यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक है और केवल मनोरंजन के लिए बनाई गई है। इसमें हनुमान जी का स्वरूप श्रद्धा के रूप में दिखाया गया है किसी भी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का उद्देश्य नहीं है
धवलपुर गांव घने जंगलों के बीच बसा एक शांत और छोटा सा गांव था यहाँ के लोग गरीब थे लेकिन दिल से बहुत मजबूत और भगवान हनुमान के सच्चे भक्त थे हर सुबह मंदिर में जय बजरंगबली की गूंज पूरे गांव में फैल जाती थी लेकिन एक दिन सब कुछ बदल गया जंगल के अंधेरे से तीन खूँखार राक्षसों ने गांव पर नज़र डाल दी पहला राक्षस था कर्कासुर सबसे शक्तिशाली और निर्दयी दूसरा था भैरासुर जिसकी हंसी ही लोगों की रूह कांप देती थी तीसरा था अंधकासुर, जो अंधेरे में गायब होकर हमला करता था
तीनों ने मिलकर धवलपुर को अपना गुलाम बना लिया रात होते ही गांव में डर उतर आता था
बच्चे रोते थे औरतें दरवाज़े बंद कर लेती थीं और बूढ़े भगवान को याद करते थे पहली रात कर्कासुर गांव में आया उसने एक घर को अपने हाथों से तोड़ दिया अंदर बैठे बूढ़े आदमी को पकड़कर हवा में उठा लिया बूढ़ा चिल्लाया बचाओ लेकिन कोई बाहर नहीं निकला और अगले ही पल उसकी आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई पूरे गांव में सन्नाटा छा गया
दूसरी रात भैरासुर आया वो जोर-जोर से हंस रहा था हा हा हा उसकी हंसी सुनकर ही एक औरत बेहोश हो गई वो बच्चों को पकड़कर हवा में घुमाता और फिर जमीन पर फेंक देता लोग कांपते हुए बस मंदिर की तरफ देखते रहते
तीसरी रात अंधकासुर आया कोई उसे देख नहीं सकता था सिर्फ उसकी आवाज आती थी मैं यहाँ हूँ
और फिर अचानक कोई गायब हो जाता था गांव धीरे-धीरे खत्म होने लगा हर दिन कोई ना कोई मर जाता था लोगों के दिल में डर घर कर चुका था।
लेकिन फिर भी एक चीज़ नहीं बदली थी उनकी भक्ति हर सुबह मंदिर में दीपक जलता था
पंडित जी कांपते हाथों से आरती करते थे एक दिन पंडित जी रो पड़े
हे बजरंगबली अब तो आ जाओ हमारे पास कुछ नहीं बचा गांव के लोग एक साथ बोले
जय हनुमान हमारी रक्षा करो
उसी भीड़ में एक महिला खड़ी थी गौरी
उसकी आंखों में डर था लेकिन विश्वास भी था वो अपने पेट पर हाथ रखे खड़ी थी क्योंकि वो मां बनने वाली थी रात को गौरी अपने छोटे से घर में बैठी थी बाहर तूफान चल रहा था हवा इतनी तेज थी जैसे कुछ होने वाला हो गौरी दर्द से कराह रही थी उसके पास कोई नहीं था गांव के लोग खुद अपने डर में बंद थे तभी अचानक आसमान में बिजली चमकी और उसी समय कर्कासुर की दहाड़ गूंजी
आज फिर शिकार होगा
गांव में भगदड़ मच गई।
लोग छिपने लगे
गौरी अकेली थी और उसका दर्द बढ़ता जा रहा था। वो भगवान को याद करने लगी
हे हनुमान जी मेरे बच्चे को बचा लो
बाहर राक्षसों का आतंक बढ़ता जा रहा था भैरासुर एक घर जला रहा था अंधकासुर बच्चों को डराकर गायब कर रहा था और कर्कासुर वो सीधे मंदिर की तरफ बढ़ रहा था उसने मंदिर का दरवाज़ा तोड़ दिया पंडित जी उसके सामने खड़े हो गए ये भगवान का घर है पीछे हट जा
कर्कासुर हंसा
आज से ये मेरा घर है
उसने एक ही वार में पंडित जी को गिरा दिया।
मंदिर की घंटी अपने आप बजने लगी
उसी समय गौरी के घर से एक तेज रोशनी निकली
पूरा गांव उस रोशनी से चमक उठा राक्षस भी रुक गए
कर्कासुर ने मुड़कर देखा
ये क्या है
गौरी चिल्लाई और उसी पल एक बच्चे का जन्म हुआ
जैसे ही बच्चा रोया आसमान गरज उठा हवा रुक गई
और मंदिर की घंटी लगातार बजने लगी बच्चे की आंखें खुलीं उनमें हल्की सी लाल चमक थी गौरी ने उसे अपने सीने से लगा लिया उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे
मेरा बेटा
उसी समय मंदिर के टूटे हुए दरवाज़े के बीच से हवा का एक तेज झोंका आया और हनुमान जी की मूर्ति के सामने दीपक खुद-ब-खुद जल उठा
कर्कासुर गुस्से में चिल्लाया ये कोई साधारण बच्चा नहीं है
भैरासुर बोला मुझे इसकी हंसी पसंद नहीं आई
अंधकासुर की आवाज आई इसे अभी खत्म कर देते हैं तीनों गौरी के घर की तरफ बढ़ने लगे।
गौरी डर गई उसने बच्चे को और कसकर पकड़ लिया
कोई है बचाओ लेकिन कोई नहीं आया तभी अचानक दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया राक्षस रुक गए
कर्कासुर ने दरवाज़े पर वार किया लेकिन दरवाज़ा टूटा नहीं अंदर बच्चा शांत हो गया उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी और उसकी पीठ के पीछे एक पल के लिए हनुमान जी की परछाईं दिखाई दी गौरी ने वो देखा और उसकी सांसें थम गईं ये ये कौन है बाहर राक्षस पीछे हट गए
कर्कासुर बोला इसे अभी नहीं मारेंगे
ये बड़ा होगा तब इसका खेल खत्म करेंगे तीनों राक्षस अंधेरे में गायब हो गए
गांव में फिर सन्नाटा छा गया
लेकिन इस बार डर के साथ एक उम्मीद भी थी
गौरी ने बच्चे को देखा और धीरे से कहा तू जरूर कोई चमत्कार है
दूर मंदिर में घंटी फिर बजी
जय बजरंगबली
और कहानी यहीं से शुरू होती है