The Great Gorila vs Bhram Rakshash in Hindi Horror Stories by Ravi Bhanushali books and stories PDF | The Great Gorila vs Bhram Rakshash

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The Great Gorila vs Bhram Rakshash

साल 1994।
बरसों से अनछुए उस घने जंगल में, जहाँ इंसानी कदम कम और डर की परछाइयाँ ज़्यादा बसती थीं, एक नाम हर साँस के साथ गूँजता था—ब्रह्म राक्षस। वह कभी एक महान विद्वान था, पर तंत्र और अहंकार ने उसे शापित आत्मा में बदल दिया था। उसकी देह राख और धुएँ से बनी थी, आँखों में जलती आग और मन में अंतहीन क्रोध।
उसी जंगल के दूसरे छोर पर एक और दहशत पल रही थी—द ग्रेट गोरिला।
एक विशालकाय प्राणी, जिसकी ताकत किसी पहाड़ से कम नहीं थी। उसकी दहाड़ से पेड़ झुक जाते थे और ज़मीन काँप उठती थी। 1994 में जंगल का संतुलन टूट चुका था, और अब टकराव तय था।
एक अमावस्या की रात, जब हवा बोझिल थी और चाँद काले बादलों में छिपा था, ब्रह्म राक्षस अपने पुराने मंदिर के खंडहरों से बाहर निकला। उसे महसूस हो रहा था कि उसकी भूमि पर कोई और शक्ति दखल दे रही है। उसी पल दूर से एक भयानक दहाड़ सुनाई दी। ब्रह्म राक्षस के होंठों पर टेढ़ी मुस्कान उभरी।
“आख़िरकार,” वह गुर्राया, “किसी ने मुझे ललकारा है।”
द ग्रेट गोरिला पेड़ों को तोड़ता हुआ मंदिर की ओर बढ़ा। उसकी आँखों में आक्रामक चमक थी। जैसे ही वह खुले मैदान में पहुँचा, बिजली कड़की और दोनों आमने-सामने आ गए। एक ओर शाप और अंधकार से बना ब्रह्म राक्षस, दूसरी ओर मांस, हड्डियों और अपार शक्ति का अवतार—द ग्रेट गोरिला।
गोरिला ने बिना देर किए हमला किया। उसकी मुट्ठी हवा चीरती हुई ब्रह्म राक्षस पर पड़ी। पहली बार राक्षस पीछे हटा। ज़मीन पर राख बिखर गई। गोरिला ने फिर वार किया, इस बार और ज़ोर से। ब्रह्म राक्षस की छाती में दरार पड़ गई, काली ऊर्जा बाहर बहने लगी। वह गंभीर रूप से घायल हो चुका था।
ब्रह्म राक्षस कराहा। सदियों बाद उसे असली पीड़ा महसूस हुई।
गोरिला ने उसे मौका नहीं दिया। उसने ज़मीन से एक विशाल पत्थर उठाया और पूरी ताकत से राक्षस पर दे मारा। पत्थर टकराते ही ज़ोरदार धमाका हुआ। ब्रह्म राक्षस ज़मीन पर गिर पड़ा। उसकी आँखों की आग मंद पड़ गई।
गोरिला ने दहाड़ लगाई—एक विजयी दहाड़। उसे लगा कि वह जीत गया है।
लेकिन ब्रह्म राक्षस अभी टूटा नहीं था।
ज़मीन पर पड़े-पड़े उसने धीमी, खौफनाक हँसी हँसी।
“तूने मुझे घायल किया है,” वह फुसफुसाया, “पर मारा नहीं।”
उसने अपने चारों ओर काली मंत्र-रेखाएँ खींचीं। जंगल की हवा अचानक ठंडी हो गई। पेड़ सड़ने लगे। गोरिला ने फिर से हमला करने की कोशिश की, पर उसके पैर भारी हो गए। जैसे किसी अदृश्य शक्ति ने उसे जकड़ लिया हो।
ब्रह्म राक्षस खड़ा हुआ, लड़खड़ाता हुआ, लेकिन उसकी शक्ति लौट रही थी।
उसने दोनों हाथ उठाए और मंत्र पढ़ा। ज़मीन के भीतर से काले सर्पों जैसी ऊर्जा निकली और गोरिला के शरीर को जकड़ लिया। गोरिला चिल्लाया, छटपटाया, अपनी पूरी ताकत लगाई, पर वह जादू से मुक्त नहीं हो पाया।
गोरिला ने आख़िरी कोशिश की। उसने पूरी शक्ति समेट कर ज़ोरदार घूंसा मारा। घूंसा ब्रह्म राक्षस की खोपड़ी से टकराया। राक्षस फिर से घायल हुआ, उसका सिर फट गया, पर इस बार वह रुका नहीं।
वह गुर्राया,
“अब मेरी बारी।”
उसने अपनी हथेली गोरिला की छाती पर रखी। मंत्र पूरा हुआ। गोरिला की आँखों में डर उतर आया। उसकी ताकत धीरे-धीरे खत्म होने लगी। उसकी दहाड़ अब दर्द में बदल चुकी थी।
एक तेज़ चीख के साथ द ग्रेट गोरिला ज़मीन पर गिर पड़ा। उसकी साँसें थम गईं। जंगल में सन्नाटा छा गया।
ब्रह्म राक्षस घुटनों के बल बैठ गया। वह खुद भी बुरी तरह घायल था। उसका शरीर टूट रहा था, राख उड़ रही थी, पर वह मरा नहीं। कुछ देर बाद वह फिर से खड़ा हुआ। उसकी आँखों में वही पुरानी आग लौट आई।
उसने गोरिला की लाश की ओर देखा और धीमे से कहा,
“1994 याद रखा जाएगा… क्योंकि आज शाप ज़िंदा रहा।”
सुबह जब सूरज निकला, जंगल शांत था। द ग्रेट गोरिला हमेशा के लिए खत्म हो चुका था।
और ब्रह्म राक्षस—
वह फिर से अपने मंदिर के अंधेरे में समा गया, ज़िंदा, शापित और पहले से भी ज़्यादा खतरनाक।