एपिसोड 7: भरोसा टूटे?बंगला फिर शांत था, लेकिन हवा में तनाव। अनन्या सोफे पर बैठी, हाथ की खरोंच पर मरहम लगी। आर्यन के होंठों का स्पर्श अभी भी महसूस हो रहा – गर्म, सच्चा। लेकिन आर्यन का चेहरा बदला हुआ। फोन कान से सटा, आँखें अनन्या पर। "हाँ... कन्फर्म करो।" कॉल कटते ही अनन्या ने पूछा, "क्या हुआ? राकेश ने क्या कहा?" आर्यन ने ठंडे स्वर में फोन आगे किया। वॉइस नोट बजाया – राकेश की आवाज़: "आर्यन, अंकित ने प्लान बनाया था। पैसों के लालच में। मैंने चाकू मारा, लेकिन वो साथ था। फैमिली प्रॉपर्टी के लिए।" अनन्या का चेहरा सफेद। "झूठ! भैया ऐसा नहीं कर सकता।" आर्यन ने सिर हिलाया, "पुलिस कस्टडी में कन्फेशन। CCTV फुटेज भी। देख?" अनन्या ने मना किया, आँसू बहने लगे। "तुम्हें खुशी हुई न? बदला पूरा। अब तलाक दो!" आर्यन करीब आया, लेकिन अनन्या पीछे हटी। "अनन्या, सच है। लेकिन तू निर्दोष। मैं तेरे भाई को सजा न दूँगा। ट्रस्ट कर।" अनन्या चिल्लाई, "ट्रस्ट? तुम्हारी दुनिया झूठ की! मैं चली जाऊँगी!" कमरे में चली गई, दरवाजा बंद। आर्यन दीवार से टिका, सिर पकड़ लिया। प्यार शुरू हुआ, लेकिन भरोसा टूट गया।सुबह अनन्या ने बैग पैक किया। "अंकित के पास जाऊँगी। सच खुद पूछूँगी।" आर्यन रास्ता रोक दिया। "खतरनाक है बाहर। विक्रम भागा है। घर रह।" अनन्या गुस्से में, "तुम्हारा जेल! मुझे कैदी समझते हो?" झगड़ा भड़का। आर्यन ने पहली बार हाथ थामा, "प्यार करता हूँ अनन्या। कॉन्ट्रैक्ट से ज्यादा। मत जा।" अनन्या स्तब्ध। "प्यार? हाह! बदले का प्यार?" हाथ छुड़ाया, लेकिन दिल काँपा। आर्यन ने सॉफ्ट कहा, "एक चांस दे। अंकित को बुलाते हैं। बात करेंगे।" अनन्या रुकी। "ठीक। लेकिन सच बोलेगा तो।" फोन किया अंकित को। "दीदी, आता हूँ। सफाई दूँगा।"दोपहर अंकित आया। लिविंग में तीनों। अंकित घबराया। "दीदी, राकेश झूठ बोल रहा। मैंने कुछ नहीं किया। बस देखा था। डर से चुप रहा।" आर्यन ने CCTV क्लिप प्ले की – धुंधली, लेकिन अंकित दिखा, चाकू थामे। "ये क्या?" अंकित रोया, "फोटोशॉप्ड! विक्रम ने बनवाया।" अनन्या बीच में, "भैया सच बोलो!" अंकित टूट गया। "हाँ... प्लानिंग में था। लेकिन मारने वाला राकेश। पैसों की जरूरत थी दीदी। माफ करो।" अनन्या सदमे में गिर पड़ी। "तुम... मेरे भैया?" आर्यन ने सम्हाल लिया। अंकित बोला, "आर्यन, सजा दे दो। लेकिन दीदी को बचा लो।" पुलिस आई, अंकित को ले गई। अनन्या रो-रोकर बीमार। आर्यन ने डॉक्टर बुलाया, दवा दी। "मैं हूँ न।" लेकिन अनन्या ने मुँह फेर लिया। भरोसा पूरी तरह टूटा।शाम को आर्यन मीटिंग कैंसल की। अनन्या के कमरे में बैठा। "खाना खा लो।" अनन्या चुप। आर्यन ने सूप बनाया – खुद। "याद है गंगा घाट? वो पल सच्चे थे।" अनन्या की आँखें नम। "सब झूठ। फैमिली बर्बाद।" आर्यन ने हाथ थामा, "नई शुरुआत करेंगे। मैं तेरे साथ।" अनन्या छूटी, लेकिन स्पर्श में गर्मी। रोमांस की चिंगारी बाकी। तभी गार्ड का फोन – "बॉस, विक्रम का ट्रक बंगले की ओर। हमला!" आर्यन गन उठाया। अनन्या उठी, "मैं भी!" दोनों बाहर। रात का अंधेरा, ट्रक लाइट्स। गोलीबारी शुरू। विक्रम नीचे उतरा, "राठौर, अंकित मेरा था। बदला लेगा!" आर्यन ने जवाब दिया। अनन्या ने एक गुंडे को लाठी से मारा। विक्रम भागा, लेकिन ट्रक फट गया। आग लगी। आर्यन ने अनन्या को बचाया, दोनों जंगल में छिपे। साँसें तेज़। "तू ठीक?" अनन्या ने सिर हिलाया, आर्यन के गले लग गई। "डर गई... लेकिन तुम पर भरोसा।" किस हुआ – जुनून भरा। लेकिन विक्रम की हँसी गूँजी, "खत्म नहीं हुआ राठौर!"घर लौटे। पुलिस ने साफ किया। अनन्या आर्यन से लिपट गई। "सॉरी... प्यार है।" लेकिन आर्यन को मैसेज – "अनन्या का राज़: वो भी कातिल जानती थी।" भरोसा फिर टला?(अगला एपिसोड: अनन्या का राज़। इंतजार करो!)