mother's affection in Hindi Motivational Stories by Vijay Erry books and stories PDF | माँ की ममता

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माँ की ममता

माँ की ममता
लेखक – विजय शर्मा एरी
(लगभग 1500 शब्दों की कहानी)


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1. एक छोटी-सी सुबह, बड़ा-सा एहसास

सर्दियों की हल्की-हल्की गुनगुनाती सुबह थी। गाँव के छोटे-से घर में चूल्हा जल चुका था और रसोई से आने वाली हल्की-सी धुएँ की महक पूरे आँगन में फैल रही थी।
माया चूल्हे के पास बैठी रोटियाँ सेंक रही थी। उसके माथे पर पसीना नहीं, ममता की चमक थी।
सामने लकड़ी के बिस्तर पर उसका बेटा अंकुर स्कूल की किताब पकड़कर सोते-सोते जागने का नाटक कर रहा था।

“उठ जा बेटा, देर हो जाएगी,” माया प्यार से बोली।
अंकुर आँखें मलते हुए बोला, “माँ… पाँच मिनट बस…”

माया ने मुस्कुराकर उसका माथा चूम लिया।
“अगर पाँच मिनट और सोएगा ना, तो मास्टरजी तेरी नोटबुक में पाँच ‘0’ लगा देंगे।”

अंकुर हँस पड़ा और उठ गया।


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2. गरीबी और सपनों का युद्ध

माया गरीब थी, पर उसके सपने अमीर थे। पति रामू पिछले पाँच साल से बीमार था, काम पर नहीं जा पाता था। कमाई की एकमात्र उम्मीद माया ही थी—दूसरों के घर काम करके दो वक्त की रोटी जुटाती थी।

लेकिन उसके दिल में एक ही अरमान था—
मेरा अंकुर पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बने।

अंकुर पढ़ने में तेज था, पर स्कूल की फ़ीस, किताबें, यूनिफॉर्म… हर छोटी चीज़ माया के लिए बड़ी लड़ाई थी।
फिर भी उसने कभी बेटे को अपनी मुश्किलें महसूस नहीं होने दीं।

कई रातें उसने अपना पेट आधा रखकर सिर्फ बेटे को खिलाया।
कभी खुद टूटी चप्पल में गुज़ारा किया, पर बेटे के लिए नई चप्पल ले आई।

उसके त्याग में कोई शोर नहीं था,
बस एक शांत-सी माँ थी
जो अपनी तकलीफ़ें चुपचाप ख़त्म कर लेती थी।


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3. वह एक दिन जिसने सब बदल दिया

एक दिन स्कूल में नोटिस आया कि अगले महीने जिला स्तरीय विज्ञान प्रतियोगिता है।
अंकुर ने जोश में घर आकर बताया—

“माँ, मुझे मॉडल बनाना है—सोलर ऊर्जा का। मास्टरजी कह रहे थे अगर मैं अच्छा करूँ तो स्कॉलरशिप भी मिल सकती है!”

माया ने उसकी चमकती आँखों को देखा।
उसे लगा जैसे उसकी सारी थकान गायब हो गई।

“बनाना बेटा… माँ तेरे लिए लकड़ी, शीशे, तार… सब ले आएगी।”

लेकिन जब उसने दुकानों में पूछताछ की तो पता चला—
पूरा सामान खरीदने में कम से कम 1200 रुपये लगेंगे।
उसके लिए यह रकम बहुत बड़ी थी।

दो दिन वह सोचती रही, कहाँ से लाए?
किससे उधार ले?
किस घर में घंटों बढ़ा दे?

पर उसे याद आया—
बेटे का सपना, बेटे का भविष्य।

उसने मन में ठान लिया—चाहे जैसे भी हो, वह यह रकम जुटाएगी।


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4. माँ का त्याग, किसी ने नहीं देखा

माया रोज पाँच घरों में काम करती थी।
उसने छठा और सातवाँ घर भी पकड़ लिया।
सुबह चार बजे उठकर रात नौ बजे तक काम…
खाना भी नहीं खा पाती थी, पर चेहरा हँसता रहता था,
ताकि अंकुर को कुछ पता न चले।

रात को थककर जब वह लेटती, उसके हाथों में दर्द होता,
पर मन में एक मीठी संतुष्टि भी थी—
“मैं अपने बेटे के सपनों में रौशनी भर रही हूँ।”

करीब बीस दिन बाद उसने जैसे-तैसे पैसे जोड़ लिए।
कपड़े का एक पुराना थैला उठाया और सामान खरीदने निकल पड़ी।

उसने सारा सामान लेकर जब घर लौटकर अंकुर के सामने रखा,
तो उसकी आँखें चमक उठीं—
“माँ! ये सब…? इतने पैसे कहाँ से आए?”

माया ने हँसकर कहा,
“तेरी माँ के पास जादू है बेटा… जो चाहे खरीद लेती है।”

अंकुर ने माँ को जोर से गले लगा लिया।
उस गले लगाने में दुनिया की सारी दौलत छुपी थी।


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5. मॉडल, मेहनत और माँ

अब रोज शाम को माया अपने काम से लौटती,
फिर दोनों साथ बैठकर मॉडल बनाते।
अंकुर तार जोड़ता, माया मजबूती से उसे चिपकाती।
कभी दोनों की उँगलियाँ गोंद में चिपक जातीं,
कभी पूरा दिन का काम दो मिनट में गिर जाता,
और दोनों हँस-हँसकर फिर से शुरू करते।

एक रात जब माया थककर सो चुकी थी,
अंकुर देर तक बैठा काम करता रहा।
माँ को सोते हुए देखकर उसने सोचा—

“मेरी माँ ही मेरी असली हीरो है।
मुझे हर हाल में उसके सपने पूरे करने हैं।”


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6. प्रतियोगिता का दिन – माँ की आँखों में सपना

प्रतियोगिता का दिन आ गया।
स्कूल में भीड़, शोर और तालियों की आवाज़ गूँज रही थी।
अंकुर ने जैसे ही अपना मॉडल प्रस्तुत किया, जज प्रभावित हो गए।
उसने न सिर्फ मॉडल बनाया,
बल्कि सोलर एनर्जी की जरूरत और फायदे भी समझाए।

पर असली नज़ारा तब हुआ
जब नतीजा घोषित हुआ—

अंकुर पहला स्थान!
और उसे साल भर की स्कूल फीस की स्कॉलरशिप!

स्कूल में तालियाँ बज उठीं।
अंकुर खुशी से उछलकर बोला,
“माँ! माँ! मैं जीत गया!”

माया की आँखों से आँसू बह निकले।
वह बोली—
“मेरे बेटे… ये तेरी मेहनत है।
माँ तो बस थोड़ी-सी हवा थी… उड़ान तो तूने भरी।”


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7. जीवन का सबसे कठिन फैसला

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
जीवन ने अभी एक और परीक्षा ली।

कुछ महीनों बाद रामू की तबीयत अचानक बहुत बिगड़ गई।
डॉक्टर ने कहा—
“ऑपरेशन करवाना पड़ेगा, नहीं तो जान को खतरा है।”

खर्च था 25,000 रुपये।
माया के लिए यह इंसान से पहाड़ उठाने जैसा था।

अंकुर ने देखा कि माँ परेशान है।
वह धीरे से बोला—
“माँ, मेरे मॉडल की वजह से जो स्कॉलरशिप मिली थी… वो पैसे पापा के लिए लगा लो।”

माया चौंक गई।
“नहीं बेटा! वो तेरी पढ़ाई का भविष्य है!”

अंकुर ने उसका हाथ पकड़कर कहा—
“पापा का होना भी मेरा भविष्य है माँ…
और मेरा भविष्य सिर्फ पढ़ाई से नहीं…
आपसे भी चला है।”

माया रो पड़ी।
उस दिन उसने समझा—
तीन घरों में काम करने वाली गरीब माया,
असल में कितनी अमीर थी—
क्योंकि उसका बेटा इतना समझदार था।


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8. कुछ त्याग जो अमर हो जाते हैं

स्कॉलरशिप की रकम और गाँव वालों की मदद से रामू का ऑपरेशन हो गया।
वह धीरे-धीरे ठीक होने लगा।
अंकुर ने पढ़ाई में और भी मेहनत शुरू कर दी।
हर किसी के सामने वह proudly कहता—

“मेरी माँ मेरी दुनिया है।
उसने मेरे लिए सब कुछ त्याग दिया।”

समय बीतता गया।
अंकुर पढ़ाई में आगे बढ़ता गया।
बारहवीं में टॉप किया, कॉलेज में शान से प्रवेश लिया।
और एक दिन—
वह जिला अफसर बन गया।

जब वह अपनी पहली तनख्वाह घर लाया,
तो माया चूल्हे के पास रोटियाँ सेंक रही थी।
अंकुर ने अपनी तनख्वाह माँ के पैरों पर रख दी।

“माँ… अगर तू न होती तो मैं कुछ भी न होता।
आज जो भी हूँ, तेरी ममता की वजह से हूँ।”

माया ने बेटे के सिर पर हाथ फेरा—
“तू भी तो मेरी ममता की सबसे बड़ी कमाई है बेटा।”


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9. अंत नहीं – एक नई शुरुआत

गाँव में उस दिन ढोल बजे, मिठाइयाँ बँटीं।
सब कहते—
“माया की ममता ने कमाल कर दिया।”

माया मुस्कुरा देती,
पर अंदर से उसका दिल कहता—
“मैंने कुछ नहीं किया।
सिर्फ माँ होने का फ़र्ज निभाया है।”

और यह सच है—
माँ का दिल कभी छोटा नहीं होता,
उसका प्यार कभी कम नहीं होता,
और उसकी ममता
किसी भी तूफान से ज़्यादा ताकतवर होती है।


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समाप्त