मौसम की करवट
लेखक – विजय शर्मा एरी
(लगभग 1500 शब्दों की कहानी)
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सर्दियों की पहली हल्की-सी ठंड पड़ चुकी थी। सुबह की धूप में एक अजीब-सी नरमी थी, जैसे मौसम खुद किसी नए मोड़ से गुज़र रहा हो। गांव भटाला खुर्द के लोग हर साल की तरह खेतों में काम करने की तैयारी में थे, लेकिन इस बार हवा में कुछ और भी था—कुछ ऐसा जो बदलाव का संकेत दे रहा था।
गांव की पगडंडी पर एक युवक तेज़ कदमों से चला आ रहा था—अमन। उसका चेहरा धूप में हल्का चमक रहा था, लेकिन आंखों में एक बेचैनी छिपी थी। तीन साल से वह शहर में पढ़ रहा था, और आज पहली बार लंबे समय बाद गांव लौटा था।
दरवाज़े पर पहुंचते ही मां की आवाज़ आई—
“अमन! ओ अमन! मेरा पुत्तर आ गया!”
मां भागकर आई, और अमन ने झुककर उसके पैर छुए। मां ने उसके माथे को चूमा—
“कितना दुबला हो गया है मेरा बच्चा… शहर की हवा लग गई लगती है!”
अमन मुस्कुरा दिया, लेकिन उसके भीतर मौसम-सा भारीपन था। शायद इसीलिए गांव के बदले मौसम ने उसे और भी संवेदनशील बना दिया था।
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1. मौसम ही नहीं, ज़िंदगी भी बदली थी
अमन घर में सामान रख ही रहा था कि सामने वाले घर से एक मोहक आवाज़ आई—
“आ गए मिस्त्री साहब शहर से?”
यह थी राधा—अमन की बचपन की दोस्त, जिसकी मुस्कान हमेशा उसे उलझा देती थी।
राधा पास आई। हवा में उसके सिर से उठती चमेली की खुशबू जैसे पूरे आंगन को महका रही थी।
“कितने बदल गए हो अमन… पहचान में नहीं आते।”
अमन मुस्कुराया—
“तुम भी तो बदल गई हो, राधा… पहले से ज्यादा सुंदर।”
राधा का चेहरा गुलाबी हो गया।
“शहर जाकर बातें भी बड़ी बड़ी करने लगे हो।”
दोनों की हंसी में जैसे हवाओं ने ताल मिला लिया। मौसम सचमुच बदल रहा था—और शायद उनके दिल भी।
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2. खेत, हवा और छुपी हुई बातें
शाम को अमन खेतों की तरफ निकल गया। गेहूं की नई फसल हल्की हवा में झूम रही थी। दूर से राधा आती दिखाई दी।
“देखो,” राधा बोली, “मौसम बिल्कुल पिछले साल जैसा नहीं है। पत्ते समय से पहले झड़ने लगे हैं।”
अमन बोला, “मौसम बदल रहा है, राधा। ऊपर से लोगों का स्वभाव भी मौसम जैसा ही तो है।”
राधा ने एक गहरी सांस ली।
“अमन… क्या तुम शहर वापस जाओगे? या इस गांव में ही…?”
अमन उसकी आंखों में झांकते हुए बोला—
“मैं तो हमेशा से इस गांव को, इस हवा को… और कुछ लोगों को छोड़कर नहीं जाना चाहता था।”
उसके शब्दों में बहुत कुछ अनकहा था। राधा ने नजरें झुका लीं।
हवा चल रही थी, मौसम में ठंड बढ़ रही थी… लेकिन दोनों के दिलों में गर्माहट उभर रही थी।
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3. काला बादल—एक बुरी ख़बर
अगले ही दिन मौसम एकदम पलट गया। तेज़ हवाएं, काले बादल, मानो कोई तूफान आने वाला हो।
घर लौटते समय, अमन को पिता की आवाज़ सुनाई दी—
“अमन, बेटा… बात करनी है।”
पिता की आवाज़ भारी थी। वह शायद कोई चिंता छिपा रहे थे।
“बेटा, तुम्हारी शहर वाली नौकरी का पत्र आया है। अगले हफ्ते जॉइनिंग है।”
अमन के हाथ से कागज़ लगभग गिर गया।
मां बोली—
“तू नहीं जाएगा न? यहां भी तो काम मिल सकता है?”
पिता ने समझाया—
“ज़िंदगी बदलते मौसम जैसी होती है। मौका मिले तो पकड़ लेना चाहिए। गांव में सिर्फ खेती है… भविष्य नहीं।”
अमन कुछ नहीं बोला। उसे लगा जैसे आसमान में उमड़ते बादल उसके भीतर भी छा गए हों।
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4. राधा का दर्द—मौसम की तरह स्पष्ट
शाम को राधा मिलने आई। वह आज बहुत शांत थी।
“सुना है… तुम शहर जा रहे हो?”
अमन ने धीमे स्वर में कहा—
“शायद… हां। मौका अच्छा है।”
राधा की आंखें कुछ पल तक उसे देखती रहीं।
“अमन, क्या कभी सोचा कि यहां भी कोई है… जो तुम्हारे बिना अधूरी हो जाएगी?”
अमन चौंक गया।
राधा की आवाज़ टूट रही थी—
“जब से तुम शहर गए, हर मौसम सूना लगने लगा। तुम्हारे लौटने का इंतज़ार करती रही… और अब फिर जा रहे हो?”
हवा तेज़ चलने लगी थी। पेड़ों की शाखें झूमते-झूमते जैसे कोई दर्द का गीत गा रही थीं।
अमन ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“राधा… तुम्हारे बिना मैं भी पूरा नहीं हूं। लेकिन…”
“लेकिन?”
“लेकिन मैं मजबूर हूं। परिवार की जिम्मेदारियाँ… सपने… सब कुछ मुझे खींच रहा है।”
राधा ने धीरे से हाथ छुड़ा लिया।
“अमन, मौसम चाहे जितना बदल जाए… कुछ लोग नहीं बदलते।
तुम्हारे जाने के बाद भी मैं यही रहूंगी… वही इंतज़ार करती राधा।”
उसके शब्द जैसे आसमान में गड़गड़ाते बादलों की तरह थे—तेज, गहरे और दुख भरे।
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5. निर्णय की रात—मौसम का सबसे कठोर प्रहार
उस रात गांव में तेज़ तूफान आया। बिजली चमकी, पेड़ गिरने लगे, और हवा गरज रही थी।
अमन कमरे में बैठा नौकरी के पत्र को घूर रहा था।
क्या वह जाए?
या यहां रहकर राधा के दिल को बचा ले?
बाहर मां की आवाज़ आई—
“अमन, तूफान बड़ा तेज़ है। कहीं मत जाना!”
पर अमन उठ खड़ा हुआ।
“मां, मुझे किसी से मिलना है।”
वह भारी बारिश में राधा के घर की तरफ भागा।
दरवाज़ा खटखटाया—
“राधा!! दरवाज़ा खोलो! मुझे तुमसे बात करनी है!”
राधा आंगन में आई। बिजली की चमक में उसका भीगा हुआ चेहरा दिखाई दिया।
“अमन… इस मौसम में आए हो?”
अमन की सांसें तेज थीं।
“राधा, मैं जाना नहीं चाहता। मैं… मैं यहीं रहना चाहता हूं। क्योंकि मेरे लिए इस गांव का सबसे जरूरी हिस्सा तुम हो।”
राधा की आंखों से आंसू बारिश की तरह गिर पड़े।
“तो फिर तुम जाओगे नहीं?”
अमन ने सिर हिलाया।
“नहीं। नौकरी मिल जाएगी कहीं और भी।
लेकिन तुम… तुम्हें खोना मेरे लिए मौसम के खत्म होने जैसा होगा।”
राधा ने अमन को गले लगा लिया।
तूफान अभी भी चल रहा था, लेकिन दोनों के दिलों में मौसम थम चुका था—एक नई रौशनी के साथ।
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6. नया मौसम, नई शुरुआत
अगली सुबह गांव में सूरज हल्का सा मुस्करा रहा था। रात का तूफान अब याद भर रह गया था।
अमन के पिता ने पूछा—
“बेटा, क्या फैसला किया?”
अमन ने शांत होकर कहा—
“पापा, मैं यही रहूंगा। गांव में ही काम शुरू करूंगा।
और… राधा से शादी भी करना चाहता हूं।”
पिता पहले तो चौंके, फिर मुस्कुरा दिए—
“मौसम बदला है, लगता है हमारा बेटा भी बदल गया है।
ठीक है, मुझे मंजूर है।”
मां ने खुशी से दुआएं दीं।
कुछ ही दिनों बाद, अमन और राधा की सगाई हो गई।
गांव में फिर से हवा में खुशियों की महक भर गई थी।
लोग कहते थे—
“देखो, बदलते मौसम ने अमन और राधा के जीवन में नई बहार ला दी।”
और सच भी था—
मौसम बदला था,
हालात बदले थे,
और सबसे ज्यादा बदले थे दो दिल—
जो अब हमेशा के लिए एक हो चुके थे।
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समाप्त