Pahli Nazar ka Ishq - 10 in Hindi Love Stories by Bikash parajuli books and stories PDF | पहली नज़र का इश्क - 10

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पहली नज़र का इश्क - 10

स्कूल का माहौल आज कुछ अलग और खास था। रंग-बिरंगे झंडे, बैनर, और स्टेज की सजावट ने पूरे स्कूल को उत्सव की तरह बदल दिया था। आज वार्षिक स्कूल फंक्शन होने वाला था, जिसमें हर क्लास के बच्चे भाग लेने वाले थे।
बिकाश और माया भी बहुत उत्साहित थे। पिछले कुछ हफ्तों में उन्होंने प्रैक्टिस की थी, और अब यह दिन था जब सबके सामने उन्हें अपना प्रदर्शन करना था।
सुबह की तैयारी और उत्साह
सुबह से ही क्लास में हलचल थी। हर कोई अपनी तैयारी कर रहा था। बिकाश अपनी शर्ट और पैंट पर ध्यान दे रहा था, जबकि माया ने अपनी ड्रेस और हेयरस्टाइल की तैयारी की।
माया ने मुस्कुराते हुए कहा,
“बिकाश, आज हमें स्टेज पर अच्छा दिखना है, और मज़ा भी करना है।”
बिकाश ने हल्की हँसी के साथ कहा,
“माया, तुम्हारे साथ तो मैं हमेशा अच्छा दिखता हूँ। बस तुम्हारे साथ होना ही सबसे खास है।”
दोनों ने एक-दूसरे की आँखों में देखा और उनकी नज़रें एक-दूसरे से मिलने लगीं।
स्कूल फंक्शन की शुरुआत
फंक्शन शुरू हुआ, और स्टेज पर बच्चों का कार्यक्रम शुरू हो गया। बिकाश और माया की बारी आई। उनके क्लास ने डांस और म्यूजिकल प्रेजेंटेशन तैयार किया था।
स्टेज पर जाते ही माया ने बिकाश का हाथ हल्के से पकड़ लिया।
“हमारे लिए यह पल यादगार होगा।”
बिकाश ने मुस्कुराते हुए कहा,
“हाँ माया… अब हम इसे मज़ेदार और शानदार बनाते हैं।”
जैसे ही म्यूजिक बजा, दोनों ने डांस करना शुरू किया। उनके स्टेप्स, मुस्कान और तालमेल ने सभी का ध्यान खींच लिया। दर्शक तालियों से झूम उठे।
मज़ेदार पल और दोस्ती
डांस के दौरान, माया ने अचानक बिकाश के पैरों के पास हल्का फिसलन महसूस की। वह हँसते हुए बोली,
“बिकाश, संभालो!”
बिकाश ने तुरंत उसे पकड़ लिया और मुस्कुराते हुए कहा,
“तुम हमेशा मुझे व्यस्त रखती हो, माया।”
दोनों की हँसी और तालमेल ने स्टेज पर उनके प्रदर्शन को और मज़ेदार और रोमांचक बना दिया।
पहला रोमांटिक पल स्टेज के बाद
डांस और प्रेजेंटेशन के बाद, दोनों स्टेज से उतरकर पीछे वाले गार्डन में गए। हवा हल्की ठंडी थी और सूरज ढल रहा था।
बिकाश ने धीरे से माया का हाथ पकड़ा और कहा,
“माया, आज का दिन हमेशा याद रहेगा। तुम्हारे साथ हर पल खास बन जाता है।”
माया ने मुस्कुराते हुए कहा,
“और मैं भी बिकाश… तुम्हारे बिना यह सब अधूरा लगता।”
दोनों ने झील की ओर देखा। सूरज की आखिरी किरणें उनके चेहरे पर पड़ रही थीं। यह पल रोमांटिक और यादगार बन गया।
छोटी नोक-झोंक और हँसी
माया ने हँसते हुए कहा,
“देखो बिकाश, तुम स्टेज पर इतने गंभीर क्यों दिखते हो?”
बिकाश ने मुस्कुराते हुए कहा,
“और तुम स्टेज पर इतनी सुंदर क्यों दिखती हो कि मैं ध्यान ही नहीं रख पाता?”
दोनों हँस पड़े। यह छोटी-सी नोक-झोंक उनके रिश्ते में मिठास और मज़ा जोड़ रही थी।
दोस्ती और प्यार में विश्वास
रात होते-होते, फंक्शन समाप्त हुआ। सभी बच्चों और शिक्षकों ने उनके प्रदर्शन की तारीफ की।
माया ने कहा,
“देखा बिकाश! हमारी मेहनत रंग लाई।”
बिकाश ने मुस्कुराते हुए कहा,
“हाँ माया… और सबसे खास बात, यह सब तुम्हारे साथ होना था।”
दोनों ने महसूस किया कि उनका प्यार केवल रोमांस नहीं, बल्कि विश्वास, समझ और दोस्ती पर आधारित है।
Episode 10 का संदेश
इस एपिसोड ने यह दिखाया कि:
पहला स्कूल फंक्शन और स्टेज पर प्रदर्शन प्यार और दोस्ती को और मज़ेदार और यादगार बनाते हैं।
छोटे-छोटे रोमांच, नोक-झोंक और शरारतें रिश्ते में मिठास जोड़ती हैं।
प्यार केवल रोमांस नहीं, बल्कि विश्वास, सहयोग और साथ होने का अनुभव भी है।
बिकाश और माया अब न केवल पहले प्यार के साथी थे, बल्कि सच्चे दोस्त, भरोसेमंद साथी और हर पल एक-दूसरे के लिए खड़े रहने वाले साथी भी बन चुके थे।