ज़ेबा बोलती जा रही थी और वह दोनों उसे सुन रहे थे. ज़ेबा फिर आगे बोली, “अम्मी आपके जैसे मैंने भी यह कभी सोचा नहीं था के मै आपसे जींदा इस जनम में दुबारा मील पाऊँगी. मैंने भी ठान लीया था के अपने जान की बाजी लगाकर उन दरींदो को उनके अंजाम तक पहुंचाकर ही दम लुंगी. मैंने भी जीने की चाह छोड़ दी थी और एक जींदा लाश की तरह जी रही थी. लेकिन मेरे अंदर वह इंतकाम की आग लगातार जल रही थी और जल रही है. इस वज़ह से मेरा मकसद था के उनके सारे राज जानना और उनके राज का उनके ही खिलाफ इस्तेमाल करना. इस काम में मै बहोत आगे बढ़ चुकी हूँ. उनके कई राज मेरे पास दफन है लेकिन मज़बूरी यह है की इन सफेदपोश हैवानों की शिकायत करने के लीये कीसके पास जाये. जहाँ भी जायें इनके दोस्त और रिश्तेदार हर जगह बैठे है हमारे हमसाये बनकर. इनके पास शीकायत करने जाए तो उनतक बात पहुँच जाती है और आम इंसान बेचारा उनके हातों बेमौत मारा जाता है. बादल आप हमारी ताकद का एक नमुन: देख चुके हो हम भी आपकी तरह किसी का भी क़त्ल करने में माहिर हो गये है. उन दरिंदो ने हमें उनके मकसद के लीये एक तेज तर्रार हथीयार बनाया है लेकीन वह यह नहीं जानते के वह हथीयार उन्हें भी काट सकता है. हथीयार की क्या जात और क्या ईमान उसे तो सिर्फ खून से मतलब वह किसी और का हो या फिर खुद उनका.”
ज़ेबा की बाते सुनकर अम्मी और बादल को अच्छा लग तो रहा था लेकीन ज़ेबा एक लड़की थी और वह फिर से भेड़ियों के चंगुल में जाने की बात कर रही थी यह बात दोनों के मन को नहीं भा रही थी. बादल और अम्मी का दिल ज़ेबा को फिर से वहाँ जाने की इजाजत नहीं दे पा रहा था. फिर ज़ेबा बोली, " अम्मी आपको मै अब्बू की मौत का वास्ता देती हूँ. आपनें तो खुद की आँखों से और करीब से अब्बू की मौत को देखा है. अब्बू बेचारे अपने बेटी की रीहाई की दुहाई देते रहे और उन दरींदो ने आपके सामने ही उनको गोली मारकर ढेर कर दिया. अब्बू ने आपके ही गोदी में सर रखकर अपनी आखरी सांसे ली थी. याद करो अम्मी वह न भूलनेवाला वह मंजर. क्या आपने कभी चाहा था के आपके बेटी के साथ वह दरींदे हवस का खेल खेले क्या अब्बू ने चाहा था. फिर भी उन्हें उन जालीमों ने मौत दे दी अम्मी.” ऐसा कहते हुये ज़ेबा रोने लगी. अब अम्मी ने उसे सहारा दिया और अपने साथ ज़ेबा के भी आंसू पोंछ दिये. फिर अम्मी बोली, " जा बेटी करले पूरा अपना इंतकाम मेरी दुआएं तेरे साथ है. मै भूल ही गयी थी के औरत खुद ही वह ताकद है जो अपनी कोख से इंसान को गर पैदा कर सकती है तो मीटा भी सकती है. उन दरींदो की माँ ने उन्हें पैदा कर के अपना फर्ज नीभाया था तो आज आप उन्हें ख़त्म कर के अपना फर्ज नीभाईये." यह कहते हुये अम्मी और भी संगीन हो गयी थी.
अम्मी के हौसलाअफजाई से ज़ेबा को नयी ताकद मील गयी थी. लेकीन बादल अभी भी मायूस होकर बैठा था और यह मानने के लीये बील्कुल राजी नहीं था. तब अम्मी बोली, " बेटा बादल, आप इतना क्यों घबरा रहे हो. आप भी उन दरींदो की तरह औरत की ताकद को कम समझ रहे को क्या. अरे आपकी माँ भी एक औरत है और आप उसकी ताकद को कमजोर समझ रहे हो. जीसने आपको पैदा किया और पाल पोसकर इतना काबील किया. वह दरींदे उस औरत जात को सरेआम जलील कर रहे है. तो आपका खून खौलने की बजाय आप एक कमजोर औरत की तरह डर रहे हो. अरे आपने तो बढचढकर ज़ेबा की हौसलाअफजाई करनी चाहिये. साथ में आपको आपके माँ के दूध का कर्ज उतारना चाहिये. बेटा आज अगर इन दरींदो का खात्मा नही हुआ तो इनका खतरा ताउम्र हमारे सर पर मंडराता रहेगा. इसके लीये अगर हमारी जान भी चली जाये तो वह किसी अच्छे मकसद के लीये काम आयी यह तसल्ली तो रहेगी. आप भी एक योद्धा हो और आपमें भी वह जोश और ताकद है तो फिर क्यों ऐसे मायूस बैठे हो. आप भी तो इस मकसद से ही सेना में शामील हुये थे ना के अपने देश की खातीर जान ज्यौछावर करनी है. तो बेटा यहीं सही वक्त है कूद पड़ो जंग में और फतह को पा लो. इस जंग में अगर शहीद भी हो गये तो अपनी माँ और हमारा सर ऊँचा कर के जाओगे. तो आगे बढ़ो बेटा कदम से कदम मीलाकर."
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अब बादल को भी वह पुराना वक्त याद आने लगा जब वह ज़ेबा की जुदाई में अपनी जान देने के लीये गया था. उस वक्त उसके जिन्दगी में वह अहम् मोड़ आया था के उसने सेना में जाने का फैसला किया था और अपने देश के लीये अपनी जान न्यौछावर करने की कसम खाई थी. अब बादल भी तैयार हो गया था और जोश से भर गया था. फिर बादल बोला, " आप ठीक कह रही हो आंटी अब मै भी ज़ेबा की तरह अपने मकसद को पूरा करने के लीये अपनी जान की बाजी लगाऊंगा. या मै जीत जाऊँगा या फिर शहीद हो जाऊँगा." फिर वह तीनों बैठकर सलाह मशवरा करने लगे के कैसे आगे अपने मकसद को अंजाम देना है. वह तीनों बैठकर मंसूबा बनाने लगे थे के तभी ज़ेबा बोली, “ बादल हम दोनों ही अलग अलग जगह पर अपने साथीयों से जाकर मीलेंगे." फिर बादल बोला, "कैसे.” ज़ेबा बोली, " बादल आपको याद है ना हम किस माहौल में वहाँ से भागे थे तो हमें उस माहौल को ही अपना रास्ता बनाना है उनके साथ शामील होने के लीये. हम यहाँ से बहोत दूर एक ऐसी जगह जानते है जहाँ उन दहशतगर्दों का आना जाना लगा रहता है. उस जगह हम घायल होकर जायेंगे और उन्हें बताएँगे के हम आपके हातों में आने से बाल बाल बचे है और आपसे बचने के दौरान आपसे मुठभेड़ में हम घायल हो गये है. आप भी आपके इलाके के करीब बेहोश हालत में आपके साथियों को मीलोगे और उन्हें बताओगे के मै एक लड़की का पीछा करते हुए बहोत दूर तक गया था. उस लड़की को पकड़ने में मै कामीयाब हो चूका था के वह लड़की धोखेसे मुझे घायल कर के भाग गयी. हम दोनों में मुठभेड़ भी हुई लेकिन वह लड़की नकाब पहने हुई शेष अगले भाग में. थी इस वज़ह से मै उसका चेहरा देख नहीं पाया."