Tere Mere Darmiyaan - 93 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 93

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तेरे मेरे दरमियान - 93

जानवी आदित्य को अपने साथ रहने के लिए बोल रही थी तब आदित्य सौचता है --

" काश ये तुम रोष मे रहकर कहती जानवी , काश ये पल यही रुक जाता , सुबह होता ही नही । पता नही सुबह होते ही क्या होगा । तुम अभी नशे हो इसिलिए मैं यहां रुकुगां तो गलत होगा । मुझे इसे सुलाकर यहाॉ से चले जाना चाहिए । " 

जानवी :- क्या हूआ...?

आदित्य :- कुछ नही , मैं यही हूँ तुम्हारे पास । 

आदित्य जानवी के बालो पर हाथ फेरने लगता है , जानवी आदित्य के बाहों मे आ जाती है और वही पर सो जाती है और धिरे से कहती है --

जानवी :- मुझे कभी छोड़कर मत जाना ।

जानवी सो चुकी थी , आदित्य जानवी को बेड पर सुला देता है और उसके चेहरे को प्यार से दैखता , आदित्य जानवी केे माथे पर किस करने जाता है पर रुक जाता है , क्योकी जानवी अभी होश मो नही थी , इसिलिए आदित्य रुक जाता है और कहता है --

आदित्य :- तुमने जो पल मुझे आज दिया है , वो मैं कभी नही भूल सकता । आज तुमने नशे मे ही सही पर मुझे वो सब बताया जो तुम उस दिन कहने आई थी । हे भगवान काश ये सब इसे याद रहे ।

जानवी करवट लेती है और आदित्य के हाथ को अपने दोनो से पकड़ लेती है । आदित्य अपना हाथ धिरे से छुड़ाता है और वहां से भारी मन से बाहर आ जाता है ।

आदित्य मन ही मन सौचता है --

" क्या तुम्हें सब याद आ गया है जानवी ..? 

जानवी सो चुकी थी रात भी काफी हो गया था आदित्य वहां से जाने लगता है तो अशोक आदित्य को रौकर कहता है --

अशोक :- इतनी रात को कहां जा रहे हो बेटा ?

आदित्य अशोक के आवाज पर रुक जाता है और मुड़कर अशोक के पास जाता है औल कहता है --

आदित्य :- घर जा रहा हूँ ।

अशोक :- ये भी घर है , इतनी रात को जाना सही नही होगा , तुम सुबह चले जाना ।

आदित्य :- नही .. मेरा यहां रुकना ठिक नही होगा । सुबह अगर जानवी मुझे यहां पर देखेगी तो उसे बुरा लगेगा । उसे लगेगा के मैं उसका पिछा कर रहा हूँ । इसिलिए मेरा ही ठिक होगा ।

आदित्य वहां से जाने लगा क्योकी उसे पता था— सुबह सब बदल जाएगा। पर आज की रात…आज की रात उसने अपने दिल को
थोड़ी देर सच मान लेने दिया और उदास मन से वहां से जाने लगा । अशोक…वो चुपचाप दुआ कर रहा था कि काश ये प्यार एक दिन
नशे से बाहर भी ज़िंदा रह पाए।

दुसरे दिन सुबह अशोक बाहर जानवी के उठने का इंतजार कर रहा था , जानवी अपने कमरे मे सो के उठती है और उठकर बैठ जाती है , जानवी का सर भारी - भारी सा लग रहा था , जानवी अपना सर पकड़कर कहती है --

जानवी :- ये मेरा सर ... इतना भारी क्यों लग रहा है ? और मैं यहां कैसे पहूँची ? 

जानवी कल रात वाली बात को याद करने की कोशिश कर रही थी , पर जानवी को कुछ बात याद आने लगती है जैसे , आदित्य विकास को पिट रहा था और आदित्य जानवी को अपने साथ घर लेकर आता है । 

जानवी झट से बिस्तर से उठती है और अपना फोन ढुडने लगती है , जानवी अपना लेती है और विकास को फोन लगाती है , पर फोन स्विच ऑफ आता है क्योकी विकास का फोन तो जानवी के पापा अशोक के पास था जो ऑफ हो चुका था । 

जानवी को विकास की चितां होने लगी , जानवी कुछ दैर मे फ्रेस हो जाती है और वहां से विकास के घर की तरफ जाने लगती है , जानवी को बहार जाते दैखकर अशोक कहता है --

अशोक :- अरे बेटी इतनी जल्दी मे कहां जा रही हो ?

जानवी :- पापा .. वो मैं आपको आकर बताती हूँ , पर मेरा जाना बहुत जरुरी है ।

अशेक कुछ कहता उससे पहले जानवी वहां से जल्दी मे चली जाती है । 

कुछ ही दैर मे जानवी विकास के घर पर पहूँच जाती है , जानवी वहां पर जाकर दैखती है के विकास वहां पर नही था । जानवी को वहां वर पता चलता है के विकास कल रात से घर नही आया है ऐर उसका कुछ भी अता पता नही है ।

ये सुनकर जानवी को बहुत हैरानी होती है , जानवी विकास को कई बार कॉल करती है पर विकास का फोन स्वीच ऑफ आता है । जानवी को विकास की फिक्र और आदित्य पर शक होने लगा था । 

जानवी विकास को बहुत ढुंडती है जहां - जहां पर विकास जाता है वहां पर भी जानवी खोजकर देख लिया पर विकास कही नही था । ऑफ्य मे भी नही था । शाम हो चुकी थी , जब जानवी को विकास का पता नही चला तो जानवी पुलिस स्टेशन जाकर विकास के गुम होने की कंप्लेन और कल रात आदित्य के साथ इसका हाथा पाई के बारे मे बताती है । 

जानवी की बात को सुनकर वो इंस्पेकटर कहता है --

इंस्पेक्टर: - मेडम .. क्या आपको पता है के उन दोनो मे किस बात को लेकर झगड़ा हो रहा था ?

जानवी याद करने की कोशिश करती है तब जानवी को थोड़ा सा याद आता है के विकास जानवी के करीब आ रहा था और उसके साथ गलत करने की कोशिश कर रहा था । जानवी मन ही मन कहती है --

" ये विकास मेरे साथ .. कही आदित्य ने उसे इस लिए तो नही मारा था के विकास मेरे साथ ... मुझे सबकुछ याद क्यों नही आ रहा है ।"

इंस्पेक्टर फिर से कहता है -- 

इंस्पेक्टर :- मेडम , कुछ याद आया ? इन दोनो मे किस बात को लेकर झगड़ा हूआ था ? 

जानवी :- मुझे पुरा याद तो नही आ रहा है , पर मैं इतना जानती हूँ के आदित्य को मेरा और विकास का साथ रहना पंसद नही था । 

इंस्पेक्टर :- ठिक है , हम विकास को ढुंडने की कोशिश करते है । आप मुझे बस इतना बता दिजिये के कल रात को आपलोग कहां पर थे ऐर आपके साथ और कौन - कौन था , और वहां पर क्या हूआ था ।

जानवी कल रात की बात को याद करती है और फिर कहती है --

जानवी :- कल शान को मैं और विकास डिनर के लिए गए थे । फिर उसके बाद मुझे ठिक से याद नही है , मुझे बस इतना याद है के आदित्य विकास को मार रहा था ।

इंस्पेक्टर :- आदित्य सर ने विकास को कहां पर और क्यों मारा आपके ये सब याद क्यों नही है , आपको इतना याद है के आप डिनर के लिए गए थे पर ये याद नही के उसके बाद क्या हूआ , कही ऐसा तो नही के विकास ने आपको कुछ पिला दिया हो और आप बेहोस हो गई हो , फिर विकास ने आपका फायदा उठाना चाहा और फिर आदित्य सर ने आकर आपको विकास से बताया है ।

जानवी याद करने की कोशिश करती है तो उसे ये याद तो आता है के जब जानवी अंदर गई थी तो विकास ने वेटर से ड्रिंक्स मंगाया था और जानवी उस ड्रिक्सं को पिया था और उसके बाद उसे याद कुछ नही ।

इंस्पेक्टर जानवी की जवाब का इंतेजार कर रहा था , तब जानवी कहती है --

जानवी :- हां ... जब मैं रेस्टोरेंट के अंदर गई तो विकास ने मेरे लिए एक ड्रिक्सं मंगाया था , और मैने उसे पिया भी था , बस उसके बाद से मुझे कुछ याद नही है ।

इंस्पेक्टर समझ जाता है के विकास ने ही जानवी को नशे की दवाई दिया होगा ।

इंस्पेक्टर :- जानवी जी , जिस वेटर ने ड्रिक्सं लाया था क्या आप उसे पहचान सकती हो ?

जानवी :- हां .. मैं उसे पहचान लुगीं ।

इंस्पेक्टर :- ठिक है , आप अभी जाईए , मैं आपको कॉल करके बुलाउगां तब आपको आना होगा ।

जानवी :- ठिक है इंस्पेक्टर ।

इतना बोलकर जानवी वहां से चली जाती है तब इंस्पेक्टर अपने से बुदबुदाकर कहता है --

इंस्पेक्टर :- पता नही , जानवी जी ने उस विकास मे ऐसा क्या दैख लिया है जो आदित्य सर जैसे इंसान को छोड़कर उस विकास के लिए परेशान है ।

इंस्पेक्टर एक गहरी सांस लेता है और अपने कॉस्टेबल से कहता है --

इंस्पेक्टर :- चल भाई. .. विकास जी को ढुंडने जाना है , जानवी मेडम का ऑडर है ।

इतना बोलकर दोनो वहां से गाड़ी लेकर चला जाता है । जानवी वहां से सिधा आदित्य के घर की और चली जाती है , जहां पर आदित्य , कृतिका , रमेश और रश्मी एक जगह पर बैठ कर बाते कर रहे थे । आदित्य कल रात के लिए बहुत खुश था ।
और उन सबको कल के बारे मे ही बता रहा था , तभी रश्मी कहती है --

रश्मी :- इसका मतलब तो ये हूआ के जानवी के दिल मे आदित्य के लिए प्यार है , वरना कल रात को वो ऐसा कभी नही करती , दैखना ... जानवी को बहुत ही जल्द सब कुछ याद आ जाएगा ।

तभी वहां पर जानवी की कार रुकती है , आदित्य और सभी जानवी के कार को दैखकर हैरान था , आदित्य को छोड़कर बाकी सभी को ये लग रहा था के जानवी आदित्य के पास आई है । 

पर आदित्य जानता था के जानवी उसके पास कुछ काम से ही आई है , जानवी कार से उतरती है और आदित्य के पास आ कर खड़ी हो जाती है । सभी जानवी की और ही दैख रहा था और जानवी के कहने का इंतेजार कर रहा था । आदित्य जानवी की और ही दैख रहा था , तभी जानवी कहती है --

जानवी :- तुम अपने आपको समझते क्या हो ? 

जानवी से इतना सुनकर सभी चोंक गया था , क्योंकी सभी को कुछ और ही आशा थी , पर आदित्य जानता था के जानवी उसके पास किसी और काम से ही आयी है ।

जानवी :- विकास कहां है आदित्य ?

विकास का नाम सुनकर इस बार आदित्य भी हैरान था , आदित्य जानवी से कहता है --

आदित्य :- क्या विकास ..?

जानवी :- हां विकास ... मुझे याद है के कल रात को तुमने विकास को मारा था और उसको बाद से विकास गायब है । बताओ .. कहां है विकास ?

आदित्य हल्की मुस्कान देता है और कहता है --
आदित्य :- मैं तु्हारा और विकास का नौकर नही हूँ , के मुझे पता हो के विकास कहां पर है । तुम्हें उसकी फिक्र है तो जाओ , तुम ही ढुंडो उसे ।

जानवी आदित्य से गुस्से से कहती है --

जानवी :- मैं जानती हूँ के विकास को तुमने ही कही पर छुपा कर रखा है । दैखो मैने पुलिस मे कंप्लेन कर दिया है , अगर तुमने विकास को कही पर रखा तो अभी बता दो , वरना पुलिस उसे ढुंड ही लेगी तब मैं भी तुम्हें बचा नही पाउगीं ।

जानवी से इतना सुनकर आदित्य को भी गुस्सा आ जाता है --

आदित्य :- पहली बात तो ये , के वो कहां है मुझे ये नही पता और मैने उसे क्यों पिटा ये जाकर तुम अपने पापा से पूछो । रही बात पुलिस की तो वो विकास को जरुर ढुडं लेगें । 

जानवी :- मुझे किसी से कुछ भी जानने की जरुरत नही है । अगर विकास को कुछ भी हूआ तो मैं तुम्हें नही छोड़ूगीं ।

To be continue....868