Bade Dil Wala - Part - 14 in Hindi Motivational Stories by Ratna Pandey books and stories PDF | बड़े दिल वाला - भाग - 14

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बड़े दिल वाला - भाग - 14

अभी तक आपने पढ़ा कि-कि अनुराग अनन्या की उदासी और सूजी आँखों से समझ गया कि उसके साथ कुछ ग़लत हुआ है, लेकिन उसने कुछ नहीं पूछा। अनुराग के ऑफिस लौटते ही अनन्या ने वीर को फ़ोन किया और उसे भरोसा दिलाया कि वह जल्द ही हमेशा के लिए उसके पास आ जाएगी। अनन्या ने वीर से उसकी "पवित्रता" पर सवाल किया, जिस पर वीर ने झूठा आश्वासन दिया। यह सुनकर अनन्या ने उसे आश्वस्त कर दिया कि कल नहीं, परसों वह उसके पास होगी। वीर इस पर निश्चिंत हो गया और अपनी रंगरेलियाँ जारी रखता रहा। अब इसके आगे-

वीर को इसी तरह अय्याशी की आदत पड़ चुकी थी। वह एक भी दिन बिना किसी लड़की के नहीं रह सकता था। लेकिन लड़कियाँ वह अक्सर अनछुई ही ढूँढता था। पैसों की उसके पास कोई कमी नहीं थी। पिता की कमाई दौलत से ऐश करना वह अपना अधिकार समझता था। लेकिन अनन्या से वह सच में प्यार करता था, पर क्या अनन्या उसकी यह गंदी हक़ीक़त जानने के बाद उसके साथ रहने को तैयार हो जाएगी? ये प्रश्न बड़ा था, परंतु वीर को विश्वास था कि अनन्या को कभी कुछ पता नहीं चलने देगा, बस वह आ जाए।

रोज़ की तरह आज भी वीर ने एक लड़की को बुलाया था।

इधर अनन्या अनुराग के ऑफिस जाने के बाद वीर के घर पहुँच गई। उसने दरवाज़े पर दस्तक दी, तो वीर चौंक गया। उसके इन रंगीन पलों में ये कौन विघ्न डालने आ गया, ऐसा सोचते हुए वह शर्ट की बटन बंद कर झुंझलाता हुआ दरवाज़ा खोलने आया। अनन्या को बाहर खड़ी देखकर उसके होश उड़ गए। अनन्या बिना कुछ बोले अंदर आने लगी।

वीर ने डरकर उसका हाथ पकड़ते हुए पूछा, "अनु, तुम आज कैसे आ गईं? चलो ना, हॉल में बैठते हैं।"

तब तक अंदर वाली लड़की कपड़े पहनने लगी, लेकिन उसी समय अनन्या वीर को धक्का देती हुई अंदर आ गई।

वीर के बिस्तर पर अर्ध नग्न अवस्था में किसी लड़की को देखकर उसने वीर के गाल पर तमाचा लगाते हुए कहा, "तो यह है तुम्हारी पवित्रता। बीवी तुम्हें गंगा की तरह पवित्र चाहिए और ख़ुद हर रोज़ मैले होते हो। मेरे होठों को अनुराग ने छुआ, तो वह झूठे हो गए। तुम तो पूरे के पूरे झूठे हो; मैं तुम्हें कैसे अपना सकती हूँ?"

"अनु, प्लीज बात को समझो। मैं तुम्हारे विरह में तड़प रहा था।"

"अच्छा, तो कोई भी चलेगी?"

"अरे, यह सब तो कॉल गर्ल है अनु, जो बुलाएगा, पैसे देगा, उनके पास चली जाएंगी। लेकिन तुम ...? तुम तो मेरा प्यार हो, मेरी पत्नी बनने वाली हो। छोड़ो ना यार यह गुस्सा। छोटी-सी बात पर इतना क्या नाराज हो रही हो?"

"छोटी-सी बात ...? यदि मैं कहूँ, मैं भी एक रात अनुराग के साथ हम बिस्तर हो चुकी हूँ, तब तुम क्या कहोगे? बताओ, बनाओगे मुझे अपनी बीवी?"

"अनु, तुम क्या कह रही हो? बोल दो, यह झूठ है। मुझे झूठी चीज़ से नफ़रत है अनु।"

"अरे जाओ वीर, तुम्हें तो रोज़ ऐसी लड़कियाँ मिल जाएंगी, लेकिन मुझे मेरे अनुराग की तरह सरल और पवित्र दिल वाला इंसान इस जीवन में तो क्या, किसी भी जीवन में नहीं मिलेगा।"

"लेकिन अनु, मैं प्यार तो सिर्फ़ तुम्हीं से करता हूँ। मुझे माफ़ कर दो और बोल दो, वह हम बिस्तर वाली बात झूठ है।"

"नहीं, वह सच है और मैं जा रही हूँ अपने अनुराग के पास अपने पवित्र तन को लेकर। अच्छा हुआ, मैंने तुम्हें रंगे हाथों अय्याशी करते हुए पकड़ लिया। वरना तो मैं तुम्हें अपना सब कुछ देने का मन बना चुकी थी। परंतु शायद भगवान भी यही चाहते थे कि मैं अपने पति के साथ रहूँ। अपने दोनों परिवारों की इज़्ज़त का मान रखूँ।"

वह लड़की तो तब तक वहाँ से जा चुकी थी।

रत्ना पांडे, वडोदरा (गुजरात)
स्वरचित और मौलिक 
क्रमशः