zindagi ke dusre kinara in Hindi Thriller by AbhiNisha books and stories PDF | जिंदगी की दूसरे किनारा - 6

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जिंदगी की दूसरे किनारा - 6

जिंदगी के दूसरे किनारा पार्ट 6






और तभी आरती दिखाते हुए 
वह लेडी अपने हाथ रोक लेती है 
और ठहरते हुए 
हल्की झुकती है
और अपने बाएं हाथों में पकड़े हुए 
घंटी को 
पूजा स्थल पर रखती है
 और फिर सीधे खड़ी होती है 
और फिर मुड़ते हुए 
अपनी बेटी के तरफ अपने कदम बढ़ती है 
और हल्की आवाज में कहती है


 चिंता मतकरो 




और वही रिया ठहरते हुए 
 अपनी मां के तरफ देखते हैं 






और वही वह लेडी अपनी बेटी के पास आते ही 
आरती की थाली दाऐ हाथें बढ़ाते हुए
 बाएं हाथ में लेती है
और फिर आरती की थाली देखते हुए 
अपनी दाऐ हाथ आरती की थाली में बड़ाते हुए 
उन से हाथों हाथों में प्रसाद उठाते हुए 




और वही रिया अपनी मां की तरह देखते हुए 
 हल्की सर को तिरछी करती है 
 और उदासीपन से रिएक्ट करते हुए 
हल्की आवाज में कहती है 

 मोम 



और वही वो लेडी रिया को देखते हुए 
और परसात हाथों से उठाते हुए 
 अपने हाथ रिया की तरह बड़ाती है 




और फिर वही रिया 
 अपनी मां को अपनी तरफ प्रसाद लेकर हाथ बढ़ाते देख अपने बाएं हाथ बढ़ाते हुए 
 दाएं हाथ से फोन लेती है 
और अपने दाएं हाथ को अपने मां
 की तरफ प्रसाद के लिए बड़ाते है





और वही वह लेडी प्रसाद को उठाते हुए 
 और अपनी बेटी को देखते हुए 
 अपनी बेटी के हाथों में परसात रखती है 

और अपनी बेटी को देखते हुए 
 अपने हाथ धीरे-धीरे पीछे लेती है





और वही रिया अपने मां के हाथों से प्रसाद लेते हुए 
हल्के नजर झुका कर 
 अपने हथेली में रखिए परसात को देखते है
 और फिर
अपनी मां को देखते हुए 
परसात वाली हथेली को उठाते है 
और हल्के सर उठाते हुए
परसात का मुंह में धीरे से हथेली से खाती है 






और वही वह लेडी अपनी बेटी का प्रसाद देते ही 
अपने हाथ पीछे लेते हुए 
फिर से सर झुकाकर आरती की थाली की तरफ देखते हैं 
 अपने हाथों की उंगलियां थाली में डालते हुए 
उनसे चंदन लेती है
 और फिर सर उठाकर अपनी बेटी की तरह देखते हुए 
अपनी बेटी की माथे की तरफ देखते हुए





और वही रिया प्रसाद खाते हुए
 अपने हाथों को नीचे करते हुए
 अपनी अपने सर को भी नीचे लेटी है




 और तभी अचानक वो लेडी तिलक वाले हाथ 
अपनी बेटी के तरफ बढ़ाते हुए
उसके सर पर तिलक लगाती है 




और वही रिया यह देख 
 हल्के सर को झुकते हुए
 तिलक लेती है
 



और तभी वो लेडी अपनी बेटी को तिलक लगाते हुए 
 अपने हाथ पीछे लेती है 



और तभी रिया
 अपने दाएं हाथ बढ़ते हुए
आरती के थालीस में जलते हुए आग से 
आरती के अपनी तरफ धीरे-धीरे करके लेती है 
दो-चार बार




और या सीन नहीं खत्म हो जाता है 





कहीं कुछ देर बाद 
मेघना अपने बाथरूम में
 हाथों में बरस लिए 
बरस को मुंह में डालकर बरस कर रही है
 और बरस करते हुए
 अचानक आईने की तरफ देखते हुए
 वह ठहर जाती है 

और फिर 2 सेकंड बाद खुद को निहारत हुए 
मुंह में रखें टूथपेस्ट की लिक्विड को
 हल्के सर झुकाते हुए 
सिंक में थूकती है 




और 
हल्के सर उठा कर
 फिर से आईने की तरफ देखती है 
और उसके दिमाग में अचानक अजीब तरह की थार 
चलने लगता है 


क्या मैं मर जाऊं
 सायद
 यह अच्छा होगा
पर क्या करूं सुसाइड 



उसकी नज़रें सामने लगे हुए आईने के तरफ टिकी हुई है 
और उसके एक हाथों में बरस है 
और दूसरे हाथ सीधा नीचे की तरफ रखते हुए 



और उसके दिमाग एक जंग की मैदान 
जो खुद सुसाइड करने के लिए कह रहा है 
और कम दर्द से मारने की तरीके ढूंढने के लिए 



मरने के कितने तरीके हैं 
कैसे मारूं जिस दर्द ना हो 




और फिर अचानक से उसके अंदर के इंसान 
अजीब से रिएक्ट करते हुए कहती है 

आ आ

मरने के लिए 
भी डिसाइड करना
 कितना मुश्किल है 
 काश काश आसानी से मैं मर पाती 


उसके अंदर की आवाज इतनी मासूम भारी है 
कि 
ऐसा लग रहा है 
कि 
कोई छोटा बच्चा कोई खिलौना जीतने के लिए 
 अजीत सी रिएक्ट रिएक्ट कर कोशिश दोनों कर रहा है





और 
फिर अचानक उसके सामने लगी हुई 
 आने में एक अजीब से आकृति उभरने लगती है 

और 
उसके साथ-साथ अचानक से
उसके अंदर तेज आवाज में
 थोर चलने लगते हैं


पर क्या करूं 
मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा 



और तेज आवाज के साथ जल्दबाजी भारी लेहजे 
में उसके दिमाग में और बातें आने लगते हैं 


और सामने उबरे हुए आकृति 
बच्चों के तरह रिएक्ट करते हुए कहती है 


डिसाइड नहीं कर पा रही 
मरना आसान है या जीना



और फिर अपने दोनों हाथ अपने चेहरे और सर पर रखते हुए 
सर को झुकने उठाते हुए
 और डिप्रैस होते हुए
अजीब से रिएक्ट करते हुए 
 ऊंची और जल्दबाजी में कहता है




कभी लगता है 
मर जाऊं कभी लगता है जिंदा रहूं
 कभी लगता है 
यह करो कभी लगता है ना करो 


और ऐसे करते हुए 
वह आकृति रोन पर उतारू हो जाते हैं 




और वही मेघना वैसे ही खड़ी होकर ठहरी हुई 
 नजरों से आईने की तरफ देख रही है 
 जैसे उसे कोई हंसी नहीं 




और यह कहते हुए 
 उसके अंदर के इंसान 
जो शीशे में आकृति बन कर उभरा हुआ है
अपने दोनों हाथों से 
खुद के सर के बलों को  पकरते हुए
और भी पैनिक होने लगते हैं 
और चिल्लाहट भरी आवाज में कहने लगती है

मैं पागल हो रही हूं
 मुझे नहीं पता मैं क्या करूं 



और वही अभी मेघना 
आईने की तरफ कढ़ी निगाहों टिकाऐ हुए 
देख रही है 



और यह सिन यही खत्म हो जाता है







और अब समय धीरे-धीरे बीता जाता है 


एक दिन दोपहर मेघना अपने बिस्तर पर बैठी है 
एक हाथों में फोन लिए
 और नजरे झुकते हुए 
दूसरे हाथों से किताब को पलटते हुए 

वह किताब को पढ़ रही है
 और दूसरे हाथों में रख फोन से
 अपने दोस्त को फोन लगा रही है 

फोन रिंग हो रही है 





और वहीं दूसरी तरफ मेघना के दोस्त काजल
 अपने ऑफिस में लंच टाइम में चेयर पर बैठकर 
टेबल पर रखी हुई टिफिन में से खाना 
अपने हाथों से 
 उठाते हुए खा रही है 
 तभी उसके टेबल पर रखी हुई 
फोन रिंग करता है 
वह लंच खाते हुए
नजरे घूम कर 
अपने फोन की तरफ देखती है
 और फिर अपने भाई हाथ बढ़ाते हुए 
अपने फोन को उठती है 


ओ फोन उठाते हुए 
फोन की स्क्रीन पर टेप करती है
 और अपने सामने हाथों में लेते हुए लाती है
 और 
हल्की आवाज में कहती है


 बोल मेघना तू कैसी है 




और तभी दूसरी तरफ मेघना
 अपने बिस्तर पर बैठे अपनी किताब को छोड़कर 
अपने फोन वाले हाथों को आगे लाती है 
और ठीक से बैठते हुए
फोन की तरफ देखती है 
और हल्की आवाज में कहती है 


कैसी है कहना छोर 
 बात की तुम्हें जो कहा था 
वह किया या नहीं 




और 
तभी अचानक काजल बातें करते हुए 
 और टिफिन से उठाते हुए खान वाले हाथों को रोक लेती है 
 ठहर जाती है 
और ठहरते हुए धीमी आवाज में कहती है 


नहीं यार तुम्हारे लिए 
कोई काम नहीं मिल रहा है 
तू समझती है ना 
कि तुम पे फाइल के हेरा फेरी करने का इल्जाम लगा है 



और तभी
यह सुनते ही अचानक से मेघना
 स्क्रीन की तरफ देखते हुए खामोश हो जाती है 





और वही काजल 
अपने हाथों को नीचे करते हुए 
अपने हाथ में लिए रोटी के टुकड़े को टिफिन में ही रख देती है 
और अफसोस जताते हुए 
और अपनी बातों को आगे बढ़ते हुए कहती है 


इसीलिए तुम्हारे लिए काम मिलना मुश्किल है 
मैं ढूंढ रही हूं 
कोशिश भी कर रही हूं
 पर कोई भी तुम्हारे नाम लेने के बाद 
अपने ब्रांच में काम देने के लिए तैयार नहीं हो रहा




और तभी उधर से मेघना गहरी खामोशी के बाद 
 हल्की आवाज में उदासी चेहरा के साथ कहती है 


तुम्हें पता है ना यह मैंने नहीं किया 




और तभी काजल बातें करते हुए 
अचानक से खामोश हो जाती है
 और फिर कुछ सेकेंड बाद मेघना को संवेदना 
देते हुए ठेहरऊ भारी हॉकी आवाज में कहती है 




मेघना देखो मुझे पता है
 तुझे पता है
 पर सबको नहीं 
सबको समझना बहुत ज्यादा मुश्किल‌ है 

चल इस बात को छोड़ 





और वहीं दूसरी तरफ मेघना चुपचाप 
बैठे हुए अपने दोस्त की बात सुन रही 




और तभी अचानक से काजल हल्क एरिया करते हुए 
थोड़ी मेघना के बीते गए बातों से ‌
ध्यान भड़काने की कोशिश करते हुए 
चेहकते हुए हल्की ऊंची आवाज में कहती है 


चल वह बात छोड़ 
तू भी क्या कर रही है 





और तभी मेघना उदासी पन से
 ठेहराऊ हल्के आवाज में कहती है

 कुछ नहीं यार 
बस ऐसे ही बेकार के
 वक्त को जय कर रही हूं 




और तभी यह सुनते हुए 
काजल को दया आती है
 और वह 2 सेकंड चुप होते हुए
2 सेकंड बाद
 हंसते हुए हल्के ठेहराऊ भरी लेहजे में कहती है 

वक्त को ऐसे जय क्यों करना 
तू ऐसे ही बैठी है ना 
 तो क्यों ना तू 
घर से ही फ्रीलांसर की काम शुरू कर दे 




और तभी उधर से यह सुनते हुए 
  मेघना बैठे-बैठे कुछ देर चुप रह जाती है 
और कुछ सेकेंड के बाद हल्की लहजे में कहती है


 हां यार
 मैं भी यही सोच रही थी 

अगर कोई काम ना मिले तो यही करना पड़ेगा 




और वहीं दूसरी तरफ काजल मेघना की बातें सुनते हुए
हल्की फीकी हंसी हंसते हुए कहती है 



हां कुछ न करने से तो अच्छा होगा
 कि तु कुछ ऑनलाइन ही काम ढूंढ ले
 उसमें तुम अपनी पहचान भी छुपा सकती हो




और काजल यह कह रही है 
तभी अचानक से काजल के आगे एक वर्कर आते हुए ठहर जाते हैं
और अपने हाथों में कुछ फाइल ले लिए


और काजल को देखते हुए 
हल्की ऊंची आवाज भी कहता है

 मैडम आपको 
बॉस ने बुलाया है 



और तभी यह कहते हुए अचानक काजल 
बर्गर की बात सुनते ही 
अपनी नजर उठाकर
 उस वर्कर के तरफ देखती है
 और उसे वर्कर को देखते हुए हल्की आवाज में कहती है 

हां मैं आ रही हूं
 बस लंच हो ही गया 




और वहीं दूसरी तरफ मेघना काजल को अपनी पहचान छुपा कर काम करने वाली बातें सुनकर सच में डूबी है 

शायद मेघना अपनी पहचान छुपा कर काम करना नहीं चाहती शायद उसे अपनी पहचान से 
 अपने काम से ज्यादा प्यार है 





और तभी वह वर्कर वहां से मूर्ति हुए चला जाता है 







और तभी काजल वर्कर से अपनी नजर हटाते हुए फोन की तरफ देखती है 
और मेघना से कल की ऊंची आवाज में कहती है 

मेघना चल में रखती हूं 
बोस बुला रहा है 
तुझे मैं बाद में बात करती हूं 



और क्या कहते हुए काजल आपने एक हाथों से अपनी कितनी तारीख को उठाकर बंद करते हुए 
धीरे-धीरे कुर्सी से उठने लगती है 



और वही मेघा 
 काजल की बातें सुनते हुए 
उदासीमां से हल्की आवाज में कहती है 

अच्छा ठीक है 




और तभी अचानक काजल अपने हाथों में रखे हुए 
फोन मैं स्क्रीन को दबाते हुए फोन कट करती है
और फिर अपने फोन को हाथों से ब्रांच पे धीरे से रखते हुए 

और अपनी दोनों हाथ से जल्दबाजी में
 अपनी टिफिन को समझते हुए
बंद करने लगती है 
और चेयर से सीधी उठ खड़ी होती है 






और वही दूसरी तरफ मेघना 
अपने हाथों में फोन लेते हुए
 उदास हो जाती है 


और उदास होते हुए 
अचानक पिछले यादों में चली जाती है 
जब उसके साथ यह सब हुआ था 
 इस पर फाइल हेरा फेरी करने की इल्जाम लगा था 




रोज के काम के दिनों की तरह मेघना
 उस दिन ऑफिस में 
अपने मैनेजर के दिए हुए फाइल को 
ऊपर के कर्मचारियों को देने के लिए
 अपने ऑफिस से बाहर  जा रही थी 



और तभी अचानक वहां
 सच डिपार्टमेंट आ जाता है 
अपने दो चार आदमियों के साथ 



और वही मेघना जल्दबाजी में 
अपने कदम बढ़ाते हुए
 जा ही रही थी
 उन लोगों पर बिना ध्यान दिए



और सर्च डिपार्टमेंट के कर्मचारी 
आते ही अचानक मेघना को देखते हुए 
उनकी तरफ बढ़ती है
 और अचानक अपने हाथ बढ़ाते हुए 
 उसके हाथों से सारा फाइलछीन लेती है 



और वही सर्च डिपार्टमेंट कैसेकरते हैं 
मेघना अचानक से चोक जाती है 
और तो वो
कुछ समझती कि
 अचानक से 

उसके हाथों से फाइल लेते हुए
 वह सर्च डिपार्टमेंट के कर्मचारी 
इन फाइलों को अपने हाथों में लिए
 एक-एक पन्ने दूसरे हाथों से पलटते हुए देखने लगता है






अगर यह कहानी आप सबको अच्छी लगे तो
आगे पढ़ते रहिए
मैं आपके प्रिय लेखक अभिनिशा❤️🦋💯