Tere Mere Darmiyaan - 68 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 68

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तेरे मेरे दरमियान - 68

कृतिका कहती है --

कृतिका :- हां कम क्या , प्यार है नही आदित्य को दिल मे तुम्हारे लिए । तुमने जो इसके साथ किया है इसके बाद तुम्हें जरा सा भी शर्म नही आई , एक बार इसे दुख दे चुके हो अब क्या करने आई हो यहां पर ।

मोनिका :- नहीं कृतिका तुम गलत सोच रही हो ।

कृतिका :- मैं सब सही समझ रही हूँ , जब विक्की के साथ थी तब तो बड़ी ओकात - ओकात करती थी , अब आज क्या हो गया , विक्की ने तुम्हें औकात दिखा दिया क्या ?

आदित्य कृतिका तो रोकते हूए कहता है --

आदित्य : - कृतिका , क्या बोल रही हो तुम , इसे गलती का एहसास हो गया है ।

कृतिका :- तु चुप रह , मुझे सब पता है , इसे कोई गलती का एहसास नही है , ये वो गिरगिट है जो समय के साथ रंग बदल लेती है । मुझे तो दाल मे ही कुछ काला लग रहा है , ये मोनिका जरुर कुछ प्लान कर रही है और मैं इसे इसकी प्लानिंग पर कामयाब होने नही दूगीं ।

कृतिका के इतना कहने पर मोनिका मन ही मन कहती है --

मोनिका :- ये कृतिका कुछ ज्यादा ही दिमाग लगा रही है अब क्या होगा , अगर आदित्य कृतिका की बातो मे आ गया तो मेरा और मेरे बच्चे का क्या होगा । नही , मैं इसे ऐसा करने नही दूगीं ।

तभी मोनिका अपनी रोनी सुरत बनाती है और कहती है --

मोनिका :- तुम ठिक बोल रही हो कृतिका , मैने जो तुम लोगो को साथ किया , अगर तुम्हारे जगह पर मैं होती तो मैं भी शायद यही करती , पर कृतिका मेरा भरोसा करो , मैं सच मे अब बदल गई हूँ , और अब मुझे ये Realise हूआ के आदित्य का प्यार ही मेरे लिए सच्चा है इसिलिए तो मैं उस विक्की के पास दोबारा नही गई , और आदित्य के पास आकर अपने प्यार को दोबारा मांग रही हूँ ।

मोनिका की बात को सुनकर कृतिका सोच मे पड़ जाती है , कृतिका को सोचते हूए दैखकर जानवी कहती है ---

जानवी :- ये कृतिका को अचानक क्या हो गया , ये चुप क्यों गई , कही ये मोनिका के बातो मे तो नही आ गई ।

जानवी परेशान हो जाती है , इधर मोनिका फिर कहती है --

मोनिका :- दैखो मोनिका , मैं माफी के लायक तो नही पर सिर्फ ओक बार , एक बार मुझे माफ कर दो , मैं वादा करती हूँ दोबारा सिकायत का मोका नही दूगीं । 

कृतिका :- कैसे मोनिका , कैसे हम तुम पर भरोसा कर ले , तुमने जो आदित्य के किया है जिस तरह से गंदी - गंदी बात बोली हो , हम तुमपर कैसे भरोसा करे ।

मोनिका :- ठिक है कृतिका , अब जब तक मैं तुम लोगो को भप़रोसा ना दिला दूं , तब तक मैं आदित्य से अपने लिए प्यार नही मागूगीं । मैं पहले की तरह ही तुम लोगो के लिए बनकर दिखाउगी , आदित्य का ध्यान रखूगीं , इसे अब कभी अकेला नही छोड़ूंगी, हर पल इसके साथ रहूगीं । और अगर फिर भी तुम्हें मेरे पर भरोसा नही होगा तो मैं खुद यहां से चली जाउगीं और दोबारा फिर कभी लौट कर नही आउगीं ।

इतना बोलकर मोनिका वहां से चली जाता है । 

“मोनिका फिर से आदित्य की ज़िंदगी के दरवाज़े पर आई, पर इस बार आदित्य के दिल पर ताला था… मगर उसकी मोहब्बत भरी बातों ने धीरे-धीरे उस ताले की जंग छुड़ानी शुरू कर दी।”

“जानवी ने मोनिका को आदित्य के करीब देखा तो उसके दिल में जैसे कुछ कस कर टूट गया… उसने सोचा—

जानवी :- ‘मेरा और आदित्य का रिश्ता तो मैने खत्म किया था, पर ये कैसा एहसास हैं… क्या मैं सच में उसे खोने से डर रही हूँ?


“जानवी ने नज़रें मोड़ी, पर दिल न मोड़ पा रही थी… मन में बस एक ही सवाल गूंजा—

जानवी :- ‘डिवोर्स तो कागज़ों पर हो चुका है , तो क्या मेरे अंदर का रिश्ता अब भी ज़िंदा है? ये क्या हो रहा है मुझे , मुझे ऐसा क्यों लग रहा है जैसे मैं आदित्य को खो रही हूँ । आज से पहले कभी ऐसा नही हूआ तो फिर आज मोनिका को आदित्य के करिब मैं क्यों नही दैख पा रही हूँ ।


“मोनिका को आदित्य के इतना पास देखकर जानवी के दिल में एक सिहरन उठी… उसने सोचा—

> ‘जिसे छोड़ दिया था, शायद वही आज सबसे ज़्यादा अपना लगता है।’”
जानवी खुद से लड़ती रही—

> ‘हक तो मेरा नहीं रहा… फिर ये दर्द क्यों इतना अपना लगता है?’”

“जानवी ने पहली बार महसूस किया— आदित्य से कोई भी रिश्ता ना रखने का दावा करना आसान था… पर उसे किसी और के साथ देखना नहीं।”


मोनिका जाते - जाते कृतिका पर गुस्सा होती है और गुस्से से कहती है ---

मोनिका :- ये तुने क्या किया मोनिका , अब तु उन सबके गिल मे कैसे जगह बनाएगी , तेरे पास समय बिल्कुल भी नही है और फिर ये प्रेगनेंसी को तु कब तक छुपाएगी । उस कृतिका की वजह से मैने आज खुद अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली । अब क्या करु ।


दुसरा दिन बारिश हो रही थी , जानवी अपने कमरे मे उदास मन से बैठी थी और कल के बारे मे ही सौच रही थी , तभी जानवी के फोन पर उसके पापा अशोक का कॉल आता है , जानवी कॉल रिसिव करके भारी मन से कहती है --

जानवी :- हेलो ।

उधर से अशोक की आवाज आता है --

अशोक :- बेटा जानवी , कैसी हो बेटा ?

जानवी :- ठिक हूँ पापा , आप कैसे हो ?

जानवी के उदासी भरी आवाज को सुनकर अशोक समझ जाता है के जानवी का मन उदास है अशोक जानवी से पूछता है --

अशोक :- क्या बात है बेटा , तु ठीक तो है ? तेरी आवाज ...

जानवी :- मैं ठिक हूँ पापा , आप बताओ क्या कर रहे हो ?


अशोक खुश होकर कहता है --

अशोक :- बेटा हमने नया प्रोजेक्ट का काम सुरु कर दिया है , शादी के बाद तो तु ऑफिस आई ही नही , बेटा तेरा सिग्नेचर चाहिए कुछ डाक्यूमेंट्स पर , इसिलिए तुझे कॉल किया था , पर कोई बात नही मैं खुद तेरे पास आ जाता हूँ ।


तभी जानवी झट से कहती है --

जानवी :- नही पापा , मैं आ जाउगीं , वैसे भी यहां पर कुछ अच्छा नही लग रहा है ।

जानवी के आंखो से आंशु अपने आप आ गया था , जिसे जानवी हाथ से पोछती है और अपने आंशु को हैरानी से दैखती है । तभी उधर से अशोक की आवाज आती है --

अशोक :- बेटा तुम ठिक हो ना ?

जानवी :- हां पापा , सब ठिक है , मैं आती हूँ कुछ दैर मे ।

इतना बोलकर जानवी फोन काट देती है और अपने जगह से उठकर ऑफिस के लिए तैयार होने लगती है , जानवी तैयार होकर ऑफिस के लिए जाने लगती है , आदित्य वही पर बैठा जानवी को दैख रहा था , पर आदित्य और जानवी का रिश्ता ही ऐसा था के आदित्य चाह कर भी जानवी से पूछ नही सकता था ।

जानवी कुछ दूर जाती ही है के बारिश होने के कारण उसका पैर फिसल जाता है और जानवी वही पर गिर जाती है , जिससे जानवी के पैर के टखने मे चोट लग जाती है , ये दैखकर आदित्य भागकर जाता है और जानवी के पास जाकर बैठ जाता है । आदित्य अपना हाथ जानवी की और बड़ाता है पर जानवी आदित्य का हाथ नही पकड़ती है और खुद उठने की कोशिश करती है पर उठ नही पाती और दर्द से कराहते हूए वही पर बैठ जाती है ।

जानवी :- ( दर्द ये कराहती है ) आह्ह ....!

आदित्य जानवी से कहता है --

संंभल कर चलना चाहिए , बारिश का समय है फिसलन तो रहेगा ना , इतना बोलतर आदित्य जानवी को अपने गोद मे उठा लेता है , जिसे दैखकर रश्मी , कृतिका , रमेश सभी हैरान और सबके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी । 

तभी वहां पर मोनिका भी आ जाती है , मोनिका दैखती है के आदित्य ने जानवी को अपने गौद मे उठाकर रखा है , जिसे दैखकर मोनिका को जलन होने लगती है , जानवी आदित्य की और दैखे जा रही थी ।

“जानवी की नज़रें आदित्य पर ठहर गईं… जैसे वक्त रुक गया हो। वो उसे बस एक टक देखती रही—बिना पलक झपकाए, बिना कुछ कहे… मानो उसकी आँखें ही वो सब बोल रही हों, जो उसका दिल कब से छुपाए बैठा था।”

आदित्य चुप चाप जानवी को उठाकर अंदर ले आया , मेनिका ये सब बर्दाश्त नही कर पा रही थी , मोनिका को दैखकर कृतिका को बहोत बुरा लग रहा था , कृतिका धिमे आवाज से कहती है --

कृतिका :- आ गई मनहूस, हर अच्छे वक्त मे ये आ जाती है ।

आदित्य भी जानवी की और बस दैखे जा रहा था , तभी जानवी की नजर अपने आस पास के लोगो पर , जहां पर कृतिका और बाकी सभी थे तो जानवी दैखती है के सभी उन दोनो को ही दैख रहा है तब जानवी निचे उतरने की कोशिश करती है तब आदित्य को भी Realise होता है के उसने जानवी को बबोत दैर से गौद मे उठाकर रखा है ।

इधर मोनिका के मन मे टीस उठी और मोनिका मन ही मन कहती है --

मोनिका :- ये जानवी को क्या हो गया , ये आदित्य के गौद मे क्या कर रही है ।

आदित्य जानवी को उतार देता है , निचे उतरते ही जानवी को उसको टखने मे दर्द का एहसास होता है और लड़खड़ाने लगती है तो आदित्य फिर से जानवी को पकड़ लोता है इस बार आदित्य का एक हाथ जानवी के कमर पर था और एक हाथ जानवी के हाथ मे । 

दोनो फिर एक दुसरे को दैखता रहता है , सभी का मन बहोत खुश था सिवाय मोनिका के तभी वहां पर मोनिका आदित्य के पास आती है और कहती है --

मोनिका :- आदित्य क्या हूआ ? तुम जानवी को कैद मे क्यों उठा रखा था ।

मोनिका की बात को सुनकर आदित्य जानवी के कमर से हाथ हटा देता है , जिसे दैखकर कृतिका गुस्से से करती है --

कृतिका :- ये मोनिका को कुछ काम नही है क्या , कितना अच्छा दोनो एक साथ थे , इसे वो भी दैखा नही गया और आ गई आदित्य के खुशी मे दखल देने । मन तो करता है के इसका गला ही दबा दूं ।
जानवी आदित्य से अलग होकर खुद चलने की कोशिश करती है पर चल नही पाती , और दर्द से कराहती है ---

जानवी :- आह्ह ...!

जानवी के दर्द को दैखकर आदित्य मोनिका की तरफ दैखता भी नही और जानवी के पास जाकर कहता है ---

आदित्य :- क्या कर रही हो जानवी , पैर मे दर्द है और तुम कहां जा रही हो ?

जानवी कहती है --

जानवी :- मुझे कुछ काम है , जाना जरुरी है ।

आदित्य :- दैखो तुम्हें अभी डॉक्टर की जरुरत है , इसिलिए पहले डॉक्टर के पास चलते है फिर काम कर लेना ।

जानवी मोनिका के दैखकर गुस्सा हो जाती है और बिना कुछ कहे ही आगे बड़ने लगती है । पर दर्द होने के कारण वो लड़खड़ाकर चलने लगती है , आदित्य जानवी को संभालने जाता है पर जानवी उसे रोक देती है और लंगड़ाती हूई धिरे धिरे आगे बड़ती है ।

ये दैखकर कृतिका मोनिका से पास जाती है और धिरे से मोनिका से कहती है --

कृतिका :- तुम्हें जरा सा शर्म नही आती है , कितना अच्छा दोनो एक साथ था , इन्हें डिसटर्ब करना जरुरी था क्या ।

मोनिका :- O I am so sorry , मुझे नही पता था , इन दोनो का तो Divorce हो चुका है ना और दोनो एक दुसरे से बात नही करते इसिलिए मैं ...

“मोनिका की बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि कृतिका ने बीच में ही काटते हुए कहा—”

कृतिका :- बस ! अब मेरी बात सुनो -- आदित्य के लाइफ मे अब तुम्हारे लिए कोई जगह नही है , उसे अब सांती से रहने दो और फिर कभी भी आ आदित्य की और मत दैखना ।

To be continue....538