Tere Mere Darmiyaan - 65 in Hindi Love Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | तेरे मेरे दरमियान - 65

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तेरे मेरे दरमियान - 65

इधर जानवी पुलिस स्टेशन पहूँच जाती है और अंदर चली जाती है जहां पर इंस्पेक्टर विक्रम जानवी को दैखकर कहता है --

इंस्पेक्टर :- आईए मेम । ( अपने सिपाही से कहता है ) कदम उन लोगो को मेम के पास लेकर आओ ।

कदम :- जी सर । 

कदम उन लोगो को लाने चला जाता है , विक्रम जानवी से कहता है --

विक्रम :- कल फिर इन लोगो ने एक लड़की से छेड़छाड़ किया , तो मुझे लगा के शायद ये वही लोग होगें जिन्होने आपके साथ भी बदतमीजी किया था ।

जानवी :- पता चला ये लोग किसके लिए काम करता है ।

विक्रम :- जी मेम , ये सब काली के आदमी है , बहोत पिटने के बाद अपना मुह खोला इन सबने ।

तभी कदम वहां उन पांचो सबको लेकर आ जाता है , जानवी उन सबको दैखकर पहचान जाती है और कहती है --

जानवी :- हां ऑफिसर ये सब वही है , इन सबने मिलकर ही मेरे साथ जबरदस्ती करने की कोशिश किया था । 

इतना बोलकर जानवी बारी - बारी से उन सबका कॉलर पकड़ती है और सबको थप्पड़ मारती है , तब विक्रम जाके जानवी को रोकता है और कहता है --

विक्रम :- शांत हो जाईए मेम , संभालिए अपने आपको , अब इन सबको मुझसे कोई बचा नही सकता ।

जानवी गुस्से से कहती है --

जानवी :- छोड़ दिजिये मुझे ऑफिसर, मैं इन सबको जान से मीर दूगीं ।

विक्रम :- शांत रहिए मेम । बैठिए आप यहां पर , कदम इन सबको लेकर जाओ । 

विक्रम जानवी को पानी देता है और कहता है --

विक्रम :- ये लिजिए पानी पी लिजिए ।

जानवी पानी पीने लगती है ।

विक्रम :- अब आप बिल्कुल भी चितां मत किजिए, इन सबको मैं कड़ी से कड़ी सजा दिलवाऊंगा ।

जानवी :- क्या ये सब सच मे काली का आदमी है ।

विक्रम :- हां , मेम , पर आप ऐसा क्यों बोल रही हो ?

जानवी :- क्योंकी मुझे लगा था के ये आदित्य का काम है ।

विक्रम :- नही मेम , उन्होने तो आपकी हर बार गुडें से आपकी जान बचाई है तो फिर आप उनके बारे मे ऐसा कैसे सौच सकती हो ।

विक्रम जानवी को उन सबकी कॉल डिटेल दिखाता है और कहता है --

विक्रम :- ये दैखिए मेम , मैने इन सबका कॉल डिटेल निकाला है , जिसने इनलोगो ने कल तक काली से कई बार बात किया है और ये दैखिए इसमे विकास का भी नम्बर है , इससे ये साफ होता है के विकास का भी इसमे हाथ है । 

जानवी वो सब दैखकर हैरान हो जाती है , विक्रम फिर कहता है -- 

विक्रम :- आदित्य सर तो निर्दोष है , आप उन पर गलत शक कर रही हो मेम । 

जानवी :- मुझे कुछ समझ मे नही आ रहा है के ये सब हो क्या रहा है मोरे साथ ।

विक्रम :- आप बस मुझे थोड़ा सा समय दे दिजिये , मैं आपके सामने सारी सच्चाई ला कर रख दूगां । पर अभी इतना जरुर कहूंगा के आदित्य सर का इन सबसे कोई लेना देना नही है ।

जानवी विक्रम की बात को सुनकर वहां से निकल जाती है और अपनी कार पर बैठकर सौचने लगती है --

जानवी :- ये मेरे साथ क्या हो रहा है , मुझे कुछ समझ मे नही आ रहा है के कौन सही है और कौन गलत , और फिर आज जो मैने दैखा , मोनिका और आदित्य को वो सब क्या था । क्या ये ऑफिसर सच बोल रहा है , क्या आदित्य सच मे मुझसे प्यार करता है ?

जानवी वहां से कार लेकर घर की और निकल जाती है और घर मे अपने गार्डन मे बैठकर रश्मी की बातो को याद करती है ।

जानवी रश्मी की कही बातो को याद कर रही थी , जानवी मन ही मन कहती है --

जानवी :- ये क्या हो गया है मुझे , मैं सही गलत का फैसला भी नही कर पा रही हूँ , रश्मी का कहना भी तो सही है , आदित्य बुरा नही है, उसने तो हर वक्त मेरी मदद की है , शायद मैने विकास के प्यार के कारण आदित्य को बहोत बुरा भला कह दिया और उसे मेरे कारण बहोत कुछ झेलना पड़ा । पता नही आदित्य मेरे बारे क्या सौचता होगा , रश्मी सही कहती है , अगर विकास को मेरी फिक्र होती तो वो मुझे मुसीबत मे छोड़कर कभी नही जाता । आदित्य ने तो मेरे लिए तेजाब को अपने उपर ले लिया था , ऐसा कोई भी किसी के लिए नही करेगा ।

जानवी को मन मे अब फिर से आदित्य के लिए जगह बनना सुरु हो रहा था पर आज जो जानवी ने दैखा , उस के लिए जानवी परेशान थी ।

जानवी :- मुझे ये पता करना होगा के आदित्य ने मेरे लिए इतना कुछ क्यों किया, क्या इसने ये सब पैसो के लिए किया, इंसानियत के लिए या फिर मुझसे प्यार करता है , या फिर जो मैने आज दैखा , क्या आदित्य मोनिका से अब भी प्यार करता है । 

तभी जानवी के फोन पर विकास का कॉल आता है , जानवी विकास का नाम दैखते ही गुस्से से फोन को दैखती है फिर रिसिव करके कहती है --

जानवी :- क्या है बोलो ।

विकास जानवी के इस तरह कहने से कहने से समझ जाती है के जानवी उससे बहोत नाराज है । विकास बड़े ही चतुराई से कहता है --

विकास :- क्या कर रही हो जानवी ।

जानवी :- तुमसे क्या मतलब ।

विकास :- ऐसे क्यों बोल रही हो जानवी ।

जानवी :- तो कैसे बोलु , आज किस लिए फोन किया तुमने , ये जानने के लिए के मैं जिंदा हूँ या नही या उस रात को मेरे साथ उन लड़को ने कुछ किया के नही । तुम कैसा मर्द हो विकास दो - दो बार तुमने मुझे अकेला छोड़कर भाग गए । मैं मर रही हूँ या क्य हूआ मेरे साथ , तुमने एक बार भी ये जानने की कोशिश नही की ।

विकास :- नही जानवी ऐसा नही है ।

जानवी : - दैखो विकास , मुझे तुमसे को ई बात नही करनी , प्लिज आजके बाद तुम मुझे कॉल मत करना ।

विकास :- जानवी मेरी बात तो सुनो ।

जानवी: - मुझे कुछ नही सुनना , बाय ।

इतना बोलकर जानवी फोन काटने वाली होती है के तभी विकास कहता है --

विकास :- मैं बहोत परेशान हूँ जानवी , मुझे काली मारने की धमकी दे रहा है ।

काली का नाम सुनकर जानवी रुक जाती है और फिर कहती है --

जानवी :- क्या काली ।

विकास :- हां जानवी, काली मुझे मारने की धमकी दे रहा है ।

जानवी :- पर वो तुम्हें क्यों मारने की धमकी दे रहा है ।

विकास :- मैं सब कुछ तुम्हें बताउगां , पहसे ये बताओ के तुम हो कहां , मुझे तुमसे मिलकर सब बताना है ।

जानवी :- ठिक है , तुम न्यु मार्केट आओ , मैं अभी आती हूँ ।

इधर आदित्य , कृतिका , रश्मी और रमेश सभी मॉल के ऑफिस पर बैठा था , आदित्य अब भी मोनिका के बारे मे सौच रहा था , सभी आदित्य को परेशान दैखकर एक दुसरे की और दैख रहा था तभी आदित्य को परेशान दैखकर रश्मी आदित्य से पूछती है --

रश्मी :- आदित्य , क्या बात है , तुम बहोत परेशान लग रहे हो ।

कृतिका :- हां आदित्य , जब से आए हो ऐसे ही गुमसुम बैठै हो , जानवी ने फिर कुछ कहा क्या ।

आदित्य कहता है --

आदित्य: - नही यार , जानवी ने कुछ नही कहा और उसके बातो का मुझपर कोई असर भी नही होता है ।

रमेश :- तो फिर क्या बात है ?

आदित्य : - वो आज सुबह मोनिका मिली थी ।

कृतिका :- तो क्या , उसने कुछ कहा क्या तुमसे , उसकी तो मैं ....।

आदित्य कृतिका की बात को रोकते हूए कहता है --

आदित्य :- नही रुको कृतिका , मोनिका ने ऐसा कुछ भी नही कहा ।

रमेश चिड़ते हूए कहता है --

रमेश :- अरे यार पहेली मत बूझा , जो बात है साफ - साफ बोल ।

रमेश के इतना कहने पर आदित्य उम सभी को सुबह की बात बोलकर सुनाता है , आदित्य की बात को सुनकर कृतिका कहती है --

कृतिका :- ये हूई ना बात , जैसे को तैसा , उसके साथ जो हूआ ना वो ठिक ही हूआ , उसके जैसी लड़की के साथ ऐसा ही होना चाहिए । बहोत औकात - औकात कर रही थी , अब विक्की ने दिखा दिया उसो उसकी औकात ।

रश्मी: - बिल्कुल सही हूआ है उसके साथ । ये उसके कर्मो का फल है ।

रमेश आदित्य के कंधो पर हाथ रखता है और कहता है --

आदित्य :- ये तो अच्छी बात है ना आदित्य , फिर तुम क्यों मुह लटकाए हो , चलो इसी खुशी आज शाम को पार्टी करते है ।

आदित्य : - तुम लोग समझ नही रहे हो मेरी बात को ।

कृतिका गुस्से से कहती है --

कृतिका :- क्या नही समझ रही हूँ , उसके साथ ना यही होना चाहिए था , और तुम्हें क्यों दर्द हो रहा है , तुम कही फिर से उसके साथ ...

आदित्य: - वही वो बात नही है , प्यार मैं धोका मिलने पर कैसा लगता है मुझे पता है यार । वे तो सॉरी भी बोल रही थी , उसे अब समझ मे आ गया है के उसने गलती की थी ।

कृतिका ( गुस्से से ) :- सॉरी बोली तो क्या , हां , क्या ऐसा महान काम कर दिया उसने , ये सॉरी वॉरी , सिर्फ एक बहाना है , बहोत चालाक लड़की है वो , फसा रही है तुम्हें , अब जब विक्की ने छोड़ दिया तो फिर तुम्हारे पास आ गई और उसके बाद फिर कोई पैसा वाला मिलेगा तो मोनिका उसके साथ फिर चली जाएगी । मैं सब समझ रही हूँ ।

आदित्य :- पता नही यार शायद ऐसा हो , पर ...

कृतिका फिर कहती है --

कृतिका :- पर वर कुछ नही , वो अगर कॉल करेगी तो तुम जवाब नही दोगे और ना ही उससे मिलोगे , जिस लड़की ने इतना जलिल किया , तुम्हारे साथ इतना कुछ बुरा किया , हमे उसके साथ कोई रिस्ता नही रखना है ।

कृतिका की बात पर सभी हामी भरता है , पर आदित्य अब भी परेशान था ।

मोनिका अपने घर मे बैठकर आदित्य के पास वापस जाने का सौच रही थी , और मन ही मन प्लान बना रही थी के आदित्य के ुास कैसे जाए ।

मोनिका :- क्या करु कुछ समझ मे नही आ रहा है , विक्की ने तो मुझे कही का नही छोड़ा , अब तो बस दो ही रास्ते है , एक इस बच्चे को गिरा दूं या आदित्य से माफी मांगकर उससे शादी कर लूं । 

मोनिका कुछ दैर सौचती है फिर कहती है --

मोनिका :- पर .. क्या आदित्य फिर से मुझे अपना़येगा , मोनिका जो करना है जल्दी कर तेरे पास टाईम बहोत कम है । आदित्य के दिल मे मेरे लिए अब भी जगह है या नही ये पता करने के लिए मुझे उससे मिलना पड़ेगा ।


To be continue.....504