मोनिका :- ये दैखो उसने मुझसे शादी का वादा किया था , फिर मेरे साथ वो सब किया और मुझे धोका दिया , फिर उसने तुम्हारी शादी रोकी , ताकी तुम विकास के साथ शादी करके चली ना जाओ , जिससे उसकी प्लानिंग फेल हो जाती और तुम्हारी सारा पैसा उसके हाथो से चला जाता । वो मुझसे कहता के एक बार जानवी की प्रॉपटी मेरी हो जाए उसके बाद वो यो शहर छोड़ देगा । शायद इसिलिए उस दिन जब तुम उसे छोड़ने की बात करी तो उसे लगा के उसके हाथ से सब कुछ चला जाएगा , इसलिए उसने तुम्हें रास्ते से हटाने की कोशिश करा होगा ।
मोनिका जानवी के दिमाग में डर और नफरत के बिच बो देती है—
मोनिका :- “शायद इसलिए तुम्हारा दिल उसे रिजेक्ट कर रहा है और सच जानने के लिए तुम यहां पर आ गई ।
मोनिका जानवी का हाथ पकड़ती है और कहती है --
मोनिका :- जानती हो जानवी उसने मुझे भी शादी का वादा करके मेरे साथ हर रात बिताता और वो सब करता , मैं पागल उसके बातो मे आ गई , जब मैने उससे कहा के मैं माँ बनने वाली हूँ तब उसने मुझसे कहा के मैं अपना मुह बंद रखु और किसी को ये बात ना बताइ , ताकी तुम्हें ये पता ना चले और उसकी मेहनत बर्बाद ना जाए । पर जब मैने उसे कहा के या तो तुम मेरे शादी करो या ंैं जानवी को सब सच बता दूगीं , तब उस दिन वो तु्हें यहाॉ पर बुलाया और फिर तुम्हारा एक्सीडेंट कराया । यही सच है जानवी । आदित्य अच्छा लड़का नही है जानवी , तुम उसे नही जानती वो अपना मकसद पुरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है ।
जानवी के मन मे अब आदित्य के लिए सिर्फ नफरत ही नफरत पनपने लगा था । जानवी वहां से गुस्से से चली जाती है , मोनिका एक शैतानी हंसी दैती है और कहती है --
मोनिका :- बेचारी जानवी , उसो क्या पता को आदित्य उसे कितना प्यार करता है और अब मैं उऩ दोनो को कभी एक नही होने दूगीं , कभी नही ।
कुछ दिनों के लिए जानवी फिर उलझ बड़ जाती है। लेकिन मोनिका एक गलती कर बैठती है— वह एक ऐसा झूठ बोलती है , जो जानवी की दिल की याद से टकरा जाता है। और उसी रात— जानवी को पहला फ्लैशबैक आता है ।
एक छोटा सा— आदित्य का हाथ, और एक वादा, जब जानवी घायल आदित्य के गोद मे थी और आदित्य कहता है --
आदित्य :- “मैं हूँ न…”
जानवी निंद से फिर से उठकर बैठ दाती है और रो पड़ती है।
जानवी :- ये क्या हो रहा है मेरे साथ । ये कैसा सपना है , जो बार बार मुझे परेशान करती है ।
दुसरे दिन शाम को अशोक जानवी के पास आता है जानवी कही दाने के लिए तैयार हो रही थी तो अशोक जानवी के पास आता है और उससे कहता है --
अशोक :- जानवी , बेटा कैसी तबीयत है तुम्हारी ?
जानवी :- अच्छी हूँ पापा ।
अशोक :- कही जा रही हो क्या बेटा ?
जानवी :- हां पापा , बहोत दिन से बाहर नही गई हूँ । तो सोचा के मैं ...
अशोक :- हां , हां बेटी जरुर जाओ । पर किसीको तो साथ ले लो ।
जानवी :- पापा , वो मैं विकास के साथ जा रही हूँ ।
अशोक :- बेटा फिर से वो विकास ।
जानवी :- पापा आपने आदित्य को अच्छा लड़का बताकर उसकी और मेरी शादी करा दी , पर क्या हूआ । पापा विकास अच्छा लड़का है , वो मेरा बहोत ख्याल रखेगा । और अब मैं विकास से ही शादी करुगी ये फाइनल है ।
जानवी इतना बोलकर वहां ये चली गई । अशोक एक गहरी सांस लेता है और कहता है --
अशोक :- ये कैसी माया है तेरी भगवान , मैं जिस इंसांन से जानवी को बचाना चाहता हूँ । वो उसी के पास जा रही है ।
एक्सीडेंट को आज ठीक दो महीने पूरे हो चुके थे। पर जानवी के लिए ये दो महीने सिर्फ़ कैलेंडर के पन्ने थे—यादों में नहीं।
उसकी ज़िंदगी का एक हिस्सा, जैसे किसी ने बेरहमी से मिटा दिया हो। आदित्य—एक नाम जो कभी उसकी साँसों में बसता था—अब उसके लिए सिर्फ़ एक अजनबी था।
पर अब जब भी कोई उसका ज़िक्र करता, जानवी की आँखों में खालीपन उतर आता, जैसे कोई तस्वीर हो ही नहीं और इसी खालीपन में विकास धीरे-धीरे जगह बनाना चाहता था।
आज जानवी खुद उससे मिलने आई थी। कॉफ़ी शॉप के बाहर खड़ा विकास उसे दूर से देख रहा था। वही हल्की चाल, वही उलझे बाल, वही आँखें—पर अब उनमें वह चमक नहीं थी, जो पहले किसी और के लिए हुआ करती थी , विकास ने गहरी साँस ली ,उसके सामने एक मौका खड़ा था—शायद आख़िरी , जानवी अंदर आई , उसने हल्की मुस्कान के साथ विकास को देखा और कहा --
जानवी :- “सॉरी… देर हो गई,” जानवी ने कहा।
विकास ने तुरंत सिर हिलाया,
विकास :- “नहीं कोई बात नही , वो मैं भी अभी आया हूँ , आओ बैठो ना ।”
वह जानबूझकर उसकी तरफ़ झुका नहीं, छुआ नहीं , उसे पता था—जल्दबाज़ी जानवी को डरा सकती है , दोनों के बीच थोड़ी देर खामोशी रही। तभी वहां पर वेटर कॉफी लेकर आ जाता है ।
जानवी कॉफी का कप उठाते हुए पूछा,
जानवी :- “तुम्हें मुझसे कुछ ज़रूरी बात करनी थी?”
विकास के लिए यही वह पल था , जहाँ विकास को तय करना था—सच या चाल पर आज उसने सच नहीं चुना।
विकास ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
विकास :- “बस ये जानना चाहता था… तुम कैसी हो अब?”
जानवी ने कंधे उचका दिए,
जानवी :- “डॉक्टर कहते हैं के अब सब ठीक है… बस कुछ चीज़ें याद नहीं आतीं। कोशिश करती हूँ याद करने की पर कुछ याद ही नही आती । "
उसने जानबूझकर आदित्य का नाम नहीं लिया , विकास की आँखों में एक पल के लिए राहत चमकी—और फिर वही राहत गिल्ट में बदल गई।
विकास :- “तुम्हें डर नहीं लगता?”
विकास ने पूछा , जानवी चौंकी और कहती है --
जानवी :- “किस बात का?”
विकास :- “इस बात का कि ज़िंदगी का एक हिस्सा तुम्हें याद नहीं,”
विकास ने धीमे से कहा , जानवी ने कप नीचे रखा , उसकी आवाज़ भर आई , जानवी विकास की और दैखती है और बड़े ही मासुमियत से कहती है --
जानवी :- “डर लगता है विकास… कभी-कभी लगता है, मैं अधूरी हूँ किसी के बिना , जैसे कोई मुझे पूरा करके चला गया हो।”
विकास के अंदर कुछ टूट गया वो समझ गया के जानवी आदित्य के लिए ये बोल रही थी पर उसे ये याद नही था।
विकास कहता है --
विकास :- “तुम अधूरी नहीं हो,”
विकास ने नज़रें झुकाते हुए कहा,
विकास :- “तुम बस… चोट खाई हुई हो।”
जानवी ने उसकी तरफ़ देखा , उसकी आँखों में भरोसा था , और यही भरोसा विकास का हथियार बन रहा था। विकास ने धीरे से कहा--
विकास :- “एक बात कहूँ , एक्सीडेंट के बाद… मैं रोज़ अस्पताल आता था।”
विकास ने जानवी को झुच बोलने लगा , वह कभी आया ही नही था ।
जानवी की भौंहें सिकुड़ीं, और खुश होकर कहती है ---
जानवी :- “सच?”
विकास :- “हाँ,”
विकास ने शांत आवाज़ में कहा,
विकास :- “तुम सोई रहती थीं… बोल नहीं पाती थीं। पर मैं बस बैठा रहता था।”
उसने जानबूझकर आदित्य को कहानी से मिटा दिया। जानवी की आँखों में नमी आ गई।
जानवी :- पर मुझे याद क्यों नहीं है ये सब?”
विकास ने उसका दर्द अपनी मुट्ठी में कस लिया।
विकास :- “शायद इसलिए… क्योंकि कुछ लोग तुम्हारी यादों से ज़्यादा तुम्हारी ज़िंदगी में रहना चाहते थे,”
उसने कहा , यह वाक्य सीधा दिल पर लगा। जानवी पहली बार उसके इतना क़रीब महसूस करने लगी , कुछ देर बाद, विकास उठा।
विकास :- “चलो,”
उसने कहा,
विकास :- “मैं तुम्हें एक जगह दिखाना चाहता हूँ।”
वह जगह जानवी के लिए नई नही थी , और ना ही विकास के लिए नई थी , शाम की हल्की हवा, सूखे पत्ते, और डूबता सूरज।
ये वही केफे था , यहीं एक्सीडेंट से एक दिन पहले जानवी और आदित्य बैठे थे , विकास यह जानता था। जानवी जगह को दैखकर हैरानी से विकास से पूछती है --
जानवी :- “यहाँ क्यों लाए हो?”
विकास ने आसपास देखा,
विकास :- “पता नहीं…बस लगा के शायद तुम्हें अच्छा लगेगा।”
जानवी ने आँखें बंद कीं , हवा उसके चेहरे से टकराई , अचानक उसके सिर में हल्का दर्द उठा और एक आवाज़…
“जानवी…”
वह चौंक गई।
विकास ये सब दैखकर झट से कहा --
विकास :- “क्या हुआ?”
विकास ने घबराकर पूछा।
जानवी ने अपना माथा पकड़ा,
जानवी :- “कुछ… कुछ अजीब लगा।”
विकास का दिल तेज़ धड़कने लगा , अगर उसे याद आ गया तो , उसने जानवी के कंधे थाम लिए।
विकास :- “शायद हवा तेज़ है… बैठ जाओ।”
जानवी बैठ गई, पर उसकी आँखें उसी जगह पर टिकी रहीं , जहां पर उस दिन आदित्य और जानवी बैठा था ।
जानवी :- “अजीब है,”
जानवी ने कहा,
जानवी :- “यह जगह… जानी-पहचानी लग रही है। ऐसा लग रहा है जैसे यहां पर मैं उस टेबल पर बैठी थी और उधर .... उधर शायद पता नही कौन था । पर मुझे ऐसा लग रहा है के मैं यहां पर कुछ समय पहले ही आयी हूँ ।
विकास के भीतर डर फैलने लगा , कही वो जानवी को यहां पर लाकर कोई गलती तो नही कर दिया ।
तभी जानवी को बाहर एक चेहरा दिखाई दिया जो और कोई नही बल्की आदित्य था । जानवी आदित्य को दैखकर बस उसकी और दैखती रहती है , आदित्य वहां पर बाहर खड़ा था , केफे मे वन वे मिरर लगा था जिस कारण ये जानवी आदित्य को साफ - साफ दैख पा रही थी पर आदित्य जानवी को नही दैख पा रहा था । क्योकी इस मिरर से बाहर का अंदर की और नही दिखता है पर अंदर से बाहर का सब दिखाई देता है ।
आदित्य का मासुम चेहरा उसकी आंखे , उसकी मुस्कान को दैखकर जानवी को धुंधला सा कुछ पल आने लगता है जो दिल को चीरता हुआ जानवी को परेशान करने लगता है और उसके कान मे ओक आवाज सा गुंजता है , मैं हूँ ना । आई लव .... एक्सीडेंट के बाद आदित्य ये जानवी से बोल रहा था , ये बात जानवी को याद आने लगी थी पर जानवी को पूरी बात याद नही आती ।
जानवी का सिर घूमने लगा , उसके दिमाग़ में बिखरी हुई तस्वीरें टकराने लगीं।
हँसी…आँसू…वादा…ये सब एक धुंधली तस्वीर बनकर जानवी के सामने आ रहे थे ।
विकास ये सब दैखकर चोंक गया था , उसकी चाल यहाँ खत्म हो रही थी , उसे ऐसा लगने लगा । जानवी की आँखों से आँसू बहने लगे।
जानवी विकास से आदित्य को दैखकर मन ही मन कहती है --
जानवी :- “मुझे… मुझे उसे देखकर ऐसा क्यों लग रहा है…जैसे मैं उसे खो चुकी हूँ? जबकी मैं उससे सबसे ज्यादा नफरत करती हूँ । आखिर उसमे ऐसा क्या है के मैं उससे नफरत करते हूए भी उसी की और खिंची चली जाती हूँ ।
आदित्य बाहर एक बच्चे के साथ खेल रहा था , वो बच्चा अपनी मां के गोद मे रो रहा था तो आदित्य उसे अजीब तरह से मुह बनाकर हसा रहा था , आदित्य का अजीब सा मुह दैखकर जानवी को भी हसी आने लगा था और जानवी आदित्य की और दैखे जा रही थी ।
विकास जानवी जिस और दैख रही थी उसी और दैखता है , जहां पर विकस दैखता है के जानवी आदित्य की और दैख रही थी ।
ये दैखकर विकास चमक जाता है ऐर मन ही सौचता है --
विकास :- ये जानवी आदित्य की और दैखकर ऐसे मुस्कुरा क्यों रही है ।
विकास जानवी को आवाज लगाकर कहता है --
विकास :- अरे जानवी , क्या हूआ तुम किस सौच मे पड़ गयी ?
जानवी विकास से छुपाती है और कहती है --
जानवी :- नही नही कुछ नही ।
इतना बोलकर जानवी चुप रो जाती है और आदित्य की और दैखने लगती है । ये दैखकर विकास अंदर ही अंदर गुस्सा हो जाता है और सौचता है --
विकास :- ये जानवी उस आदित्य के लिए मुझसे झुट क्यों बोल रही है ।
शाम का वक़्त था , विकास जानवी को घर पहूँचा कर घर मे बैठकर आदित्य को जानवी से दुर करने के बारे मे सौच रहा था ।
कमरे में हल्की पीली रोशनी फैली हुई थी, लेकिन उस रोशनी में भी विकास का चेहरा बुझा-बुझा लग रहा था। खिड़की के बाहर शहर अपनी रफ्तार में था—गाड़ियाँ, लोग, आवाज़ें—पर विकास के भीतर सब ठहरा हुआ था।
उसके एक हाथ में मोबाइल था और एक हाथ मे शराब , विकास एक - एक सिप शराब का लेता है और मोबाईल के स्क्रीन पर जानवी की तस्वीर। विकास जानवी की तस्वीर की और दैकर कहता है --
विकास :- आखिर क्या है उस आदित्य मे जो मुझमे नही है , वो भी तो तुम्हारी पैसे के लिए तुम्हारे साथ है । पर इस बार मैं इस मौके को हाथ से जाने. ही दे सकता , इस बार मैं तुम्हें अपना बना कर ही रहूँगा , चाहे इसके लिए मुझे कुछ भी करना पड़े , इसके चाहे मुझे आदित्य को ही रास्ते से हटाना पड़े या तुम्हारे पापा अशोक को ही क्यों ना मारना पड़े , इस बार जो भी मेरे रास्ते पर आएगा , मैं उसे इस दुनिया से उठा दूगां , पर जानवी को अब मेरे होने ये कोई नही रोक सकता ।
तभी दरवाज़े पर हल्की दस्तक हुई। विकास कहता है --
विकास :- "आ जाओ,"
विकास ने बिना पलटे कहा।
दरवाज़ा खुला और मोनिका अंदर आई। ऊँची एड़ी की सैंडल की आवाज़ कमरे में गूंज गई। वह हमेशा की तरह सलीके से तैयार थी—आत्मविश्वास से भरी हुई, आँखों में चालाक चमक लिए , मोनिका विकास के पास आकर बैठ जाती है , मोनिका विकास के फोन पर जानवी का तस्वीर दैखकर कहती है --
मोनिका :- "अब भी उसी तस्वीर को देख रहे हो?"
मोनिका ने तंज़ कसते हुए कहा।
विकास ने मोबाइल टेबल पर रख दिया और कहा --
विकास :- "वो अब भी वही है, मोनिका… पर मेरे लिए नहीं। उसके दिल मे अब भी आदित्य को लिए कुछ तो है ।
मोनिका मुस्कराई और कही --
मोनिका :- कुछ है पर क्या है ये अभी जानवी को नही पता , यही तो मौका है, विकास।"
विकास ने चौंककर उसकी तरफ़ देखा।
विकास :- मौका? किस बात का?"
मोनिका कुर्सी खींचकर उसके सामने बैठ गई।
मोनिका :- "जानवी की ज़िंदगी में वो खाली जगह… जो उसकी याददाश्त के साथ चली गई है। उसे तुम अपना जगह बनाओ , और जानवी की याददाश्त वापस आए उससे पहले तुम उससे ये भरोसा दिलाओ के वो तुम्हारे लिए सबसे Important है बाकी सब उसके आगे कुछ भी नही ,ऐसा करके उसका भरोसा जीतो ।
विकास की आँखों में बेचैनी उभर आई।
विकास :- तुम क्या कहना चाह रही हो?"
मोनिका ने अपने बाल पीछे किए और सीधी बात पर आ गई।
मोनिका :- "मैं कह रही हूँ—तुम जानवी से शादी कर लो।"
To be continue......715