फिर बादल अपना लेपटॉप खोलता है और उस शख्स के बारे में जो जानकारी उसके बारे में है उसे खंगालता है. लेकीन बादल को उस जानकारी में ज़ेबा का जिक्र कहीं मी दिखाई नहीं देता है. फिर बादल अपने अफसर को एक मेल भेजता है और कहता है की उसे उस शख्स की और जानकारी चाहिए वह भीजवाइये. बादल के मेल जवाब में यह लीखकर आता है कीहमारे पास जीतनी भी जानकारी थी वह तुम्हें दे दी गयी है. इसके आगे की और जानकारी तुम्हे जुटानी है. अब बादल सोचता है की आगे का कार्य उसे खुद ही नीपटाना है और अपने मकसद को अब उसे ही पूरा करना है. उसके बाद बादल ने उस बालकनी की ओर देखा तो उसे वह बालकनी खाली दिखाई दी. वह औरत याने के ज़बा दरवाजे के अंदर चली गयी थी. यूँ ही रोज चलता रहा बादल जेबा को चोरी चोरी चुपके चुपके खिड़की के भीतर से ताकने लगा. फिर एकदिन वह पल आ गया की दोनों की निगाहें एकदुसरे से अचानक से मीली. वाकिया इस तरह से हुआ था के एक औरत सब्जी मंडी गयी थी सब्जी खरीदने तो वहाँ से लोटते वक्त उसकी भिड़त एक राह चलते नौजवान से हो गयी. इस कारण से वहाँ चौराहे पर हंगामा हो गया था. उस हंगामे और शोर को सूनकर ज़ेबा अपने बालकनी का दरवाजा खोलकर बालकनी में आकर खड़ी थी और ठीक उस ही पल बादल भी शोर सुनकर अचानक से उसकी बालकनी में आ गया था. तभी इथर उधर देखते वक्त ज़ेबा की नजर बादल पर पड़ी और ठीक उस ही वक्त बादल की भी नजर उससे जाकर मीली.
बादल को इस तरह देखकर ज़ेबा तो एकपल के लीये हैरान हो गयी और फिर बाद में झट से उसने अपनी पलके झुका ली थी. फिर वह दरवाजे के भीतर गयी और उसने दरवाजा भीतर से बंद कर दिया. अब ज़ेबा अपने बेडपर जाकर बैठी और सोचने लगी और इस तरह से ज़ेबा अब आज पर लौट आई थी. ज़ेबा को इस बात की चिंता सता रही थी की वह बादल का और उसके सवालों का सामना कैसे करेगी. फिर ज़ेबा ने परदे की ओट से झांककर देखा तो बादल की बेचैन नजरे अब भी उसे ही ढ्ंड रही थी. ज़ेबा अब फिर से अपने बेडपर आकर बैठ गयी. वह सोचने लगी के बादल की नजरों से कैसे बचा जाये. तब ज़ेबा तय कर लेती है की चाहे कुछ भी हो जाये बादल के नजरो के सामने उसे नहीं आना है. तो ज़ेबा ने तय किये नुसार वैसा ही किया उसने बालकनी में भी नीकलना छोड़ दिया. वह सारा का सारा वक्त अपने कमरे में ही बीताने लगी. इस तरह से दिन बी दिन गुजरने लगे लेकिन उस तरह से बादल की बेचैनी थी की और ज्यादा बढ़ने लगी थी. उसे एक बार ज़ेबा से मीलना था और उसे पूछना था की वह ऐसे क्यों सबसे नीगाहें छुपाकर चली आयी और अब यूँ छिपकर उस शख्स के साथ क्यों रह रही है. बादल बस मौके की ताक में था और करीब करीब एक महीने के बाद उसे एक मौका मीला. एकदिन बादल रोज की तरह उस शख्स के ऊपर अपनी नजरे गढ़ाये बैठा हुआ था. तभी उसने देखा की वह शख्स एक बड़ी से सी गाड़ी में बैठकर कहीं बाहर जा रहा है.
अब बादल असमंजस में पड गया था की उसे उस शख्स के पीछे जाना चाहिये या ज़ेबा से मीलने उसके फ्लैट में जाना चाहिये. इस ही उधेडबुन में वह शख्स देखते ही देखते बादल की नजरों से ओझल हो गया. तब बादल ने सोचा जीसका पीछा करना था वह तो चला गया तो अब अपना दुसरा मकसद पूरा करने का मेरे पास अच्छा मौका है. इसलीये बादल आपने कमरे से नीकला और सीधा ज़ेबा के फ्लैट के बाहर जाकर रुक गया. वहा पर जाकर उसने इधर उधर देखा तो उसे कोई भी दिखाई नहीं दिया. तब उसने सोचा की यही सही वक्त है ज़ेबा बात करने का तो उसने दरवाजे की बेल बजाई. तब दरवाजे के भीतर से ज़ेबा की आवाज आयी, "कौन," तब बादल बाहर से बोला, " मै." फिर ज़ेबा बोली, " मै कौन अपना नाम बताइये." तब बादल बोला, " मै बादल, आपसे बात करने आया हूँ. दरवाजा खोलीये में भीतर आना चाहता हूँ." बादल का नाम सुनकर ज़ेबा थोड़ी देर के लीये घबरा गयी और फिर वह बोली, " मुझे आपसे कोई बात नहीं करनी है आप वापस चले जाइये और दोबारा यहाँ आने की जुर्रत न करे" तब बादल बोला, " ज़ेबा मुझे सिर्फ एकबार आपसे मीलना है और." बादल कहता जा रहा था के तभी ज़ेबा भीतर से बोली, " मुझे और कुछ नहीं सुनना है आप चले जाइये." अब बादल मायूस होकर अपने कमरे की और चल पड़ा. ज़ेबा ने फिर परदे की ओट से झांककर देखा तो बादल अपने प्लैट की ओर लौट रहा था.
बादल अपने कमरे में जाकर मायूस होकर बैठ गया. उसके मन की बेचैनी उसे एकपल के लीये भी चैन से बैठने नहीं दे रही थी, वह बार बार खडकी से बाहर ज़ेबा की बालकनी की ओर देख रहा था. अब रह रह कर बादल को क्रोध आ रहा था और वह उस ही क्रोध में और तप रहा था. के तभी बादल का फोन बज उठा. उसने फोन उठाकर देखा तो वह फोन उसके अफसर का था. फिर बादल ने फोन उठाकर बोला, " जय हिन्द साहाब," आगे से आवाज आयी, "जय हिन्द, जवान, कैसे हो और क्या खबर है." तब बादल ने कहा, " साहाब, अभी कुछ ख़ास नहीं हो रहा है सब कुछ सामान्य है." तभी अफसर बोला, " जवान, तुमने कब से हमसे झूठ बोलना सीख लीया है. तुम्हारा ध्यान कहाँ होता है और तुम्हे हमने जीस मकसद से वहाँ भेजा है. तुम वह मकसद छोड़कर किसी और ही मकसद के पीछे भाग रहे हो." फिर बादल बोला, " नहीं साहाब, ऐसा कुछ नहीं है मै तो." तभी बीच में अफसर बोला, " तुम वहाँ बैठकर क्या कर रहे हो जब तुम्हारा शिकार किसी और जगह पर गया हुआ है. तुम्हे तो इस वक्त सायें की तरह उसके पीछे होना चाहिए था. देखो मुझे काम में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं है. इसके बाद अगर ऐसी कोताही तुमसे होगी तो तुम्हे इसकी सजा मीलेगी समझे." फिर बादल बोला, " मुझे माफ़ कीजियेगा साहाब मै नाकामीयाब हो गया लेकिन मै आपको वचन देता हूँ की आगे से ऐसा नहीं होगा." और फोन कट हो जाता है
शेष अगले भाग में .........७