नया शीर्षक
“काग़ज़ी रिश्ते सच्चा प्यार”
(एक Contract Marriage पर आधारित भावनात्मक हिन्दी कहानी)
लेखक : विजय शर्मा Erry
कहानी
शहर की ऊँची इमारतों के बीच, जहाँ रिश्ते भी अक्सर सौदों में बदल जाते हैं, वहीं रहती थी अनन्या—एक आत्मनिर्भर, समझदार और संवेदनशील लड़की। पिता की अचानक मृत्यु के बाद उस पर माँ और छोटे भाई की ज़िम्मेदारी आ पड़ी थी। दूसरी ओर था आरव मल्होत्रा, एक सफल बिज़नेसमैन, जिसने कम उम्र में ही सफलता तो पा ली थी, पर रिश्तों पर भरोसा खो दिया था।
आरव की दादी की आख़िरी इच्छा थी—
“मेरी आँखों के सामने अपने पोते की शादी देखना चाहती हूँ।”
आरव जानता था कि अगर वह शादी नहीं करेगा तो दादी सदमे में चली जाएँगी। लेकिन प्यार और शादी—इन दोनों शब्दों से उसे एलर्जी थी। वहीं अनन्या के सामने मजबूरी थी—माँ के इलाज और भाई की पढ़ाई के लिए पैसों की।
यहीं से जन्म हुआ एक अजीब प्रस्ताव का—
Contract Marriage।
एक वकील के केबिन में, ठंडे माहौल के बीच, दोनों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
शर्तें साफ़ थीं—
यह शादी सिर्फ़ एक साल के लिए होगी
कोई भावनात्मक अपेक्षा नहीं
एक-दूसरे की निजी ज़िंदगी में दख़ल नहीं
एक साल बाद तलाक़, बिना सवाल के
अनन्या ने काँपते हाथों से दस्तख़त किए।
आरव ने बिना भाव के।
शादी बड़े घर में हुई, मगर दिलों में कोई उत्सव नहीं था। दादी बेहद खुश थीं। समाज ने तालियाँ बजाईं, पर यह रिश्ता सिर्फ़ काग़ज़ों पर था।
शुरुआती दिन अजीब थे।
एक ही छत के नीचे रहते हुए भी दोनों अजनबी थे।
अनन्या सुबह चुपचाप रसोई में काम करती,
आरव देर रात लौटता।
धीरे-धीरे छोटी-छोटी बातें होने लगीं।
एक दिन अनन्या बुख़ार में काँप रही थी।
आरव ने अनजाने में उसका माथा छू लिया।
“तुमने दवा क्यों नहीं ली?”
उसकी आवाज़ में पहली बार चिंता थी।
अनन्या ने कमज़ोर मुस्कान के साथ कहा—
“Contract में ये नहीं लिखा था कि आप मेरा ख़्याल रखेंगे।”
आरव कुछ नहीं बोला…
लेकिन पूरी रात वह सो नहीं पाया।
दिन बीतते गए।
अनन्या ने घर को घर बना दिया।
आरव को पहली बार लगा कि ऑफिस से लौटने की भी एक जगह होती है।
दादी अक्सर कहतीं—
“देखो, सच्ची जोड़ियाँ भगवान बनाता है।”
आरव हँस देता,
अनन्या चुप रह जाती।
लेकिन चुप्पियों में भावनाएँ पलने लगी थीं।
एक शाम आरव ने अनन्या को रोते देखा।
भाई के कॉलेज की फीस की आख़िरी तारीख़ थी।
आरव ने बिना कुछ पूछे चेक आगे बढ़ा दिया।
“ये क्यों?”
अनन्या ने पूछा।
“Contract में लिखा है—पति ज़िम्मेदार होगा।”
आरव ने हल्की मुस्कान के साथ कहा।
उस रात अनन्या देर तक रोती रही—
पहली बार किसी ने बिना एहसान जताए मदद की थी।
समस्या तब आई जब एक साल पूरा होने वाला था।
वकील की फ़ाइल फिर से टेबल पर थी।
आरव शांत था,
अनन्या की आँखें झुकी हुई थीं।
“तलाक़ के पेपर तैयार हैं,”
वकील ने कहा।
आरव ने कलम उठाई…
लेकिन हाथ रुक गया।
उसी पल दादी की आवाज़ आई—
“अगर ये रिश्ता झूठा था, तो तुम दोनों की आँखों में सच्चाई क्यों है?”
दादी को सब पता चल चुका था।
अनन्या की आँखों से आँसू बह निकले।
आरव ने पहली बार सच स्वीकार किया—
“मैं डरता था, दादी…
लेकिन ये लड़की मेरे डर से ज़्यादा मज़बूत निकली।”
अनन्या ने धीमे स्वर में कहा—
“ये शादी Contract थी…
पर मेरा प्यार असली था।”
कमरे में सन्नाटा था।
आरव ने तलाक़ के काग़ज़ फाड़ दिए।
“अगर तुम चाहो…
तो इस रिश्ते को Contract से निकालकर
ज़िंदगी बना सकते हैं।”
अनन्या ने उसकी ओर देखा—
आज पहली बार वह अजनबी नहीं था।
उसने धीरे से सिर हिला दिया।
दादी की आँखों से आँसू और चेहरे पर मुस्कान थी।
जिस रिश्ते की शुरुआत शर्तों से हुई थी,
वह अब भरोसे, सम्मान और प्रेम में बदल चुका था।
काग़ज़ी रिश्ता टूट गया था,
पर दिलों का बंधन हमेशा के लिए जुड़ गया।
✨ कहानी का संदेश
कभी-कभी मजबूरी में बने रिश्ते भी,
अगर सम्मान और समझ से निभाए जाएँ,
तो सच्चे प्यार में बदल सकते हैं.