवी के आंखो मे आंशु निकलने लगता है , तभी रागिनी जानवी से पूछती है --

रागिनी :- जानवी ... क्या तुमने भी अभी तक शादी नही की ?

जानवी :- जब आदित्य ने मेरे अलावा किसी और को अपने दिल मे आने नही दिया तो मैं कैसे किसी और को आने दे सकती हूँ ।

रागीनी इतना सुनकर खुशी से कहती है --

रागिनी :- इसके मतलब ... इसका मतलब तुमने अभी तक शादी नही की , और तुम अब भी आदित्य से प्यार करती हो ?

जानवी :- हां ... मैं आदित्य से बहुत प्यार करती हूँ । 

रागिनी :- ये तो बहुत अच्छी बात है , मैं अभी आदित्य को कॉल करती हूँ और उसे सब बताती हूँ ।

तभी जानवी कहती है --

जानवी :- नही रागिनी रुको ... उसे तुम सिर्फ किसी भी लेकर आऔ । मैं आदित्य से खुद बात करुगीं ।

रागिनी :- वाह । ये तो और भी अच्छी बात है , तुम चिंता मत करो , आदित्य जरुर आएगा । अब तुम दोनो का वनवास खतम होगा ।

फोन कट होता है।

जानवी धीरे से अपनी आँखें बंद करती है…और फिर एक गहरी साँस लेकर कहती है —

जानवी :- “इस बार… मैं अपनी कहानी अधूरी नहीं छोड़ूँगी।

जानवी अशोक को सारी बात बोलकर सुनाती है तो अशोक ये सुनकर बहुत खुश हो जाता है और कहता है --

अशोक :- बेटा , इपर वाले ने तुम दोनो के एक दुसरे के लिए ही बनाया है , जाओ बेटा और आदित्य को लेकर आओ ।

और उसी पल…
जानवी अपने प्यार को पाने के लिए फिर से निकल पड़ती है। ️


दुसरा दिन भव्य होटल…चारों तरफ लाइट्स, म्यूज़िक, डांस, हँसी…
आज रागिनी का रिसेप्शन था।

सभी दोस्त मौजूद थे — रमेश , कृतिका और रश्मी और माहौल बिल्कुल हल्का-फुल्का और खुशियों से भरा हुआ था।

तभी वहां पर जानवी की एंट्री – जानवी दरवाज़े से जानवी अंदर आती है। रेड कलर की साड़ी में…सिंपल, एलिगेंट… लेकिन बेहद खूबसूरत। जानवी को वहां पर दैखकर रमेश , कृतिका और रश्मी सभी मुह बना लेता है क्योंकी जानवी के वजह से आदित्य को बहुत कुछ सहना पड़ा था ।

कृतिका :- ये जानवी यहां पर क्या कर रही है ?

रमेश :- वो जो भी करे हमे उससे क्या । आज उसी के वजह से आदित्य को बहुत कुछ सहना पड़ा ।

जानवी कृतिका और बाकीयों को दैखकर उसके पास जाने लगती है पर वो लोग जानवी को अपने और आते दैख वहां से चला जाता है । जानवी समझ जाती है के उन लोगो कोसमन मे अभी भी उसके लिए नाराजगी है । तभी उसकी आँखें भीड़ में किसी को ढूँढ रही थीं और वो था आदित्य । जानवी की आंखे आदित्य को दैखने के लिए बेताब थी ।

जानवी (मन ही मन): - आज… बस एक बार उससे बात करनी है…”

तभी वहां पर रागिनी आती है और जानवी को गले लगा कर कहती है --

रागिनी :- ओह जानवी .... कितने दिनो बाद तुमसे मिल रही हूँ । तुम्हें दैखकर बहुत अच्छा लगा ।

जानवी :- आदित्य ....?

रागिनी :- हां बाबा ... वो आ रहा है , अभी बात हूआ उससे , वो रास्ते मे ही है । इतने दिनो तक दुर रहे बस कुछ और समय ।

जानवी :- एक - एक मिनट भारी लग रहा है रागिनी । 

जानवी कुछ दैर चुप रहती है फिर पुछती है --
जानवी :- रागिनी ... क्या वो अब भी मुझसे प्यार करता है ?

रागिनी :- अगर प्यार नही करता तो अब तक शादी क्यों नही की ?

जानवी चुप रहती है जानवी की खामोशी को दैखकर रागिनी फिर कहती है ---

रागिनी :- तुम चिंता मत करो , मैं हूँ ना ... मैं बात करुगीं आदित्य से । तुम दोनो एक हो जाओ इससे बड़ी खुशी और क्या होगी ।

रागिनी जानवी के हाथ को पकड़ती है और कहती है --

रागिनी :- जानवी. .. आदित्य को कितना समझ पायी हो मैं नही जानती , पर आदित्य को मैं बचपन से जानती हूँ । उसके जैसा लड़का तुम्हें कही नही मिलेगा , वो अपने लिओ कम और दुसरो के लिए ज्यादा जीता है । दुसरो की खुशी मे अपनी खुशी दैखता है , पर वो पहली बार तुम्हारे प्यार के लिए बिखर गया , पर इस बार उससे बिखरने मत देना । उसे अपना बना कर रखना ।

जानवी हां मे अपना सर हिला देती है ।

तभी कुछ दैर बाद आदित्य की एंट्री – दूसरी तरफ से आदित्य आता है , ब्लैक सूट… कॉन्फिडेंट पर्सनैलिटी…लेकिन दिल आज भी वही पुराना था। जानवी वही पर बैठी थी और जैसे ही उसकी नज़र जानवी पर पड़ती है…वो वहीं रुक जाता है।

आदित्य (धीरे): - जानवी…?

तभी जानवी को कुछ अपना सा एहसास होता है और जानवी इधर - उधर दैखने लगती है और दोनों की नज़रें मिलती हैं…
और इस बार…उन नजरों में कोई शिकायत नहीं थी…बस हल्की सी झिझक और छुपा हुआ प्यार।

आदित्य को दैखकर जानवी खड़ी हो जाती है , जानवी के आंखो से आंशु बहने लगते है और दोनो ऐसे ही एक दुसरे को दैखने लगता है । तभी जानवी आदित्य की और अपना कदम बढ़ाती है के तभी वहां पर रमेश , कृतिका और रश्मी भागकर आती है और आदित्य को गले लगा लेता है । 

कृतिका :- वाव आदित्य , तुमतो एक दम से स्टार बन गए । कैसे हो तुम ?

आदित्य :- अच्छा हूँ ... तुम सब कैसे हो ?

कृतिका :- दैखो एक दम मस्त । 

आदित्य :- काम कैसा चल रहा है तुम लोगो का , कोई परेशानी तो नही है ना ?

रमेश ( नाराजगी से ) :- ये सब तुम आज पूछ रहे हो , इतने दिनो से ना फोन कॉल ना मेसेज , एक दम से भुल गया हमे । तु बिल्कुल बदल गया आदित्य ।

आदित्य :- मैं तुम लोगो को कैसे भूल सकता हूँ यार । बस कुछ काम के कारण ....

रश्मी :- पर इन दो सालो मे क्या हमारी एक बार भी याद नही आई ..?

आदित्य :- आई ... बहुत याद आई ।

To be continue....1047