prem ka arth meera - 14 in Hindi Women Focused by sunita maurya books and stories PDF | मीरा प्रेम का अर्थ - 14 - तुम जिंदा हो?....

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मीरा प्रेम का अर्थ - 14 - तुम जिंदा हो?....

माधव के साथ सभी जाने के लिए कार में बैठ गए
और वहां से चल दीए .. और कुछ ही देर में वो लोग एकेडमी के हॉस्पिटल में पहुंच गए... माधव तेज कदमों से चल रहा था। जैसी ही वो मीरा के वार्ड के पास पहुंचा उसके कदम रुक गए ...उसको देख सभी रुक गए। विनायक सर ने माधव से कहा.... 

क्या हुआ माधव रुक क्यु गए, अंदर क्यों नहीं जा रहे हो तुम, चलो!... माधव जो अभी तक किसी सोच में था उसके कानों में विनायक सर की बात गई तो उसने उनकी तरफ देखा और बस हम्म किया गेट खोल दिया ......उन सबकी नजर एक खाली बिस्तर पर गई वो बिस्तर सुधा का था। जब सबने नजरें घुमाईं तो देखा कि सुधा मीरा के बिस्तर के पास रखीे  कुर्सी पर बैठी मीरा के सर पर हाथ फेर रही थी .....सुधा को जब एहसास हुआ कि कमरे में कोई आया है तो उसने पीछे मुड़कर देखा...पीछे देखते ही सबसे पहले उसकी नजर माधव पर गई.... उसको देख सुधा काफी हेरानं थी वो हेरानी भरी नजरो से माधव को देखते हुए धीरे से अपनी जगह से उठी और फिर धीमे कदमो के साथ माधव की और बढ़ने लगी.....
सुधा माधव के पास पहुंची उसने हेरानी से माधव के कंधो को छुआ फिर उसके गालो को। और फिर माधव से पूछा। .......तुम जिंदा हो?....

ये बात सुन वहां खड़े सभी हेरानी से सुधा को देखने लगे माधव ये देख काफी शांत था और बात की शुरुआत कहा से करे उसको समझ नहीं आ रहा था। इसलिए उसने सिर्फ हाँ कहा और चुप हो गया....फिर से सुधा ने उससे पूछा.. क्या तुम सच में जिंदा हो या फिर मैं कोई सपना देख रही हूं ......

सूरज आगे आया  और बोला...हा ये सपना नहीं है सच है लेकिन तुम ऐसे क्यों पूछ रही हो?.....सूरज की आवाज सुन सुधा ने सूरज की तरफ देखा और पहचानने  की कोशिश करने लगी .....सुधा के एक्सप्रेशन देख सभी हेरान होकर एक दूसरे को देखने लगे .
तभी सुधा ने कहा...तुम सूरज हो हेना?.....

सूरज ने हा मैं सर हिलाया .सुधा ने माधव की तरफ देखा .,..माधव तुम जिंदा थे ...तो क्यू नहीं आए तुम मीरा के पास वापस ....क्यूं ....इतना कहकर सुधा ने माधव के गालों पर एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया और गुस्से में कहने लगी...तुम जिंदा थे तो क्यों नहीं आए मुझे बताओ क्यू...क्यों बोलो माधव....तुमने तो कहा था कि तुम कभी मीरा को छोड़ कर नहीं जाओगे .फिर क्यों नहीं आये तुम। ....इतना कहकर सुधा का गुस्सा आंसुओं में बदल गया वो घुटनो में बैठ कर रोने लगी....
सुधा को ऐसा करते देख सभी वहां हेरान हो गए.. माधव खड़ा बस सुधा को देख रहा था .सूरज आगे आया और सुधा को कंधे से पकड़ के बिस्तर पर बैठाया...सुधा अभी भी रो रही थी और बोले जा रही थी....क्यूं किया तुमने मीरा के साथ ऐसा। क्यों... तुम क्यों नहीं आये माधव... सूरज ने सुधा को साइड टेबल पर रखे गिलास से पानी पिलाया ...और पीठ को सहलाते हुए उसको शांत होने के लिए कहने लगा .....

..तभी माधव ने सुधा से कहा ..... मैं आया था... हा मुझे आने में थोड़ी देर हो गई थी लेकिन मीरा ने भी किसी से शादी कर ली .उसने भी तो मेरा इंतजार करने का वादा किया था उसका क्या हा...तुम्हें हर बार मैें ही क्यों गलत लगता है।...माधव ने ये बात काफी गुस्से और नाराज़गी दिखाते हुए कहीं थी। ये सुन सभी माधव को हेरानी से देखने लगे... सुधा ने भी हेरानीे से माधव को देखने लगी ......

ऐसे क्या देख रही हो मेरी तरफ हा एक बात बताओ हमारी सारी बातें तुम्हारे सामने होती थी।क्यू नहीं कहा था क्या कि वो मेरा इंतजार करेगी। क्यू फिर वो आगे बढ़ गई अपनी जिंदगी में। आज भी वो नजारा मेरे सामने आता है जब मीरा के हाथों को किसी और के हाथों में देखा था।वो तो आगे बढ़ गई लेकिन मेरा क्या ...उसने तो कर ली शादी ......लेकिन मैं तो अभी भी वही अटका हुआ हूं...टाइम जरूर आगे निकला गे लेकिन मैं........माधव आगे कुछ कहता है इसे पहले सुधा ने उसको रोक लिया और....

बस करो माधव अगर तुम समय रहते आ जाते तो ऐसा कुछ होता ही नहीं। छोड़ो भी मीरा के तो सगे लोग भी अपने नहीं थे तुम तो फिर भी पराए थे। तुम से और उम्मीद ही क्या कर सकती है।और वेसे भी किसी के साथ सात फेरे लेने से कोई किसी का हो नहीं जाता ......फिर माधव के सीने पर उंगली लगाते हुए बोली .... उसके लिए यहां .. यहां प्यार हो चाहिए ....जो शायद तुम्हारे अंदर ख़तम हो चूका...तुमने कितना जाना उसको..अगर जानते तो कभी उसके बारे में ऐसा नहीं सोचते ....

बोलते हुए सुधा की आंखे नम होने लगी थी और एक एक कर आंख से गिरने लगे थे ......उसने कभी अपनी जुबान से कहा नहीं कि वो कितना प्यार करती है तुमसे .तुम्हें लगता है उसने तुम्हारा इंतजार नहीं किया  गलत सोच्तेे हो तुम....इतने कहकर सुधा अपने सामान की तरफ जाने लगी। उसने मीरा के कपड़ो के बैग जो काफी गंदा और मेला हो गया था .उस मेे से उसने कुछ निकाला .... बाकी सब उसको बहुत ध्यान से देख रहे थे सुधा वापस आयी माधव को एक तस्वीर दिखाते हुए बोली......ये याद है तुम्हें!...

माधव ने तस्वीर को अपने हाथों में ले लिया और देखने लगा... ये वही तस्वीर है जब सभी लोग मिलके उदयपुर में घुमने गए थे .... उसमें मीरा और माधव एक साथ खड़े मुस्कुरा रहे थे ..

मीरा के पास तुम्हारी निशानी के नाम पर बस यही एक चीज है। उसकी शादी जरूर हुई लेकिन उसने इस आदमी से कभी प्यार नहीं किया क्योंकि उसकी आत्मा तो हमेशा से माधव के पास थी। वो हमेशा से तुम्हारा इंतज़ार करती थी। लेकिन तुम कभी नहीं आये। ........
उसकी बात का जवाब देते हुए माधव ने कहा...मैं आया था लेकिन जब पता चला वो किसी और की हो गई है तो।मैं नहीं जा पाया उसके सामने .मेरे कदम आगे बढ़े ही नहीं .....

माधव ने जैसी बात ख़तम की सुधा थोड़ा गुस्सा के साथ माधव से बोली.... क्यू माधव क्यू। क्यू रोका तुमने अपने कदमो को क्यू! अगर  तुम थोड़ी हिम्मत करके मीरा से मिलने की कोशिश करते तो शायद स्थिति कुछ और होती ...पता है सिर्फ तुम्हें और तुम्हारे परिवार को कुछ ना हो इस्लीये उसने खुदकोें उस नरक में झोंक दिया
......इतना कहकर सुधा फूट फूट का रोने लगी.......
सुधा के मुँह से अपने और अपने परिवार के बारे में सुनकर हेरान हो गया  और सुधा से पूछने लगा...मेरे और मेरे परिवार के लिए...क्या मतलब है तुम्हारा  सुधा बोलो. मुझे सारी बात शुरुआत सेै बताओ कि मीरा की ये हालत कैसी हुई .......मुझे बताओ सुधा ......
सुधा आपने आपको नॉर्मल किया और बोली..उस दिन जब तुम मीरा से मिलने आये थे......
कॉलेज की लाईब्रेरी......

मीरा एक टेबल पर बैठी थी उसके सामने माधव बैठा था। दोनों शांत थे एक दूसरे को देख रहे थे। मीरा काफी परेशान नजर आ रही थी क्योंकि माधव की पोस्टिंग कश्मीर हो गई थी. लेकिन माधव ने ये बात मीरा को आज बताई थी इसलिए मीरा थोड़ा परेशान और नाराज थी।.......मीरा ने इशारों में पूछा,...तुम्हें कब जाना है ?....
माधव धीमी आवाज में बोला...... कल जाना है ?....
मीरा ने गुस्सा दिखाते हुए इशारों में बोली...कल जाना है और आज बता रहे हो?...बहुत जल्दी नहीं है ये बात बताने के लिए .....
माधव माफ़ी माँगते हुए बोला....माफ़ कर दो मुझे मैं भूल गया था .... माधव की बात का जवाब देते हुए मीरा बोली .... भूल गए ये कोई बहाना नहीं होता।सीधा सीधा बोलो बताना नहीं चाहते थे चोरी चुपके मुझ से पिछा छुड़ाना चाहते थे .....

माधव ने मीरा की बात सुनी और फिर अपने हाथ में मीरा के हाथ को लिया और बोला...ऐसा नहीं था मीरा विश्वास करो मेरे दिमाग से निकल गया था तुमको बताना। मैं ट्रेनिंग में इतना व्यस्त था बस ...और तुम्हें छोड़ने की बात भी मेरे मन में नहीं आई..
मीरा ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और बस टेबल पर रखी पर कुछ किताबें उठाईं और बाहर जाने लगीं। माधव कन्फ्यूज होकर मीरा मीरा करते हुए उसके पीछे चलने लगा और मीरा चलते हुए लाइब्रेरी से बाहर निकल गई। उसके पीछे माधव को जाते देख वही बैठी सुधा भी कंफ्यूज हो गई और उनके पीछे चलने लगी .....मीरा यूहीं गुस्से में चली जा रही थी कि तभी माधव उसके सामने आ गया और मीरा अचानक रुक गई और दूसरे रास्ते से जाने लगी। लेकिन फिर से माधव उसका रास्ता रोक कर खड़ा हो गया। मीरा ने उसको इग्नोर किया और फिर दूसरे रास्ते से जाने लगी। लेकिन माधव ने फिर से मीरा का रास्ता रोक लिया...ये देख चिढ़कर मीरा ने माधव को घूर कर देखा ........
माधव ने कहा...अरे यार रुक जाओ सुन तो लो मेरी बात .
..तभी सुधा उनके पास आयी और बोली......अरे क्या हुआ मीरा तुम्हें...फिर माधव की तरफ देखकर बोली... अरे क्या हुआ इसको तुमने क्या कह दिया इसको जो ये गुस्सा हो गई है। ......

माधव ने कहा.... हां वो क्या है कि मैं उसको एक बात बताना भूल गया था कि मेरी पोस्टिंग कहीं और हो गई। इसलिए मुझे जाना पड़ेगा ...
सुधा ने कहा....ओह इतनी जरूरी बात तुम बताना भूल गए..वेसे जाना कब है तुम्हें?...सुधा की बात का जवाब में माधव ने कहा... कल सुबह ...
माधव की बात सुन सुधा भी गुस्से में बोली .... क्या ?.... और फिर मीरा की तरफ देखने लगी .... मीरा ने इशारों में कहा .... अब तुम मैें क्या करूँ इसकी आरती उतारू.....
सुधा ने फिर से माधव को देखा और बोली। ..वाह बेटे खाना खाना तो नहीं भूलते होगे तुम जो ये बात भूल गए .अब हटो सामने से... ...

सुधा को ऐसे बोलते देख माधव बोला....अरे कम से कम तुम तो मेरी साइड लो। समझ गया बहन जसी दोस्त है वो तुम्हारी वो तो तुम्हारी ही साइड लोेगी। अरे  मेरी बात तो सुन लो यार मेरे दिमाग से ये बात बिल्कुल निकल गई थी सच में .....

तभी मीरा ने सुधा को इशारा किया ताकि वो माधव को उसके रास्ते से हटा सके...... सुधा ने भी ऐसा किया उसने माधव से कहा... अरे हटो सामने से तुम  .....
माधव भी जिद्द पर अड गया.... मैं नहीं हटूंगा .....सुधा ने अपना माथा पीटा और बोली...अरे बेवकूफ वो तुमसे गुस्सा है इसलिए सामने से नहीं हटा रही थी। उसको अपना लेक्चर अटेंड करना है इसलीये हटा रही है .....
सुधा की बात सुनके माधव बोला...मीरा तुमको अपना लेक्चर अटेंड करना है इसलिए जा रही हो ....मीरा ने अपना सिर हा में हिलाया ..... 

तो क्या तुम मुझसे गुस्सा नहीं हो ...इस बात पर मीरा ने माधव को घूर  कर देखा और जाने लगी  ...
मीरा के साथ चलते हुए माधव ने मीरा से कहा। मीरा एक बार यार ठीक से बात कर लो मुझसे। मीरा सच मे हमें दोबारा ऐसा मोका कब मिलेगा हमें नहीं पता। और वापस कब आऊंगा ये भी नहीं पता। पता नहीं मैं आऊंगा भी या नहीं .....
ये बात सुन के मीरा के कदम अचानक अपनी जगह रुक गई। ...

.ये देख माधव ने कहा. .. अभी मैं जा रहा हूं लेकिन मैं तुम्हारा तुम्हारे हॉस्टल के पीछे रात को 8 बजे इंतजार करूंगा .फिर मीरा के करीब आया हल्के से उसके कानो में बोला....तुम्हें आना ही होगा .......ये बोलकर वो वहां से चला गया...मीरा अभी भी अपनी जगह पर खड़ी थी .........उसके कानो में माधव की आवाज गूंज रही थी...
शाम 7 बजे...

हॉस्टल के अपने कमरे में मीरा इधर से उधर चल रही थी वो बार बार घड़ी की तरफ देख रही थी... तभी सुधा कमरे में आई और मीरा को इधर उधर चलते देख कर हेरान होकर बोली.... अरे क्या हुआ मीरा ऐसे क्यों चल रही हो ?....
मीरा रुक गई और सुधा को देखने लगी .....मानो वो पूछना चाह रही थी माधव से मिलने जाए या ना जाए।सुधा ने उसकी तरफ देखा और मीरा को उसकी बाजू से पकड़ कर अपने साथ बिठाया और बोली... मीरा अगर तुम माधव से मिलना चाहती हो तो मिल आओ। नाराज़ होने से कोई फ़ायदा नहीं है .वेसे भी वो कल चला जाएगा ....देर हो जाये इसे पहले उसे मिल लो। पता नहीं वो कब आएगा .... सुधा के मुँह से ये बात सुन मीरा थोड़ी कन्फ्यूज हो गई क्योंकि सुधा कभी भी माधव के फेवर में नहीं बोलती थी। लेकिन आज.....

सुधा ने मीरा के मन में चल रही बात को पढ़ लिया और बोली.... मुझे पता है तुम क्या सोच रही हो कि मैं माधव की तरफ से क्यू बोले जा रही हूं। फिर मुस्कराते हुए उसने मीरा के गालों पर हाथ रखा और बोली...क्योंकि मुझे उसकी आंखो में बहुत प्यार दिखता है तुम्हारे लिए।.....वो अच्छा है  बस थोड़ी बात उल्टी करता है। बाकी अच्छा है.  और मेरी मानो तो तुम्हें उससे मिलने जाना चाहिए ......

मीरा ये बात सुन खुश हो गई और सुधा के गले लग गई .और फिर होकर परेशानी से सुधा को देखने लगी .ये देख सुधा ने कहा .... अब क्या हुआ अब क्यू परेशांन हो ?...
मीरा ने इशारे में कहा...वो तो ठीक है लेकिन हम वहां तक जाएंगे कैसे हॉस्टल से बाहर......सुधा ने मुस्कुराते हुए मीरा को देखा और बोली.... उसकी चिंता तुम मत करो बस मेरे पीछे आओ ........सुधा ने मीरा को  पकड़ा और अपने साथ लेके जाने लगी। वो मीरा को पीछे के दरवाजे से बाहर ले आई। जहां से ज्यादा किसी का आना जाना नहीं होता था... वो उसको हॉस्टल के बाहर ले आई जहां माधव अपनी बाइक के साथ, उसका इंतजार कर रहा था।माधव ने जै से ही देखा कि सुधा मीरा को लेकर  आ गई है वो अपनी जगह पर ही खड़ा हो गया है ...  सुधा ने मीरा को माधव के पास ले आई और माधव से बोली...
ये लो ले आई मैं तुम्हारी मीरा को। और हा याद रहे टाइम से ले आना मेरी मीरा को। मीरा जाओ ......

सुधा की बात सुन में मीरा माधव के पीछे उसकी बाइक पर बैठ गई माधव ने बाइक स्टार्ट की और वहा से चला गया.....थोड़ी देर बाइक ड्राइव करने के बाद माधव एक जगह आकर रुका। माधव ने मीरा का हाथ पकड़ा और उसको अंदर ले जाने लगा... वो जगह काफी खुबसूरत थी.... एक बड़ी सी झील थी। उसके आस पास बहुत सारी सारे फुल  उसके सामने एक महल दिखाई दे रहा था , जो सुनहरी रोशनी से जगमगा रहा था सामने एक शांत झील चमक रही थी,जो आस-पास के पेड़ों से टिमटिमाती स्ट्रिंग लाइट्स को प्रतिबिंबित कर रही थी....ठंड का मौसम हो रहा था इसलिए वहा ज्यादा लोग दिखाई नहीं दे रहे थे....माधव और मीरा हाथों में हाथ डाले एक दूसरे के साथ चलने लगे।  माधव मीरा के साथ घुमते हुए उसको उस जगह के बारे मे बता रहा था .यूही घुमते घुमते काफी टाइम हो गया। तो माधव ने कहा... 
आओ मेरे साथ...वो उसको एक जगह ले गया। जो पहले वाली जगह से थोड़ी दूर थी।  वो भी उसी महल का एक छोटा सा हिस्सा था। जो पेड़ पोधो से ढका हुआ था .चार पिलर के सहारे एक छत बनी हुई थी उसके बीचो बीच आग जल रही थी जिसकी लो मध्यम थी।  उसके पिलर पर फुलो की सजाव्वत हो रखी थी उन्हें थोड़ी थोड़ी जगह पर लाइट जल रही थी ....वहां पेड़ो पर भी छोटी छोटी जगमगाती लाइटें लगी हुई थी। जो देखने में बेहद खूबसूरत लग रही थी...मीरा देख रही थी वो सब देख उसकी आँखों में अलग ही चमक नज़र आ रही थी। की तभी उसको अपने कमर पर किसी का स्पर्श महसूस हुआ।  उसने अपनी गर्दन को हल्का सा पीछे करके देखा तो और  कोई नहीं बलकी माधव था। माधव ने मीरा की कमर में हाथ डाला और हल्के से मीरा के  कंधो पर अपना चेहरा रख दिया। ये देख मीरा सामने की तरफ मुस्कुराकर देखने लगी..  

इस के बदले में मीरा ने अपने हाथों को माधव के हाथों पर रख दिया और हल्के से पीछे हो गई। ऐसा मानो मीरा माधव ने कहीं खो जाना चाहती थी....कुछ देर यूहीं रहने के बाद माधव ने मीरा को दोनो हाथो को पकड़ा घुमा कर अपनी तरफ उसका चेहरा कर लिया।  फिर एक हाथ उसके कमर पर रख कर दूसरे हाथ अपने हाथों में लेकर उसके साथ डांस करने लगा.... 
माधव ने  मीरा से कहा....अरे वो क्या है ना कि मैं एक्सरसाइज करता हुआ ना तो मेरी बॉडी तुम्हारी तरह स्मूथ नहीं चलती। डांस भी उतना अच्छा नहीं कर पाता मैं। बस जैसा आता वेसा कर रहा हु हंसना मत.....
माधव की बात सुन के मीरा के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई और उसने हाँ मेे सर हिला दिया.. मतलब यह कि वो उसका मजाक नहीं बनायेगी....तभी माधव ने कहा...
अरे तुम तो हंसने लगी मेरा मज़ाक उड़ा रही हो......माधव की बात सुन मीरा ने सकपकाई और अचानक उसकी हंसी रुक गईैं और  डांस करते करते मीरा की सैंडल अचानक से अटक गई और मीरा गिरने को हुई तो माधव ने उसको संभालते हुए  अपना एक हाथ उसकी कमर पर और एक उसके सिर के पीछे रख लिया ....मीरा गिरने से बच गई... माधव ने मीरा की आंखों में देखा और मुस्कुराते हुए बोला... 

अरे अरे संभल के कल से मैं नहीं रहूंगा तुम्हें इस तरह बचाने के लिए।   .....माधव की बात सुन अचानक मीरा के चेहरे पर उदासी छा गई..मीरा माधव की आंखों में देखते हुए अचानक माधव के गले लग गई....माधव सीधा हुआ और उसके कमर में हाथ डाल दिया।    ...और धीरे से बोला.....
मैं जानता हूं मीरा ये बहुत मुश्किल है तुम्हारे लिए .और मेरे लिए भी  .. लेकिन तुमने तो मुझसे कहा था ना कि मेरा पहला फ़र्ज़ मेरी मातृभूमि के लिए है .... तो फिर क्यू रोक रही हो मुझे .....
माधव की बात सुन मीरा माधव से अलग भी और इशारों में बोली.... मैं कब तुम्हें रोक रही हूं?...
माधव ने मुस्कुराते हुए मीरा के आंसुओं की बूंदो को अपने हाथ लिया और उसको दिखाते हुए बोला... अच्छा तो ये क्या है?.....ये देख मीरा आंसुओं को देखने लगी.. उसको खुद पता नहीं चला कि उसकी आंखों से आंसू कब निकलने लगे ......माधव ने कहा...तो बताओ ये क्या है फिर बारिश तो ही नहीं थी...मीरा ने कुछ नहीं कहा बस वो माधव को देख रही थी।    ....माधव ने मीरा के चेहरे को अपने दोनों हाथों में लिया और बोला......
मीरा अगर ऐसे करोगी तो मैं कैसे जा पाऊंगा बोलो...फिर प्यार से उसको बालो को पीछे करते हुए बोला.... देखो मैं चाहता हूं कि कल जब मैं जाऊं तो तुम मुझे हंसते हुए भेजो। ना की यह नाक बहती और आंसू गिरते हुए चेहरे के साथ.......माधव की बात सुन के अचानक मीरा हंसने लगी...माधव ने देखा और कहा...हा इसी चेहरे के साथ। मुझे तुम्हारा खिलखिलाते चेहरा देखना है......


ये सुन मीरा माधव की आंखों में देखने लगी... कभी उसके होठों को देखती कभी आंखों में... मीरा ने धीरे से अपनी आँखें बंद कर लीं और अपने चेहरे को माधव के चेहरे की तरफ बढ़ाने लगी.. ये देख माधव ने भी अपनी आंखें बंद कर ली... अब दोनों के होंठ इतने करीब थे कि वो दोनों एक दूसरे की गरम सांसों को महसूस कर रहे थे... तबी माधव ने अपने  होंठ को मीरा के होठों पर रख दिये .......




अरे दोस्तो, ये कहानी आपको अच्छी लगती है तो कृपया हमें लाइक करें और कमेंट करें... मुझे पता है कि थोड़ी लेट स्टोरी डालती हूं वो इसलिए क्योंकि मैं जॉब करती हूं और दूसरी कहानी भी लिखती हूं अपनी...वो फंतासी आधार कहानी है इसलिए उसमें थोड़ा समय लगता है......
देरी के लिए क्षमा करें.