Storeys - Part 43 in Hindi Motivational Stories by Neeraj Sharma books and stories PDF | मंजिले - भाग 43

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मंजिले - भाग 43

          " कोवा काटे " मंजिले कहानी सगरे की 4--भी कहानी ---------

                        जिंदगी चूर हो जाती है, जरूरी नहीं पीने से, मेहनत से थक कर भी। सोचना जरूरी हो जाता है, किस्मत मे हर पड़ाव पर सोचना। किसी का घर बर्बाद करना हो, तो अक्सर उन लोगों से रिश्ता जोड़ो, जो बहुत चुगली करते हो। झूठ की नीव पर घर बनते ही कहा है। बन गए तो फिर तमाशा लगा रहता है। हा, एक दोस्त याद आ गया, बहुत ही प्रभावशाली स्टेमना था।...

                       परन्तु ठग एक नंबर का... पूछो मत। कोई जान सकता है किसी को... दिमाग पढ़ने वाले दिमाग़ पढ़ लेते है। बस समझो। झूठ बोल कर जिंदगी मे मकान की नीव रखी हो वो दीवारे दलीले देता होगा "पता कया, करो और करो, चोर हो करो चोरी.. जैसे तैसे भी हाथ फिलाओ, सब के आगे ------ खूब झूठ बोलो, कही चले थोड़ी चले है। " '-----मुक़दर मे किसी के ठोकरे ही होती है, माग कर भी कभी किसमते बनी है।" खूब करो मन की करो।

                                  "जरूरी नहीं, कर्जे मे डूबे हो, और उतारे बिन भी मर सकते हो, टैक्स नहीं लगेगा।" 

                                        दगेबाज और कोई नहीं, "जमाना है साहब। हम थोड़ी है " मांगते रहना उनका काम होता है, और देना रहम होता है, पर हर कोई आपको ही कहेगा --- कोवा काटेगा, पहले जेब, फिर पता नहीं कया कया ------" भीख। "

"कच्चे घर की छत कया गिरी। " लडके की शादी हो गयी ----- हेड ऑफिस बिल मांगता रहा, अंत सरपच, नबरदार अंदर हो गए। जिन्होंने लिया था, बाबा ज़ी मोह माया तैयाग कर स्वर्ग चले गए।

कुछ दुनिया ऐसी है, समझो... चोर है, रोड इंस्पेक्टर है जानी आवारा तो उसे यही है रहने दो। "फैसले जल्दी लेने वाले अक्सर हार जाते है मिया "----! सोचकर बोलो," इतना की बस पहले खरबूजा पक ही जाये... "

" नहीं मित्र ' "सीखो एप्प से लेन और देन, जल्दी उपलब्ध हो जाएगी... मोबाइल पर। "  हसना जरूरी हो गया है। सब सोच रहे है, कैसे लुटे किसी को... सच मे।

कोई काम मेहनत का कोई करना नहीं चाहता... फिर खर्चे भी तो इतने, पूछो मत, कोई करे कया.... मुगफली से कोई शराब नहीं कोई पीता... पीता है वो बस बकरे के.... बस पूछो मत।  -" ---- अब तो उधार चल पड़ा है, ठेको पर, शायद हो सकता है, अगर ये ठेकेदार अगर शराबी की प्रॉब्लम समझ सके तो.... " हमें कौन समझा है कोई नहीं ------घर की मिलती नहीं है। कयोकि निकालनी नहीं आती... कुकर फाड़ जाता है...

                            "  चलो छोड़ो -----" जिसे भी दिये पैसे वो अगले जन्म का कह के चला गया। अब यकीन नहीं रहा। " एक इशतेहार लगा कोई कल ज़ी. टी रोड पे, पढ़ा एक महीने मे 15 % वेयाज मिलेगा 20000 पर, हमें मिले सुबह 10 से शाम 4 वजे तक। मैंने सोचा ये कौनसा फाडू बैंक आ गया... बैंक का नाम ही फ़ाशु था। फेशीयन शार्ट इसका मतलब था। बैंक एक साल से ऊपर तक अभी भी है हैरत मे सब। सच मे, कमरे बैंक के यही है। पर 60000000 करोड़ रूपये का चुना... लग गया। लालच....। पता नहीं कैसे फसाते थे कमबख्त। जिसके जयादा डूबे वो विचारा तो चारपाई पर है, जिनके डूबा दिये... "वो रोज आकर गाल मंदा बोल कर जाते है.".. देखो कैसी परशुस्ती है।

नीरज शर्मा ---------144702