अगली सुबह, हल्की धूप परदे से अंदर आ रही है।
कमरा बिल्कुल शांत है।
Shreya धीरे-धीरे आँखें खोलती है… सिर भारी है पर अब दर्द उतना नहीं।
वो उठकर बैठती है और सामने का नज़ारा देखकर उसकी आँखें भर आती हैं—
Karan और Kabir दोनों बैठे-बैठे ही सो गए थे।
Kabir उसका हाथ दोनों हाथों से पकड़े बैठे-बैठे सोया था।
Karan उसका सर सहलाते-सहलाते ही नींद में झुक गया था।
दोनों के चेहरे पर थकान साफ दिख रही थी।
Shreya को देखकर समझ आ जाता है कि दोनों भाई पूरी रात उसकी देखभाल करते रहे।
उसके गले में एक सिसकी अटक जाती है।
Shreya (धीरे से फुसफुसाते हुए) बोली -
ये लोग… ये मेरे लिए इतना सब...!
वो Kabir के हाथ को अपनी उंगलियों से दबाकर धीरे से छुती है।
Kabir हल्का सा हिलता है और नींद में ही बोल देता है
Kabir (आँखें आधी बंद, नींद में ही) बोला -
Shreya… पानी चाहिए? बुखार कम हुआ?
Shreya हक्की-बक्की उसे देखने लगती है।
Shreya (धीरे से) बोली -
मैं ठीक हूँ… आप सो जाइए।
Kabir आँखें खोल देता है।
Kabir (थकी आवाज़ में मुस्कुरा कर) बोला -
बस पक्का? हां?
Shreya सिर हिलाती है।
इस आवाज़ से Karan भी धीरे-धीरे उठता है।
Karan (चौंककर) बोला -
Shreya… तबियत कैसी है? बुखार कम हुआ?
Shreya दोनों को देखती है—
उनकी नीद से भरी हुई आँखें, बिखरे बाल और रात भर की थकान…।
उसे बहुत guilt महसूस होता है।
Shreya (आँखों में आँसू लेकर) बोली -
Sorry…आप दोनों को पूरी रात जागना पड़ा…।
Karan उसका हाथ पकड़ लेता है।
Karan (बहुत प्यार से) बोला -
पागल लड़की… sorry क्यों बोल रही हो? तुम हम दोनों की जिम्मेदारी हो… तुम हमारी Shreya हो।
Kabir भी मजाक में बोल देता है—
Kabir बोला -
हां… और ऐसे ही touchy moment में रो दिया तो tax लगेगा!
Shreya हँसते-हँसते रो देती है।
Kabir और Karan दोनों उसे खींचकर बीच में कसकर पकड़ लेते हैं।
Kabir (Shreya के सिर पर kiss करके) बोला -
बस… अब हम कहीं नहीं जा रहे। जब तक तुम 100% ठीक नहीं हो जाती।
Karan बोला -
आज घूमने का plan cancel. पूरा दिन तुम rest करोगी।
Shreya गर्दन हिलाती है—
पर उसके दिल में एक अनजाना सुकून है।
कुछ देर बाद।
Kabir उसके लिए खिचड़ी बनाने जाता है।
Karan कमरे में उसके बाल सुलझाकर बाँधता है।
Shreya शर्म से आँखें झुका लेती है।
Karan (मुस्कुराते हुए) बोला -
अब बाल मत खोलना… उलझ जाएंगे।
Shreya हँस देती है।
और कमरे में एक अलग ही मिठास फैल जाती है—
जैसे बीमारी भी प्यार के आगे हार गई हो।
दोपहर का समय, होटल की बालकनी
हल्की धूप है। हवा में ठंडक है लेकिन मौसम प्यारा है।
Shreya अब ज़्यादा ठीक है, पर चेहरा अभी भी थोड़ा फीका लगता है।
Karan और Kabir ने उसे बीच में बैठा रखा है, दोनों के हाथों में गर्म चाय के कप हैं।
Shreya के सामने अदरक वाली चाय और हल्का सा टोस्ट रखा है।
Kabir (मजाकिया अंदाज़ में) बोली -
Shreya जी… आपकी तबियत तो royal treatment से ही ठीक होती है लगता है।
दो पति… दो caretaker… दो servants भी ले आते क्या?
Shreya उसे गुस्से वाला look देती है।
Shreya बोली -
Servant आप दोनों हो… मुझे क्यों चाहिए और?
Kabir का मुँह खुला का खुला रह जाता है।
Karan (हँसते हुए ) बोला -
बिल्कुल ठीक बोला। हम दोनों को इसने कल रात से नौकर बना दिया है।
Shreya शरम जाती है और चाय की चुस्की लेने लगती है।
Kabir की शरारतें शुरू हो गईं।
Kabir अचानक Shreya के कप के नीचे हाथ लगा देता है।
Kabir बोला -
चाय गरम है ना? मैं पकड़ लेता हूं… तुम पे तो ठंडी और गर्मी दोनों से attack ho जाते हैं।
Shreya हँसकर उसका हाथ झटक देती है।
Shreya बोली -
आप दोनों के बिना भी मैं पी सकती हूँ!
Karan (धीमे से, प्यार से) बोला -
पर हमारे बिना तुम बीमार पड़ जाती हो…
ये साबित हो गया ।
Shreya धीरे से नीचे देखती है।
Karan का ये नरम लहजा हमेशा उसे दिल से छू जाता है।
Kabir Karan को आँख मारता है—
Kabir ( फुसफुसाकर) बोला -
भैया… आप romantic mood में लग रहे हो!
Karan Kabir का कान खींच देता है।
Shreya हँसते-हँसते दोहरी हो जाती है।
Shreya अचानक चुप हो जाती है।
हवा उसके बाल उड़ाती है, और दोनों भाई उसे देख रहे हैं।
Shreya (धीमे से) बोली -
कल रात… जब मेरी तबियत खराब थी…।
आप दोनों ने मुझे…जिस तरह संभाला...
मैं… मैं कभी नहीं भूलूंगी।
Karan उसका हाथ पकड़ता है।
Karan बोला -
हम लोग सिर्फ पति नहीं… तुम्हारे दोस्त भी हैं। तुम्हारी हर तकलीफ का सामना करने के लिए हम दोनों खड़े हैं।
Kabir भी Shreya की पीठ पर हाथ रखता है।
Kabir बोला -
अगर तुम बीमार हुई ना… तो मैं नहीं… भैया रो पड़ेंगे!
Karan बोला -
तू चुप भी करेगा?
Shreya मुस्कुराती है…
फिर धीरे से दोनों को देखती है… और उनके कंधों पर अपना सिर टिकाकर बैठ जाती है।
Karan एक तरफ से संभालता है।
Kabir दूसरी तरफ से।
Shreya अब सच में उन दोनों के बिना अधूरी थी।
वो दोनों उसके दुनिया थे…
और Shreya अब बहुत आराम और भरोसे से उनके करीब महसूस करने लगी थी।
उनके बीच दूरी नहीं… सिर्फ रिश्ते गहराने लगे थे।
शाम का समय, होटल में वापस लौटने के बाद)
Shreya पूरे दिन थोड़ी नर्वस थी।
उसे खुद समझ नहीं आता था कि उसकी body इतनी sensitive क्यों है…।
कभी कुछ हो जाता है, कभी कुछ।
वो खुद भी घबरा जाती थी, पर कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाती थी।
कमरे में
Kabir बेड पर लेटा मोबाइल स्क्रोल कर रहा था।
Karan लैपटॉप पर कुछ coding देख रहा था।
Shreya खिड़की के पास बैठी बाहर देख रही थी—
हवा तेज थी… बादल घिर रहे थे।
अचानक—
Shreya बोली -
उह्ह… मेरा सिर…!
उसने अपना माथा पकड़ लिया।
चेहरा सफेद पड़ गया।
Karan और Kabir दोनों एक साथ उठे।
Kabir (घबरा कर) बोला -
Shreya!? क्या हुआ?
Shreya की आँखों के आगे सब गोल-गोल घूमने लगा।
वो खड़ी होने में भी लड़खड़ाने लगी।
Kabir भागकर उसे पकड़ लेता है।
Karan (आवाज़ काँपते हुए) बोला -
Shreya…आँखें खोलो… बोलो क्या हो रहा है!
Shreya की साँस तेज़ हो गई।
सिर पकड़कर वो नीचे बैठने लगी।
Shreya (कराहते हुए) बोली -
Kabir ji… Karan ji… सिर… फट रहा है…
ऐसा दर्द… पहले कभी… नहीं…
Kabir के हाथ काँप गए।
Karan का दिल जोर से धड़कने लगा।
Kabir उसे पकड़कर बेड पर लेटाता है।
Kabir का चेहरा डर से सफेद पड़ गया था।
Kabir बोला -
भैया… ये normal headache नहीं है… देखो इसकी body कैसे कांप रही है…!
सच में—
Shreya के हाथ-पैर काँप रहे थे।
उसकी आँखें लाल हो रही थीं।
लग रहा था जैसे अंदर कोई तूफ़ान उठ गया हो।
Karan तुरंत उसके माथे पर हाथ रखता है।
Karan (घबराकर) बोला -
Shreya…मेरी तरफ देखो… shhhh…
सांस धीरे लो… मैं हूं ना...।
पर Shreya दर्द से तड़प रही थी।
अचानक—
Kabir (आँखें चौड़ी करते हुए) बोला -
भैया… ये कैसा दर्द हो रहा है इसको?
इसकी body तो बिल्कुल… बिल्कुल react ही नहीं कर रही है!
Shreya की आवाज़ फटती हुई निकलती है—
Shreya बोली -
I.... don't know....
मुझे ये सब… क्यों होता है…।
और वो Karan की shirt पकड़कर उससे चिपक जाती है।
Karan उसे कसकर पकड़े रहता है।
Karan (टूटती आवाज़ में) बोला -
बस… बस Shreya… हम यहीं हैं…।
तुम्हारी एक सांस भी ऊपर नीचे हुई ना…
तो हम मर जाएंगे…।
Kabir पास बैठकर Shreya का सिर अपने सीने से टिकाता है।
Kabir (आँखों में नमी लेकर) बोला -
Shreya… please कुछ मत बोलो…
मैं बर्दास्त नहीं कर पाऊंगा…।
10 मिनट बाद
दवा देने और शीतल पट्टी रखने के बाद,
Shreya का शरीर हल्का ढीला पड़ने लगता है।
सांसें धीमी होने लगती हैं।
दर्द थोड़ा कम होता है।
पर पूरी तरह नहीं।
Karan और Kabir अभी भी उसे थामे हुए हैं।
Shreya (धीमी, थकी आवाज़ में) बोली -
मुझे… नहीं पता....
मेरे साथ ऐसा क्यों होता है…
मैने…कभी किसी को नहीं बताया…।
पर जब से जॉब लगी है… मेरी body… ऐसे react करती है… ।
Karan और Kabir एक-दूसरे को देखते हैं।
पहली बार उनके मन में डर उतरता है—
कहीं Shreya के साथ कोई बड़ा राज़ तो नहीं?
कहीं उसके शरीर में कुछ ऐसा तो नहीं… जो किसी ने बताया ही नहीं?
Kabir धीरे से उसका माथा चूमता है।
Kabir बोला -
Shreya… अब तुम कुछ नहीं छुपाओगी।
तुम्हारी हर problem…हमारी problem है।
Karan उसका हाथ थाम लेता है।
Karan बोला -
हां… जो भी है… हम सब मिलकर संभालेंगे।
Shreya की आँखों से आँसू बहने लगते हैं—
Shreya बोली -
मैं… अकेली नहीं हूं ना?
दोनों भाई एक साथ बोलते हैं—
Karan & Kabir बोले -
कभी नहीं!
उस रात शारीरिक दर्द से ज्यादा…
तीनों के दिलों के बीच एक नया रिश्ता बन गया—
एक गहरा भरोसा, एक असली अपनापन।
अब कहानी कुछ बड़ा मोड़ लेने वाली थी…।