Tere Mere Darmiyaan - 101 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 101

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तेरे मेरे दरमियान - 101

मोनिका :- एक रात .... Seriously ? ठिक है मैं ये पैसे वकील 
 को दोना चाहती थी , ताकी डि एन ए रिपोर्ट बदल सके । अगर तुम्हें नही देनी है तो मत दो । आगे जो कुछ भी होगा फिर मुझे मत बोलना ।

मोनिका की बात को सुनकर विकी गुस्सा हो जाता और कहता है --

विकी :- तो तुम अब मुझे ब्लेकमैल करोगी ?

मोनिका :- इतना तुम्हों भी करना चाहिए । आखिर तुम्हारे बच्चे की भविष्य का सवाल है । 

विकी :- मोनिका ..... 

विकी अपने गुस्से को कंट्रोल करते हूए कहता है --

विकी :- ठिक है पर ये आखिरी बार होगा । उसको बाद तुम्हें कोई पैसे नही मिलेगें ।

विकी फोन काट देता है और अपने से कहता है---

विकी :- ये मोनिका अब ज्यादा ही बोलने लगी है , ये कही पलट ना जाए । इससे पहले मुझे ही कुछ करना होगा । 

तभी वहां पर शमिका आ जाती है , विकी अपने मे इतना खोया था के शमिका के आने की भनक तक नही लगता है , तो शमिका विकी से कहती है --

शमिका :- विकी .... विकी ...

शमिका के बुलाने पर विकी शमिका की और दैखता है और फिर चोंक जाता है ।

शमिका :- क्या बात है , कहां खोये हो ?

विकी :- क.....कुछ नही ..?

शमिका :- कुछ परेशान हे तो बताओ ?

विकी :- नही ऐसी कोई पात नही है । तु
..तुम बैठो मैं अभी आता हूँ ।

इतना बोलकर विकी वहां सो चला जाता है , शमिका को विकी का स्वभाव कुछ अजीब सा लगा । शमिका धिरे से कहती है --

शमिका :- इसे क्या हूआ ...?

विकी बाहर से शांत दिख रहा था…लेकिन अंदर से बुरी तरह डर चुका था।

विकी (मन ही मन): - अगर DNA रिपोर्ट बदल गई… तो केस सीधा आदित्य पर जाएगा। और मैं… साफ बच जाऊँगा।”

वह तुरंत अपने पुराने जानने वाले लैब टेक्नीशियन को कॉल करता है। क्योकी उसे मोनिका पर बिल्कुल भी भरोसा नही था ।

विकी: - मुझे एक रिपोर्ट में छोटा सा बदलाव चाहिए।
नाम… और सैंपल मैचिंग बदलनी है।”

टेक्नीशियन ( घबराकर ) :- ये रिस्की है विकी… अगर पकड़े गए तो लाइसेंस चला जाएगा।”

विकी (ठंडे स्वर में): - रिस्क के पैसे दोगुने मिलेंगे।

लेकिन…विकी सिर्फ रिपोर्ट बदलवाने पर नहीं रुकता।
उसे डर है कि कहीं मोनिका पलट न जाए। इसलिए वह एक और चाल चलता है — वह मोनिका के साथ हुई अपनी कॉल रिकॉर्ड करना शुरू कर देता है। वह उसके मैसेज सेव कर लेता है। और secretly एक private investigator भी हायर करता है, ताकि अगर मोनिका उसे फँसाए तो उसके खिलाफ सबूत हो।

आदित्य ते पापा और मां आदित्य को कॉल करता है --

विद्युत :- बेटा , ये मैं क्या , तु इंडिया छोड़कर जा रहा है ?

पुनम :- बेटा ... तु हमारे साथ आजा । यहां पर रहो , तुझसे बहुत दुर रह लिया पर अब नही , अब से तेरी कोई जीत नही चलेगी , तुझे जितना जो कुछ करना था तुने कर लिया । अब तु सिर्फ मेरी सुनेगा ।

आदित्य :- मां .. पापा , मैं आउगां आपके पास और आपके साथ ही रहूगां , पर मां .. मुझे अभी जाना जरुरी है । मां जिस काम के लिए मैं घर ये बाहर निकली था उसे पुरा करने का समय आ गया है । बस कुछ दिनो की बात है मां ।

पुनम :- मैं यब समझती हूँ के तु क्यों जा कहा है । जानवी के यादो से दुर जाना है चाहती है ना बेटा । बेटा जानवी से हम लोग बात करते है ना । तु दुखी मत हो । हम बात करेगें अपनी बहूँ से ।

आदित्य :- नही मां , मुझो जो कुछ करना था , जितनी कोशिश करनी थी मैने कर ली । अब कुछ नही बचा । उसो कुछ भी बोलने की कोई जरुरत नही है ।

विद्युत :- पर बेटा ..

आदित्य :- पापा ... मां ... आपलोग मेरी चितां मत करो । मैं कुछ दिनो मे आ जाउगां । पर अभी मुझे जाना होगा । बस यो मोनिका की केस को ठिक करने के बाद ।

रात का समय था रात बहुत शांत थी…पर जानवी के भीतर शोर था। वो अपने कमरे की लाइट बंद करके खिड़की के पास बैठी थी।
चाँदनी अंदर आ रही थी… और उसके साथ यादों की परछाइयाँ भी।
जानवी बार-बार आदित्य के बारे में सोच रही थी। उसका गुस्सा…उसकी खामोशी…उसकी आँखों में छुपा हुआ दर्द…सब एक-एक कर सामने आ रहा था।

जानवी की आँखों से आँसू गिर पड़े जानवी अपने आंशु पोछती है और कहती है --

जानवी (धीरे से खुद से): - तुम इतने चुप क्यों रहे आदित्य…? एक बार तो मुझे रोक सकते थे…एक बार तो कह सकते थे कि तुम बेगुनाह हो…

इतना बोलने के बाद जानवी फिर खुद ही जवाब दे बैठी —

जानवी :- नहीं… तुमने कोशिश की थी…मैंने ही सुनना बंद कर दिया था… मैं बहुत बुरी हूँ आदित्य ... तुम मुझे डिजर्व ही नही करते । 

वो बिस्तर पर लेटती है…पर नींद आँखों से कोसों दूर थी। हर बार जब वो आँखें बंद करती…उसे वही एक्सीडेंट वाला पल दिखता —
उसका सिर आदित्य की गोद में…आदित्य की घबराई हुई आवाज़…
और उसका खुद का कहना —

"अभी नहीं…"

जानवी उठकर आईने के सामने खड़ी हो जाती है।

जानवी: - क्या आदित्य मुझे उस दिन I love you बोल रहा था …? मुझे कुछ याद क्यों नही आ रहा है ?

उसके चेहरे पर पछतावे की लकीर साफ थी , वो अपना फोन उठाती है…और आदित्य का नंबर देखती है… पर उंगली कॉल बटन पर रुक जाती है। जानवी सौच मे पड़ जाती है दिल कहता है — कॉल कर लो और पर जानवी आदित्य को क्या बोलती , यही सौचकर उसकी उंगली थम जाती है ।

कुछ सेकंड बाद…उसकी उंगली काँपती है… और वो
फोन सीने से लगाकर बैठ जाती है।

जानवी (टूटती आवाज़ में): - तुम्हारे बिना… सब खाली लग रहा है आदित्य…मैंने तुम्हें समझा ही नहीं…

और उसे एहसास होता है —वो सिर्फ आदित्य को मिस नहीं कर रही…वो खुद को भी मिस कर रही है —वो वाली जानवी… जो उसके साथ खुश थी। 

जानवी अपना फोन फिर से लेती है और अब आदित्य का नम्बर डायल करती है । पर आदित्य का फोन स्विच ऑफ आ रहा था । जानवी हैरान हो जाती है और बार - बार आदित्य को कॉल लगाती है पर हर बार आदित्य का नम्बर स्विच ऑफ आ रहा था । जानवी धिरे से कहती है --

जाववी :- ये आदित्य ने अपना फोन ऑफ करके क्यों रखा है ?

और उसी पल किसी और जगह…आदित्य भी अकेला बैठा था। उसके सामने जानवी की वही फोटो थी। दोनों एक-दूसरे को याद कर रहे थे…पर दोनों के बीच अब दूरी थी… और वो दूरी सिर्फ शब्दों से नहीं भरने वाली थी।

अशोक जानवी के कमरे की लाईट को जलता दैखकर जानवी के पास जाता है और कहता है--

अशोक :- जानवी ... बेटा तुम सोयी नही अभी तक ?

जानवी: - नींद नही आ रही है पापा । ऐसा लग रहा है जैसे मुझसे मेरा कोई अपना दुर जा रहा है । आदित्य को फोन किया तो , उसका फोन भी नही लग रहा है ।

अशोक :- ऐसा करोगी तो कैसे चलेगा । तुम्हारी तबीयत बिगड़ जाएगी । हम सुबह फिर बात करगें , आदित्य कहा पर है हम पता लगा लेगें और फिर कोस के डेट पर तो आएगा ही ना ।

जानवी :- पापा ... आप मुझे इतना समझाते रहे , आदित्य मुझे हर बार एक अच्छे पति की तरह मेरा साथ दिया और मैं ...मैने उसे क्या दिया , सिर्फ दुख । पापा पता नही को मैं आदित्य से प्यार करती थी के नही , पर मुझो ऐसा लगता है के जैसे अब आदित्य ही मेरा सब कुछ है । पापा , मैं उसे अपना दिल हाल कैसे बताउ ? क्या वो मुझ माफ करेगा ?

अशोक :- जरुर करेगा बेटा , वो आदित्य है , वो तुमसे बहुत प्यार करता है ।

अशोक से इतना सुनकर जानवी खुश हो जाती है और कहती है -

जानवी :- क्या आदित्य सच मे मुझसे प्यार करता है ?

अशोक :- हां बेटा , मैने उसकी आंखो मो दैखा है तुम्हारो लिए उसका प्यार , केयर और जिम्मेदारी है । अब सो जा सुबह हम फिर से आदित्य के पास जाएगें और इस बार मैं नही तुम खुद उससे बात करना ।

जानवी अशोक की बात को सुनकर उसके चोहरे पर एक हल्की संतोष वाली मुस्कान आ जाती है और वही बेड पर सो जाती है ।

जानवी दुसरे दिन सुबह सबसे पहले आदित्य के ऑफिस जाती है।
वहाँ बताया जाता है के सर ने छुट्टी ले ली है।
वो उसके पुराने घर जाती है। वहाँ पता चलता है के वो कुछ दिन पहले ही शिफ्ट हो गए।

वो उसके पसंदीदा कैफ़े जाती है। वही कोना… वही टेबल…
पर आदित्य नहीं। हर जगह खालीपन था। तभी आसमान में हल्की बारिश हो रही थी और जानवी उसी सड़क पर खड़ी थी…जहाँ कभी उसका एक्सीडेंट हुआ था।

वो जगह…जहाँ उसकी यादें अधूरी रह गई थीं। उसकी आँखों में आँसू थे…पर इस बार दर्द में सच्चाई थी। जानवी उस जगह पर खड़ी होकर आदित्य को याद कर रही थी । जानवी धिरे से खुद से कहती है --

जानवी (धीरे, खुद से): - यहीं… यहीं तुम मुझे अपनी गोद में उठाए बैठे थे ना आदित्य…तुम कुछ कहना चाहते थे उस दिन ... और मैंने… मैंने तुम्हें रोक दिया…

तभी उसे अचानक याद आता है उस दिन की कुछ झलक—आदित्य की आँखों में आँसू थे और उसकी आवाज़ काँप रही थी… आदित्य जानवी से बोल रहा था --

आदित्य :- अगर आज तुम्हें कुछ हो जाता… तो मैं खुद को कभी माफ नहीं करता… क्योंकि… क्योंकि मैं तुमसे—

और उसने उसके होंठों पर उंगली रख दी थी और कहती है --

जानवी :- अभी नहीं…

जानवी के आँसू तेज़ हो जाते हैं।

जानवी: - मैंने तुम्हें हर बार रोका आदित्य…तुम्हारे शब्दों को… तुम्हारे सच को… तुम्हारे प्यार को…मैंने तुम्हें कभी सुना ही नहीं…और तुम मुझसे दुर हो गए , शायद यही मेरी सजा है ।

वो घुटनों पर बैठ जाती है और रोते हूए कहती है --

जानवी (रोते हुए): - "तुम मुझे बचाते रहे… और मैं तुम्हें ही कटघरे में खड़ा करती रही…तुम चुप रहे…क्योंकि तुम मुझे खोना नहीं चाहते थे…और मैंने तुम्हें खो दिया… क्योंकि मुझे खुद पर भरोसा था… तुम पर नहीं… आदित्य बस एक बार मुझसे मिल लो । मैं तुम्हारे बिना अब रह नही पाउगीं आदित्य. ..

वो उठती है अपने आँसू पोंछती है उसकी आँखों में अब पछतावा ही नहीं…दृढ़ता भी है --

जानवी: - नहीं… इस बार मैं चुप नहीं रहूँगी। इस बार मैं तुम्हें ढूँढूँगी आदित्य। तुम जहाँ भी हो… तुम्हें बता कर रहूँगी… कि मैं गलत थी।
कि तुम सही थे। कि… मैं तुमसे प्यार करती हूँ। आदित्य बहुत प्यार । तुम ... तुम चितां मत करो , उस मोनिका के वजह से तुम परेशान हो ना .. मैं उस मोनिका को भी दैख लूंगी और सच का पता लगा कर ही रहूँगी ।


To be continue....952