Tere Mere Darmiyaan - 105 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 105

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तेरे मेरे दरमियान - 105

शमिका मोनिका के कंधे पर हाथ रखकर कहती है --

शमिका :- मोनिका .. विकी ने तुम्हें और मुझे , हम दोनो को धोका दिया है , और ना जाने कितनो को दिया होगा । और तुम उस धोकबाज को बचाना चाहती हो ?

मोनिका आँसू पोंछती है… और दृढ़ आवाज़ में कहती है —

मोनिका: - ठीक है…मैं कोर्ट में सच बोलूँगी।

शमिका और जानवी दोनों उसे देखते हैं।

मोनिका: - “मैं जज के सामने सब बता दूँगी…कि इस बच्चे का असली बाप विकी है…और आदित्य पूरी तरह बेगुनाह है।

अब पहली बार मोनिका के चेहरे पर पछतावे के साथ सच्चाई का साहस दिखाई दे रहा था। और उसी पल तय हो गया —
कोर्ट में अब सच सामने आएगा…और विकी का असली चेहरा दुनिया देखेगी।

इधर रात का समय था। विकी शमिका को कई बार कॉल चुका था पर शमिका विकी का कॉल को ब्लाक कर रखी थी , जिससे वितकी को समझ मे आ गया था के मोनिका ने शमिका को सब कुछ बता दिया है । विकी अपने कमरे में बेचैनी से टहल रहा था। उसके दिमाग में बार-बार वही बात घूम रही थी —

' अगर मोनिका ने कोर्ट में सच बोल दिया… तो सब खत्म हो जाएगा। शमिका भी चली जाएगी… और मेरी इज्जत भी।"

वह गुस्से में टेबल पर हाथ मारता है।

विकी (खुद से): - ये मोनिका जरुर शमिका को सब सच पता दिया है इसलिए शमिका ने मुझे ब्लाक करके रखा है । पर अगर मोनिका ने कोर्ट मो सच बता दिया तो ? नहीं… ऐसा नहीं होने दूँगा। मुझे कुछ करना होगा। 

विकी का पहला प्लान अब मोनिका को डराना था विकी तुरंत मोनिका को फोन करता है --

विकी :- मोनिका .. तुमने शमिका को सब बता तो नही दिया ना ? उसने मेरा नम्बर ब्लॉक करके रखा है ।

मोनिका :- अभी तो उसने तुम्हारा सिर्फ नम्बर बलॉक किया है , आगे बहुत कुछ बाकी है ।

विकी मोनिका के बात गुस्सा हो दाता है और अपने दांत को भींचते हूए कहता है --

विकी :- ये तुमने सही किया मोनिका ... 

मोनिका :- और तुमने जो किया क्या वो सही था ?

विकी: - मोनिका… कल कोर्ट में अगर तुमने मेरा नाम लिया…तो याद रखना… तुम्हारी जिंदगी भी बर्बाद हो जाएगी।

मोनिका अब पहले जैसी कमजोर नहीं थी।

मोनिका: - अब डराने की कोशिश मत करो विकी। बहुत गलती कर चुकी हूँ… अब सच ही बोलूँगी।

फोन कट जाता है। विकी का गुस्सा और बढ़ जाता है। विकी गुस्से से फोन को दैखते हूए कहता है --

विकी :- इसका हरजाना तुम्हें मंहगा पड़ेगा मोनिका ... अब मुझे ही कुछ करना होगा ।

विकी का दूसरा प्लान – झूठा सबूत

विकी सोचता है --

" अगर मोनिका सच बोलेगी… तो मैं उसे झूठा साबित कर दूँगा और एक बार अगर मोनिका झुटी साबित हो गई तो फिर सब कुछ मैं वापस पा लुगां , शमिका को भी ।

वह अपने एक आदमी को फोन करता है।

विकी: - मुझे ऐसे कागज चाहिए जिससे लगे कि मोनिका का किसी और के साथ रिश्ता था…और बच्चा उसी का है। मुझे मोनिका को बदनाम करना है , तुम्हें जो करना है करो पर ऐसा लगना चाहिए के मोनिका का संबध एक से नही बल्की कई लड़को के साथ है ।

उसका आदमी जवाब देता है —

" समझ गया सर… सब इंतजाम हो जाएगा।”

विकी अब अपने लिए तीसरा प्लान सौचता है और है शमिका को बहलाना । अगले दिन विकी शमिका से मिलने जाता है। उसके चेहरे पर नकली दुख था। विकी को दैखकर शमिका का गुस्सा फुट पड़ता है , विकी समझ जाता है के शमिका बहुत गुस्से मे है , विकी दुखी चेहरा बनाकर शमिका से पास जाता है और कहता है --

विकी: - शमिका… तुम मुझ पर शक कर रही हो ना? मोनिका झूठ बोल रही है… वो पैसे के लिए ये सब कर रही है।

शमिका शांत होकर उसे देखती है।

शमिका: - अब सच जानने के लिए और रहा ही क्या ? अगर तुम सच बोल रहे हो…तो कोर्ट में सच सामने आ ही जाएगा।

विकी को महसूस हो जाता है कि अब शमिका उस पर पहले जैसा भरोसा नहीं करती।

विकी मन ही मन सोचता है —

"अगर जरूरत पड़ी… तो मैं मोनिका को कोर्ट तक पहुँचने ही नहीं दूँगा।"

उसकी आँखों में खतरनाक इरादा दिखाई देता है। विकी शमिका से फिर कहता है --

विकी :- तुम्हें पता है वो दिन जिस दिन मोनिका मेरे घर आई थी और तुमने उसे दैखकर मुझसे पुछा था के ये कौन है , उस दिन भी वो मुझसे पैसे लेने के लिए आई ही । मैने उसे 10 लाख रुपया दिया था उस दिन ।

शमिका :- तुमने उसे सच छुपाने के लिए ये सब किया होगा! 

विकी :- नही शमिका , मैं ये सब बात को बाहर लाना नही चाहता था , क्योंकी मुझे डर था के ये सब झुटी खबर अगर तुम तक पहूँच जाए तो हमारे रिश्ते पर असर पड़ेगा । कल तुम्हें उसके पास जाना ही नही चाहिए था । उसे तो अब मौका मिल गया । उसने तुम्हें दैखकर पलटी मारा ताकी तुमको मुझसे अलग करके मुझसे और पैसा ले सके ।

शमिका :- विकी , मुझे बहलाने की कोशिश मत करो । 

विकी :- मैं तुम्हें बहला नही रहा हूँ । मैं तुमसे प्यार करता हूँ ।

शमिका चिप रहती है तब विकी फिर कहता है --

विकी :- ठिक है .. मैं जब तक ये साबित नही कर देता के मोनिका झुठ बोल रही है तब तक मैं तुम्हारे सामने नही आउगां ।

शमिका :- विकी... सच सामने आ चुका है और कल कोर्ट मे ये साबित भी हो जाएगा । 

विकी :- ठिक है शमिका ... कल कोर्ट मे ही मिलते है । 

विकी इतना बोलकर वहां से चला जाता है , 

विकी बाहर आकर उस आदमी को फिर से फोन करता है और कहता है --

विकी :- कल कुछ भी हो जाए पर मोनिका कोर्ट नही पहूँचना चाहिए ।
इधर शमिका को विकी के बातो का शमिका का कोई प्रभाव नही पड़ता है ।

उधर घर में जानवी बेचैनी से इधर-उधर टहल रही थी। उसके हाथ में मोबाइल था और दिल तेज़ी से धड़क रहा था। वह बार-बार आदित्य का नम्बर डायल करती है…पर हर बार वही आवाज़ सुनाई देती है —

"The number you are trying to call is switched off."

जानवी परेशान होकर फोन नीचे कर देती है। कुछ सेकंड बाद वह फिर कॉल करती है…लेकिन इस बार भी वही जवाब। अब उसकी आँखों में बेचैनी और बढ़ जाती है।

जानवी (धीरे-धीरे खुद से): - आदित्य… एक बार… बस एक बार बात कर लो…”

पर फोन अब भी बंद था तब जानवी फिर कृतिका को कॉल करती है कृतिका का फोन बजता है…पर कृतिका जानवी का फोन नहीं उठाता , वह दोबारा कॉल करती है…पर फिर भी कोई जवाब नहीं। उसे समझ आ जाता है के सब उससे नाराज़ हैं , अब जानवी सोफे पर बैठ जाती है उसके हाथ काँप रहे थे , उसकी आँखों के सामने एक-एक करके पुरानी बातें आने लगती हैं —

जब आदित्य ने उसे गुंडों से बचाया था ,जब वह हर बार उसकी रक्षा करता रहा और जब उसने बिना कुछ कहे उसकी सारी गलतफहमियाँ सह लीं ये सब सोचते - सोचते जानवी की आँखों से आँसू बहने लगते हैं।

जानवी (रोते हुए): - मैंने… मैंने सबके साथ कितना गलत किया…

वह अपने बालों में हाथ फेरती है और गुस्से में खुद से कहती है —

जानवी: - मैं इतनी अंधी कैसे हो गई…? जिस इंसान ने हमेशा मेरी रक्षा की…मैंने उसी को सबसे बड़ा दुश्मन समझ लिया।

उसके मन में बार-बार वही याद आ रहा था वो एक्सीडेंट के बाद का पल…जब वह आदित्य की गोद में थी…और आदित्य उससे ‘I love you’ कहने वाला था , जानवी की आँखों से आँसू और तेज़ बहने लगते हैं।

जानवी (टूटे हुए स्वर में) :- आदित्य… तुम कहाँ हो…?

वह खिड़की के पास जाकर बाहर देखने लगती है। आज पहली बार उसे एहसास हो रहा था के जिस इंसान को उसने ठुकराया…वही इंसान उसकी जिंदगी का सबसे सच्चा सहारा था।

जानवी धीरे से खुद से वादा करती है —

जानवी :- बस एक बार… एक बार आदित्य मिल जाए…तो मैं उससे सब सच कह दूँगी… के मैं उससे बहुत प्यार करती हूँ और उसके बिना नही रह सकती और उससे माफी माँग लूँगी। तुम कहां हो मुझे पता नही है पर आदित्य कल तो कोर्ट मे तुम आओगे ना ? कल मैं तुम्हें सब कुछ बता दुगीं ।

उधर आदित्य रागिनी के घर पर था । रागिनी आदित्य की बहुत अच्छी दोस्त थी तो इसिलिए वो उसी के पास तला गया था । आदित्य भी उदास बैठा था क्योंकी कल आदित्य का जानवी से डिवोर्स कन्फर्म हो जाएगा । 

रागिनी आदित्य को मायनस देखकर वो भी दुखी हो जाती है ।

आदित्य सोफे पर चुपचाप बैठा था। उसकी आँखें कहीं दूर खोई हुई थीं… जैसे वह सामने नहीं, बल्कि अपनी यादों को देख रहा हो।
टेबल पर रखी चाय ठंडी हो चुकी थी… पर आदित्य ने उसे छुआ तक नहीं।

रागिनी दरवाज़े के पास खड़ी उसे देख रही थी। वह समझ गई थी कि आदित्य अंदर से कितना टूटा हुआ है। रागिनी धीरे से उसके पास आकर बैठती है और कहती है --

रागिनी (धीरे): - आदित्य… कब तक ऐसे चुप बैठोगे?

आदित्य हल्का सा सिर उठाता है… लेकिन कुछ बोलता नहीं। कुछ पल की खामोशी के बाद वह धीरे से कहता है —

आदित्य: - कल… सब खत्म हो जाएगा रागिनी। मेरा प्यार मुझसे हमेशा के लिए दुर हो जाएगा ।

रागिनी समझ जाती है वह किस बारे में बात कर रहा है।

आदित्य: - कल कोर्ट में साइन हो जाएंगे…और उसके बाद… जानवी हमेशा के लिए मेरी जिंदगी से चली जाएगी। मैं उसे रोकने की बहुत कोशिश की , पर किसी का जबरदस्ती प्यार पाया नही जी सकता । तो अब बस ... 

उसकी आवाज़ में दर्द साफ सुनाई दे रहा था। रागिनी की आँखों में भी नमी आ जाती है।

रागिनी: - तुम उससे इतना प्यार करते हो… फिर भी उसे जाने दे रहे हो?

आदित्य हल्की सी मुस्कान देता है… पर वो मुस्कान दर्द से भरी थी।

आदित्य: - प्यार… कभी-कभी पकड़ कर रखने का नाम नहीं होता रागिनी…कभी-कभी छोड़ देना ही असली प्यार होता है।

वह कुछ पल के लिए चुप हो जाता है।

आदित्य: - अगर जानवी को लगता है कि मेरे बिना वो खुश रहेगी…
तो मैं उसे रोकने वाला कौन होता हूँ? उसकी खुशी मे खुश होना भी तो प्यार ही है ना ?

उसकी आँखें नम हो जाती हैं और फिर आदित्य अपने आंखे चुराते हूए कहता है --

आदित्य (धीरे): - बस… एक ही अफसोस रहेगा…

To be continue....996