Mera Pyar - 9 in Hindi Love Stories by mamta books and stories PDF | मेरा प्यार - 9

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मेरा प्यार - 9

​​एपिसोड 9: लहू के रिश्ते और नफरत की दीवार

​अस्पताल के आईसीयू (ICU) के बाहर गलियारे में सफेद रोशनी और फिनाइल की गंध के बीच एक भारी सन्नाटा पसरा था। तभी लिफ्ट के दरवाजे खुले और ऊँची हील्स की खट-खट ने उस सन्नाटे को चीर दिया। ज़ारा की एंट्री किसी तूफान की तरह थी। आँखों पर बड़ा सा काला चश्मा, चेहरे पर शिकन और रूह में गुस्सा... वह सीधे डॉक्टर के पास पहुँची।
​"मेरी बहन कैसी है?" ज़ारा की आवाज़ में वह अधिकार था जिसे कोई टाल नहीं सकता था।
​"हालत गंभीर है मैम, खून बहुत बह चुका है। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं," डॉक्टर ने सहमते हुए जवाब दिया।
​ज़ारा ने गहरी साँस ली और पीछे मुड़ी। ठीक उसी वक्त मिस्टर खन्ना गलियारे के दूसरे छोर से आते दिखे। जो इंसान हमेशा तन कर चलता था, आज उसके कदम लड़खड़ा रहे थे। उनके चेहरे पर डर साफ दिख रहा था—बेटी को खोने का डर कम, और ज़ारा के गुस्से का सामना करने का डर ज़्यादा।
​मिस्टर खन्ना ने कांपती आवाज़ में कहा, "ज़ारा... बेटा, ज़ोया कैसी है? मैं तो बस..."
​"खामोश रहिए मिस्टर खन्ना!" ज़ारा की दहाड़ ने पूरे अस्पताल स्टाफ को ठिठकने पर मजबूर कर दिया। "बेटा मत कहिए मुझे। आपके मुँह से ये रिश्ता शोभा नहीं देता।"
​मिस्टर खन्ना ने नज़रे झुका लीं, "देखो ज़ारा, तुम गलत समझ रही हो। मैं तो मीटिंग में..."
​"मीटिंग? दौलत? मुनाफा?" ज़ारा कड़वाहट से मुस्कुराई और अपने पिता के बिल्कुल करीब जाकर उनकी आँखों में आँखें डालकर बोली। "दौलत की भूख ने आपको अंधा कर दिया है। सालों पहले मेरी माँ को भी आपने इसी भूख की वेदी पर चढ़ा दिया था। आपने सोचा था कि ज़ोया छोटी है और मैं विदेश में हूँ तो हमें कुछ पता नहीं चलेगा? माँ की मौत कोई इत्तेफाक नहीं थी, आपकी लापरवाही और आपका गुरूर था जिसने उन्हें हमसे छीना!"
​मिस्टर खन्ना का चेहरा सफेद पड़ गया। "ज़ारा! तुम ये क्या कह रही हो? वो एक एक्सीडेंट था!"
​"झूठ बोलना बंद कीजिए!" ज़ारा ने चिल्लाते हुए कहा। "आप इतने भूखे हो चुके हैं कि अब अपनी दूसरी बेटी को भी मारने पर उतारू हैं? सिर्फ इसलिए कि वह एक मामूली लड़के से बात करती है? इसीलिए मैं आपसे दूर रहती हूँ, इसीलिए मैंने खन्ना मेंशन की दहलीज़ छोड़ दी थी क्योंकि वहां की हवा में अपनों का खून और नफरत की बदबू आती है।"
​अस्पताल के गलियारे में मौजूद लोग हैरान थे। शहर के सबसे बड़े आदमी की धज्जियाँ उसकी अपनी बेटी उड़ा रही थी।
​ज़ारा ने आगे बढ़कर मिस्टर खन्ना की छाती पर उंगली रखी और चेतावनी भरे लहजे में कहा, "अब सुन लीजिए... अब तक मैं खामोश थी, पर अब नहीं। मैं आपको तबाह करके ही जाऊँगी। आपके जिस साम्राज्य पर आपको नाज़ है, उसे मैं ईंट से ईंट बजा दूँगी। और जैसे ही ज़ोया को होश आएगा, मैं उसे इस नर्क से निकालकर अपने साथ ले जाऊँगी। आज के बाद आपका अपनी किसी भी बेटी पर कोई हक नहीं रहा। आप सिर्फ एक अमीर, तन्हा और नाकाम इंसान बनकर जिएंगे।"
​मिस्टर खन्ना दीवार के सहारे टिक गए। उनकी आँखों के सामने उनकी पूरी सल्तनत ढहती हुई दिख रही थी। 
​
​अस्पताल के आईसीयू के बाहर का गलियारा किसी युद्ध के मैदान जैसा लग रहा था। ज़ारा की आँखों में धधकती आग देखकर अस्पताल का स्टाफ भी सहमा हुआ था। मिस्टर खन्ना, जो कल तक पूरे शहर को अपनी उंगलियों पर नचा रहे थे, आज अपनी बेटी के सामने बेबस और लाचार खड़े थे।
​"ज़ारा, मेरी बात तो सुनो... मैंने जो भी किया, खन्ना खानदान के रुतबे के लिए किया," मिस्टर खन्ना ने आखिरी कोशिश करते हुए कहा।
​"रुतबा?" ज़ारा की आवाज़ में ज़हर घुला था। "रुतबे की बात आप रहने ही दीजिए। जिस रुतबे के लिए आपने मेरी माँ को मार दिया, उसे मैं रुतबा नहीं, खून से सनी हुई रईसी कहती हूँ। माँ अस्पताल में आखिरी साँसें ले रही थीं और आप लंदन में डील साइन कर रहे थे। आज ज़ोया यहाँ मौत के मुँह में है और आप तब भी मीटिंग में ही थे। आपके लिए इंसान सिर्फ एक 'नंबर' हैं, जिन्हें आप जब चाहें इस्तेमाल करें और जब चाहें मिटा दें।"
​मिस्टर खन्ना का सिर झुक गया। ज़ारा ने उनके और करीब आकर फुसफुसाते हुए कहा, "मुझे नफरत है आपसे। इसीलिए मैं सात समंदर पार चली गई थी ताकि आपकी इस ज़हरीली दुनिया का साया मुझ पर न पड़े। पर मुझे क्या पता था कि आप मेरी छोटी बहन को भी इसी तरह खत्म करने की कोशिश करेंगे।"
​मिस्टर खन्ना ने लड़खड़ाते हुए बेंच को पकड़ा। "ज़ोया मेरी जान है ज़ारा... मैं उसे खोना नहीं चाहता।"
​"वो आपकी जान नहीं, आपकी 'प्रॉपर्टी' है जिसे आप अपनी मर्जी से चलाना चाहते थे!" ज़ारा ने चिल्लाकर कहा। "पर अब बहुत हुआ। अब मैं यहाँ आ गई हूँ। आपके इस साम्राज्य को मैं तबाह कर दूँगी। आपकी साख, आपके शेयर, आपकी ये घमंडी बिल्डिंग्स... सब कुछ मिट्टी में मिला दूँगी। और जैसे ही ज़ोया की आँख खुलेगी, मैं उसे लेकर यहाँ से हमेशा के लिए चली जाऊँगी। आप अपनी दौलत के साथ इस अकेले महल में सड़ते रहियेगा।"
​मिस्टर खन्ना के पास अब कहने को कुछ नहीं बचा था। वह वहीं फर्श पर बैठने ही वाले थे कि डॉक्टर आईसीयू से बाहर आए।
​डॉक्टर के चेहरे के भाव गंभीर थे। "मिस्टर खन्ना... ज़ोया मैम की हालत बिगड़ रही है। उन्हें 'ओ नेगेटिव' खून की सख्त ज़रूरत है और हमारे ब्लड बैंक में स्टॉक खत्म है। अगर अगले आधे घंटे में खून नहीं मिला, तो हम उन्हें खो देंगे।"
​मिस्टर खन्ना बदहवास हो गए, "मेरा ले लो डॉक्टर! किसी का भी ले लो, बस उसे बचा लो!"
​डॉक्टर ने सिर हिलाया, "आपका ग्रुप मैच नहीं कर रहा है। ज़ारा मैम, आपका?"
​ज़ारा ने बेबसी से देखा, "मेरा भी मैच नहीं करेगा डॉक्टर... मेरा ग्रुप अलग है।"
​पूरे गलियारे में सन्नाटा छा गया। शहर के सबसे रईस इंसान के पास अरबों की दौलत थी, पर अपनी बेटी की रगों में दौड़ने के लिए दो बूंद खून नहीं था।
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