विकास :- छी छी छी ... आदित्य , बेचारा दैखो कैसी शकल हो गयी है बेचारे की । क्या - क्या सौच के रखा था और दैखो क्या हो गया । तु जानवी की दौलत को हड़पना चाहता था ना पर बेचारा तोरी ऐसी किस्मत कहा । आज तुम्हारा डिवोर्स और कल मेरी और जानवी की शादी । दैखो मैने कार्ड भी बना लिया है , और डिवोर्स को बाद येसा पहला इनविटेशन तुम्हारे लिए । तु्हें क्या लगता था के तुम ये अच्छा बनने का ढोंग करके जानवी का दिल जीत लोगे और उसकी दौलत पर कब्जा कर लोगे । हा हा हा हा ... पर किस्मत का खेल तो दैखो , कल हमारी शादी फिर उसकी. सारी दौलत मेरी । अहा.. पहले मैं उसके साथ सोउगां । फिर उसकी जवानी का मजा लुगां ।
विकास मुह से इतना सुनकर आदित्य का गुस्सा भड़क जाता है और आदित्य विकास का कॉलर पकड़ता है और उसे मारने लगता है । आदित्य विकास को बुरी तरह से पिटता है , जिसे दैखकर आदित्य के दोस्त औऱ जानवी वहां पर आ जाती है । जानवी विकास को आदित्य से छुड़ाती है और आदित्य को एक थप्पड़ मारती है और कहती है --
जानवी :- How dare you आदित्य । तुमने विकास के साथ बदतमीजी कैसे की । अभी माफी मांगो वरना ...
आदित्य :- क्या ... वरना क्या कर लोगी । अरे तुम्हें दिखाई नही देता , ये तुम्हारे बारे मे गलत बोल रहा था ।
जानवी :- क्या गलत बोल रहा था हां ... वो जो भी बोल रहा था उससे तुम्हें क्या ? वो मेरा होने वाला पति है तो उसकी जो मर्जी वो मेरे बारे मे बोलेगा । वैसे ऐसा क्या बोल दिया जो तुम इतना भज़क रहा हो ।
आदित्य जानवी की और गुस्से से दैखता है तो जानवी कहती है --
जानवी :- तुम इतना निचे गिर जाओगे , मैने कभी सौचा भी नही था । विकास से तुम इसिलिए जलते हो क्योंकि तुम जो चाहते थे वो पुरा नही हूआ । तुम्हें मेरी दौलत चाहिए था ना , वो जप वो सपना पूरी नही हूआ तो तुम विकास के उपर हाथ उठाया । ठिक है बोलो कितने पैसे चाहिए । डिवोर्स को बाद लड़का लड़की को Alimony देते है ना पर मैं तुम्हें Alimony दुगीं । बताओ कितना चाहिए तुम्हें ।
जानवी अपने पर्स से चेक निकालती है और उसमे 2 करोड़ का चेक बनाकर आदित्य को हाथ मे थमा देती है और कहती है --
जानवी :- यो लो 2 करोड़ है । इसमे तुम आराम से अपना बाकी की जिदंगी बिता सकते हो । अब तो खुश हो ना ।
आदित्य चोक को दैखता है और चेक को वही पर फाड़कर फेंक देता है और कहता है ---
आदित्य: - तुम्हें क्या लगता है के मुझे तुम्हारी दौलत की चाह थी । तुम गलत हो जानवी , तुम इस विकीस पर भरोसा करती हो ना , बबोत जल्द तुम्हें पता चलेगा के ये इस विकास की सच्चाई क्या है । उस समय तुम बहोत पछताओगी जानवी । ये विकास को मैने किसी जलन या हार जीत के कारण नही मारा । इसने तुम्हारे बारे मे गलत बोला , इसने कहा के ये तुम्हारे साथ पहले सोयेगा , फिर जवानी का मजा लेगा और फिर तुम्हारी दौलत ।
ये सुनकर जानवी भी चोंक जाती है , जानवी को ये आदित्य की कोई चाल लगी के आदित्य ये बोलकर विकास और उसके बिच गलतफहमी पैदा कर रहा है ।
जानवी :- तुम्हें क्या लगता है के तुम ये मन गड़ंत बाते बोलकर मेरे और विकास के बीच मे गलतफहमी पैदा कर दोगे । तो आदित्य ये तुम्हारी भूल है । मैं और विकास एस दुसरे से बहोत प्यार करते है ।
विकास जानवी की बेवकुफी पर मन ही मन हसने लगता है । तभी आदित्य कहता है --
आदित्य: - तुम्हें जो सौचना है वो सोचो , मुझे जो कहना था वो मैने तुम्हें बता दिया, मुझे तुम्हारी फिक्र है , मैं नही चाहता के तुम इस विकास शादी करके अपना सबकुछ गवां बेठो इसिलिए मैने तुम्हें इसकी सच्चाई बताई ये तुम्हें धोका के अलावा और कुछ नही देगा । बाकी आगे तुम्हारी मर्जी ।
जानवी हल्की मुस्कान के साथ कहती है --
जानवी :- ये दैखो , जो खुद धोकेबाज है वो दुसरो को धोके की बात बता रहा है ।
आदित्य हैरानी से कहता है --
आदित्य :- धोका ..? मैने किसीको कोई धोका नही दिया ।
जानवी :- अच्छा, अरे सच्चाई बताने मे सर्म आ रही है । ठिक है मैं ही बता देती हूँ । मेरे से शादी होने के बाद भी तुमने मोनिका के साथ संबध रखा , और उससे प्रेंग्नेंट करके उससे शादी करने से मना किया और फिर जब उसने सबको बात बताने का धमकी दिया तब तुमने उसे 10 लाख थमा दिया । ताकी उसका मुह बंद रहे । सबसे बड़ा धोके बाज तो तुम हो आदित्य । तुमने मुझे और मोनिका दोनो को ही धोका दिया है ।
ये सुनकर सभी हैरान हो जाता है और तब विकास कहता है --
विकास: - अरे वाह , ये तो नया खबर सुनाई है तुमने जानवी । ये तो इन लो क्लास लोगो का चाल है , अब दैखो ना मोनिका और आदित्य दोनो ही पहले गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड थे । फिर दोनो ने ब्रेकअप का अफवाह फैलाया , और छुपके - छुपके दोनो ने अपनी प्रेम कहानी जारी रखा , और फिर एक ने जानवी को फसाया और एक ने विकी को , दोनो की प्लानिंग कितना अच्छा था , आदित्य तुमेहारी दौलत हज़पता और मोनिका उस विकी की और फिर ये दोनो शादी करके आराम से रहते । है ना ।
आदित्य :- ये झुट है , मोनिका के पेट मे मेरा बच्चा नही , बल्की विकी का बच्चा है और मैने उसे कोई 10 लोख नही दिए ।
जानवी :- अब ये तुम दोनो का मेटर है , मुझे उससे कोई लेना - देना नही है । तुम दोनो क्या करते हो मुझे उससे कोई फर्क नही पड़ता । चलो विकास ।
इतना बोलकर जानवी कोर्ट के अंदर चली जाती है । अशोक आदित्य के पास आता है और कहता है --
अशोक :- बेटा , आज अगर आखिरी बार मैं तुमसे कुछ मांगु तो दोगे ।
आदित्य :- सर , अब मैं आपको क्या दे सकता हूँ ।
अशोक :- बेटा , तुम ये डिवोर्स मत लो । तुम कुछ भी करो पर जानवी को उस विकास से बचा लो बेटा ।
आदित्य हैरान जाता है और कहता है --
आदित्य :- पर सर ...
अशोक :- बेटा मैं जानता हूँ , मैने तुम्हें बहोत दुख दिया है , पर बेटा अगर जानवी की शादी विकास से हो जाती है तो उसकी जिंदगी नर्क बन जाएगी ।
आदित्य: - पर सर , अब मैं कुछ नही कर सकता । जानवी मुझसे ऐसे ही नफरत करती है ।
अशोक आदित्य का हाथ पकड़ लेता है और कहता है--
अशोक :- मैं तुमसे जानवी की जिंदगी का भीख मांगता हूँ बेटा । अगर हो सके तो इस बड़े बाप को बारे मे एस बार सोच लेना , बस एक आखिरी बार बेटा, जो दुख मेरी वजह से तुम्हें मिला है , मैं उसको लिए फिर से माफी मांगते हूँ ।
कृतिका :- सर हम भी चाहते थे के जानवी और आदित्य साथ रहे पर जानवी की वजह से आदित्य को बहोत दुख पहूँचा है । और अगर दोनो का डिवोर्स नही होता है तो जानवी आदित्य को और परेशान करेगी । और अगर जानवी की याददाश्त वापस नही आई तो फिर आदित्य की पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगा । सर माफ किजिएगा पर आपकी आपकी बोटी मे जरा सा भी इंसानियत नही है । जिस आदित्य ने इसकी हर बार मदद की है वो उसो ही गलत समझती है ।
आदित्य :- सर , मैं आपका दर्द समझ सकता हूँ । मैं भी जानवी से प्यार करता हूँ ।
ये सुनकर अशोक की आंखो मे एक खुशी आ जाती है ।
अशोक :- क्या , तुम जानवी से प्यार करतो हो ।
आदित्य :- जी सर । पर अब कुछ नही हो सकता । मुझे माफ कर देना ।
आदित्य इतना बोलकर वहां से चला जाता है ।
अशोक बार-बार जानवी की तरफ देखते, जैसे कुछ कहना चाहते हों,
पर शब्द गले में ही दम तोड़ देते थे।
अशोक (धीमे स्वर में): - बेटा…अभी भी वक्त है… एक बार फिर सोच लो , हो सकता है मोनिकी ने तुम्हें झुट बोला हो ,बेटा आदित्य बुरा नही है , कही ऐसा ना हो के बाद मे पछताना पड़े ।
जानवी ने उनकी तरफ देखा भी नहीं।
जानवी (सख़्त लहजे में): - पापा, आपने कहा था ये मेरा फैसला होगा। आज बस वही होने दीजिए। आदित्य को मैं पुरी तरह से पहचान चुकी हूँ । वो एक घटिया इंसान है ।
अशोक चुप हो गए। क्योंकि वो जानते थे —जिस बेटी ने अपनी यादें खो दी हों, उससे सच छीनना आसान हो जाता है।
थोड़ी दूरी पर विकास खड़ा था। ब्लैक सूट, महंगी घड़ी और चेहरे पर नकली चिंता। लेकिन उसकी आँखें…वो सिर्फ एक ही चीज़ देख रही थीं —जानवी की दौलत। अशोक की बात पर और जानवी के जवाब पर वो मन ही मन मुस्कुराया और सोचा ---
विकास :- “आज डिवोर्स…कल शादी…और परसों सब कुछ मेरा , वाह रे मेरी किस्मत ।”
विकास ने जानवी के कंधे पर हाथ रखा और कहा --
विकास: - टेंशन मत लो जानवी, आज सब खत्म हो जाएगा। आज से तुम्हारी जिंदगी से एक बुरा चेप्टर हमेशा के लिए क्लोज हो जाएगा और कल से नई ज़िंदगी शुरू करेंगे।
जानवी ने सिर हिला दिया। जानवी अपनी याददाश्त को लेकर परेशान थी वो अभी विकास से शादी नही करना चाहती थी पर आदित्य से नफ़रत ज़रूर थी और यही विकास की जीत थी।
आदित्य की एंट्री होती है सादा कपड़े, थकी हुई आँखें, और चेहरे पर वो दर्द जो किसी केस फाइल में दर्ज नहीं होता।
उसके साथ थे —मामा तिरु (जिसकी आँखें सब समझती थीं) कृतिका (दोस्ती और गुस्से का मिला-जुला चेहरा)
रमेश और रश्मी (जो आज भी इस शादी को बचाना चाहते थे)
आदित्य की नज़र जैसे ही जानवी पर पड़ी —उसका दिल धक से रह गया। वो वही थी…पर वैसी नहीं।
कृतिका (गुस्से में): - देखो उसे आदित्य… वो ऐसे रियेक्ट कर लही है जैसे तुम्हें पहचानती ही नहीं ।
आदित्य ने जवाब नहीं दिया , क्योंकि वो जानता था —आज उसे प्यार नहीं, सबूत चाहिए।
तभी कोर्ट रूम मे जज आ जाते है और फैसला शुरू होता है ।
कोर्ट रूम में जज अपनी सीट पर बैठ चुके थे। मोनिका भी वहां पर आ कर बैठ जाती है , मोनिका के चेहरे पर मुस्कान थी और आदित्य और आदित्य के बाकी सभी दोस्त भी मोनिका को दैखकर अपना मुह फेर लेती है ।
जज: - केस नंबर 214/2026 , जानवी आदित्य बनाम आदित्य तिवारी , डिवोर्स बाय म्यूचुअल कंसेंट।
जानवी बिना झिझक खड़ी हो गई।
जज: - मिस जानवी, क्या आप इस शादी को खत्म करना चाहती हैं?
जानवी बिना किसी झिझक के झट से कहती है --
जानवी (बिना सोचे): - हाँ , ये शादी मेरे लिए एक गलती थी और मैं इसे खत्म करना चाहती हूँ ।
जानवी के इतना कहते ही अशोक की आँखों से आँसू बह निकले और आदित्य का दिल बैठ गया ।
जज: - मिस्टर आदित्य?
आदित्य खड़ा हुआ।
आदित्य: - मैं…इस डिवोर्स के खिलाफ हूँ।
आदित्य के ऐसा कहने से कोर्ट में हलचल नच गया ।
जज: - वजह?
आदित्य ने जानवी की तरफ देखा।
आदित्य: - क्योंकि ये फैसला उसकी यादों से नहीं…उसकी बीमारी से लिया जा रहा है।
विकास तुरंत खड़ा हो गया।
विकास: - ऑब्जेक्शन , ये सब भावनात्मक ड्रामा है। ये आदित्य नही चाहता है के जानवी उससे अलग हो , क्योकी आदित्य को जानवी की दौलत पर मौज जो करना है ।
विकास के इतना कहने पर मामा तिरु का वार , तिरु धीरे से आगे बढ़े।
तिरु: - माय लॉर्ड, एक्सीडेंट के बाद जानवी की मेमोरी लॉस रिपोर्ट हमारे पास है , और डॉक्टर की राय भी। आदित्य ने तो बहोत बार जानवी की जान बचाया है और ये विकास हर बार जानवी को मुश्किल मे छोड़कर भाग गया है । ये सब जानवी भूल गई है लगता है , दौलत आदित्य को नही इस विकास को चाहिए ।
ये सुनकर विकास का चेहरा कड़ा हो गया।ों
जज ने दोनो के बात को सुनकर दोनो से पूछा --
जज :- आप दोनो कौन हो ?
तिरु :- मैं आदित्य का मामा हूँ और ये जानवी की दोस्त , सॉरी मॉय लॉर्ड इसे दोस्त भी नही कहा जा सकता।
विकास: - लेकिन लॉर्डशिप, इसका मतलब ये नहीं कि वो फैसले नहीं ले सकती।
तभी रश्मी खड़ी हुई।
रश्मी: - लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं , कि कोई उसकी हालत का फायदा उठाए।
रश्मी की बात पर कोर्ट में सन्नाटा छा गया ।
जज ने जानवी से पूछा—
जज: - क्या आपको अपने पति से कोई शिकायत है?
जानवी की आँखों में अचानक ज़हर उतर आया।
जानवी: - हाँ। ये आदमी मुझे कंट्रोल करना चाहता था , ये मेरी दौलत को लूटना चाहना था. ये मेरी ज़िंदगी मे एक घुटन है और कुछ नही ।
ये सुनकर आदित्य को झटका लगा।
आदित्य :- जानवी…मैंने तुम्हें कभी—
जानवी (चिल्लाते हुए): - चुप रहो! मुझे तुमसे नफ़रत है , तुम मेरी दोसत पाने के लिए ऐसा गिरा हूआ हरकत करोगे मैं सोच भी नही सकती हूँ । मॉय लॉर्ड , इस आदमी से मुझे धिन आने लगी है , और कितना निचे गिरोगो । लाइफ मे कुछ करो ऐसे दुसरो ते भरोसे जिंदगी नही काटी जाती , बेसर्म इंसान , मुझे लगा था के आज कमसे तुम चुप रहोगे , पर नही, तुमने अपना रंग दिखा ही दिया ।, मुझे इसे डिवोर्स चाहिए , ताकी मुझे इसकी शक्ल दोबारा दैखना ना पड़े ।
ये शब्द नहीं थे…ये आदित्य के सीने में गड़ा चाकू था।
कृतिका गुस्से से आगे आई।
कृतिका: - माय लॉर्ड, क्या मैं कोर्ट मे कुछ कहना चाहती हूँ । जब अस जानवी को अपने पेसो का इतना ही रौब है तो मैं उसे ये बताना चाहती हूँ के आदित्य कौन है , और इस जानवी के जैसा कितनी ही लड़किया उसके लिए लाईन मे लगी है ।
जानवी हँस पड़ी।
जानवी: - मुझे ड्रामे से नफ़रत है। ये सब कही और जा के करो । मॉय लॉर्ड मैं इसके बारे मे और कहना तो नही चाहती थी , पर मजबुर होकर कहना पड़ रहा है । ये मुझसे शादी करके किसी और से भी संबध रखता है ।
ये सुनकर सभी हैरान हो जाता है जज जानवी से पूछता है --
जज :- क्या कहना चाहते हो , साफ - साफ कहो ।
जानवी :- मॉय लॉर्ड , ये इंसान धोके बाज भी है , इसनो मुझे और एक और लड़की को चीट किया है , जो इसके बच्चे की मां बनने वाली है ।
ये सुनकर सभी चोंक गया था और मोनिका हैरान थी मोनिका मन ही मन कहती है --
" ये लड़की क्या कर रही है , ये मेरा नाम क्यों लो रही है , कही इसके चक्कर मे मैं ना फंस जाउं ।
जानवी :- आदित्य ने शादी मुझसे किया और मोनिका से भी संबध रखा । और उसे प्रेग्नेंट कर दिया । और जब मोनिका ने उसे शादी करने को कहा तो इसने मना कर दिया ।
मोनिका जानवी के पास जाती है और धिरे कहती है ---
मोनिका :- जानवी , यो तुम क्या कर रही हो । तुम के बिच मे मुझे क्यों घुसा रही हो ।
जानवी :- तुम चिंता मत करो , मैं जो कर रही हूँ उसमे तुम्हार भी अच्छा होगा , इसने तुम्हारे साथ भी गलत किया है तो इसो इसती सजा तो मिलनी ही चाहिए । और तुम्हें न्याय ।
मोनिका :- पर जानवी मैं ऐसे सबके सामने ।
तभी जज कहता है --
जज :- जानवी जी , आपके पास इसका कोई सबूत है ।
जानवी मेनिका या हाथ पकड़ती है पर मोनिका ना मे सर हिलाती है । पर जानवी मोनिका को जबरदस्ती उठाकर कहती है --
जानवी :- ये खुद है मॉय लॉर्ड ।
जज :- क्या जानवी जो कह रही है वो सच है ?
मोनिका :- जी जज सहाब ।
कोर्ट मे हलचल मच गई । तब आदित्य कर कहता है --
आदित्य: - ये झुट है मॉय लॉर्ड । ये लड़की झुट बोल रही है ।
जानवी :- तो क्या है आदित्य ?