love witch in Hindi Horror Stories by Vijay Erry books and stories PDF | चुड़ैल से प्यार

Featured Books
  • Stop Letting Everything Affect You (Book Review)

    मजबूत बनवणारे प्रेरणादायी पुस्तकआजच्या आधुनिक जगात माणसाचे आ...

  • टापुओं पर पिकनिक - भाग 27

    २७. आर्यनला येथे ड्युटी देण्यात आली होती, बाकीच्यांना नंतर क...

  • The Mafia Couple - Chapter - 2

    काही महिने हळूहळू निघून गेले होते.Sanvi आता आधीसारखी राहिली...

  • जोडे

    मिलिंद गाडीतून उतरले. त्यांनी हातात एक box असलेली पिशवी घेतल...

  • पत्र सुमने..

    प्रिय सोना ट्रिप करणे तुझा अगदी आवडीचा छंद होता आपल्या दोघां...

Categories
Share

चुड़ैल से प्यार



---

चुड़ैल से प्यार
✍️ लेखक: विजय शर्मा एरी  

प्रस्तावना
प्यार एक ऐसा भाव है जो सीमाओं को नहीं मानता। यह जाति, धर्म, उम्र, यहाँ तक कि जीवन और मृत्यु की दीवारों को भी पार कर सकता है। यह कहानी एक ऐसे युवक की है जिसने प्रेम किया—पर इंसान से नहीं, बल्कि एक चुड़ैल से।  

---

पहला अध्याय: गाँव का रहस्य
पंजाब के एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का युवक रहता था। वह पढ़ा-लिखा था, पर खेती-बाड़ी में अपने पिता का हाथ बँटाता था। गाँव में एक पुरानी हवेली थी, जिसे लोग "भूतों का घर" कहते थे। कहते थे कि वहाँ रात को अजीब आवाजें आती हैं, और जिसने भी वहाँ जाने की कोशिश की, वह डर के मारे लौट आया।  

अर्जुन को बचपन से ही रहस्यमयी चीज़ों में दिलचस्पी थी। वह अक्सर सोचता—क्या सचमुच भूत-प्रेत होते हैं? या यह सब लोगों की कल्पना है?  

---

दूसरा अध्याय: पहली मुलाक़ात
एक रात, पूर्णिमा का चाँद आसमान में चमक रहा था। अर्जुन साहस करके उस हवेली में चला गया। हवेली के भीतर अंधेरा था, पर अचानक उसे लगा कि कोई उसके पीछे खड़ा है।  

वह मुड़ा—और देखा एक युवती। उसकी आँखें गहरी थीं, बाल खुले हुए, और चेहरे पर अजीब-सी उदासी।  

"तुम कौन हो?" अर्जुन ने काँपती आवाज़ में पूछा।  

युवती मुस्कुराई—"लोग मुझे चुड़ैल कहते हैं। पर मैं सिर्फ़ एक आत्मा हूँ, जो प्रेम की तलाश में भटक रही है।"  

अर्जुन का दिल धड़कने लगा। डर के बजाय उसे करुणा महसूस हुई।  

---

तीसरा अध्याय: प्रेम की शुरुआत
दिन बीतते गए। अर्जुन हर रात हवेली में जाने लगा। वह युवती का नाम जानना चाहता था। उसने बताया—"मेरा नाम रूहानी है। मैं सौ साल पहले इसी गाँव में रहती थी। पर समाज ने मुझे चुड़ैल कहकर जलाया, क्योंकि मैंने एक पराए धर्म के युवक से प्रेम किया था।"  

अर्जुन की आँखें भर आईं। उसने कहा—"रूहानी, तुम्हें चुड़ैल नहीं, प्रेम की देवी कहना चाहिए।"  

धीरे-धीरे दोनों के बीच एक अनोखा रिश्ता बनने लगा। अर्जुन उसे कविताएँ सुनाता, और रूहानी अपनी अधूरी कहानी साझा करती।  

---

चौथा अध्याय: संघर्ष
गाँववालों को अर्जुन के व्यवहार पर शक होने लगा। वे कहते—"यह लड़का हवेली में चुड़ैल से मिलता है। यह अपशकुन है।"  

अर्जुन ने विरोध किया—"वह चुड़ैल नहीं, इंसान है। बस आत्मा के रूप में है।"  

पर समाज को यह स्वीकार नहीं था। उन्होंने अर्जुन को धमकाया कि अगर वह हवेली गया तो उसे गाँव से निकाल दिया जाएगा।  

---

पाँचवाँ अध्याय: प्रेम की परीक्षा
अर्जुन ने रूहानी से कहा—"क्या तुम चाहती हो कि मैं तुम्हें मुक्त कर दूँ?"  

रूहानी ने आँसू भरी आँखों से कहा—"मुक्ति तभी मिलेगी जब कोई मुझे सच्चे दिल से अपनाए।"  

अर्जुन ने उसका हाथ थाम लिया—"मैं तुम्हें अपनाता हूँ। चाहे तुम आत्मा हो या इंसान।"  

उस क्षण हवेली में तेज़ रोशनी फैल गई। रूहानी का चेहरा चमक उठा। वह बोली—"अर्जुन, तुम्हारे प्रेम ने मुझे शांति दी। अब मैं इस दुनिया से विदा ले सकती हूँ।"  

---

छठा अध्याय: विदाई
रूहानी धीरे-धीरे धुंध में बदलने लगी। अर्जुन चिल्लाया—"नहीं! मुझे छोड़कर मत जाओ।"  

रूहानी ने मुस्कुराकर कहा—"प्यार का अर्थ बाँधना नहीं, मुक्त करना है। तुमने मुझे मुक्त कर दिया। अब मैं हमेशा तुम्हारे दिल में रहूँगी।"  

और वह गायब हो गई।  

---

सातवाँ अध्याय: प्रेम की अमरता
अर्जुन गाँव लौट आया। लोग उसे पागल कहते रहे। पर अर्जुन जानता था कि उसने सच्चा प्रेम किया है।  

वह अक्सर हवेली के पास बैठकर कविताएँ लिखता। उसकी कविताओं में रूहानी की यादें होतीं। लोग धीरे-धीरे उसकी रचनाओं को पढ़ने लगे और समझ गए कि प्रेम किसी भी सीमा को नहीं मानता।  

---

उपसंहार
यह कहानी हमें सिखाती है कि प्रेम आत्मा का बंधन है, शरीर का नहीं। अर्जुन और रूहानी का रिश्ता समाज की परिभाषाओं से परे था। चुड़ैल कहे जाने वाली आत्मा भी प्रेम की हकदार थी—और अर्जुन ने उसे वह हक दिया।  

---