Vulture - 5 in Hindi Magazine by Ravi Bhanushali books and stories PDF | Vulture - 5

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Vulture - 5

शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ान
भाग 5: “पंखों का रहस्य”
[दृश्य 1 – परित्यक्त मंदिर, अर्धरात्रि]
टूटा हुआ प्राचीन मंदिर। छत से चाँदनी छनकर गिर रही है। घायल वल्चर स्तंभ के सहारे खड़ा है। उसके पंखों से रक्त टपक रहा है। शहर में उसे खलनायक घोषित किया जा चुका है।
वल्चर (स्वगत):
“रक्षक से राक्षस बनने में एक झूठ ही काफ़ी होता है…
पर सच अब भी साँस ले रहा है।”
अचानक हवा में सुनहरी रोशनी फूटती है।
[दृश्य 2 – नए नायक का आगमन]
रोशनी से एक तेजस्वी योद्धा प्रकट होता है—आर्यव्रत। उसके कंधों पर उजले पंख, आँखों में शांत ज्वाला। उसके चारों ओर आभा है।
आर्यव्रत:
“तूने मेरी विरासत ढोई है, रक्तपंख…
अब समय है कि सच उजागर हो।”
वल्चर चौंकता है।
वल्चर:
“तुम कौन हो… और मेरी शक्ति की बात कैसे जानते हो?”
[दृश्य 3 – रहस्योद्घाटन]
मंदिर की दीवारों पर प्रकाश से दृश्य उभरते हैं—प्राचीन काल में गिद्ध-देव के योद्धा, रक्त से शक्ति पाने की परंपरा।
आर्यव्रत:
“तेरी शक्ति संयोग नहीं थी।
वह गिद्ध-देव की विरासत है।
तू चुना गया इसलिए क्योंकि तू टूटकर भी उठा।”
वल्चर:
“तो क्या मैं किसी प्रयोग का परिणाम हूँ?”
आर्यव्रत (शांत स्वर में):
“नहीं। तू परीक्षा का उत्तर है।”
[दृश्य 4 – मायावी का आक्रमण]
मंदिर की छत टूटती है। मायावी धुएँ और दर्पणों के साथ उतरता है।
मायावी:
“अरे वाह… देवताओं की कहानियाँ फिर ज़िंदा हो रही हैं।
आज दोनों मिथक मिटेंगे।”
[दृश्य 5 – त्रिकोणीय महायुद्ध]
आर्यव्रत तलवार-सी प्रकाश धार बनाकर मायावी पर वार करता है। मायावी भ्रम रचकर वार टाल देता है। वल्चर आकाश से गोता लगाकर प्रहार करता है। तीनों की टक्कर से मंदिर काँप उठता है। पत्थर गिरते हैं। प्रकाश और छाया का टकराव आकाश फाड़ देता है।
मायावी (हँसते हुए):
“दो नायक… पर जनता की नज़र में खलनायक एक ही है!”
वल्चर:
“आज जनता नहीं… सच बोलेगा!”
[दृश्य 6 – सत्य का प्रकाश]
आर्यव्रत अपने पंख फैलाता है। प्रकाश पूरे मंदिर से शहर तक फैलता है। मायावी के भ्रम टूटने लगते हैं। शहर की विशाल स्क्रीन पर असली दृश्य उभरते हैं—मायावी की करतूतें, झूठे प्रक्षेपण, ड्रोन हमले।
लोग (हैरानी में):
“वल्चर निर्दोष है!”
“यह सब मायावी का छल था!”
मीरा भीड़ में स्क्रीन देखती है। उसकी आँखों में पश्चाताप उतर आता है।
मीरा:
“मैंने तुम्हें गलत समझा…”
[दृश्य 7 – अंतिम द्वंद्व]
मायावी क्रोधित होकर ठोस रूप लेता है। उसकी धारें वल्चर के पंखों पर गिरती हैं। आर्यव्रत प्रकाश-ढाल बनाकर प्रहार रोकता है।
आर्यव्रत:
“अंधकार को हराने के लिए एक ही प्रकाश काफ़ी है।”
वल्चर पूरी शक्ति समेटकर ऊपर उड़ता है। वह बिजली की गति से नीचे उतरकर मायावी के केंद्र पर प्रहार करता है। आर्यव्रत साथ-साथ प्रकाश-प्रहार करता है। छाया और भ्रम फटकर बिखर जाते हैं।
मायावी (चीखते हुए):
“सच… सबसे बड़ा शत्रु है!”
वह धुएँ में विलीन होकर गिर पड़ता है। उसकी शक्ति समाप्त हो जाती है।
[दृश्य 8 – पतन और स्वीकार]
मायावी बेहोश पड़ा है। शहर में शांति लौटती है। लोग ऊपर देखते हैं। पुलिस पीछे हट जाती है।
लोगों की आवाज़:
“वल्चर ज़िंदाबाद!”
वल्चर थका हुआ नीचे उतरता है।
वल्चर:
“मैं नायक नहीं…
बस सच का वाहक हूँ।”
[दृश्य 9 – पहचान का रहस्य]
मीरा पास आती है।
मीरा:
“तुम्हारी उड़ान में वही अपनापन है…
जो अर्जुन में था।”
वल्चर कुछ क्षण मौन रहता है।
वल्चर (धीमे स्वर में):
“कुछ रहस्य उड़ान के साथ ही सुरक्षित रहते हैं।”
मीरा की आँखों में आँसू और मुस्कान एक साथ हैं।
[दृश्य 10 – नई सुबह]
आर्यव्रत आकाश की ओर बढ़ता है।
आर्यव्रत:
“विरासत अब तेरे हाथों में है।”
वल्चर पंख फैलाकर शहर के ऊपर उड़ान भरता है। सुबह की पहली किरणें उसके पंखों पर पड़ती हैं।